दिल्ली के राउज एवेन्यू कोर्ट ने सोमवार को कांग्रेस की वरिष्ठ नेता और ऑल इंडिया महिला कांग्रेस की अध्यक्ष अलका लांबा को 2024 के जंतर-मंतर महिला आरक्षण प्रदर्शन मामले में दोषी करार दिया। कोर्ट ने सजा पर बहस के लिए 5 जून की तारीख तय की है।
नई दिल्ली: एडिशनल चीफ जुडिशियल मजिस्ट्रेट (ACJM) अश्विनी पंवार की अदालत ने आज कांग्रेस नेता अलका लांबा (Alka Lamba) को दोषी घोषित करते हुए सजा की सुनवाई के लिए 5 जून 2026 की तिथि निर्धारित की। यह मामला 29 जुलाई 2024 को संसद भवन के निकट जंतर-मंतर पर महिला आरक्षण की मांग को लेकर हुए प्रदर्शन से जुड़ा है, जिसमें अलका लांबा मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित थीं।
2024 के लोकसभा चुनाव से पहले, ऑल इंडिया महिला कांग्रेस के पदाधिकारियों ने जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की अनुमति मांगी थी। प्रदर्शन के दौरान संसद की ओर मार्च करने की अनुमति पहले ही प्रशासन द्वारा अस्वीकार कर दी गई थी और क्षेत्र में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 के तहत निषेधाज्ञा भी लागू थी।
अभियोजन पक्ष के अनुसार, अलका लांबा ने इस निषेधाज्ञा का उल्लंघन किया, प्रदर्शनकारियों को उकसाया, पुलिस अधिकारियों को धक्का दिया, बैरिकेड पार किए और प्रदर्शनकारियों को निर्धारित प्रदर्शन क्षेत्र से बाहर ले जाने की कोशिश की।
“कोर्ट ने वीडियो फुटेज में देखा कि आरोपी प्रदर्शन में सबसे आगे थीं और उन्होंने दूसरों को पुलिस बैरिकेड तोड़ने तथा सार्वजनिक रास्ते में रुकावट डालने के लिए उकसाने में अहम भूमिका निभाई।” – राउज एवेन्यू कोर्ट
दिसंबर 2025 से शुरू हुई थी आरोप तय करने की प्रक्रिया
19 दिसंबर 2025 को ACJM ने वीडियो साक्ष्य देखने के बाद लांबा के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 132, 221, 223(a) और 285 के तहत आरोप तय किए थे। लांबा ने इस आदेश को रिवीजन याचिका के माध्यम से चुनौती दी, परंतु 6 फरवरी 2026 को विशेष न्यायाधीश (MP-MLA) दिग विनय सिंह ने उनकी याचिका यह कहते हुए खारिज कर दी कि निचली अदालत के आदेश में कोई कानूनी खामी नहीं है।
इसके बाद 18 अप्रैल 2026 को कोर्ट ने अलका लांबा का बयान दर्ज किया और 4 मई को फैसला सुरक्षित रख लिया था। आज यानी 25 मई 2026 को अदालत ने उन्हें दोषी करार दिया।
किन धाराओं में दोषी करार?
कोर्ट ने अलका लांबा को BNS की इन धाराओं के तहत दोषी माना: धारा 132 (लोकसेवक को कर्तव्य से विरत करने के लिए हमला या आपराधिक बल), धारा 221 (सार्वजनिक अधिकारी को बाधा), धारा 223(a) (सरकारी आदेश की अवहेलना) और धारा 285 (सार्वजनिक मार्ग में अवरोध)। BNS की धारा 132 के तहत अधिकतम दो वर्ष के कारावास का प्रावधान है।
कांग्रेस और अलका लांबा का रुख
अलका लांबा ने अदालत में लगाए गए सभी आरोपों से इनकार किया था और मुकदमा चलाने की मांग की थी। कांग्रेस पार्टी इस पूरे मामले को राजनीतिक रूप से प्रेरित बताती रही है। अब 5 जून को सजा पर बहस के बाद अंतिम फैसला आएगा, जो पार्टी और नेत्री दोनों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण होगा।












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