NCERT किताब विवाद: माफी के बाद भी सुप्रीम कोर्ट सख्त

NCERT विवाद 2026 — 'Exploring Society: India and Beyond' कक्षा 8 पुस्तक पर सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया शख्त

NCERT किताब विवाद ऐसा नहीं है की नया है, पहले भी कई बार ऐसे विवाद उभरे हैं लेकिन इस बार जो विवाद है वो कुछ ज्यादा है विवादित है क्यूंकि न्यायपालिका पर सवाल उठाया गया है। हालांकि NCERT द्वारा बिना शर्त माफ़ी मांग ली गयी है बावजूद इसके सुप्रीम कोर्ट काफी शख्त रवैया अपनाये हुए है।

NCERT विवाद: क्या है पूरा मामला?

राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (NCERT) इन दिनों एक बड़े विवाद के केंद्र में है। कक्षा 8 की सामाजिक विज्ञान की नई पुस्तक “Exploring Society: India and Beyond (Part II)” के एक अध्याय ने देशभर में शैक्षिक और न्यायिक हलकों में तूफान खड़ा कर दिया है। इस पुस्तक के अध्याय 4 — ‘हमारे समाज में न्यायपालिका की भूमिका’ में न्यायिक व्यवस्था की चुनौतियों के तहत भ्रष्टाचार, लंबित मामलों के बोझ और जजों की कमी का उल्लेख किया गया था। यह मामला सीधे भारत के सर्वोच्च न्यायालय तक पहुंचा और अब यह एक राष्ट्रीय शिक्षा नीति बहस का रूप ले चुका है।

सुप्रीम कोर्ट ने लिया स्वतः संज्ञान

वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल और अभिषेक सिंघवी ने इस मामले को तत्काल सुनवाई के लिए सुप्रीम कोर्ट के सामने रखा। इसके बाद भारत के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल एम. पंचोली की तीन सदस्यीय पीठ ने इस मामले पर स्वतः संज्ञान लिया।

सुप्रीम कोर्ट ने पुस्तक में मौजूद सामग्री को “न्यायपालिका की छवि को धूमिल करने वाला” बताया और 26 फरवरी 2026 को एक ऐतिहासिक आदेश पारित करते हुए इस पुस्तक के किसी भी प्रकार के प्रकाशन, पुनर्मुद्रण और डिजिटल प्रसार पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया। इसके साथ ही कोर्ट ने केंद्रीय शिक्षा सचिव और NCERT के निदेशक को अवमानना का कारण बताओ नोटिस जारी किया।

मुख्य न्यायाधीश ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि यह एक “सुनियोजित साजिश” भी हो सकती है और वे तब तक शांत नहीं बैठेंगे जब तक पूरी जांच और जिम्मेदारी तय नहीं हो जाती।

जाने सुप्रीम कोर्ट का नया आदेश

NCERT ने मांगी बिना शर्त सार्वजनिक माफी

सुप्रीम कोर्ट की कड़ी नाराजगी और सरकार के दबाव के बाद NCERT ने 10 मार्च 2026 को एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए अपने आधिकारिक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पूर्व ट्विटर) पर सार्वजनिक माफी जारी की। परिषद के निदेशक और सदस्यों ने अध्याय 4 के लिए “बिना शर्त और पूर्ण खेद” व्यक्त किया।

NCERT ने अपने बयान में स्वीकार किया कि पुस्तक में “अनुचित सामग्री गलती से शामिल” हो गई थी और इसे “एरर ऑफ जजमेंट” बताया। परिषद ने यह भी भरोसा दिलाया कि भविष्य में पाठ्यपुस्तकों की सामग्री तैयार करते समय अधिक सावधानी और सतर्कता बरती जाएगी।

किताब पूरी तरह बाजार से वापस

NCERT ने “Exploring Society: India and Beyond (Part II)” को पूरी तरह बाजार से वापस ले लिया है। परिषद ने पुष्टि की कि:

  • पुस्तक अब बाजार में उपलब्ध नहीं है।
  • पुस्तक को NCERT की आधिकारिक वेबसाइट से भी हटा दिया गया है।
  • संशोधित संस्करण में विवादित अध्याय शामिल नहीं किया जाएगा।
  • उचित अधिकारियों से परामर्श कर अध्याय को नए सिरे से लिखा जाएगा
  • 2026-27 शैक्षणिक सत्र से पहले नया संस्करण उपलब्ध हो सकता है।

