तेहरान: मध्य पूर्व की धरती पर जारी अमेरिका-इज़राइल और ईरान के बीच के युद्ध में एक बड़ा मोड़ आ गया है। 17 मार्च 2026 की देर रात हुई इज़राइली एयरस्ट्राइक में ईरान के सबसे ताकतवर नेताओं में से एक — सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के सचिव अली लारिजानी — की मौत हो गई। शुरुआत में इज़राइल ने इसकी घोषणा की, और कुछ घंटों बाद ईरान ने खुद इसकी आधिकारिक पुष्टि कर दी।
दुनिया की प्रमुख मीडिया संस्थाओं के अनुसार, ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल ने अर्ध-सरकारी समाचार एजेंसी तस्नीम के माध्यम से जारी अपने बयान में स्वीकार किया कि उनके सचिव अली लारिजानी, उनके पुत्र मुर्तज़ा लारिजानी और कार्यालय प्रमुख अलीरेज़ा बयात इस हमले में शहीद हुए।
कौन थे अली लारिजानी?
अली लारिजानी का जन्म 3 जून 1958 को इराक के नजफ़ में हुआ था। वे ईरान के सबसे प्रभावशाली परिवारों में से एक — लारिजानी परिवार — के सदस्य थे। वर्ष 2009 में प्रतिष्ठित Time पत्रिका ने इस परिवार को “ईरान का केनेडी परिवार” कहा था।
अली लारिजानी — संक्षिप्त परिचय
| पूरा नाम | अली अर्दशीर लारिजानी |
| जन्म तिथि | 3 जून 1958, नजफ़ (इराक) |
| पद | सचिव, सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल, ईरान |
| शिक्षा | B.Sc. गणित व कंप्यूटर विज्ञान (शरीफ़ यूनिवर्सिटी), Ph.D. पश्चिमी दर्शन (तेहरान यूनिवर्सिटी) |
| प्रमुख भूमिकाएँ | ईरान के परमाणु वार्ताकार, संसद अध्यक्ष (10+ वर्ष), IRIB (राज्य प्रसारण) प्रमुख |
| मृत्यु | 17 मार्च 2026, इज़राइली एयरस्ट्राइक, तेहरान |
| मृत्यु के समय आयु | 67 वर्ष |
लारिजानी एक असाधारण व्यक्तित्व थे। उन्होंने जहाँ एक ओर इस्लामी क्रांतिकारी गार्ड्स (IRGC) में सेवा की, वहीं दूसरी ओर जर्मन दार्शनिक इम्मानुएल कांट पर डॉक्टरेट की थीसिस भी लिखी। वे दशकों तक ईरान के परमाणु कार्यक्रम के मुख्य वार्ताकार रहे और 10 वर्षों से अधिक समय तक संसद के अध्यक्ष पद पर रहे।
28 फ़रवरी के बाद से थे ईरान के ‘वास्तविक शासक’
28 फ़रवरी 2026 को अमेरिका-इज़राइल के संयुक्त हमले में सुप्रीम लीडर आयतोल्लाह अली खामेनई, IRGC प्रमुख और रक्षा मंत्री सहित कई शीर्ष ईरानी नेताओं की मौत के बाद, अली लारिजानी ईरान के वास्तविक सत्ता-केंद्र बन गए थे। वे उन गिने-चुने नेताओं में थे जो सैन्य, खुफिया और राजनीतिक मोर्चों को एक साथ संभाल सकते थे।
“ईरान की राष्ट्र और इस्लामी क्रांति की सेवा में जीवन लगाने के बाद, वे अंततः अपनी चिर-अभिलषित ‘शहादत’ को प्राप्त हुए।”
— ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल का आधिकारिक बयान (अर्ध-सरकारी Mehr News के अनुसार)
इज़राइल का दावा — और ईरान की स्वीकृति
इज़राइल के रक्षा मंत्री इज़राइल काट्ज़ ने 17 मार्च को अपने बयान में कहा कि लारिजानी को “समाप्त” कर दिया गया है। इज़राइली सेना (IDF) ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया पोस्ट में लारिजानी को “ईरानी आतंकी शासन का वास्तविक प्रमुख” बताया। इज़राइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने एक वीडियो बयान में कहा:
“हमने आज सुबह अली लारिजानी को खत्म किया — वह रिवोल्यूशनरी गार्ड्स का ‘बॉस’ था। यह गैंगस्टरों का गिरोह है जो वास्तव में ईरान को चलाता है। हम इस शासन को अंदर से कमज़ोर कर रहे हैं।”
— इज़राइली PM बेंजामिन नेतन्याहू (17 मार्च 2026, टेलीविज़न बयान)
इज़राइली PM ने आगे कहा कि इस अभियान का मकसद ईरानी जनता को अपनी सरकार बदलने का अवसर देना है — “यह एक बार में नहीं होगा, आसानी से नहीं होगा, लेकिन अगर हम प्रतिबद्ध रहे तो यह संभव है।”
बसीज कमांडर सोलेइमानी भी मारे गए
उसी रात के हमले में ईरान की बसीज पैरामिलिट्री फ़ोर्स के प्रमुख ब्रिगेडियर जनरल गुलामरेज़ा सोलेइमानी और उनके डिप्टी सैयद करीशी को भी मार गिराया गया। IDF ने बताया कि उन्हें एक अस्थायी तंबू में ढूंढा गया था, जो उनके मुख्यालय से अलग ट्रैकिंग से बचने के लिए बनाया गया था। IRGC ने उनकी मौत की पुष्टि अपने Sepah News पर की। इसके अलावा IDF ने IRGC एयरोस्पेस फ़ोर्स के प्रमुख की हत्या का भी दावा किया।
