इज़राइल ने किया खामेनेई का खात्मा — तेहरान में आग, दुनिया में भूचाल, मध्य पूर्व में महायुद्ध शुरू”

Iran US Israel war: grieving Iranian woman holding Ayatollah Khamenei banner, fighter jet overhead, Donald Trump on right amid rising tensions

पृष्ठभूमि: हमले की ज़मीन कैसे तैयार हुई?

इज़राइल और अमेरिका ने जून 2025 में पहले भी ईरान के परमाणु बुनियादी ढाँचे पर हमले किए थे, जिसके बाद ट्रम्प ने ईरान की परमाणु क्षमता को “नष्ट” घोषित किया था। हालांकि, परमाणु कार्यक्रम को लेकर वार्ता विफल होने और ईरान के यूरेनियम संवर्धन जारी रखने के आरोपों के बाद स्थिति फिर बिगड़ी।

ट्रम्प ने यह हमला इज़राइल और सऊदी अरब की हफ्तों की पैरवी के बाद शुरू किया। इससे पहले अमेरिका ने ईरान को परमाणु हथियार कार्यक्रम छोड़ने के लिए बार-बार दबाव डाला था, लेकिन बातचीत का कोई नतीजा नहीं निकला।

28 फरवरी 2026: “ऑपरेशन एपिक फ्यूरी” — हमले की रात

संयुक्त सैन्य अभियान भारतीय समयानुसार शनिवार की सुबह 1:15 बजे (अमेरिकी पूर्वी समय) शुरू हुआ।

हमले की शुरुआत तेहरान में भारी विस्फोटों से हुई, जिसमें धुएं के बड़े-बड़े गुबार आसमान में उठते देखे गए।

अमेरिका और उसके सहयोगी बलों ने इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) की कमान एवं नियंत्रण सुविधाओं, ईरान की वायु रक्षा प्रणाली, मिसाइल और ड्रोन लॉन्च साइटों और सैन्य हवाई अड्डों सहित कई ठिकानों पर हमला किया।

IDF ने ईरान के भीतर सैन्य हथियार उत्पादन कारखानों और सैन्य बुनियादी ढाँचे के आसपास मौजूद ईरानी नागरिकों के लिए तत्काल निकासी चेतावनी जारी की।

खामेनेई की मौत: क्या हुआ उस सुबह?

चार इज़राइली सुरक्षा अधिकारियों के हवाले से बताया गया कि आयतुल्ला अली खामेनेई को तेहरान स्थित उनके परिसर पर इज़राइली हवाई हमले में मार दिया गया।

ईरान की राज्य मीडिया ने बताया कि “खामेनेई अपने कार्यालय में काम कर रहे थे और उसी समय यह हमला हुआ।” IRIB के टेलीग्राम अकाउंट ने लिखा — “इस्लामिक क्रांति के सर्वोच्च नेता को उनके कार्यस्थल बेत-अल-रहबारी में शहीद किया गया।”

एक वरिष्ठ अमेरिकी रक्षा अधिकारी ने फॉक्स न्यूज़ को बताया कि अमेरिकी सरकार इज़राइल के इस आकलन से सहमत है कि खामेनेई मृत हैं, और उनके साथ 5 से 10 शीर्ष ईरानी नेता भी मारे गए जो तेहरान के एक परिसर में बैठक कर रहे थे।

इज़राइल और ईरान के सूत्रों के अनुसार, IRGC कमांडर मोहम्मद पाकपुर, ईरान के रक्षा मंत्री अमीर नासिरज़ादेह, खामेनेई के सलाहकार अली शमखानी और ईरानी सशस्त्र बलों के चीफ ऑफ स्टाफ मोहम्मद बाघेरी भी इज़राइली हमले में मारे गए।

ट्रम्प के बयान: क्या बोले अमेरिकी राष्ट्रपति?

