झारखंड PGT शिक्षक नियुक्ति 2023: उच्च न्यायालय के फैसले के दो महीने बाद भी सरकार चुप, 600 पद रिक्त, अभ्यर्थियों में रोष

झारखंड PGT शिक्षक नियुक्ति 2023 में OBC-2 आरक्षण विवाद, हाईकोर्ट के फैसले के बाद भी नियुक्ति प्रक्रिया लंबित

रांची, झारखंड: झारखंड में वर्ष 2023 में जारी पीजीटी (स्नातकोत्तर प्रशिक्षित शिक्षक) नियुक्ति विज्ञापन संख्या 02/2023 एवं 03/2023 को लेकर ओबीसी-2 आरक्षण विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा। झारखंड उच्च न्यायालय का फैसला आए लगभग आठ सप्ताह बीत चुके हैं, लेकिन न तो झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) और न ही शिक्षा विभाग की ओर से कोई ठोस कदम उठाया गया है। इस निष्क्रियता से हजारों अभ्यर्थियों में गहरा असंतोष पनप रहा है।

3120 पदों में से 600 अब भी रिक्त

अभ्यर्थियों का कहना है कि JSSC द्वारा जारी इस भर्ती में कुल 3120 पद स्वीकृत थे, जिनमें 2855 नई रिक्तियाँ और 265 बैकलॉग रिक्तियाँ शामिल थीं। इनमें से अभी भी लगभग 600 पद रिक्त बताए जा रहे हैं। अभ्यर्थियों का आरोप है कि शिक्षा विभाग ने अपनी त्रुटि स्वीकार करते हुए ओबीसी-2 वर्ग को 110 सीटें देने की बात कही थी, किंतु इस संबंध में अब तक कोई आधिकारिक आदेश नहीं निकला।

अन्य भर्तियाँ आगे, PGT 2023 पीछे — अभ्यर्थियों का बड़ा सवाल

प्रभावित अभ्यर्थियों का कहना है कि जहाँ एक ओर राज्य में अन्य शिक्षक नियुक्तियाँ तेज गति से आगे बढ़ रही हैं, वहीं 2023 की पीजीटी नियुक्ति प्रक्रिया को जान-बूझकर लटकाया जा रहा है। उल्लेखनीय है कि हाल ही में झारखंड हाईकोर्ट ने प्रशिक्षित माध्यमिक आचार्य प्रतियोगिता परीक्षा के पेपर-2 की पुनर्परीक्षा पर रोक लगाने की याचिका को खारिज करते हुए JSSC को 1 जुलाई तक परीक्षा परिणाम घोषित कर अनुशंसा सरकार को भेजने का निर्देश दिया है — लेकिन PGT 2023 के रिक्त पदों को भरने का मामला अभी भी ठंडे बस्ते में है।

PGT घोटाले की जाँच में भी उठे गंभीर सवाल

झारखंड में शिक्षक नियुक्ति की पारदर्शिता पर सवाल पहले से उठते रहे हैं। झारखंड हाईकोर्ट के निर्देश पर गठित वन मैन फैक्ट फाइंडिंग कमीशन ने स्नातक प्रशिक्षित शिक्षक संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षा-2016 (PGT/TGT) से जुड़े नियुक्ति विवाद में सरकारी आंकड़ों में बड़ा विरोधाभास पाया — नए शपथ पत्र में 12,739 अभ्यर्थियों की नियुक्ति का उल्लेख था, जबकि पहले के शपथ पत्र में यह संख्या केवल 12,046 बताई गई थी। यह विसंगति सरकारी तंत्र की विश्वसनीयता पर गंभीर प्रश्न खड़े करती है।

सुप्रीम कोर्ट की सख्ती — लेकिन पीजीटी 2023 के पीड़ितों को कोई राहत नहीं

सर्वोच्च न्यायालय ने हाल ही में झारखंड में शिक्षक भर्ती की सुस्त रफ्तार पर कड़ा रुख अपनाया है। न्यायमूर्ति पंकज मित्तल और न्यायमूर्ति एसवीएन भट्टी की पीठ ने राज्य सरकार को सहायक शिक्षकों की भर्ती के लिए 4 हफ्ते में विज्ञापन और 10 हफ्ते में पूरी नियुक्ति प्रक्रिया संपन्न करने की सख्त समय-सीमा दी है। इसके बावजूद PGT 2023 के रिक्त पदों को लेकर प्रशासनिक मौन बरकरार है।

मुख्यमंत्री के पास है शिक्षा विभाग का प्रभार — फिर भी देरी क्यों?

सबसे बड़ा सवाल यह है कि शिक्षा विभाग का प्रभार सीधे मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के पास है। अभ्यर्थियों का तर्क है कि जब विभाग की कमान खुद मुख्यमंत्री के हाथ में हो, और न्यायालय भी स्पष्ट निर्देश दे चुका हो, तब भी समयबद्ध कार्रवाई न होना सरकार की इच्छाशक्ति पर प्रश्नचिह्न लगाता है।

अभ्यर्थियों की माँग — अब बस आंदोलन ही विकल्प?

प्रभावित उम्मीदवारों ने सरकार, शिक्षा विभाग और JSSC से जल्द से जल्द ओबीसी-2 वर्ग को 110 सीटें आवंटित करने और रिक्त 600 पदों पर नियुक्ति प्रक्रिया पूरी करने की माँग की है। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई, तो वे लोकतांत्रिक तरीके से सड़क पर उतरने को बाध्य होंगे।

यह मामला महज नौकरी का नहीं, झारखंड के हजारों युवाओं के भविष्य और न्यायपालिका के प्रति सरकारी जवाबदेही का सवाल बन चुका है।

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