CNN की रिपोर्ट के अनुसार, इज़राइली सूत्रों ने यह भी बताया कि बसीज नेतृत्व के अधिकांश वरिष्ठ अधिकारी इसी रात के हमले में मारे गए।
प्रमुख घटनाओं की टाइमलाइन
28 फ़रवरी 2026
अमेरिका-इज़राइल संयुक्त हमले में ईरान के सुप्रीम लीडर आयतोल्लाह अली खामेनई, IRGC चीफ़ मोहम्मद पकपुर और रक्षा मंत्री सहित शीर्ष अधिकारी मारे गए। ईरान-इज़राइल युद्ध का पहला दिन।
मार्च 2026 (शुरुआत)
खामेनई की मौत के बाद अली लारिजानी ईरान के तीन सदस्यीय संक्रमण परिषद में केंद्रीय भूमिका में आए। देश की युद्धकालीन रणनीति की बागडोर उनके हाथ में आई।
13 मार्च 2026
अली लारिजानी आखिरी बार तेहरान में क़ुद्स डे मार्च में राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियान के साथ सार्वजनिक रूप से दिखे।
16-17 मार्च 2026 (रात)
इज़राइली हवाई हमले में तेहरान के भीतर अली लारिजानी, उनके बेटे मुर्तज़ा, कार्यालय प्रमुख अलीरेज़ा बयात, बसीज कमांडर सोलेइमानी और उनके डिप्टी मारे गए।
17 मार्च 2026 (दोपहर/शाम)
इज़राइल ने औपचारिक घोषणा की। शाम को ईरान के सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल ने लारिजानी की मौत की पुष्टि की। IRGC ने सोलेइमानी की मौत की पुष्टि की। राष्ट्रपति पेज़ेशकियान ने “गहरे शोक” का इज़हार किया।
रणनीतिक महत्व — ईरान को कितना नुकसान?
CBS News के विश्लेषण के अनुसार, लारिजानी ईरान के उन गिने-चुने नेताओं में थे जो एक साथ युद्ध और राजनीति दोनों को संभाल सकते थे। वे बाहरी चैनलों से बातचीत भी कर सकते थे और आंतरिक सत्ता संरचना में पूरी तरह विश्वसनीय भी थे। उनकी मृत्यु से ईरान की इस दोहरी क्षमता को बड़ा झटका लगा है।
NBC News की रिपोर्ट के अनुसार, खामेनई की मृत्यु के बाद लारिजानी को ही ईरान का “वास्तविक नेता” माना जा रहा था। उनके जाने से नए सुप्रीम लीडर मोज्तबा खामेनई (स्वर्गीय आयतोल्लाह के पुत्र) को एक ऐसे विश्वसनीय सलाहकार की कमी महसूस होगी जो उनके पिता की सत्ता का वास्तविक ज्ञाता था।
ईरान का जवाब — ‘शहादत’ को मिली पुष्टि
सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल ने अपने बयान में लारिजानी की मौत को “शहादत” बताया और कहा कि वे “सेवा के मोर्चे” पर काम आए। ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियान ने कहा: “उनसे मुझे केवल भलाई, दूरदर्शिता और साथ मिला। इस नुकसान की भरपाई करना बेहद मुश्किल है।” IRGC ने अपने बयान में चेतावनी दी कि इस हमले का बदला लिया जाएगा।
इस बीच ईरान के संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाकर गलीबाफ़ ने कहा कि होर्मुज़ जलडमरूमध्य की स्थिति युद्ध से पहले जैसी नहीं रहेगी — जो एक बड़े आर्थिक और वैश्विक तेल आपूर्ति संकट का संकेत है।
अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प का बयान
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने व्हाइट हाउस में पत्रकारों से बात करते हुए इन हमलों की सराहना की। उन्होंने कहा कि मारे गए अधिकारी “हजारों प्रदर्शनकारियों की हत्या के जिम्मेदार” थे। वहीं, अमेरिका के नेशनल काउंटरटेरोरिज़्म सेंटर के निदेशक जो केंट ने इस युद्ध पर असहमति जताते हुए अपने पद से इस्तीफ़ा दे दिया — वे ट्रम्प प्रशासन के पहले वरिष्ठ अधिकारी हैं जिन्होंने ऐसा किया।
विशेषज्ञों का विश्लेषण
दोहा इंस्टीट्यूट फ़ॉर ग्रेजुएट स्टडीज़ के प्रोफ़ेसर मोहम्मद अल-मसरी ने Al Jazeera से बात करते हुए कहा कि अमेरिका और इज़राइल “व्हाक-ए-मोल” खेल रहे हैं — एक नेता को हटाओ, दूसरा आ जाएगा। उनके मुताबिक इससे ईरानी शासन का पतन निकट नहीं है। वहीं IDF प्रवक्ता ने स्पष्ट किया कि यह एक “लंबे अभियान” का हिस्सा है और नए सुप्रीम लीडर मोज्तबा खामेनई भी “सुरक्षित नहीं” हैं।












प्रातिक्रिया दे