जबलपुर क्रूज हादसा: बार्गी डैम में 9 की मौत, बेटे को सीने से चिपकाए मां की मिली लाश

जबलपुर बार्गी डैम क्रूज हादसे में बचाव अभियान के दौरान NDRF की टीम नाव से शव निकालते हुए

Jabalpur cruise accident: मध्यप्रदेश के जबलपुर क्रूज हादसा ने आम आदमी के साथ साथ बचाव कर्मियों के दिल को भी दहला दिया है। जिले में स्थित बार्गी डैम पर गुरुवार शाम एक दिल दहलाने वाला हादसा हुआ। एमपी टूरिज्म द्वारा संचालित एक पर्यटक क्रूज नाव अचानक आए भीषण तूफान की चपेट में आकर पलट गई। इस दुर्घटना में अब तक 9 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, 28 यात्रियों को सुरक्षित बाहर निकाला गया है, और 4 लोग अभी भी लापता हैं। बचाव दल राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (NDRF), राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (SDRF) तथा सेना के साथ मिलकर तलाश अभियान जारी रखे हुए है।

बेटे को सीने से चिपकाए मां की मिली लाश

इस हादसे की सबसे मार्मिक और रुला देने वाली तस्वीर सामने आई शुक्रवार सुबह, जब गोताखोरों ने एक माँ और उसके 4 वर्षीय बेटे की लाश पानी से बाहर निकाली। माँ ने मरते दम तक अपने बच्चे को छाती से लगाए रखा – मौत भी उस ममता को नहीं तोड़ पाई।

पीड़ित परिवार दिल्ली का निवासी था और पर्यटन के उद्देश्य से जबलपुर आया था। परिवार में चार सदस्य थे – पिता, माँ मरीना, एक बेटी और 4 वर्षीय बेटा त्रिशन। जब क्रूज पलटी, तो पिता और बेटी किसी तरह बच निकलने में सफल रहे, लेकिन माँ और बेटा नहीं बच सके। शुक्रवार सुबह जब बचावकर्मियों ने डूबी हुई क्रूज के मलबे से लाश बाहर निकाली, तो वे दृश्य देखकर स्तब्ध रह गए। माँ ने बच्चे को इतनी कसकर पकड़ रखा था कि बचाव दल को पहले उन्हें अलग करना पड़ा। इस मार्मिक दृश्य का वीडियो सामने आने के बाद पूरे देश में शोक की लहर दौड़ गई।

हादसा कैसे हुआ?

यह दुर्घटना 30 अप्रैल 2026 को शाम लगभग 5 बजे हुई, जब क्रूज बार्गी डैम रिजर्वायर में किनारे से करीब 300 मीटर की दूरी पर थी। अचानक भीषण तूफान आया, जिसमें हवा की रफ्तार 40 से 74 किलोमीटर प्रति घंटा तक पहुँच गई और तेज बारिश भी होने लगी। इसी तूफान की चपेट में आकर नाव असंतुलित हो गई और कुछ ही सेकंड में पानी में डूब गई।

“तेज हवा थी। हमने नाव संचालक को किनारे की ओर आने को कहा, लेकिन उसने ध्यान नहीं दिया। नाव दूसरी तरफ जाने लगी और बीच डैम में ही पलट गई। जिन्होंने लाइफ जैकेट पहना था, वे कूद गए।” — प्रत्यक्षदर्शी सम्राट

क्रूज के पायलट महेश पटेल, जिनके पास दस वर्षों से अधिक का अनुभव है, ने बताया कि तूफान इतना अचानक और तेज था कि जहाज को नियंत्रित करने का मौका ही नहीं मिला। वे स्वयं जीवित बच गए। आधिकारिक रिकॉर्ड के अनुसार क्रूज में 29 यात्रियों के टिकट जारी किए गए थे, लेकिन जमीनी रिपोर्ट्स के अनुसार उस दिन 43 से 47 यात्री सवार थे। इस अनियमितता की जाँच की जा रही है।

सुरक्षा में बड़ी चूक – लाइफ जैकेट नहीं!