सरकार ने डिजिटल प्लेटफॉर्म को दिया सख्त निर्देश

केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय ने सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय और इलेक्ट्रॉनिक्स मंत्रालय को पत्र लिखकर निर्देश दिया कि सभी डिजिटल प्लेटफॉर्म और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया से विवादित पुस्तक को तत्काल हटाया जाए। इसके अतिरिक्त NCERT ने एक एडवाइजरी जारी की जिसमें स्कूलों और शिक्षकों से कहा गया कि वे:

  • प्रतिबंधित पाठ्यपुस्तक की हार्ड कॉपी वापस करें।
  • सोशल मीडिया पर शेयर किए गए पोस्ट और PDF डिलीट करें।

केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने भी इस मामले पर सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि जवाबदेही तय की जाएगी और विवादित सामग्री तैयार करने वालों के खिलाफ कार्रवाई होगी।

दो अधिकारियों पर गिरी गाज

सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि विवादित अध्याय तैयार करने में शामिल दो व्यक्तियों को अब शिक्षा मंत्रालय या UGC से जुड़े किसी भी कार्य में शामिल नहीं किया जाएगा। हालांकि, मुख्य न्यायाधीश ने इस कार्रवाई को पर्याप्त नहीं माना और कहा कि “असली जिम्मेदार लोगों की पहचान कर उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए।”

NCERT निदेशक की जांच — कहां हुई चूक?

NCERT निदेशक ने पुस्तक की तैयारी, संपादन और अनुमोदन प्रक्रिया की आंतरिक जांच बैठा दी है। सूत्रों के अनुसार जांच का उद्देश्य सिर्फ गलती की पहचान करना नहीं, बल्कि भविष्य में ऐसी किसी अनुचित सामग्री को पूरी तरह रोकना भी है। जांच में यह देखा जा रहा है कि किताब बनाने, संपादन और मंजूरी की प्रक्रिया में किस स्तर पर चूक हुई।

NCERT पुस्तक विवाद का इतिहास — यह पहली बार नहीं

यह पहली बार नहीं है जब NCERT की किसी किताब को लेकर देश में विवाद खड़ा हुआ हो। इससे पहले भी कई बड़े मामले सामने आ चुके हैं:

  • 1978: इतिहासकार राम शरण शर्मा की किताब “Ancient India” को CBSE पाठ्यक्रम से हटाया गया।
  • 2012: कक्षा 11 की राजनीति विज्ञान पुस्तक में B.R. अंबेडकर और जवाहरलाल नेहरू को दर्शाते कार्टून पर विवाद, बाद में कई सलाहकारों ने इस्तीफा दिया।
  • 2022-2024: मुगल साम्राज्य, 2002 के गुजरात दंगे और 1984 के सिख विरोधी दंगों से जुड़े अध्यायों को हटाया गया।

हालांकि मौजूदा विवाद अधिक गंभीर माना जा रहा है क्योंकि इस बार स्वयं सर्वोच्च न्यायालय ने हस्तक्षेप किया और सीधे अवमानना नोटिस जारी किए।

विशेषज्ञों की राय — शिक्षा या सेंसरशिप?

इस पूरे विवाद पर शिक्षा जगत में दो पक्ष उभरकर सामने आए हैं। एक वर्ग का मानना है कि छात्रों को न्यायपालिका की वास्तविक चुनौतियों से अवगत कराना आवश्यक है और यह किसी संस्था पर हमला नहीं, बल्कि शिक्षा का हिस्सा है। दूसरे वर्ग का तर्क है कि स्कूली पाठ्यपुस्तकों में ऐसी संवेदनशील सामग्री को अत्यंत सावधानी और संतुलित दृष्टिकोण के साथ प्रस्तुत किया जाना चाहिए।

आगे की संभावनाएं?

सुप्रीम कोर्ट में इस मामले की सुनवाई अभी जारी है। कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि बिना शर्त माफी काफी नहीं है और जब तक जिम्मेदारी पूरी तरह तय नहीं होती, सुनवाई जारी रहेगी। अगली सुनवाई में NCERT और शिक्षा सचिव को अपना पक्ष कोर्ट के सामने रखना होगा।

निष्कर्ष

NCERT किताब विवाद भारतीय शिक्षा प्रणाली के लिए एक महत्वपूर्ण सबक है। जहां एक ओर सुप्रीम कोर्ट की सख्ती ने यह संदेश दिया है कि न्यायपालिका की गरिमा से कोई समझौता नहीं, वहीं दूसरी ओर यह सवाल भी उठता है कि पाठ्यपुस्तकों की सामग्री की समीक्षा प्रक्रिया कितनी कड़ी और पारदर्शी होनी चाहिए। यह विवाद अभी समाप्त नहीं हुआ — सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई जारी है और आने वाले दिनों में और बड़े खुलासे हो सकते हैं।

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