Twisha Sharma Death Case, MP: भोपाल की चर्चित अभिनेत्री और मॉडल ट्विशा शर्मा की संदिग्ध मौत के मामले ने अब देश की सर्वोच्च अदालत का ध्यान खींच लिया है। सुप्रीम कोर्ट ने इस हाई-प्रोफाइल दहेज हत्या मामले में स्वत: संज्ञान (Suo Motu Cognizance) लेते हुए मुख्य न्यायाधीश (CJI) न्यायमूर्ति सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष सोमवार, 26 मई 2026 को सुनवाई निर्धारित की है। यह कदम ऐसे समय उठाया गया है जब देशभर में महिलाओं की सुरक्षा, वैवाहिक घरों में दहेज उत्पीड़न और प्रभावशाली परिवारों द्वारा न्यायिक प्रक्रिया को प्रभावित करने के आरोपों को लेकर जन आक्रोश अपने चरम पर है।
कौन थीं ट्विशा शर्मा?
33 वर्षीय ट्विशा शर्मा मूल रूप से उत्तर प्रदेश के नोएडा की निवासी थीं। ट्विशा शर्मा मॉडलिंग और फिल्म इंडस्ट्री से जुड़ी थीं और मार्केटिंग तथा कम्युनिकेशन क्षेत्र में काम करती रहीं। उन्होंने MBA की डिग्री हासिल की थी। इसके अलावा वह मिस पुणे का खिताब भी जीत चुकी थीं। ट्विशा शर्मा की शादी दिसंबर 2025 में भोपाल निवासी एडवोकेट समर्थ सिंह से हुई थी। दोनों की मुलाकात मैट्रिमोनियल साइट और डेटिंग ऐप के जरिए हुई थी।
कब और कैसे हुई मौत?
ट्विशा शर्मा 12 मई को भोपाल के कटारा हिल्स इलाके स्थित अपने ससुराल में मृत पाई गई थीं। शुरुआत में पुलिस ने इसे आत्महत्या माना, लेकिन परिवार के दहेज प्रताड़ना और मानसिक उत्पीड़न के आरोपों के बाद मामला गंभीर हो गया। मौके से कोई सुसाइड नोट नहीं मिला।
परिवार के आरोप और पुलिस कार्रवाई
ट्विशा के परिजनों के मुताबिक शादी के बाद शुरुआती कुछ समय तक सब कुछ सामान्य रहा, लेकिन धीरे-धीरे ट्विशा को मानसिक और शारीरिक प्रताड़ना झेलनी पड़ी। ट्विशा के भाई मेजर हर्षित शर्मा ने आरोप लगाया कि गर्भवती होने के बाद पति समर्थ सिंह और उनकी मां गिरिबाला सिंह ने ट्विशा के चरित्र पर सवाल उठाने शुरू कर दिए थे। परिवार का कहना है कि पति अक्सर कहता था कि ‘यह बच्चा मेरा नहीं है।’
इस मामले में पुलिस ने ट्विशा के पति वकील समर्थ सिंह और रिटायर्ड जज सास गिरीबाला सिंह के खिलाफ दहेज हत्या और प्रताड़ना की धाराओं में प्राथमिकी दर्ज की।
आरोपी पति का सरेंडर और 7 दिन की रिमांड
ट्विशा की मौत के बाद से समर्थ सिंह 10 दिनों तक फरार रहा और पुलिस उसकी तलाश में जुटी थी। शुक्रवार को जबलपुर जिला अदालत परिसर छावनी में तब्दील हो गया, जब समर्थ सिंह भारी ड्रामे के बीच आखिरकार पुलिस की गिरफ्त में आ गया। इसके बाद शनिवार को मजिस्ट्रेट की अदालत में सुनवाई हुई, जहाँ SIT ने 7 दिन की रिमांड की माँग की, जो मंजूर कर ली गई।
MP हाईकोर्ट का ऐतिहासिक फैसला — दूसरे पोस्टमार्टम की अनुमति
मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने मामले की संवेदनशीलता और रहस्य को देखते हुए मृतका ट्विशा शर्मा के शव का दोबारा पोस्टमार्टम कराने की अनुमति दे दी। दिल्ली एम्स की टीम भोपाल आकर पोस्टमार्टम करेगी। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद कोर्ट यह तय करेगा कि शव किसे सौंपा जाएगा।
सुनवाई के दौरान आरोपी समर्थ सिंह की ओर से दायर अग्रिम जमानत याचिका वापस ले ली गई। सुनवाई के दौरान आरोपी के वकील ने अदालत को बताया कि उनका मुवक्किल निचली अदालत के समक्ष आत्मसमर्पण करने के लिए तैयार है।
CBI जांच की सिफारिश