ट्रम्प ने Truth Social और NBC न्यूज़ के ज़रिए कई अहम बयान दिए:

Truth Social पर पोस्ट: ट्रम्प ने लिखा —

“खामेनेई, इतिहास के सबसे दुष्ट लोगों में से एक, मर गया। यह न केवल ईरान के लोगों के लिए न्याय है, बल्कि उन सभी महान अमेरिकियों के लिए भी है जो खामेनेई और उनके खूनखराबे करने वाले गुट के हाथों मारे गए या घायल हुए।”

NBC न्यूज़ से फोन पर: ट्रम्प ने कहा —

“जो लोग सारे फैसले लेते थे, उनमें से ज़्यादातर अब नहीं रहे।” उन्होंने यह भी कहा कि “ईरानी नेतृत्व का बड़ा हिस्सा खत्म हो गया है।”

Truth Social वीडियो संबोधन (8 मिनट): ट्रम्प ने एक 8 मिनट के वीडियो में कहा —

“कुछ समय पहले, संयुक्त राज्य अमेरिका की सेना ने ईरान में बड़े पैमाने पर युद्ध अभियान शुरू किया। हमारा उद्देश्य ईरानी शासन से आने वाले तत्काल खतरों को समाप्त करके अमेरिकी जनता की रक्षा करना है।”

ईरान के लोगों को संबोधित करते हुए ट्रम्प ने कहा —

“ईरान के महान और गर्वित लोगों से मैं कहता हूँ कि आपकी आज़ादी का समय आ गया है। घर में रहें। बाहर मत निकलें। जब हम काम पूरा कर लें, तो अपनी सरकार संभालें — वो आपके लिए ही है।”

हमले को जारी रखने की घोषणा: ट्रम्प ने Truth Social पर लिखा कि हमला “मध्य पूर्व और दुनियाभर में शांति के लक्ष्य तक बिना रुके पूरे हफ्ते जारी रहेगा।”

हमले के पीछे कारण: इज़राइल और अमेरिका का तर्क

1. परमाणु खतरा: ट्रम्प ने दावा किया कि ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम को जारी रख रहा था और अमेरिका तक पहुँचने वाली मिसाइलें विकसित करने की योजना बना रहा था।

2. 47 साल की दुश्मनी: नेतन्याहू ने कहा — “47 सालों से आयतुल्ला शासन ‘इज़राइल का नाश हो’ और ‘अमेरिका का नाश हो’ का नारा लगाता रहा।”

3. इज़राइल का लक्ष्य — शासन परिवर्तन: इज़राइल के प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने कहा कि इस अभियान का उद्देश्य खामेनेई के शासन को सत्ता से हटाना है। “यह अभियान बहादुर ईरानी जनता के लिए अपनी नियति खुद तय करने की परिस्थितियाँ बनाएगा।”

4. हमले को “प्रीएम्प्टिव स्ट्राइक” बताया: एक वरिष्ठ रक्षा अधिकारी ने कहा कि खुफिया जानकारी और “मौके का लक्ष्य” मिलने पर जानबूझकर हमले की समयसीमा आगे बढ़ाई गई।

ईरान का पलटवार: अमेरिकी ठिकाने निशाने पर

ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स ने मध्य पूर्व में अमेरिकी सैनिकों की मेज़बानी करने वाले 27 ठिकानों पर हमले का दावा किया, साथ ही तेल अवीव में इज़राइली सैन्य ठिकानों को भी निशाना बनाया।

ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने NBC न्यूज़ से कहा कि ईरान सैन्य ठिकानों पर हमला कर रहा है, अमेरिकियों पर नहीं, और वो बातचीत के लिए तैयार हैं, बशर्ते हमले बंद हों।

संयुक्त अरब अमीरात ने घोषणा की कि अबू धाबी में एक ईरानी हमले में मलबा गिरने से एक व्यक्ति की मौत हो गई।

ईरान के रेड क्रिसेंट के प्रवक्ता के मुताबिक ईरान में अमेरिकी-इज़राइली हमलों में 200 से अधिक लोग मारे गए और 747 घायल हुए।

