नई दिल्ली : मध्य पूर्व में 40 दिनों से जारी भीषण युद्ध के बाद 8 अप्रैल 2026 को ऐतिहासिक दो सप्ताह के ईरान-अमेरिका सीजफायर की घोषणा की गई। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ की मध्यस्थता में हुआ यह समझौता तब आया जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान को धमकी दी थी कि अगर होर्मुज़ जलडमरूमध्य नहीं खुला तो “पूर्ण विनाश” किया जाएगा।
मुख्य बिंदु
- अमेरिका-ईरान के बीच दो सप्ताह का अस्थायी सीजफायर लागू हुआ
- पाकिस्तान के PM शहबाज़ शरीफ ने समझौते में मध्यस्थ की भूमिका निभाई
- ईरान ने होर्मुज़ जलडमरूमध्य से जहाज़ों की आवाजाही फिर शुरू करने पर सहमति दी
- इज़राइल ने सीजफायर का समर्थन किया, लेकिन लेबनान में हमले जारी रखे
- 10 अप्रैल को इस्लामाबाद में अमेरिका-ईरान वार्ता प्रस्तावित
- ईरान का 10-सूत्रीय शांति प्रस्ताव वार्ता का आधार बनेगा
युद्ध की शुरुआत कैसे हुई?
28 फरवरी 2026 को अमेरिका और इज़राइल ने ईरान पर संयुक्त हवाई हमले शुरू किए थे। इसी दौरान इज़राइल ने ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अली खामेनेई को भी मार गिराया। इसके जवाब में ईरान ने होर्मुज़ जलडमरूमध्य बंद कर दिया, जिससे दुनिया के एक-पांचवें तेल और गैस की आपूर्ति बाधित हो गई। वैश्विक तेल कीमतें आसमान छूने लगीं और शेयर बाज़ारों में भारी गिरावट आई।
सीजफायर कैसे हुआ?
ट्रम्प ने ईरान को मंगलवार रात की डेडलाइन दी थी कि अगर होर्मुज़ जलडमरूमध्य नहीं खोला गया तो “पूर्ण विनाश” होगा। डेडलाइन से महज दो घंटे पहले पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ की सक्रिय कूटनीतिक कोशिशों से सीजफायर पर सहमति बनी। पीएम शरीफ ने कहा, “दोनों पक्षों ने असाधारण समझदारी और परिपक्वता दिखाई है।” दुनियाभर के नेताओं ने पाकिस्तान की कूटनीतिक भूमिका की सराहना की।
“यह विश्व शांति के लिए एक बड़ा दिन है!” – राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प, ट्रुथ सोशल पर घोषणा करते हुए
समझौते की शर्तें क्या हैं?
अमेरिका ने दो सप्ताह के लिए ईरान पर सैन्य हमले रोकने का वादा किया। बदले में ईरान ने होर्मुज़ जलडमरूमध्य से जहाज़ों के सुरक्षित मार्ग की अनुमति देने पर सहमति जताई। ट्रम्प ने ईरान के 10-सूत्रीय प्रस्ताव को “वार्ता का उचित आधार” बताया। हालांकि 10-सूत्रीय प्रस्ताव को पूरी तरह सार्वजनिक नहीं किया गया है, रिपोर्टों के अनुसार इसमें शामिल हैं:
ईरान के 10 सूत्रीय प्रस्ताव के प्रमुख बिंदु (अब तक ज्ञात)
- अमेरिका की ओर से गैर-आक्रामकता की मौलिक प्रतिबद्धता
- होर्मुज़ जलडमरूमध्य पर ईरान का नियंत्रण बरकरार रहे
- ईरान के परमाणु संवर्धन कार्यक्रम को मान्यता
- ईरान पर सभी प्राथमिक और द्वितीयक प्रतिबंध हटाए जाएं
- क्षेत्र से अमेरिकी सैनिकों की वापसी
- विदेशों में जमे ईरानी संपत्तियों की वापसी
सीजफायर क्यों टूटता दिख रहा है?
