लेफ्टिनेंट जनरल एन एस राजा सुब्रमणि बने भारत के नए CDS, 30 मई 2026 से संभालेंगे पदभार

लेफ्टिनेंट जनरल एन एस राजा सुब्रमणि, भारत के नए चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ 2026

नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने 39 वर्षों के शानदार सैन्य अनुभव वाले लेफ्टिनेंट जनरल एन एस राजा सुब्रमणि (सेवानिवृत्त) को देश का तीसरा CDS नियुक्त किया है। वे 30 मई 2026 से पद संभालेंगे।

नई नियुक्ति की पृष्ठभूमि

भारत सरकार ने 9 मई 2026 को एक ऐतिहासिक घोषणा करते हुए लेफ्टिनेंट जनरल एन एस राजा सुब्रमणि (सेवानिवृत्त) को देश का नया चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) नियुक्त किया। वे वर्तमान CDS जनरल अनिल चौहान का स्थान लेंगे, जिनका कार्यकाल 30 मई 2026 को समाप्त हो रहा है। लेफ्टिनेंट जनरल सुब्रमणि 30 मई 2026 से इस पद का कार्यभार ग्रहण करेंगे।

इस नियुक्ति के साथ ही लेफ्टिनेंट जनरल सुब्रमणि सैन्य मामलों के विभाग (Department of Military Affairs – DMA) के सचिव के रूप में भी कार्य करेंगे। यह नियुक्ति भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा संरचना के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

महत्वपूर्ण तथ्य

चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) पद की औपचारिक शुरुआत 1 जनवरी 2020 को हुई थी। जनरल बिपिन रावत इस पद के पहले CDS थे। यह देश का सर्वोच्च सैन्य पद है जो चार-स्टार जनरल रैंक का होता है और तीनों सेनाओं — थल सेना, नौसेना तथा वायु सेना — के बीच समन्वय के लिए जिम्मेदार होता है।

शानदार शैक्षणिक एवं प्रशिक्षण पृष्ठभूमि

लेफ्टिनेंट जनरल राजा सुब्रमणि राष्ट्रीय रक्षा अकादमी (NDA), खडकवासला के 67वें कोर्स और भारतीय सैन्य अकादमी (IMA) के 77वें कोर्स के पूर्व छात्र हैं। उन्होंने यूनाइटेड किंगडम स्थित जॉइंट सर्विसेज कमांड एंड स्टाफ कॉलेज, ब्रैकनेल से प्रशिक्षण प्राप्त किया है।

उच्च शिक्षा के क्षेत्र में उन्होंने किंग्स कॉलेज लंदन से मास्टर ऑफ आर्ट्स (MA) की डिग्री प्राप्त की है तथा मद्रास विश्वविद्यालय से रक्षा अध्ययन में एम.फिल (M.Phil) किया है। इसके अलावा उन्होंने राष्ट्रीय रक्षा कॉलेज, नई दिल्ली से भी शिक्षा ग्रहण की है।

विशिष्ट सैन्य कैरियर: एक नजर

दिसंबर 1985 में गढ़वाल राइफल्स की 8वीं बटालियन में कमीशन पाने वाले जनरल सुब्रमणि का करियर 39 से अधिक वर्षों तक फैला है। उन्होंने देश की विभिन्न महत्वपूर्ण कमानों और पदों पर अपनी सेवाएं दी हैं।

  • 1985 – गढ़वाल राइफल्स की 8वीं बटालियन में कमीशन प्राप्त किया
  • असम में 16 गढ़वाल राइफल्स की कमान – परेशन राइनो (काउंटर-इन्सर्जेंसी) में अहम भूमिका; सेना मेडल से सम्मानित
  • कजाकिस्तान स्थित भारतीय दूतावास, अस्ताना में रक्षा अताशे के रूप में सेवा
  • 2020 – उत्तर भारत क्षेत्र के जनरल ऑफिसर कमांडिंग (GOC) नियुक्त
  • 2021 – II कोर (कोर कमांडर) – लेफ्टिनेंट जनरल रैंक में नियुक्ति
  • 2022 – नॉदर्न कमांड, उधमपुर के चीफ ऑफ स्टाफ
  • मार्च 2023 – सेंट्रल कमांड, लखनऊ के GOC-in-C नियुक्त
  • जुलाई 2024 – भारतीय थल सेना के उप प्रमुख (Vice Chief of Army Staff — 47वें) बने
  • सितंबर 2025 – राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय में सैन्य सलाहकार के रूप में तैनात
  • 30 मई 2026भारत के तीसरे चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) के रूप में पद ग्रहण

पुरस्कार एवं सम्मान

उनके उत्कृष्ट सैन्य जीवन को कई प्रतिष्ठित पुरस्कारों से नवाजा गया है:

PVSM — परम विशिष्ट सेवा मेडल

AVSM — अति विशिष्ट सेवा मेडल

SM — सेना मेडल

VSM — विशिष्ट सेवा मेडल

CDS के रूप में प्रमुख चुनौतियाँ

लेफ्टिनेंट जनरल सुब्रमणि के सामने सबसे बड़ी और सर्वोच्च प्राथमिकता है — तीनों सेनाओं का थिएटर कमांड में एकीकरण। यह भारत सरकार की महत्वाकांक्षी योजना है जिसके तहत युद्ध की स्थिति में थल सेना, नौसेना और वायु सेना एकजुट होकर एक संयुक्त रणनीति से प्रहार कर सकें।

इसके अतिरिक्त उन्हें रक्षा क्षेत्र में स्वदेशीकरण को बढ़ावा देना होगा, पड़ोसी देशों से उत्पन्न सुरक्षा चुनौतियों से निपटना होगा तथा आधुनिक साइबर और अंतरिक्ष युद्ध के क्षेत्रों में भारत की क्षमताओं को सुदृढ़ करना होगा।

“चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ देश का सर्वोच्च सैन्य पद है — यह सरकार को एकल बिंदु पर सलाह देता है और तीनों सेनाओं के बीच सर्वोच्च समन्वय की भूमिका निभाता है।”

— रक्षा मंत्रालय, भारत सरकार

नए नौसेना प्रमुख की भी नियुक्ति

इसी घोषणा के साथ केंद्र सरकार ने नए नौसेना प्रमुख (Chief of Naval Staff) की भी नियुक्ति की है। एडमिरल कृष्णा स्वामीनाथन को भारतीय नौसेना का अगला प्रमुख नियुक्त किया गया है। वे वर्तमान में मुंबई में वेस्टर्न नेवल कमांड के फ्लैग ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ के रूप में सेवारत हैं। एडमिरल स्वामीनाथन 31 मई 2026 को नए नेवी चीफ का पदभार संभालेंगे और उनका कार्यकाल 31 दिसंबर 2028 तक रहेगा।

एडमिरल स्वामीनाथन को 1 जुलाई 1987 को भारतीय नौसेना में कमीशन मिला था। वे संचार और इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर में विशेषज्ञ माने जाते हैं।

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