जग वसंत LPG जहाज़ भारत पहुँचा: होर्मुज़ जलडमरूमध्य संघर्ष के बीच 47,600 टन गैस लेकर कांडला बंदरगाह पर सुरक्षित आया

जग वसंत LPG जहाज़ भारत पहुँचा: होर्मुज़ जलडमरूमध्य संघर्ष के बीच 47,600 टन गैस लेकर कांडला बंदरगाह पर सुरक्षित आया

कांडला, गुजरात: पश्चिम एशिया में जारी युद्ध और होर्मुज़ जलडमरूमध्य में भारी तनाव के बावजूद, भारतीय नौसेना की निगरानी में एक और बड़ी कामयाबी हासिल हुई है। भारतीय तिरंगे तले चलने वाले LPG टैंकर जग वसंत ने ईरानी अधिकारियों से सुरक्षित पारगमन की अनुमति प्राप्त कर होर्मुज़ जलडमरूमध्य पार किया। जहाज़ लगभग 47,600 मीट्रिक टन LPG लेकर 26 मार्च 2026 को गुजरात के कांडला बंदरगाह पर पहुँचा।

भारतीय नौसेना के युद्धपोतों ने ओमान की खाड़ी में पूरे 24 घंटे इस LPG जहाज़ को एस्कॉर्ट किया, जिसके बाद जहाज़ ने भारत के पश्चिमी तट की ओर अपनी यात्रा पूरी की।

जग वसंत और पाइन गैस — दो जहाज़, एक मिशन

जग वसंत का संचालन ग्रेट ईस्टर्न शिपिंग द्वारा किया जाता है और यह भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (BPCL) द्वारा चार्टर्ड है। इस जहाज़ की क्षमता लगभग 54,478 मीट्रिक टन है।

जग वसंत ने कुवैत से LPG लोड किया था, जबकि पाइन गैस ने UAE के रुवाइस से अपना माल लिया था। दोनों जहाज़ क्षेत्रीय तनाव के कारण पहले से यहाँ रुके हुए थे।

दोनों जहाज़ों पर क्रमशः 33 और 27 भारतीय नाविक सवार हैं, जिन्होंने इस संकटपूर्ण पारगमन को सफलतापूर्वक पूरा किया।

कैसे पार किया होर्मुज़? — अपनाया गया असाधारण मार्ग

जहाज़ों ने होर्मुज़ जलडमरूमध्य पार करने के लिए एक असाधारण मार्ग — क़ेश्म–लारक चैनल — का इस्तेमाल किया। यह मार्ग ईरानी क्षेत्रीय जल से होकर गुज़रता है, जो सामान्य शांतिकाल में कम प्रयोग किया जाता है।

जहाज़ों ने पारगमन के दौरान अपने AIS ट्रांसपोंडर पर पहचान संकेत बदल दिए — यानी सामान्य लेबल की जगह उन्होंने स्पष्ट रूप से अपनी भारतीय पहचान प्रसारित की। इससे यह संकेत मिलता है कि उन्हें ईरानी अधिकारियों से पूर्व अनुमति मिली थी और वे जानबूझकर अपनी पहचान प्रसारित कर रहे थे ताकि किसी भी टकराव से बचा जा सके।

यह रूटिंग रणनीति उन जहाज़ों के लिए एक वास्तविक कॉरिडोर के रूप में उभरी है जिन्हें ईरानी अधिकारियों से होर्मुज़ पार करने की अनुमति मिली है।

शिपिंग मंत्रालय के विशेष सचिव राजेश कुमार सिन्हा ने बताया कि ईरान ने होर्मुज़ पार करने पर कोई टोल नहीं लिया।

भारतीय नौसेना का ‘ऑपरेशन संकल्प’ — समुद्र में सुरक्षा कवच

भारतीय नौसेना ने जग वसंत और पाइन गैस दोनों जहाज़ों को होर्मुज़ जलडमरूमध्य पार करने में मार्गदर्शन किया। जलडमरूमध्य से निकलने के बाद अरब सागर में इन जहाज़ों को सीधे नौसेना एस्कॉर्ट प्रदान की गई।

भारत की बहु-आयामी प्रतिक्रिया के तहत भारतीय नौसेना का ऑपरेशन संकल्प ओमान की खाड़ी में एस्कॉर्ट मिशन चला रहा है, साथ ही विदेश मंत्रालय राजनयिक स्तर पर सक्रिय है और LPG की वैकल्पिक आपूर्ति के लिए अमेरिका और अर्जेंटीना से स्रोत विविधीकृत किए जा रहे हैं।

संघर्ष की पृष्ठभूमि — होर्मुज़ क्यों बंद हुआ?

