वैश्विक तेल संकट के बीच PM मोदी की जन-अपील – “कर्तव्य को सर्वोपरि रखते हुए संकल्प लें”
सिकंदराबाद (तेलंगाना ): प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार (10 मई 2026) को तेलंगाना के सिकंदराबाद में एक महत्वपूर्ण सार्वजनिक कार्यक्रम में देशवासियों को संबोधित करते हुए पश्चिम एशिया (West Asia) संकट के भारत पर पड़ रहे प्रभावों को लेकर कई अहम बातें कहीं। उन्होंने कहा 1 साल सोना न खरीदें, नागरिकों से पेट्रोल-डीजल का संयमित उपयोग करने, वर्क-फ्रॉम-होम (WFH) अपनाने और अनावश्यक विदेश यात्रा से बचने की सीधी अपील की।
PM मोदी ने कहा:
“इस वैश्विक संकट के समय हमें कर्तव्य को सर्वोपरि रखते हुए संकल्प लेना होगा और पूरी निष्ठा के साथ उसे पूरा करना होगा। एक बड़ा संकल्प यह है कि पेट्रोल और डीजल का उपयोग संयमित रखें।”
भाषण में मोदी जी ने स्पष्ट रूप से कहा:
“सोने की खरीद एक ऐसा क्षेत्र है जहाँ विदेशी मुद्रा का व्यापक उपयोग होता है… राष्ट्रहित में हम यह संकल्प लें कि एक साल तक सोना नहीं खरीदेंगे, चाहे कुछ भी हो।”
पृष्ठभूमि: क्यों आई यह नौबत?
पश्चिम एशिया में अमेरिका-इज़राइल और ईरान के बीच जारी युद्ध के कारण दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल परिवहन मार्गों में से एक — होर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) — बुरी तरह प्रभावित हुआ है। इससे वैश्विक कच्चे तेल की कीमतें तेजी से उछली हैं।
तेल बाजार के ताज़ा आँकड़े:
- कच्चे तेल की कीमत: $70/बैरल से बढ़कर लगभग $126/बैरल हो गई है।
- भारतीय तेल कंपनियाँ (Indian Oil, BPCL, HPCL) मिलकर प्रतिमाह लगभग ₹30,000 करोड़ का नुकसान उठा रही हैं।
- सरकार अभी तक उपभोक्ताओं की रक्षा के लिए इस बोझ को स्वयं वहन कर रही है।
- 15 मई 2026 से पहले पेट्रोल-डीजल की कीमतों में संशोधन की संभावना।
यदि कीमतें बढ़ीं, तो:
- पेट्रोल/डीजल: ₹4-5 प्रति लीटर की वृद्धि हो सकती है।
- LPG सिलेंडर: ₹40-50 महँगा हो सकता है।
PM मोदी के भाषण के मुख्य बिंदु – विदेशी मुद्रा व राष्ट्रीय प्रगति से जुड़े
1. पेट्रोल-डीजल बचाना = विदेशी मुद्रा बचाना
पीएम मोदी ने नागरिकों को यह महत्वपूर्ण आर्थिक सच्चाई बताई कि भारत अपनी तेल जरूरतों का अधिकांश हिस्सा आयात से पूरा करता है और इसके लिए बड़ी मात्रा में विदेशी मुद्रा खर्च होती है।
उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा:
“पेट्रोल और डीजल पूरी दुनिया में बहुत महँगे हो गए हैं। यह हम सभी की जिम्मेदारी है कि पेट्रोल-डीजल की खरीद पर खर्च होने वाली विदेशी मुद्रा को भी संरक्षित करें — और यह काम पेट्रोल-डीजल का संयमित उपयोग करके संभव है।”
व्यावहारिक सुझाव:
- जहाँ मेट्रो उपलब्ध है, वहाँ मेट्रो रेल का अधिकतम उपयोग करें।
- कारपूलिंग अपनाएं।
- इलेक्ट्रिक वाहन (EV) रखने वाले उनका अधिकतम उपयोग करें।
2. WFH और ऑनलाइन मीटिंग — कोविड की सीख को दोबारा अपनाएं
पीएम मोदी ने कोविड-19 महामारी के दौरान अपनाई गई वर्क-फ्रॉम-होम व्यवस्था का हवाला देते हुए कहा कि उस दौर में लोगों ने साबित किया था कि घर से काम करना, ऑनलाइन मीटिंग और वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग न केवल संभव है, बल्कि प्रभावी भी है।
उन्होंने आग्रह किया कि अब राष्ट्रीय हित में इन प्रणालियों को फिर से बढ़ावा दिया जाए ताकि ईंधन की खपत में उल्लेखनीय कमी लाई जा सके।
(नोट: PM मोदी के इस बयान से सोशल मीडिया पर लॉकडाउन की अटकलें उठीं, लेकिन सरकार की ओर से ऐसी कोई घोषणा नहीं की गई है। WFH की यह अपील पूरी तरह ईंधन बचत के संदर्भ में थी।)
3. सोना न खरीदें — राष्ट्रहित का सबसे बड़ा संकल्प
यह शायद PM मोदी की इस भाषण की सबसे अनूठी और साहसिक अपील थी। उन्होंने कहा कि सोने की खरीद में बड़े पैमाने पर विदेशी मुद्रा खर्च होती है।
