फलता री-पोलिंग (Falta Re-polling): पश्चिम बंगाल की सियासत में मंगलवार को एक बड़ा और अप्रत्याशित उलटफेर सामने आया। दक्षिण 24 परगना जिले की हाई-प्रोफाइल फालटा विधानसभा सीट से तृणमूल कांग्रेस (TMC) के आधिकारिक प्रत्याशी जहांगीर खान ने चुनावी मैदान से अपने कदम पीछे खींच लिए। खास बात यह है कि री-पोलिंग के सिर्फ दो दिन पहले अभिषेक बनर्जी के करीबी सहयोगी माने जाने वाले जहांगीर खान ने यह घोषणा कर राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी।
यह वही जहांगीर खान हैं जिन्होंने चुनाव प्रचार के दौरान IPS अधिकारी अजय पाल शर्मा को ललकारते हुए कहा था
“अगर वह सिंघम हैं, तो मैं पुष्पा हूँ — पुष्पा झुकेगा नहीं!”
और आज वही “पुष्पा” मैदान छोड़ गया।
फलता री-पोलिंग: क्यों हो रहा है दोबारा मतदान?
फलता सीट पर दोबारा मतदान की पृष्ठभूमि को समझना जरूरी है। भारत निर्वाचन आयोग ने 2 मई 2026 को पश्चिम बंगाल की फालटा विधानसभा सीट पर पुनर्मतदान का आदेश दिया था। आयोग ने “गंभीर चुनावी अपराधों और लोकतांत्रिक प्रक्रिया के साथ खिलवाड़” का हवाला देते हुए 285 मतदान केंद्रों पर 21 मई को नए सिरे से मतदान कराने का निर्देश दिया।
जांच में सामने आया कि 285 में से कम से कम 60 मतदान केंद्रों — यानी करीब 21% बूथों — पर EVM के साथ छेड़छाड़ की गई थी। इससे 53,967 मतदाता यानी कुल मतदाताओं के 22.82% प्रभावित हुए। कई बूथों पर भाजपा उम्मीदवार के नाम और चुनाव चिह्न के पास वाले EVM बटन पर सफेद टेप लगाने की भी शिकायत थी।
जहांगीर खान ने क्यों वापस ली उम्मीदवारी?
मंगलवार (19 मई) को प्रेस कॉन्फ्रेंस में जहांगीर खान ने कहा — “मैं फालटा का बेटा हूँ और चाहता हूँ कि फालटा में शांति रहे और विकास हो। हमारे मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी फालटा के विकास के लिए एक विशेष पैकेज दे रहे हैं, इसीलिए मैं री-पोलिंग से खुद को अलग कर रहा हूँ।”
उन्होंने कहा कि उनका सपना था “सोनार फालटा” — यानी एक आदर्श और विकसित क्षेत्र — और इसी जनहित को ध्यान में रखते हुए उन्होंने यह निर्णय लिया।
हालांकि राजनीतिक गलियारों में उनके इस बयान पर कई सवाल उठ रहे हैं। विपक्ष का आरोप है कि नाम वापस लेने के पीछे असली वजह चुनावी दबाव और बदलती राजनीतिक परिस्थितियाँ हैं। शुभेंदु अधिकारी ने दावा किया कि जहांगीर खान को पोलिंग एजेंट तक नहीं मिल रहे थे और उन्हें हार का अंदेशा हो गया था।
अजय पाल शर्मा विवाद: जब “सिंघम” से टकराया “पुष्पा”
इस पूरे राजनीतिक ड्रामे की जड़ में है IPS अधिकारी अजय पाल शर्मा और जहांगीर खान के बीच का वह विवाद, जो चुनाव के दौरान राष्ट्रीय सुर्खियाँ बना।
अजय पाल शर्मा को चुनाव पर्यवेक्षक के रूप में फालटा में तैनात किया गया था। “सिंघम” की छवि वाले शर्मा ने मतदान से पहले जहांगीर खान के आवास पर जाकर उनके परिवार को मतदाताओं को डराने-धमकाने से बचने की चेतावनी दी थी।
इस पर जहांगीर खान ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा था —
“यह बंगाल है; अगर वह सिंघम हैं, तो मैं पुष्पा हूँ।
