नई दिल्ली : भारतीय क्रिकेट टीम के विस्फोटक बल्लेबाज रिंकू सिंह (Rinku Singh) के पिता खानचंद्र सिंह (Khanchandra Singh) का शुक्रवार, 27 फरवरी 2026 को ग्रेटर नोएडा स्थित यथार्थ हॉस्पिटल (Yatharth Hospital) में निधन हो गया। वे स्टेज-4 लिवर कैंसर (Stage 4 Liver Cancer) से लंबे समय से जूझ रहे थे। सुबह लगभग 5 बजे उन्होंने अंतिम सांस ली। यह दुखद खबर ऐसे समय में आई जब रिंकू सिंह T20 विश्व कप 2026 (T20 World Cup 2026) में भारतीय टीम के साथ शामिल हैं।
अस्पताल में कैसी थी खानचंद्र सिंह की स्थिति?
रिंकू सिंह के पिता खानचंद्र सिंह की तबीयत पिछले कुछ दिनों से बेहद नाजुक बनी हुई थी। उन्हें ग्रेटर नोएडा के यथार्थ हॉस्पिटल की क्रिटिकल केयर यूनिट (CCU) में भर्ती कराया गया था। अस्पताल के सूत्रों के अनुसार, उन्हें मैकेनिकल वेंटिलेटर सपोर्ट (Mechanical Ventilator Support) पर रखा गया था और साथ ही उन्हें कंटीन्यूअस रीनल रिप्लेसमेंट थेरेपी (CRRT – Continuous Renal Replacement Therapy) भी दी जा रही थी। डॉक्टरों ने उनकी हालत को स्थिर करने की पूरी कोशिश की, लेकिन कैंसर की यह अंतिम अवस्था उनपर हावी हो गई।
T20 विश्व कप छोड़ घर लौटे थे रिंकू सिंह
रिंकू सिंह T20 विश्व कप 2026 में भारतीय दल का हिस्सा हैं। जब उन्हें पिता की हालत बिगड़ने की जानकारी मिली, तो वे भारत बनाम दक्षिण अफ्रीका सुपर-8 मैच के बाद तुरंत टीम से छुट्टी लेकर ग्रेटर नोएडा पहुंचे। पिता से मिलने के बाद वे एक बार फिर चेन्नई लौट गए, जहां MA चिदंबरम स्टेडियम में भारत और जिम्बाब्वे (India vs Zimbabwe) का मैच खेला जाना था। हालांकि टीम प्रबंधन ने उन्हें खेलने वाली XI में शामिल नहीं किया। संजू सैमसन को ओपनर के तौर पर वापस लाया गया, जबकि ईशान किशन को नंबर-3 और तिलक वर्मा को फिनिशर की भूमिका दी गई।
संघर्षों की मिसाल थे खानचंद्र सिंह — LPG सिलेंडर बेचकर बेटे को बनाया क्रिकेटर
खानचंद्र सिंह की जीवनयात्रा एक आम भारतीय पिता के संघर्ष और समर्पण की अद्भुत कहानी है। उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ में वे दशकों तक LPG गैस सिलेंडर की डिलीवरी का काम करते रहे — और यही उनकी आजीविका थी। अपनी आर्थिक तंगी के बावजूद उन्होंने बेटे रिंकू की क्रिकेट प्रतिभा को पहचाना और उसे हर हाल में आगे बढ़ाया। रिंकू सिंह ने खुद कई मौकों पर कहा है कि उनकी सफलता के पीछे पिता की मेहनत और त्याग सबसे बड़ी प्रेरणा रही है। यहां तक कि जब रिंकू अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेटर बन गए, तब भी खानचंद्र सिंह अपना सिलेंडर वितरण का काम नहीं छोड़ते थे — यह उनकी जिजीविषा और ईमानदारी का प्रतीक था।
शादी से तीन महीने पहले चली गई पिता की छाँव
यह खबर और भी दिल को दुखाने वाली इसलिए है क्योंकि रिंकू सिंह की शादी की तैयारियां जोरों पर थीं। वे समाजवादी पार्टी की सांसद प्रिया सरोज के साथ सगाई कर चुके हैं। 8 जून 2025 को लखनऊ में उनकी सगाई हुई थी। अब विवाह जून 2026 में होना तय है, जो वाराणसी (काशी) में संपन्न होगा और रिसेप्शन अलीगढ़ में। लेकिन विधि का विधान देखिए — जब बेटे की शादी का समय आया, तब पिता खानचंद्र सिंह इस खुशी के साक्षी नहीं बन सके। पिता का सपना था कि रिंकू का विवाह धूमधाम से हो — वह सपना अब आंखें भिगो जाता है।
क्रिकेट जगत में शोक: हरभजन सिंह ने दी श्रद्धांजलि
खानचंद्र सिंह के निधन की खबर मिलते ही क्रिकेट जगत में शोक की लहर दौड़ गई। पूर्व भारतीय क्रिकेटर हरभजन सिंह (Harbhajan Singh) ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (Twitter) पर अपनी संवेदनाएं प्रकट कीं। उन्होंने लिखा कि यह रिंकू और उनके परिवार के लिए बेहद कठिन समय है, जबकि वे T20 विश्व कप में अपनी जिम्मेदारियां निभाने के प्रति प्रतिबद्ध भी हैं। हरभजन ने वाहेगुरु से दिवंगत आत्मा को शांति और परिवार को शक्ति देने की प्रार्थना की। पार्थिव शरीर को अंतिम संस्कार के लिए अलीगढ़ ले जाया गया।
रिंकू की T20 विश्व कप भागीदारी पर संशय
पिता के निधन के बाद अब यह बड़ा सवाल उठ रहा है कि क्या रिंकू सिंह T20 विश्व कप 2026 के शेष मैचों में हिस्सा ले पाएंगे। BCCI की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। टीम इंडिया का अगला अहम मुकाबला वेस्टइंडीज (West Indies) के खिलाफ कोलकाता में होना है। इस मैच में जीत भारत को साउथ अफ्रीका के साथ सेमीफाइनल में ले जा सकती है। जिम्बाब्वे के खिलाफ मैच में भारत ने 256/4 का बड़ा स्कोर खड़ा कर 72 रनों से जीत दर्ज की। हार्दिक पांड्या ने 23 गेंदों में नाबाद 50 रन बनाए, जबकि तिलक वर्मा ने 16 गेंदों में नाबाद 44 रन जड़े।
रिंकू सिंह का क्रिकेट सफर: अलीगढ़ से अंतर्राष्ट्रीय मंच तक
रिंकू सिंह का जन्म 12 अक्टूबर 1997 को अलीगढ़, उत्तर प्रदेश में हुआ था। आर्थिक तंगी के बावजूद उन्होंने क्रिकेट की राह नहीं छोड़ी और रणजी ट्रॉफी व विजय हजारे ट्रॉफी में उत्तर प्रदेश का प्रतिनिधित्व किया। IPL में कोलकाता नाइट राइडर्स (KKR) के लिए खेलते हुए उन्होंने 2023 में वह ऐतिहासिक पारी खेली जब उन्होंने गुजरात टाइटंस के खिलाफ अंतिम ओवर में लगातार 5 छक्के मारकर असंभव लक्ष्य हासिल किया। इस पारी ने उन्हें रातोंरात देश का चहेता खिलाड़ी बना दिया। उनकी इस उपलब्धि के पीछे पिता खानचंद्र सिंह की अनथक मेहनत और बलिदान की अदृश्य नींव हमेशा रही।












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