इस हादसे में सुरक्षा मानकों की घोर अनदेखी का मामला भी सामने आया है। हादसे से ठीक पहले का एक वीडियो वायरल हुआ है जिसमें यात्री क्रूज पर मजे कर रहे हैं लेकिन किसी के भी शरीर पर लाइफ जैकेट नहीं है। एक जीवित बची यात्री ने बताया कि उन्हें कोई लाइफ जैकेट नहीं दी गई थी। वहीं, राज्य के पर्यटन मंत्री का दावा है कि यात्री लाइफ जैकेट पहने हुए थे — इस विरोधाभास की जाँच जारी है। उल्लेखनीय है कि पायलट महेश पटेल ने लाइफ जैकेट पहनी थी और वे बच गए।

बचाव अभियान – सेना, NDRF, हेलीकॉप्टर सब मैदान में

हादसे के बाद से बचाव अभियान युद्धस्तर पर जारी है। SDRF और NDRF की टीमों के अलावा सेना भी मोर्चे पर है। हैदराबाद से हेलीकॉप्टर हवाई निगरानी के लिए मंगाया गया और कोलकाता से एक विशेष अर्धसैनिक बल की टीम भी घटनास्थल पर पहुँची। डूबी हुई क्रूज को बाहर निकालने के लिए हाइड्रोलिक मशीनें और एक्सकेवेटर का उपयोग किया जा रहा है। नाव लगभग 20 फुट गहरे पानी में फँसी हुई है। अब तक 17 घायलों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है जहाँ उनका इलाज चल रहा है।

एक और परिवार की दर्दनाक कहानी

खमरिया ऑर्डिनेंस फैक्ट्री के कर्मचारी कमराज आर्य अपने 15 परिजनों के साथ इस यात्रा पर निकले थे। बुजुर्ग माता-पिता किनारे पर ही रुक गए थे, लेकिन कमराज, उनकी पत्नी और बच्चे नाव पर चढ़े। एक बेटे को बचा लिया गया, लेकिन कमराज और उनकी पत्नी अभी भी लापता हैं। ऐसे कई परिवार हैं जो किनारे पर खड़े अपनों का इंतजार कर रहे हैं।

सरकार की प्रतिक्रिया – जाँच के आदेश, मुआवजे का ऐलान

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने हादसे का संज्ञान लेते हुए तुरंत पर्यटन मंत्री धर्मेंद्र भावसिंह लोधी और लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह को घटनास्थल रवाना किया। सीएम ने स्वयं जबलपुर पहुँचकर पीड़ित परिवारों से मुलाकात की और मृतकों के परिजनों को 4-4 लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की। साथ ही उन्होंने हादसे की उच्चस्तरीय जाँच के आदेश दिए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी दुख व्यक्त करते हुए PMNRF से मृतकों के परिजनों को 2-2 लाख रुपये और घायलों को 50,000 रुपये की अनुग्रह राशि देने की घोषणा की।

“यह हादसा मौसमी चक्रवात के कारण हुआ है। हमारे मंत्री, NDRF, SDRF के जवान और सभी अधिकारी मौके पर हैं। 9 शव मिले हैं, 29 लोगों को बचाया गया है। हम इस हादसे की जाँच करेंगे।” — मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव

पर्यटन मंत्री धर्मेंद्र लोधी उस समय आलोचना के घेरे में आ गए जब प्रेस वार्ता में वे नर्मदा के बैकवाटर में नाव संचालन के स्थानीय नियमों से अनजान नजर आए। इस पूरी त्रासदी ने एमपी टूरिज्म के प्रबंधन पर बड़े सवाल खड़े किए हैं।

अब भी जारी है तलाश

शुक्रवार शाम तक बचाव और तलाश अभियान जारी था। प्रशासन ने पुष्टि की है कि अभी भी 4 लोग लापता हैं, जिनमें बच्चे भी शामिल हो सकते हैं। जबलपुर कलेक्टर राघवेंद्र सिंह ने कहा कि अभियान तब तक जारी रहेगा जब तक सभी लापता लोगों का पता न लग जाए। इस हादसे ने एक बार फिर सरकारी पर्यटन सुविधाओं में सुरक्षा व्यवस्था और निगरानी तंत्र पर गंभीर सवाल उठाए हैं।

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