दुनिया की प्रतिक्रिया

यूरोपीय संघ: यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन और यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा ने एक संयुक्त बयान में “परमाणु सुरक्षा सुनिश्चित करने और वैश्विक परमाणु अप्रसार व्यवस्था को कमज़ोर करने वाली किसी भी कार्रवाई को रोकने” की अपील की।

ब्रिटेन: ब्रिटेन ने इस हमले में हिस्सा नहीं लिया। ब्रिटिश प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने सरकार की आपातकालीन ‘कोबरा’ समिति की बैठक बुलाई।

पाकिस्तान: पाकिस्तान के कराची में सैकड़ों प्रदर्शनकारियों ने अमेरिकी वाणिज्य दूतावास पर धावा बोला, जिसमें कम से कम छह लोग मारे गए।

इराक, लंदन में विरोध प्रदर्शन: तेहरान के हमले के खिलाफ इराक, लंदन और दुनिया के कई हिस्सों में सड़कों पर प्रदर्शन हुए।

ईरान का जवाब: ‘अक्षम्य अपराध’ और मिसाइल‑ड्रोन हमले

ईरान की सरकार और IRGC ने अमेरिका‑इज़राइल के इस ऑपरेशन को “अंतरराष्ट्रीय क़ानून के ख़िलाफ़, पूरी तरह अवैध और अक्षम्य अपराध” करार दिया है। आधिकारिक बयानों के मुताबिक़, यह हमला न सिर्फ़ ईरान बल्कि पूरी मुसलमान उम्मत, विशेषकर शिया समुदाय के ख़िलाफ़ सीधी जंग है, जिसका “कड़ा और लंबा जवाब” दिया जाएगा।

ईरान ने “ट्रूथफुल प्रॉमिस 4” और अन्य नामों से ऑपरेशनों की घोषणा करते हुए खाड़ी क्षेत्र में अमेरिकी नौसैनिक जहाज़ों, सप्लाई शिप्स और कुवैत, बहरीन, क़तर, यूएई सहित कई देशों में स्थित ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन हमले करने का दावा किया। समानांतर रूप से ईरान ने इज़राइल की ओर भी सैकड़ों मिसाइलें और ड्रोन दागे, जिन्हें आंशिक रूप से एयर डिफेंस सिस्टम ने इंटरसेप्ट किया, लेकिन इज़राइल में भी मौतें और घायल होने की खबरें सामने आईं।​

मानवीय कीमत और नागरिकों की स्थिति

संयुक्त राष्ट्र महासचिव ने सुरक्षा परिषद को जानकारी दी कि ईरान के कई शहरों में नागरिक इलाकों पर भी हमलों की खबर है, जिनमें एक गर्ल्स स्कूल पर बम गिरने और बड़ी संख्या में बच्चों के मारे जाने‑घायल होने की रिपोर्ट शामिल है। ईरान के रेड क्रिसेंट और सरकारी मीडिया के अनुसार सैकड़ों नागरिकों की मौत और सैकड़ों के घायल होने की आशंका जताई जा रही है, हालांकि स्वतंत्र रूप से इन आंकड़ों की पुष्टि मुश्किल है।​

ईरान के ऊपर अधिकतर अंतरराष्ट्रीय उड़ान मार्ग अस्थायी रूप से डायवर्ट कर दिए गए हैं, इंटरनेट सेवाओं पर भारी पाबंदियाँ हैं और पूरे क्षेत्र में तेल टैंकरों व व्यापारिक जहाज़ों की आवाजाही पर असर पड़ रहा है। विशेषज्ञ चेतावनी दे रहे हैं कि यदि तनाव और बढ़ा तो वैश्विक तेल क़ीमतों और शिपिंग कॉरिडोर्स पर गहरा असर पड़ सकता है।​

