ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के खिलाफ नाबालिग बटुकों के यौन शोषण का आरोप, मेडिकल रिपोर्ट में पुष्टि का दावा — इलाहाबाद हाईकोर्ट ने गिरफ्तारी पर रोक लगाई, मार्च के तीसरे सप्ताह में होगी अगली सुनवाई।
प्रयागराज : देश के धार्मिक जगत को हिलाकर रख देने वाले एक बड़े विवाद में ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के खिलाफ Protection of Children from Sexual Offences (POCSO) Act के तहत प्रयागराज के झूंसी थाने में FIR दर्ज की गई है। इस मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 27 फरवरी 2026 को उनकी गिरफ्तारी पर अंतरिम रोक लगाते हुए मार्च के तीसरे सप्ताह में अगली सुनवाई निर्धारित की है। वहीं, राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने भी इस मामले में संज्ञान लिया है।
1. विवाद की जड़ — माघ मेला 2026 में ‘मौनी अमावस्या’ पर हुआ टकराव
इस पूरे विवाद की शुरुआत 18 जनवरी 2026 को हुई, जब प्रयागराज माघ मेले में मौनी अमावस्या के पवित्र अवसर पर शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद और उनके अनुयायी संगम में स्नान के लिए जा रहे थे। प्रशासन ने उनकी पालकी यात्रा को रोक दिया और समर्थकों के साथ कथित तौर पर धक्कामुक्की की। शंकराचार्य ने आरोप लगाया कि उनके साथ अपमानजनक व्यवहार किया गया और उन्हें जानबूझकर धार्मिक स्नान से वंचित किया गया। इसके बाद उन्होंने अपने शिविर के बाहर धरने पर बैठकर माफी की मांग की।
प्रशासन ने अपनी सफाई में कहा कि भीड़भाड़ की स्थिति में भगदड़ से बचाने के लिए यात्रा को रोकना जरूरी था। हालाँकि, माघ मेला प्रशासन ने 20 जनवरी को शंकराचार्य को नोटिस जारी कर पूछा कि वे ‘ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य’ का पद क्यों प्रयोग कर रहे हैं, जबकि सुप्रीम कोर्ट के एक आदेश के अनुसार इस पद पर किसी की भी नियुक्ति अपील के निपटारे तक मान्य नहीं है। इस कदम की विपक्ष ने तीखी आलोचना की।
2. POCSO FIR कैसे दर्ज हुई? — शिकायत से कोर्ट के आदेश तक की पूरी टाइमलाइन
घटनाओं का क्रम इस प्रकार रहा:
- 13 जनवरी 2025 — आरोपित घटनाओं की शुरुआत, जो महाकुंभ 2025 के दौरान धार्मिक शिविरों में हुई बताई जाती है।
- 18 जनवरी 2026 — माघ मेले में संगम स्नान को लेकर प्रशासन-शंकराचार्य के बीच टकराव।
- 24 जनवरी 2026 — जगद्गुरु रामभद्राचार्य के शिष्य आशुतोष महाराज (आशुतोष ब्रह्मचारी) ने पुलिस आयुक्त के पास शिकायत दर्ज कराई। आरोप लगाया कि माघ मेला 2026 और महाकुंभ 2025 के दौरान नाबालिग बटुकों (शिष्यों) का यौन शोषण हुआ।
- 8 फरवरी 2026 — पुलिस द्वारा कार्रवाई न होने पर शिकायतकर्ता ने स्पेशल POCSO कोर्ट, प्रयागराज में याचिका दाखिल की।
- 21 फरवरी 2026 — जज विनोद कुमार चौरसिया की अदालत ने दो पीड़ित नाबालिगों के कैमरे पर दर्ज बयानों के आधार पर झूंसी थाने को FIR दर्ज करने का आदेश दिया।
- 22 फरवरी 2026 — झूंसी थाने में भारतीय न्याय संहिता और POCSO Act की कई धाराओं के तहत FIR दर्ज। आरोपियों में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद, उनके शिष्य मुकुंदानंद ब्रह्मचारी और 2-3 अज्ञात व्यक्ति शामिल।
- 24 फरवरी 2026 — शंकराचार्य ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में अग्रिम जमानत (Anticipatory Bail) के लिए याचिका दाखिल की।
- 27 फरवरी 2026 — जस्टिस जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने अग्रिम जमानत याचिका पर सुनवाई की और गिरफ्तारी पर अंतरिम रोक लगाते हुए फैसला सुरक्षित रखा।
- 28 फरवरी 2026 — NHRC ने DK फाउंडेशन ऑफ फ्रीडम एंड जस्टिस की याचिका पर संज्ञान लिया।
3. आरोप क्या हैं? — मेडिकल रिपोर्ट से मामला गंभीर
शिकायतकर्ता आशुतोष महाराज के अनुसार, दो शिष्यों — जिनमें एक नाबालिग है — ने 13 जनवरी 2025 से 15 फरवरी 2026 के बीच यौन शोषण का शिकार होने की बात कही है। आरोप है कि ये घटनाएं महाकुंभ 2025 और माघ मेला 2026 के दौरान आयोजित धार्मिक शिविरों में, शिविर परिसर के अंदर और शिविर के बाहर खड़े एक वाहन में हुईं। कथित रूप से गुरुकुल संचालन की आड़ में नाबालिग बटुकों का शोषण किया गया।