सीजफायर की घोषणा के कुछ ही घंटों बाद खबरें आने लगीं कि यह समझौता कई मोर्चों पर दरक रहा है। इज़राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने साफ कह दिया कि यह सीजफायर लेबनान पर लागू नहीं होगा। इज़राइली सेना ने दक्षिणी लेबनान, बेरूत के दक्षिणी उपनगरों और टायर शहर पर हमले जारी रखे। लेबनानी स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, अब तक कम से कम 1,530 लोग मारे जा चुके हैं जिनमें 130 बच्चे शामिल हैं।
हिज़्बुल्लाह ने फिलहाल संयम बरतते हुए गोलीबारी रोकी है, लेकिन उसने चेतावनी दी है कि “अगर इज़राइल ने सीजफायर का पालन नहीं किया तो पूरा क्षेत्र जवाब देगा।” होर्मुज़ जलडमरूमध्य पर भी स्थिति पूरी तरह सामान्य नहीं हुई है — सीजफायर की घोषणा के छह घंटे से ज़्यादा समय बाद भी जलमार्ग में व्यापारिक जहाज़ों की आवाजाही नाममात्र ही रही।
- 28 फरवरी 2026 – अमेरिका-इज़राइल ने ईरान पर हमले शुरू किए; खामेनेई मारे गए
- मार्च 2026 – (मध्य)ईरान ने होर्मुज़ जलडमरूमध्य बंद किया; तेल कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर
- 7 अप्रैल 2026 – ट्रम्प की डेडलाइन; पाकिस्तान की मध्यस्थता शुरू
- 8 अप्रैल 2026 – तड़केदो सप्ताह के सीजफायर की घोषणा; ट्रम्प बोले — ‘बड़ा दिन है’
- 8 अप्रैल 2026 – सुबहइज़राइल के लेबनान हमले जारी; होर्मुज़ पर स्थिति अनिश्चित
- 10 अप्रैल 2026 – (प्रस्तावित)इस्लामाबाद में अमेरिका-ईरान वार्ता, स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनर शामिल होंगे
अब आगे क्या होगा?
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ ने दोनों देशों के प्रतिनिधिमंडलों को 10 अप्रैल को इस्लामाबाद में वार्ता के लिए आमंत्रित किया है। ट्रम्प के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ, दामाद जेरेड कुशनर और उपराष्ट्रपति जेडी वेंस के इसमें शामिल होने की संभावना है। ईरान ने कहा है कि वार्ता उसके 10-सूत्रीय प्रस्ताव के आधार पर होगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह सीजफायर बेहद नाज़ुक है। ईरान के जाने-माने विश्लेषक त्रिता पार्सी का कहना है कि इस्लामाबाद वार्ता विफल भी हो सकती है, लेकिन “परिस्थितियाँ बदल गई हैं।” सबसे बड़ा सवाल परमाणु संवर्धन का है — ट्रम्प चाहते हैं कि ईरान का परमाणु भंडार “हटाया जाए”, जबकि ईरान संवर्धन का अधिकार छोड़ने को तैयार नहीं है। यही मुद्दा फरवरी में पिछली वार्ता के टूटने का कारण भी बना था।
वहीं, लेबनान में इज़राइल के लगातार हमले किसी भी समय सीजफायर को पूरी तरह ध्वस्त कर सकते हैं। किंग्स कॉलेज के विश्लेषक क्रिग के अनुसार, “क्षेत्र में किसी भी सीजफायर के लिए सबसे बड़ा खतरा इज़राइल है।” वैश्विक बाज़ारों में सीजफायर की खबर से राहत की लहर दौड़ी और कच्चे तेल की कीमतें तेज़ी से गिरीं।
भारत पर क्या असर?
होर्मुज़ जलडमरूमध्य से भारत का भारी व्यापार गुज़रता है। ईरान से भारत को तेल आपूर्ति बाधित होने के कारण पिछले डेढ़ महीने में पेट्रोल और डीज़ल की कीमतों पर दबाव बना हुआ था। अगर इस्लामाबाद वार्ता सफल रही और होर्मुज़ पूरी तरह खुला तो भारतीय अर्थव्यवस्था को काफी राहत मिल सकती है। भारत में जनता दल (यूनाइटेड) नेता और पीडीपी प्रमुख महबूबा मुफ्ती ने सीजफायर में पाकिस्तान की भूमिका की सराहना की और भारत-पाकिस्तान वार्ता की भी वकालत की।











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