अमेरिका के न्यू मैक्सिको राज्य की एक जूरी ने फेसबुक और इंस्टाग्राम की पैरेंट कंपनी मेटा को बच्चों की मानसिक सेहत को नुकसान पहुंचाने और बाल यौन शोषण से जुड़े खतरों को छिपाने का दोषी मानते हुए 375 मिलियन डॉलर, यानी लगभग 3100 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया है। अदालत ने माना कि मेटा ने बच्चों की सुरक्षा से जुड़े जोखिमों की जानकारी छिपाई, मुनाफे को पहली प्राथमिकता दिया और उपभोक्ता संरक्षण कानून का हजारों बार उल्लंघन किया।
फैसला कब और कहां हुआ?
अमेरिकी राज्य न्यू मैक्सिको की एक स्टेट ट्रायल कोर्ट में चल रहे इस केस में जूरी ने 24 मार्च 2026 को अपना फैसला सुनाया। करीब छह–सात हफ्तों तक चली सुनवाई के बाद यह निर्णय आया, जिसमें मेटा के सीईओ मार्क जकरबर्ग सहित व्हिसलब्लोअर्स, शिक्षकों और मनोवैज्ञानिकों की गवाही भी सुनी गई।
कितना जुर्माना और क्यों?
जूरी ने मेटा पर 375 मिलियन अमेरिकी डॉलर का जुर्माना तय किया, जो भारतीय मुद्रा में लगभग 3100 करोड़ रुपये बैठता है। अदालत के मुताबिक मेटा ने उपभोक्ता संरक्षण कानून का “हजारों बार” उल्लंघन किया और हर उल्लंघन पर अलग-अलग पेनल्टी जोड़कर यह कुल रकम बनाई गई।
जूरी ने माना कि फेसबुक और इंस्टाग्राम जैसे प्लेटफॉर्म्स पर बच्चों के साथ यौन शोषण और ऑनलाइन दुरुपयोग के गंभीर जोखिम मौजूद थे, लेकिन मेटा ने इन्हें पर्याप्त रूप से न तो रोका और न ही उपयोगकर्ताओं को सही तरह से आगाह किया। फैसले में यह भी कहा गया कि कंपनी ने बच्चों की मानसिक सेहत पर पड़ने वाले नकारात्मक प्रभावों से जुड़े खतरों को छिपाया और उनकी उम्र व अनुभवहीनता का व्यावसायिक लाभ उठाया।
अदालत ने Facebook‑Instagram को बच्चों के लिए कैसे खतरनाक माना?
जूरी ने अपने निर्णय में साफ कहा कि मेटा ने सुरक्षा से अधिक मुनाफे को तरजीह दी और बच्चों की सुरक्षा के बारे में भ्रामक दावे किए।
मुख्य बिंदु इस तरह हैं:
- प्लेटफॉर्म्स पर मौजूद बाल यौन शोषण से जुड़े जोखिमों को कंपनी ने कम करके बताया या छिपाया।
- बच्चों और किशोरों की मानसिक सेहत पर पड़ने वाले संभावित गंभीर असर के बारे में उपयोगकर्ताओं को सटीक और पारदर्शी जानकारी नहीं दी गई।
- मुनाफे के लिए ऐसे एल्गोरिद्म व फीचर्स अपनाए गए, जिनसे बच्चों की स्क्रीन टाइम और निर्भरता बढ़े, जबकि संबंधित खतरों की पूरी जानकारी नहीं दी गई।
- अदालत के अनुसार, यह सब “अनुचित व्यापारिक प्रथाओं” और उपभोक्ता संरक्षण कानून के उल्लंघन की श्रेणी में आता है।
केस की पृष्ठभूमि क्या है?
न्यू मैक्सिको के अटॉर्नी जनरल ने यह मुकदमा इस आधार पर दायर किया था कि मेटा ने वर्षों तक अपने प्लेटफॉर्म्स पर बच्चों से जुड़े जोखिमों को जानते-बूझते नजरअंदाज किया और जनता से छिपाया। अंतरराष्ट्रीय रिपोर्ट्स में भी सामने आया था कि फेसबुक और इंस्टाग्राम नाबालिगों के शोषण व तस्करी के नेटवर्क के लिए “मार्केटप्लेस” की तरह इस्तेमाल हो रहे हैं और कंपनी के भीतर इस संबंध में चेतावनियां दी गई थीं।
अदालत ने इन दलीलों से सहमति जताते हुए माना कि मेटा को अपने प्लेटफॉर्म्स पर बच्चों की सुरक्षा से जुड़ी समस्याओं की जानकारी थी, बावजूद इसके, उसने पर्याप्त कदम नहीं उठाए और न ही यूज़र्स के सामने पूरी सच्चाई रखी। यह फैसला ऐसे समय आया है जब अमेरिका में सोशल मीडिया लत (addiction) और किशोरों की मानसिक सेहत पर पड़ रहे असर को लेकर मेटा समेत कई टेक कंपनियों पर सामूहिक मुकदमे चल रहे हैं।
मेटा का पक्ष और आगे की कानूनी लड़ाई
मेटा ने कोर्ट के इस फैसले से असहमति जताई है और संकेत दिया है कि वह ऊपरी अदालत में अपील करेगी। कंपनी के प्रवक्ता ने आरोप लगाया कि राज्य के अभियोजकों ने रिकॉर्ड और दस्तावेजों को तोड़-मरोड़ कर पेश किया और यह दावा दोहराया कि मेटा किशोरों की सुरक्षा के लिए भारी निवेश कर रही है।
मेटा का कहना है कि वह अपने प्लेटफॉर्म्स को बच्चों के लिए सुरक्षित बनाने के लिए कई नए टूल्स, पेरेंटल कंट्रोल और सेफ्टी फीचर्स पर काम कर रही है, हालांकि अदालत ने कंपनी के इन दावों को पर्याप्त नहीं माना।
टेक कंपनियों पर कड़ा संदेश
विशेषज्ञ इस फैसले को बड़ी टेक कंपनियों के लिए एक सख्त संदेश के रूप में देख रहे हैं कि बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा और मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े मुद्दों पर अब अदालतें पहले से कहीं ज्यादा सख्त रुख अपना रही हैं। न्यू मैक्सिको का यह फैसला अमेरिका में चल रहे उन दर्जनों मुकदमों की पृष्ठभूमि में अहम माना जा रहा है, जिनमें मेटा, गूगल, स्नैपचैट और अन्य सोशल मीडिया कंपनियों पर बच्चों को लत लगाने वाले डिज़ाइन और एल्गोरिद्म का इस्तेमाल करने के आरोप लगे हैं।
मार्केट के स्तर पर देखें तो फैसले के बाद भी मेटा के शेयरों में लगभग 5 प्रतिशत तक की बढ़त दर्ज की गई, जबकि कंपनी का मार्केट वैल्यू करीब 1.5 ट्रिलियन डॉलर के आसपास है, जिससे साफ है कि जुर्माने की यह रकम उसके कुल आकार के मुकाबले सीमित है, लेकिन नियामकीय जोखिम और कानूनी दबाव के लिहाज से मामला बेहद गंभीर है।











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