फालटा में उत्तर प्रदेश पुलिस के अधिकारियों की कोई भी धमकी या दबाव बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।” उन्होंने यहाँ तक कह दिया था कि “तस्वीर अभी बाकी है मेरे दोस्त” और CRPF को उड़ा देने की बात भी कही थी।
यह विवाद तब और बढ़ गया जब TMC के एक नेता ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो शेयर किया जिसमें अजय पाल शर्मा को UP में लड़कियों के साथ नाचते दिखाया गया और उन्हें “बेशर्म” बताया गया।
TMC और BJP की प्रतिक्रिया
TMC का रुख: तृणमूल कांग्रेस ने जहांगीर खान के इस फैसले को उनका व्यक्तिगत निर्णय बताया और कहा कि चुनाव परिणाम घोषित होने (4 मई) के बाद से फालटा में 100 से अधिक TMC कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया गया है, कई पार्टी कार्यालयों में तोड़फोड़ हुई और उन्हें बंद करा दिया गया।
वरिष्ठ TMC नेता कुणाल घोष ने खुद अपनी पार्टी के नेता पर तंज कसते हुए पूछा — “अगर जहांगीर खान पुष्पा थे, तो झुके क्यों?”
BJP का हमला: BJP IT सेल प्रमुख अमित मालवीय ने X (पूर्व ट्विटर) पर लिखा — “री-पोल 21 को है, फिर भी अभिषेक बनर्जी के विश्वासपात्र जहांगीर ‘पुष्पा’ खान ने अचानक दौड़ से बाहर होने का फैसला कर लिया। ‘डायमंड हार्बर मॉडल’ का क्या हुआ? क्या यह मॉडल उस पल ढह गया जब मतदाताओं को निष्पक्ष रूप से बोलने का मौका मिला?”
पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने चुनाव प्रचार के अंतिम दिन फालटा में रोड शो किया और BJP उम्मीदवार देबांशु पांडा के समर्थन में प्रचार किया। वह पहले ही कह चुके थे — “पुष्पा अब मेरी जिम्मेदारी है।”
डायमंड हार्बर मॉडल पर सवाल
फालटा में पुनः मतदान ने राजनीतिक ध्यान खींचा है क्योंकि यह विधानसभा क्षेत्र डायमंड हार्बर के अंतर्गत आता है, जो TMC राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी का संसदीय क्षेत्र है। जहांगीर खान और ममता बनर्जी या अभिषेक बनर्जी सहित पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने 4 मई से शुरू हुए चुनाव प्रचार के दौरान इस निर्वाचन क्षेत्र में कोई रैली या जनसभा आयोजित नहीं की।
राज्य BJP अध्यक्ष समीक भट्टाचार्य ने सवाल उठाया कि अभिषेक बनर्जी अपने संसदीय गढ़ का हिस्सा होने के बावजूद फालटा से दूर क्यों रहे।
आगे की परिस्थिति?
फालटा विधानसभा सीट पर 21 मई को पुनर्मतदान होगा और मतगणना 24 मई को की जाएगी। सुरक्षा व्यवस्था को कड़ा किया जा रहा है। जहांगीर खान के हटने से BJP उम्मीदवार देबांशु पांडा के लिए मुकाबला अब सीधा हो गया है, हालाँकि असली नतीजा 21 मई को वोटिंग के बाद ही साफ होगा।
इस बीच कलकत्ता हाई कोर्ट ने जहांगीर खान के खिलाफ दर्ज FIR पर 26 मई तक किसी भी कार्रवाई पर रोक लगा दी है।
फालटा की इस सियासी उथलपुथल ने एक बात तो साफ कर दी — पुष्पा ने खुद कहा था “झुकेगा नहीं,” लेकिन राजनीति की हवा कब किस करवट बदले, कोई नहीं जानता।












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