“सोने की खरीद एक ऐसा क्षेत्र है जहाँ विदेशी मुद्रा का व्यापक उपयोग होता है। राष्ट्रहित में हम यह संकल्प लें कि एक साल तक, चाहे जो भी अवसर हो — शादी हो या कोई भी सामाजिक कार्यक्रम — सोना नहीं खरीदेंगे।”
क्यों महत्वपूर्ण है यह अपील? भारत दुनिया का सबसे बड़ा सोना आयातक देशों में से एक है। शादी-विवाह के सीज़न में सोने की माँग असाधारण रूप से बढ़ जाती है, जिससे विदेशी मुद्रा पर दबाव बढ़ता है। यदि 140 करोड़ देशवासी एक साल के लिए सोना न खरीदें, तो अरबों डॉलर की विदेशी मुद्रा की बचत संभव है।
4. विदेश यात्रा टालें — कम से कम एक साल के लिए
पीएम मोदी ने मध्यम वर्ग में बढ़ती विदेश में शादियाँ करने और विदेशी छुट्टियाँ मनाने की प्रवृत्ति का उल्लेख करते हुए कहा कि वर्तमान परिस्थितियों में नागरिकों को कम से कम एक साल के लिए अनावश्यक विदेश यात्रा स्थगित करनी चाहिए।
यह भी विदेशी मुद्रा के संरक्षण की दिशा में एक प्रत्यक्ष कदम है, क्योंकि विदेश यात्रा पर बड़ी मात्रा में डॉलर और अन्य विदेशी मुद्राएं खर्च होती हैं।
भारत की स्थिति: सरकार डटकर मुकाबला कर रही है
पीएम मोदी ने यह भी स्पष्ट किया कि सरकार इस वैश्विक संकट से निपटने के लिए ठोस कदम उठा रही है:
- कच्चे तेल के आयात स्रोतों में विविधता: रूस, अमेरिका और पश्चिम अफ्रीकी देशों से आयात बढ़ाया गया है।
- रिफाइनरियाँ 100% से अधिक क्षमता पर चल रही हैं।
- LPG उत्पादन में वृद्धि की गई है।
- कई पड़ोसी देशों (बांग्लादेश — ईंधन राशनिंग, श्रीलंका — कार्यालय दिवस में कटौती) के विपरीत भारत में पेट्रोल पंपों पर कोई लंबी कतारें या संकट नहीं है।
पीएम ने देशवासियों से एकजुटता का आह्वान करते हुए कहा कि जैसे पहले हर संकट में 140 करोड़ देशवासियों की सामूहिक शक्ति ने देश को उबारा, वैसे ही इस बार भी हम मिलकर इन चुनौतियों को पार करेंगे।
आपके लिए व्यावहारिक कदम: PM मोदी की अपील को जीवन में उतारें
ईंधन बचत के लिए:
- मेट्रो, बस या कारपूलिंग को प्राथमिकता दें।
- EV है तो उसका अधिकतम उपयोग करें।
- WFH संभव हो तो ऑफिस से इतर काम घर से करें।
- ऑनलाइन मीटिंग को ट्रैवल के विकल्प के रूप में अपनाएं।
- वाहन नियमित सर्विसिंग से ईंधन दक्षता बढ़ाएं।
विदेशी मुद्रा बचाने के लिए:
- एक साल तक सोना न खरीदें — बजाय इसके म्यूचुअल फंड, PPF, या FD में निवेश करें।
- शादियाँ देश में करें, विदेश में नहीं।
- विदेशी छुट्टियाँ एक साल के लिए टालें — भारत में पर्यटन को बढ़ावा दें।
- आयातित विलासिता वस्तुओं से दूरी बनाएं।
- Made in India उत्पादों को प्राथमिकता दें।
PM मोदी की अपील का महत्व: एक ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य
1965 के भारत-पाकिस्तान युद्ध के दौरान तत्कालीन प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री ने देशवासियों से एक वक्त का खाना छोड़ने की अपील की थी। करोड़ों नागरिकों ने उस अपील पर अमल किया और देश को विदेशी निर्भरता से उबरने में मदद की।
आज, 61 साल बाद, PM मोदी की यह अपील उसी भावना की अगली कड़ी है — एक जिम्मेदार, जागरूक और आत्मनिर्भर भारत के निर्माण की दिशा में हर नागरिक का योगदान।
निष्कर्ष
PM मोदी का आज का संबोधन महज एक भाषण नहीं, बल्कि यह एक राष्ट्रीय संकल्प का आह्वान है। पश्चिम एशिया के युद्ध ने जहाँ दुनिया भर में ऊर्जा संकट पैदा किया है, वहीं भारत इस चुनौती का डटकर सामना कर रहा है। सरकार के प्रयासों के साथ-साथ यदि 140 करोड़ भारतीय नागरिक पेट्रोल बचाएं, सोना न खरीदें और विदेशी यात्रा टालें — तो भारत की अर्थव्यवस्था और भी मजबूत होगी और हम एक समृद्ध, आत्मनिर्भर राष्ट्र की ओर तेजी से आगे बढ़ेंगे।











प्रातिक्रिया दे