यू तो बिहार राज्य को आई .ए .एस. और आई .पी .एस. का गढ़ कहा जाता है। लेकिन इसी में से ऐसे लोग भी है जिन्हें एक या दो बार में ही सफलता प्राप्त हो जाती है और कुछ ऐसे भी लोग होते है जिन्हें हमेशा निराशा हाथ लगती है। असफल होने के बावजूद भी बिहार की बेटी सुनिधि ने वो कर दिखाया जिसे भविष्य में तैयारी कर रहे छात्रों को हमेशा प्रेरणा मिलते रहेगी।
सुनिधि बनी तीसरे प्रयास में DSP कठिनाइयों के बावजूद नहीं मानी हार
बिहार के नवादा जिला की रहने वाली सुनिधि ने कुछ ऐसा कर दिखाया है जो सभी विद्यार्थियों के लिए एक प्रेरणादाई बन गई है। बिहार में आयोजित होने वाली बी पी एस सी के 70वें अधिवेशन के संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षा में सुनिधि ने 800 नंबर प्राप्त करके अपने डी एस पी बनने का सपना पूरा कर लिया है। सुनिधि बताती है कि इसके पीछे सुनिधि के पिता का एक बहुत बड़ा योगदान है। जो कि पहले ही गुजर चुके हैं। सुनिधि के पिता हमेशा से चाहते थे कि उनकी बेटी सिविल सेवा ज्वाइन करे।
सुनिधि ने बताया कि उन्होंने इसके पहले भी परीक्षा के दो अटेम्प्ट दिए थे। लेकिन दोनों बार उनके हाथों में असफलता ही आई। असफलता के कारण उन्होंने अपना धैर्य कभी नहीं खोया। इन दोनों प्रयासों से उन्होंने कुछ सीखा और अपने तैयारी को और बेहतर कर दिया और अंततः अपने तीसरे बिहार संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षा में उन्होंने अच्छे नंबर लाकर अपने पिता का सपना पूरा किया।
कॉलेज प्रोफेसर बनने का था सपना सुनिधि का। लेकिन पिता के सपनो ने बनाया DSP
सुनिधि बचपन से ही पढ़ने में बहुत मेधावी थी। वह अपनी शिक्षा भारती स्कूल तथा राजेंद्र मेमोरियल महिला कॉलेज नवादा से की। उन्होंने पटना से ही अपनी अंडर ग्रैजुएट की पढ़ाई पूरी की और प्रथम स्थान पाई, तथा पटना से ही पोस्ट ग्रैजुएट किया। वर्तमान में वह PhD की पढ़ाई कर रही है। इसी बीच सुनिधि का चयन इस कॉम्पिटेटिव एग्जाम द्वारा हो गया।












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