मूल रूप से पश्चिम एशिया में युद्ध छिड़ने पर होर्मुज़ जलडमरूमध्य में 28 भारतीय झंडे वाले जहाज़ थे। इनमें से 24 जलडमरूमध्य के पश्चिमी हिस्से में और 4 पूर्वी हिस्से में थे।

28 फरवरी 2026 को संघर्ष शुरू होने के बाद से होर्मुज़ जलडमरूमध्य, जिससे वैश्विक तेल का 20% और LPG का 30% प्रवाह होता है, व्यावसायिक यातायात के लिए लगभग बंद हो गया था।

20 से अधिक देशों ने एक मजबूत संयुक्त बयान जारी कर ईरान की तरफ से होर्मुज़ जलडमरूमध्य की “वास्तविक बंदी” की आलोचना की। इन देशों में UAE, UK, फ्रांस, जर्मनी, इटली, जापान, कनाडा, दक्षिण कोरिया और ऑस्ट्रेलिया शामिल हैं।

भारत की ऊर्जा सुरक्षा पर असर

भारत ऊर्जा आयात पर भारी निर्भर है — देश की 60% LPG माँग आयात से पूरी होती है और इसका अधिकांश भाग होर्मुज़ जलडमरूमध्य से होकर आता है।

LPG का 85–95% और गैस का 30% इसी जलडमरूमध्य से आता है। जबकि कच्चे तेल की आपूर्ति को रूस, पश्चिम अफ्रीका, अमेरिका और लैटिन अमेरिका जैसे वैकल्पिक स्रोतों से आंशिक रूप से पूरा किया गया है, लेकिन औद्योगिक और व्यावसायिक उपयोगकर्ताओं को गैस और LPG की आपूर्ति में कटौती की गई है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राज्यसभा में आश्वस्त किया कि भारत के पास पर्याप्त कच्चे तेल के भंडार हैं और पश्चिम एशिया संघर्ष के दौरान आपूर्ति की मज़बूत व्यवस्था है।

अब तक कितने जहाज़ पहुँचे और कितने फँसे हैं?

LPG वाहक शिवालिक 16 मार्च को गुजरात के मुंद्रा पहुँचा, जबकि एक अन्य LPG टैंकर नंदा देवी अगले दिन कांडला बंदरगाह पर पहुँचा। दोनों LPG वाहक 13 मार्च को चले थे और 14 मार्च की सुबह होर्मुज़ जलडमरूमध्य पार कर लिया था। भारतीय झंडे वाले तेल टैंकर जग लाड़की — जिसमें UAE से 80,886 मीट्रिक टन कच्चा तेल था — 18 मार्च को मुंद्रा पहुँचा।

जग वसंत और पाइन गैस के फारस की खाड़ी से निकल जाने के बाद, अभी भी 20 भारतीय झंडे वाले जहाज़ होर्मुज़ के पश्चिम में फँसे हुए हैं, जिनमें 540 भारतीय नाविक सवार हैं।

कुल मिलाकर, लगभग 500 टैंकर जहाज़ अभी भी खाड़ी के अंदर इंतज़ार कर रहे हैं — जिनमें कच्चे तेल के टैंकर, उत्पाद टैंकर और रासायनिक वाहक शामिल हैं।

भारत की राजनयिक सफलता — ईरान से बातचीत का नतीजा

भारत ईरान के साथ अपने जहाज़ों के लिए सुरक्षित मार्ग सुनिश्चित करने की बातचीत में लगा रहा है। इससे पहले एक टैंकर को ईरानी नौसेना ने रेडियो के ज़रिये संभावित हमला क्षेत्रों से बचाते हुए मार्गदर्शन दिया था। इस पारगमन के साथ ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ईरान के राष्ट्रपति से बात की और शिपिंग मार्गों को खुला रखने की आवश्यकता पर ज़ोर दिया।

जग वसंत और पाइन गैस का पारगमन यह दर्शाता है कि ईरान की होर्मुज़ तक चयनात्मक पहुँच की नीति — गैर-शत्रुतापूर्ण देशों के लिए खुली, विरोधी देशों के जहाज़ों के लिए बंद — किस तरह काम कर रही है। भारत और चीन जैसे कुछ चुनिंदा देशों को ही यह सुरक्षित मार्ग उपलब्ध कराया जा रहा है।

LPG की घरेलू आपूर्ति बनी रहेगी

सरकार ने बंदरगाहों को निर्देश दिया है कि LPG वाहकों को प्राथमिकता दी जाए ताकि माल जल्दी उतारा जा सके। कांडला बंदरगाह ने पहले से ही शिपिंग और बंदरगाह मंत्रालय के निर्देश पर LPG की निरंतर आपूर्ति सुनिश्चित करने के आदेश जारी किए हैं।

भविष्य में छह लदे हुए LPG वाहक और निकलने के लिए तैयार हैं।

संक्षेप में: होर्मुज़ जलडमरूमध्य के संकट के बीच जग वसंत का कांडला पहुँचना भारत की ऊर्जा कूटनीति, नौसैनिक तैयारी और नाविकों के साहस की बड़ी जीत है। यह सिद्ध करता है कि भारत अपनी ऊर्जा सुरक्षा के लिए हर मोर्चे पर सक्रिय और सक्षम है।

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