मध्य पूर्व में भड़क चुके Israel US Iran War के बीच ईरान ने पहली बार इजरायल पर अपनी उन्नत ‘Sejjil’ मध्यम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल दागने का दावा किया है। इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने बयान जारी कर कहा कि 2,000 किलोमीटर रेंज वाली सेज्जिल मिसाइलें इजरायल के सैन्य, खुफिया और आर्थिक ठिकानों को निशाना बनाने के लिए इस्तेमाल की गईं, जिसे तेहरान अपनी अब तक की “सबसे रणनीतिक जवाबी कार्रवाई” बता रहा है।
हमले का पैमाना: सैन्य व नागरिक ठिकाने निशाने पर
IRGC के मुताबिक, ताजा हमले की लहर में इजरायल के भीतर कई अहम लक्ष्य जैसे खुफिया एजेंसी मोसाद से जुड़े ठिकाने, एयरबेस और वित्तीय संस्थान निशाने पर थे। रिपोर्टों के अनुसार, बेर्शेबा स्थित Soroka Medical Center, तेल अवीव स्टॉक एक्सचेंज और आवासीय इमारतों के आसपास के इलाकों में भी मिसाइल गिरने की खबरें आईं, हालांकि इजरायल का दावा है कि अधिकतर मिसाइलें उसके रक्षा तंत्र ने इंटरसेप्ट कर लीं और नुकसान सीमित रहा।
इजरायली वायु रक्षा प्रणाली आयरन डोम, डेविड्स स्लिंग और एरो मिसाइल डिफेंस लगातार सक्रिय रखे गए, लेकिन टीवी रिपोर्टों में कहा गया कि सेज्जिल जैसी तेज व लंबी दूरी की मिसाइलों के खिलाफ अमेरिकी और इजरायली रक्षा तंत्र को भारी दबाव झेलना पड़ा। क्षेत्रीय मीडिया के मुताबिक, हमलों के दौरान कई इलाकों में दर्जनों लोग घायल हुए और नागरिकों को लंबे समय तक बंकरों व शेल्टरों में रहना पड़ा।
IRGC का तेवर: “इजरायली रक्षा तंत्र चकनाचूर”
ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड ने अपने आधिकारिक बयान में कहा कि लंबी दूरी की सेज्जिल मिसाइलों के इस्तेमाल के साथ ही “कब्जे वाले क्षेत्रों का आकाश अब ईरानी मिसाइलों और ड्रोन के लिए खुल चुका है।” बयान में दावा किया गया कि हमलों की लहर “प्रभावी और लगातार” रहेगी और इजरायल के सैन्य, खुफिया और वायुसेना प्रतिष्ठानों को निशाना बनाना जारी रहेगा।
IRGC ने इजरायल के नागरिकों को चेतावनी भरे लहजे में कहा कि “लाल अलर्ट सायरन की आवाज़ एक पल के लिए भी नहीं रुकेगी” और या तो वे “शेल्टरों में रहने की धीमी मौत” चुनें या “कब्जे वाली जमीन छोड़ कर भाग जाएं।” इस बयान से साफ है कि तेहरान इस हमले को सिर्फ सैन्य कार्रवाई नहीं बल्कि मनोवैज्ञानिक दबाव बनाने की कोशिश के रूप में भी देख रहा है।
क्या है Sejjil Ballistic Missile?
सेज्जिल ईरान की घरेलू तकनीक से विकसित दो-चरणीय, ठोस ईंधन (solid-fuel) वाली मध्यम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल (MRBM) है, जिसकी अधिकतम रेंज लगभग 2,000 किलोमीटर बताई जाती है। इस मिसाइल की लंबाई करीब 18 मीटर, व्यास 1.25 मीटर और लॉन्च वज़न करीब 23,600 किलोग्राम है, जबकि यह लगभग 650 से 700 किलोग्राम तक का वारहेड ले जाने में सक्षम मानी जाती है।
ठोस ईंधन होने की वजह से सेज्जिल को पहले से फ्यूल भरकर लंबे समय तक स्टोर किया जा सकता है और अल्प सूचना पर तेजी से लॉन्च किया जा सकता है, जिससे दुश्मन के लिए इसे प्री-एम्प्टिव स्ट्राइक में नष्ट करना मुश्किल हो जाता है। विश्लेषकों के मुताबिक, इसकी मैन्युवरेबल फ्लाइट प्रोफाइल और उच्च गति के कारण पारंपरिक मिसाइल डिफेंस सिस्टम के लिए इसे इंटरसेप्ट करना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
पहली बार युद्ध में इस्तेमाल: रणनीतिक संदेश क्या है?