आगे क्या? सत्ता‑संक्रमण और संभावित परिदृश्य

खामेनेई की मौत के साथ ही ईरान में सत्ता‑संक्रमण की जटिल संवैधानिक प्रक्रिया शुरू हो गई है; अंतरिम तौर पर राष्ट्रपति, न्यायपालिका प्रमुख और एक वरिष्ठ मौलवी की नेतृत्व परिषद सर्वोच्च नेता की जिम्मेदारियाँ निभा रही है, जब तक कि नया रहबर चुना न जाए। विश्लेषकों का मानना है कि आंतरिक सत्ता संघर्ष, IRGC की भूमिका और आम जनता का मूड – यह तय करेगा कि ईरान अधिक कठोर रुख अपनाएगा या बदलाव का कोई रास्ता खुलेगा।

अमेरिका‑इज़राइल की ओर से मौजूदा संकेत यह हैं कि सैन्य दबाव फिलहाल जारी रहेगा और “कठोर शर्तों” के साथ ही किसी नए समझौते या राजनीतिक समाधान पर विचार किया जाएगा। ऐसे में वेस्ट एशिया की जंग और वैश्विक भू‑राजनीति, दोनों ही आने वाले हफ्तों में तेज़ी से बदलती सुर्खियों में रहेंगी – और ईरान के भीतर‑बाहर की हर हलचल पर दुनिया की नज़र टिकी रहेगी।

भारत की आधिकारिक प्रतिक्रिया

भारत के विदेश मंत्रालय (MEA) ने अमेरिका‑इज़राइल के ईरान पर हमलों और खामेनेई की मौत पर “गहरी चिंता” जताते हुए कहा है कि वह गल्फ क्षेत्र की ताज़ा घटनाओं पर क़रीबी नज़र रखे हुए है। आधिकारिक बयान में सभी पक्षों से “अधिकतम संयम बरतने, तनाव न बढ़ाने और नागरिकों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देने” की अपील की गई है, साथ ही यह दोहराया गया कि मतभेदों का समाधान संवाद और कूटनीति से ही होना चाहिए।

भारतीय नागरिकों और दूतावास की एडवाइजरी

तेहरान स्थित भारतीय दूतावास पहले ही ईरान में रह रहे भारतीय छात्रों, तीर्थयात्रियों, बिज़नेस पर्सन और टूरिस्टों को “उपलब्ध साधनों से जल्द से जल्द देश छोड़ने” की सलाह दे चुका है। नई एडवाइजरी में दोहराया गया है कि सभी भारतीय और PIOs विरोध‑प्रदर्शन वाले इलाकों से दूर रहें, पासपोर्ट व दस्तावेज़ अपने साथ रखें, स्थानीय मीडिया पर नज़र रखें और ज़रूरत पड़ने पर दूतावास के इमरजेंसी हेल्पलाइन नंबरों से संपर्क करें।

MEA के मुताबिक़, जनवरी‑फ़रवरी 2026 के दौरान लगभग 9 हज़ार भारतीयों को ईरान छोड़ने की सलाह दी गई थी, जिनमें चाबहार पोर्ट प्रोजेक्ट के कर्मचारी, ऑयल‑फील्ड में तैनात टेक्नीशियन और शिया ज़ायरीन शामिल थे। अब हमलों के बाद भारतीय दूतावास इन्हीं चैनलों के ज़रिये फ़ॉलो‑अप सपोर्ट, रजिस्ट्रेशन और इमरजेंसी ट्रैवल अरेंजमेंट्स समन्वयित कर रहा है।

तेल की कीमतें और भारतीय अर्थव्यवस्था पर असर

हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य से होकर दुनिया की लगभग 20 फ़ीसदी कच्चे तेल की सप्लाई गुजरती है, और मौजूदा संघर्ष के कारण इसी रूट पर जहाज़ों की आवाजाही सबसे बड़ा जोखिम बन चुकी है। रिपोर्टों के मुताबिक़, US‑इज़राइल स्ट्राइक्स के बाद कई बड़ी ऑयल कंपनियों और ट्रेडिंग फर्मों ने अस्थायी रूप से होर्मुज़ से शिपमेंट रोक दी है, जिससे ब्रेंट क्रूड 70–73 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर जाने की आशंका जताई जा रही है और विश्लेषक 10–20 डॉलर तक की उछाल की संभावना दिखा रहे हैं।

