आज यानी 18 जुलाई को री–नीट परीक्षा 2026, जो कि 21 जून को हुई थी, का रिजल्ट आ चुका है। इसी एग्जाम में बिहार के रहने वाले तीन भाइयों और बहनों ने एक अद्भुत कमाल करते हुए अपने पूरे परिवार का और अपने जिले का नाम रोशन कर दिया।
वो कहते हैं न कि मेहनत करने वालों की कभी हार नहीं होती। इसी तरह बिहार राज्य के सहरसा जिला में रहने वाले दो भाइयों और एक बहन ने एक साथ नीट का एग्जाम दिया था। जिसके परिणामस्वरूप 18 जुलाई को परिणाम घोषित हुआ और तीनों ने नीट एग्जाम पास किया।
एक मामूली किराने की दुकान से चलती थी परिवार की जिंदगी।
इन तीनों भाइयों– बहनों के पिता एक मामूली किराने की दुकान चलाते थे। उसी से पूरे परिवार का भरन–पोषण हुआ करता था। दुकान से इतने पैसे नहीं आ पाते थे कि उनके पिता उन तीनों को एक अच्छी जगह पढ़ने के लिए भेज सके। तीनों बच्चों का कहना है कि उनका मन कोटा जाकर पढ़ने का था। लेकिन घर की आर्थिक तंगी के कारण उनके पिता उन्हें कोटा भेजने में सक्षम नहीं थे।
पास के ही कोचिंग सेंटर में पढ़ाई की और तीनों ने नीट एग्जाम क्रैक कर डाला।
तीनों बच्चों का कहना है कि घर में ज्यादा आय न होने के कारण हमने सहरसा में ही रहकर एक प्रगति क्लासेज कोचिंग सेंटर में एडमिशन ले लिया। जहां से हमने अपने कड़ी मेहनत और दिन–रात एक करके अपनी तैयारी करी और इसके बदौलत हमने नीट जैसे परीक्षा क्रैक कर लिए। उनका ये भी कहना है कि हम अपने पढ़ाई के दौरान हमे जहां भी दिक्कत आती थी हम तीनों आपस में सवाल–जवाब करके उस प्रश्न का हल निकालने की कोशिश करते थे।
साथ में उन्होंने ये भी कहा कि उनकी सफलता में उनके मां–बाप की एक अहम भूमिका है। जब भी हम पढ़ाई से निराश होते थे तब वे हमें ये कहकर हमारा मनोबल बढ़ाते थे कि, मेहनत कभी बेकार नहीं जाती। आज नहीं तो कल इस मेहनत का फल तुम्हे जरूर मिलेगी।
यह सफलता दूसरे तैयारी कर रहे छात्रों के लिए प्रेरणा बनी।
इस सफलता को पाते ही तीनों सफल छात्रों के घर में खुशी की लहर दौड़ने लगी। यह सफलता उन विद्यार्थियों के लिए एक प्रेरणा है जिनके पास संसाधनों की कमी होती है तथा वो ये सोचकर कुछ नहीं कर पाते है कि मेरे पास तो कुछ है ही नहीं। उनके शिक्षक चंदन कुमार का कहना है कि किसी भी क्षेत्र में ये एक बहुत बड़ी उपलब्धि है जब एक ही परिवार के तीन बच्चे इस तरह के प्रदर्शन करते हुए अपने लक्ष्य को प्राप्त कर लेते है।













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