सेज्जिल मिसाइल का विकास 1990 के दशक के अंत से माना जाता है और इसे पहली बार 2008 में टेस्ट किया गया था, जबकि अंतिम बार इसका परीक्षण 2012 के आसपास दर्ज किया गया था। लंबे समय तक यह मिसाइल सिर्फ सैन्य परेडों और अभ्यासों में ही दिखाई देती रही, लेकिन इजरायल पर सीधे हमले में इसका पहली बार इस्तेमाल तेहरान की डिटरेंस रणनीति में बड़े बदलाव की ओर इशारा करता है।
यूरोपीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, सेज्जिल की तैनाती को ईरान द्वारा “प्रमुख संपत्ति” के वास्तविक युद्धक्षेत्र में उपयोग के रूप में देखा जा रहा है, जो यह संदेश देता है कि तेहरान अब केवल रॉकेट या कम दूरी की मिसाइलों पर निर्भर नहीं बल्कि क्षेत्रीय शक्ति-संतुलन को चुनौती देने वाले स्ट्रैटजिक हथियारों को भी मैदान में उतारने को तैयार है।
इजरायल की प्रतिक्रिया: भूमिगत ठिकानों पर हमलों की तैयारी
रिपोर्टों के मुताबिक, इजरायल ने इस हमले के जवाब में ईरान के मिसाइल ढांचे को लंबे समय तक कमजोर करने की रणनीति पर काम शुरू कर दिया है। सैन्य सूत्रों के हवाले से खबर है कि इजरायल अपनी “दूसरे चरण” की योजना के तहत ईरान के उन भूमिगत ठिकानों पर हवाई हमले तेज कर रहा है, जहां बैलिस्टिक मिसाइलें और उनसे जुड़ा उपकरण गहराई में छुपाकर रखा गया है।
इजरायली सेना का अनुमान है कि युद्ध शुरू होने से पहले ईरान के पास 2,500 से 6,000 के बीच विभिन्न प्रकार की मिसाइलें थीं, जिनमें से एक हिस्सा अब तक के हमलों में इस्तेमाल हो चुका है। विश्लेषकों का मानना है कि सेज्जिल जैसी लंबी दूरी की मिसाइलों का कुछ हिस्सा यदि सुरक्षित रहता है, तो यह आने वाले हफ्तों में संघर्ष की दिशा और तीव्रता तय कर सकता है।
अमेरिका की भूमिका और चिंताएं
अमेरिका इस युद्ध में इजरायल का प्रमुख सैन्य व राजनीतिक सहयोगी बना हुआ है और उसकी मिसाइल डिफेंस क्षमताएं भी क्षेत्र में तैनात हैं। पश्चिमी मीडिया रिपोर्टों में कहा गया कि सेज्जिल जैसे तेज, ठोस ईंधन वाले हथियारों का प्रयोग अमेरिकी व इजरायली संयुक्त रक्षा तंत्र के लिए नई चुनौती है, क्योंकि इनके लॉन्च की तैयारी का समय कम होता है और इन्हें समय रहते ट्रैक व इंटरसेप्ट करना कठिन हो सकता है।
अमेरिकी अधिकारी सार्वजनिक तौर पर यह दावा कर चुके हैं कि लगातार हमलों के बावजूद ईरान की सैन्य क्षमता, खासकर मिसाइल भंडार, को काफी हद तक कमजोर कर दिया गया है, हालांकि ईरानी कमांडरों का कहना है कि उनकी नौसेना और मिसाइल फोर्स अब भी पूरे क्षेत्र में जवाबी कार्रवाई की पूरी क्षमता रखती हैं।
क्षेत्रीय और वैश्विक असर
खाड़ी क्षेत्र में ईरान द्वारा ऊर्जा अवसंरचना और ईंधन टैंकरों पर हमलों से पहले ही तेल बाज़ारों में अस्थिरता बढ़ चुकी है, और अब इजरायल के भीतर लंबी दूरी की सेज्जिल मिसाइलों के प्रयोग से वैश्विक अर्थव्यवस्था पर दबाव और बढ़ सकता है। सैन्य विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस तरह के स्ट्रैटजिक हथियारों का इस्तेमाल बढ़ता है तो यह सिर्फ इजरायल–ईरान तक सीमित नहीं रहेगा बल्कि पूरे पश्चिम एशिया को व्यापक युद्ध की ओर धकेल सकता है।
कूटनीतिक स्तर पर संयुक्त राष्ट्र, यूरोपीय संघ और कई क्षेत्रीय संगठन युद्धविराम और तनाव कम करने की अपील कर रहे हैं, लेकिन जमीन पर हो रही मिसाइल बरसात और कड़े बयानों से संकेत मिलता है कि फिलहाल किसी त्वरित राजनीतिक समाधान की संभावना कम नज़र आ रही है।
FAQ सेक्शन
1. Sejjil Ballistic Missile क्या है?
Ans: सेज्जिल ईरान द्वारा विकसित दो-चरणीय, ठोस ईंधन आधारित मध्यम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल है, जिसकी रेंज लगभग 2,000 किलोमीटर और पेलोड क्षमता लगभग 700 किलोग्राम मानी जाती है।
2. ईरान ने पहली बार Sejjil मिसाइल कब इजरायल पर दागी?
Ans: मीडिया रिपोर्टों और IRGC के बयानों के अनुसार, इजरायल के साथ चल रहे मौजूदा युद्ध के दौरान सेज्जिल मिसाइल का पहली बार वास्तविक युद्ध में इस्तेमाल किया गया और इजरायली ठिकानों पर इसे दागा गया।
3. Sejjil मिसाइल से Israel US Iran War पर क्या असर पड़ेगा?
Ans: विशेषज्ञों का मानना है कि सेज्जिल जैसे लंबी दूरी और तेज़ प्रतिक्रिया वाले हथियारों का युद्ध में उतरना संघर्ष को और खतरनाक व अनिश्चित बना देगा, क्योंकि यह इजरायल व उसके सहयोगियों के लिए रणनीतिक और मनोवैज्ञानिक दोनों स्तरों पर बड़ी चुनौती है।











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