भारत की लगभग आधी कच्चे तेल की आयातित ज़रूरतें ऐसे रूट्स से पूरी होती हैं जो होर्मुज़ से होकर गुजरते हैं; अनुमान है कि करीब 2.6 मिलियन बैरल प्रति दिन की सप्लाई सीधे जोखिम में आ सकती है। अगर यह स्थिति लंबी चली तो भारत में पेट्रोल‑डीज़ल के दाम, चालू खाता घाटा, रुपया और घरेलू महंगाई – सभी पर दबाव बढ़ सकता है, हालांकि ओपेक+ की अतिरिक्त क्षमता और सऊदी अरब द्वारा उत्पादन बढ़ाने जैसे विकल्प मध्यम अवधि में राहत दे सकते हैं।

भारतीय शेयर बाज़ार, रुपया और खाड़ी में बसे भारतीय

मार्केट एनालिस्ट्स का मानना है कि वेस्ट एशिया में यह युद्ध‑स्थिति भारतीय इक्विटी मार्केट में जोखिम से बचने की प्रवृत्ति (risk‑off) बढ़ा सकती है, इंडेक्सों में शॉर्ट‑टर्म गिरावट और India VIX में 20–40 फ़ीसदी तक उछाल देखने को मिल सकता है। सोने‑चांदी जैसे सेफ‑हेवन एसेट्स मजबूत हो सकते हैं, जबकि रुपया दबाव में आ सकता है, ख़ासकर अगर तेल की क़ीमतें ऊंचे स्तर पर टिक जाती हैं।

भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए एक और अहम जोखिम खाड़ी देशों से आने वाली रेमिटेंस और वहां काम कर रहे 90 लाख से अधिक भारतीयों की सुरक्षा है; अगर संघर्ष भू‑भाग और समुद्री रूट दोनों तरफ़ फैलता है, तो जॉब‑सिक्योरिटी, रिटर्न फ्लाइट्स और रेमिटेंस फ्लो पर असर पड़ सकता है। अभी तक भारत सरकार ने खाड़ी देशों से किसी बड़े इवैक्युएशन ऑपरेशन की घोषणा नहीं की है, लेकिन एयरपोर्ट्स और एयरलाइंस को अलर्ट पर रखा गया है और स्थिति पर लगातार समीक्षा बैठकें चल रही हैं।

भारत में राजनीतिक और सामाजिक प्रतिक्रिया

दिल्ली, लखनऊ, हैदराबाद, मुंबई और कश्मीर समेत कई शहरों में शिया संगठनों और मुस्लिम धार्मिक समूहों ने खामेनेई की मौत पर शोक सभाएँ और प्रदर्शन आयोजित किए हैं, जिनमें अमेरिका‑इज़राइल के हमलों की निंदा की जा रही है। भारत में ईरानी दूतावास ने भी एक्स पोस्ट के ज़रिये इन हमलों को “कायराना और अक्षम्य अपराध” बताया, चेतावनी दी कि इसके गंभीर नतीजे अमेरिका पर पड़ेंगे और विश्व समुदाय से खुलेआम इस “जुर्म” की निंदा करने की अपील की है।

कूटनीतिक स्तर पर भारत अभी संतुलित रुख अपनाते हुए एक तरफ़ क्षेत्रीय स्थिरता और ऊर्जा सुरक्षा की चिंता जता रहा है, तो दूसरी तरफ़ संप्रभुता और अंतरराष्ट्रीय कानून के सम्मान की बात दोहरा रहा है। विदेश नीति विशेषज्ञों का मानना है कि नई दिल्ली के लिए चुनौती यह होगी कि वह वेस्ट एशिया में अपने सभी प्रमुख साझेदारों – ईरान, सऊदी अरब, इज़राइल, खाड़ी देश और अमेरिका – के साथ रिश्तों का संतुलन बनाए रखे, जबकि घरेलू मोर्चे पर तेल, अर्थव्यवस्था और साम्प्रदायिक संवेदनशीलता से जुड़े दबावों को भी संभाले।

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