मेडिकल जांच में कुकर्म की पुष्टि का दावा किया गया है, हालाँकि पुलिस सूत्रों के अनुसार आधिकारिक विस्तृत रिपोर्ट अभी सार्वजनिक नहीं की गई है। इस मेडिकल रिपोर्ट ने शंकराचार्य की अग्रिम जमानत याचिका को कानूनी रूप से और जटिल बना दिया है। शिकायतकर्ता ने अदालत में दो अलग-अलग हलफनामे दाखिल किए जाने का भी उल्लेख है, जिन पर शंकराचार्य पक्ष ने सवाल उठाए हैं।
4. शंकराचार्य का पक्ष — ‘साजिश है, नार्को टेस्ट को तैयार’
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने वाराणसी में पत्रकारों से बातचीत में सभी आरोपों को सिरे से नकार दिया। उन्होंने FIR को ‘गढ़ी हुई साजिश’ बताया और कहा कि यह उनकी गोरक्षा अभियान और धार्मिक प्रचार-प्रसार की योजनाओं को बाधित करने के लिए रचा गया षड्यंत्र है। उन्होंने उत्तर प्रदेश पुलिस पर शिकायतकर्ता को संरक्षण देने का आरोप लगाया।
उन्होंने जांच में पूर्ण सहयोग का आश्वासन दिया और कहा — “अगर सच जानने के लिए नार्को एनालिसिस टेस्ट की जरूरत है, तो वो भी करा लो।” उनके अधिवक्ता ने अदालत में दलील दी कि मामला राजनीति से प्रेरित है और शंकराचार्य को स्वेच्छा से जांच में सहयोग की अनुमति दी जाए। शिष्य मुकुंदानंद ब्रह्मचारी ने भी आरोपों को ‘झूठा और बेबुनियाद’ बताया तथा शंकराचार्य को ‘निर्मल चरित्र का व्यक्ति’ करार दिया।
5. इलाहाबाद हाईकोर्ट — गिरफ्तारी पर रोक, मार्च में सुनवाई
27 फरवरी 2026 को इलाहाबाद हाईकोर्ट के जस्टिस जितेंद्र कुमार सिन्हा की सिंगल बेंच ने शंकराचार्य को बड़ी राहत देते हुए उनकी गिरफ्तारी पर अंतरिम स्थगन आदेश जारी किया। कोर्ट ने स्पष्ट निर्देश दिया कि अगली सुनवाई तक पुलिस कोई दबावपूर्ण कार्रवाई नहीं करेगी। शंकराचार्य की तरफ से अधिवक्ता मिश्रा ने बहस की जबकि उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से अपर महाधिवक्ता मनीष गोयल उपस्थित रहे। फैसला सुरक्षित रखते हुए अगली सुनवाई मार्च के तीसरे सप्ताह में तय की गई है।
6. NHRC का हस्तक्षेप — FIR को ‘राजनीतिक षड्यंत्र’ बताते हुए शिकायत
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने 26 फरवरी 2026 को DK फाउंडेशन ऑफ फ्रीडम एंड जस्टिस द्वारा दाखिल उस याचिका पर संज्ञान लिया, जिसमें शंकराचार्य के खिलाफ दर्ज FIR को ‘राजनीतिक रूप से प्रेरित और दुर्भावनापूर्ण’ बताया गया है। आयोग ने मामले को पंजीकृत कर उत्तर प्रदेश सरकार और DGP से विस्तृत रिपोर्ट तलब करने की तैयारी कर ली है। मानवाधिकार संगठन का तर्क है कि पुलिस शक्ति का दुरुपयोग कर एक धार्मिक नेता को निशाना बनाया जा रहा है।
7. राजनीतिक और धार्मिक प्रतिक्रियाएं — विवाद का व्यापक असर
इस विवाद ने देशभर में राजनीतिक और धार्मिक हलकों में हलचल मचा दी है। समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने शंकराचार्य से फोन पर बात कर समर्थन जताया और BJP सरकार पर तीखा निशाना साधा। अयोध्या के महंत राजू दास ने निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए कहा कि अगर आरोप सच हैं तो सजा मिलनी चाहिए।
धार्मिक क्षेत्र में भी मतभेद स्पष्ट हैं — शिकायतकर्ता जगद्गुरु रामभद्राचार्य के शिष्य हैं जिनसे शंकराचार्य के वैचारिक मतभेद जगजाहिर हैं। शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद लंबे समय से BJP और CM योगी आदित्यनाथ की कुछ नीतियों के मुखर आलोचक रहे हैं, जिसे मामले की राजनीतिक पृष्ठभूमि के रूप में देखा जा रहा है।
8. आगे क्या होगा? — मार्च में सुनवाई, जांच जारी
फिलहाल इलाहाबाद हाईकोर्ट के अंतरिम आदेश के बाद स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को तत्काल गिरफ्तारी का भय नहीं है। पुलिस सभी संबंधित पक्षों के बयान दर्ज करने और मेडिकल व अन्य दस्तावेजी साक्ष्य सुरक्षित करने में जुटी है। मार्च के तीसरे सप्ताह में होने वाली सुनवाई इस मामले की दिशा तय करेगी। NHRC की रिपोर्ट भी एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।












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