कोलकाता: केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने शुक्रवार को पश्चिम बंगाल के नए मुख्यमंत्री के रूप में सुवेंदु अधिकारी के नाम की आधिकारिक घोषणा की। इस घोषणा के साथ ही भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक ऐतिहासिक अध्याय की शुरुआत कर दी है – यह पहली बार है जब BJP राज्य में अपनी सरकार बनाने जा रही है।
ऐतिहासिक जीत का माहौल, अमित शाह ने की घोषणा
कोलकाता में आयोजित BJP विधायक दल की बैठक में वरिष्ठ नेता दिलीप घोष ने सुवेंदु अधिकारी का नाम मुख्यमंत्री पद के लिए प्रस्तावित किया, जिसे सर्वसम्मति से स्वीकार किया गया। इसके बाद केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने औपचारिक रूप से सुवेंदु अधिकारी के नाम की घोषणा करते हुए कहा – “सोनार बांग्ला अब शुरू होता है।”
सुवेंदु अधिकारी राजभवन पहुंचकर राज्यपाल सी.वी. आनंद बोस से मिलकर सरकार बनाने का दावा पेश किया, जिसे स्वीकार कर लिया गया।
BJP के इतिहास में यह पल बेहद खास है क्योंकि पार्टी ने ममता बनर्जी के गढ़ में सेंध लगाते हुए स्पष्ट बहुमत हासिल किया। सुवेंदु अधिकारी ने खुद भवानीपुर सीट से ममता बनर्जी को पराजित कर अपनी राजनीतिक शक्ति का प्रमाण दिया।
कौन हैं सुवेंदु अधिकारी?
सुवेंदु अधिकारी पश्चिम बंगाल की राजनीति का एक जाना-पहचाना और प्रभावशाली चेहरा हैं। पूर्व मेदिनीपुर जिले के कांथी से ताल्लुक रखने वाले सुवेंदु एक राजनीतिक परिवार से आते हैं। उनके पिता शिशिर अधिकारी केंद्र में मंत्री और सांसद रह चुके हैं। उनके भाई दिव्येंदु अधिकारी और सौमेंदु अधिकारी भी BJP के सक्रिय नेता हैं।
सुवेंदु अविवाहित हैं और उन्होंने Contai High School से प्रारंभिक शिक्षा प्राप्त की। इसके बाद विद्यासागर विश्वविद्यालय के अंतर्गत Pravat Kumar College से स्नातक और 2011 में रवींद्र भारती विश्वविद्यालय से स्नातकोत्तर (M.A.) की उपाधि प्राप्त की।
नंदीग्राम आंदोलन: जहाँ से उभरी उनकी पहचान
सुवेंदु अधिकारी की राजनीतिक पहचान 2007-08 के नंदीग्राम आंदोलन से जुड़ी है। इंडोनेशिया की सलीम ग्रुप के लिए एक SEZ परियोजना हेतु जबरन भूमि अधिग्रहण के विरोध में सुवेंदु ने ‘भूमि उच्छेद प्रतिरोध समिति’ (BUPC) का नेतृत्व किया। 14 मार्च 2007 को हुई पुलिस फायरिंग में कम से कम 14 लोगों की मौत हो गई थी – यह घटना बंगाल की राजनीति में एक ऐसा मोड़ बनी जिसने 34 साल की वामपंथी सरकार की नींव हिला दी।
TMC छोड़कर BJP में आए, फिर बने ‘ममता के सबसे बड़े विरोधी’
सुवेंदु अधिकारी पहले TMC में थे और ममता बनर्जी के करीबी माने जाते थे। लेकिन 2020 के अंत में उन्होंने TMC छोड़कर BJP का दामन थाम लिया। 2021 के विधानसभा चुनावों में नंदीग्राम से उन्होंने ममता बनर्जी को कड़ी टक्कर दी और एक ऐतिहासिक मुकाबले में उन्हें पराजित किया। इसके बाद वे बंगाल में विपक्ष के नेता बने।
2026 के विधानसभा चुनाव में BJP की ऐतिहासिक जीत के बाद सुवेंदु अधिकारी का नाम मुख्यमंत्री पद की दौड़ में सबसे आगे था — और अब वह सपना हकीकत बन गया है।
सुवेंदु का पहला बयान: “भय आउट, भरोसा इन”
मुख्यमंत्री के रूप में नाम घोषित होने के बाद सुवेंदु अधिकारी ने कहा – “भय आउट, भरोसा इन।” यह बयान बंगाल में नई सरकार की कार्यशैली का संकेत देता है। उन्होंने वादा किया कि आने वाली सरकार कानून-व्यवस्था बहाल करेगी, विकास को प्राथमिकता देगी और बंगाल को ‘सोनार बांग्ला’ बनाने के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सपने को पूरा करेगी।
संपत्ति और आर्थिक पारदर्शिता
2026 के विधानसभा चुनाव के लिए दाखिल शपथपत्र के अनुसार, सुवेंदु अधिकारी की कुल संपत्ति लगभग ₹85.87 लाख है, जिसमें पैतृक भूमि, आवासीय संपत्ति, बैंक जमा, KVP और NSC बचत शामिल हैं। उनकी वार्षिक आय ₹17.38 लाख बताई गई है और उन पर कोई देनदारी नहीं है।
शपथ ग्रहण समारोह कल
सुवेंदु अधिकारी का शपथ ग्रहण समारोह शनिवार को कोलकाता में होने की संभावना है। माना जा रहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहित BJP के शीर्ष नेता इस ऐतिहासिक आयोजन में शामिल होंगे।
बंगाल की राजनीति में नया युग
ममता बनर्जी के नेतृत्व में TMC ने 2011 से 2026 तक पश्चिम बंगाल पर राज किया। 15 वर्षों की TMC सरकार के बाद BJP की जीत और सुवेंदु अधिकारी का मुख्यमंत्री बनना बंगाल की राजनीति का एक ऐतिहासिक बदलाव है। अमित शाह की रणनीति और प्रधानमंत्री मोदी की लोकप्रियता के साथ मिलकर सुवेंदु अधिकारी की जमीनी पकड़ ने इस असंभव दिखने वाले लक्ष्य को संभव बना दिया।











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