ट्विशा शर्मा की मौत की जाँच की आधिकारिक तौर पर सीबीआई जाँच के लिए सिफारिश की गई है। चूंकि इस मामले में आरोपी परिवार न्यायपालिका और प्रशासनिक हलकों में बेहद रसूखदार पृष्ठभूमि रखता है, इसलिए मामले की निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए CBI ने भी अपनी समानांतर जाँच की रूपरेखा तैयार कर ली है।
NCW ने लिया स्वत: संज्ञान
राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) ने बुधवार को ट्विशा शर्मा की संदिग्ध मौत के मीडिया रिपोर्टों का स्वत: संज्ञान लिया। NCW अध्यक्ष विजया रहाटकर ने मध्य प्रदेश के मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक को पत्र लिखकर तत्काल, निष्पक्ष, पारदर्शी और समयबद्ध जाँच सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। आयोग ने सात दिनों के भीतर एक विस्तृत एक्शन टेकेन रिपोर्ट (ATR) प्रस्तुत करने की माँग की।
बार काउंसिल ऑफ इंडिया की कड़ी कार्रवाई
बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) ने ट्विशा शर्मा की मौत से जुड़े आरोपों के चलते अधिवक्ता समर्थ सिंह का लाइसेंस तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया। बीसीआई ने नोट किया कि दहेज हत्या, क्रूरता और संबद्ध अपराधों के लिए एफआईआर दर्ज की गई है।
सुप्रीम कोर्ट का स्वत: संज्ञान — न्याय की सर्वोच्च दस्तक
इस मामले में सबसे बड़ा न्यायिक घटनाक्रम तब सामने आया जब एक अधिवक्ता ने CJI सूर्यकांत और मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को पत्र लिखकर न्यायिक हस्तक्षेप और स्वतंत्र जाँच की माँग की। इस पत्र और मामले की गंभीरता को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने इस दहेज हत्या प्रकरण में स्वत: संज्ञान लिया।
न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने 24 नवंबर 2025 को भारत के 53वें प्रधान न्यायाधीश के रूप में शपथ ली। मानवाधिकार, लैंगिक न्याय और जेल सुधारों पर महत्वपूर्ण निर्णय देने के लिए जाने जाने वाले CJI सूर्यकांत की अगुवाई में यह सुनवाई सोमवार को होगी, जो इस मामले में न्याय की उम्मीद को और मजबूत करती है।
परिवार की माँगें
ट्विशा के परिवार ने कई महत्वपूर्ण माँगें रखी हैं। ट्विशा के परिवार ने भोपाल कोर्ट में आवेदन देकर 12 मई से 20 मई 2026 के बीच समर्थ सिंह और गिरिबाला सिंह के मोबाइल CDR निकालने और एम्स भोपाल की CCTV फुटेज सुरक्षित रखने की अपील की है। परिवार का तर्क है कि इन डिजिटल रिकॉर्ड्स से मामले की सच्चाई सामने आ सकती है।
राष्ट्रीय बहस का केंद्र बना यह मामला
इस मामले ने वैवाहिक घरों में महिलाओं की सुरक्षा, फॉरेंसिक जाँच के मानकों और शक्तिशाली परिवारों द्वारा न्यायिक व्यवस्था पर अनुचित प्रभाव के बारे में राष्ट्रीय स्तर पर बहस को पुनर्जीवित कर दिया है।
यह मामला केवल एक महिला की संदिग्ध मौत तक सीमित नहीं रहा। यह उन लाखों महिलाओं की आवाज़ बन गया है, जो वैवाहिक प्रताड़ना की शिकार होती हैं और जिनके लिए न्याय की राह बेहद कठिन होती है — खासकर तब, जब आरोपी न्यायपालिका या प्रशासन से जुड़े हों।
अब जब सुप्रीम कोर्ट ने स्वत: संज्ञान लेकर इस मामले को अपने हाथ में लिया है, तो न्याय की उम्मीद और प्रबल हो गई है। सोमवार की सुनवाई पर पूरे देश की निगाहें टिकी हैं।











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