राज्यसभा चुनाव 2026: बिहार की पांचों सीटों पर NDA की जीत, महागठबंधन की करारी हार

राज्यसभा चुनाव 2026 में बिहार की पांचों सीटें जीतने के बाद NDA नेता नीतीश कुमार, उपेंद्र कुशवाहा और अन्य विजयी प्रत्याशी

नई दिल्ली: राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) ने सोमवार, 16 मार्च 2026 को बिहार से राज्यसभा की पांचों सीटों पर ऐतिहासिक क्लीन स्वीप दर्ज करते हुए विपक्षी महागठबंधन को करारी शिकस्त दी। बिहार विधानसभा में हुई मतगणना में NDA के सभी पांच प्रत्याशियों ने निर्धारित कोटे से अधिक वोट हासिल किए और सुगमता से उच्च सदन में अपनी जगह पक्की कर ली।

चुनाव की पृष्ठभूमि

देशभर में 37 राज्यसभा सीटों के लिए 16 मार्च को मतदान हुआ, जिनमें से 26 प्रत्याशी पहले ही नामांकन वापसी की अंतिम तिथि के बाद निर्विरोध निर्वाचित घोषित हो चुके थे। शेष 11 सीटों पर मतदान बिहार (5 सीटें), हरियाणा (2 सीटें) और ओडिशा (4 सीटें) में सम्पन्न हुआ। बिहार में पांच सीटों के लिए कुल छह प्रत्याशी मैदान में थे — NDA के पांच और महागठबंधन का एक उम्मीदवार।

बिहार की 243 सदस्यीय विधानसभा में राज्यसभा की एक सीट जीतने के लिए कम से कम 41 प्रथम वरीयता वोटों की आवश्यकता थी। NDA के पास विधानसभा में स्पष्ट बहुमत है — भाजपा के 89, JDU के 85, लोजपा (राम विलास) के 19, हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (सेकुलर) के 5 और राष्ट्रीय लोक मोर्चा के 4 विधायक हैं।

विजयी प्रत्याशी और वोट प्राप्ति

मतगणना में NDA के सभी पांच उम्मीदवारों को निम्नलिखित प्रथम वरीयता वोट प्राप्त हुए:

प्रत्याशीदलप्राप्त वोट
नीतीश कुमारजनता दल (यूनाइटेड)44 (प्रथम वरीयता)
नितिन नबिनभारतीय जनता पार्टी44 (प्रथम वरीयता)
रामनाथ ठाकुरजनता दल (यूनाइटेड)42 (प्रथम वरीयता)
उपेंद्र कुशवाहाराष्ट्रीय लोक मोर्चा42 (प्रथम वरीयता)
शिवेश रामभारतीय जनता पार्टी30 + द्वितीय वरीयता

महागठबंधन में दरार, चार विधायक रहे अनुपस्थित

महागठबंधन की ओर से अमरेंद्र सिंह धारी एकमात्र उम्मीदवार थे, लेकिन विपक्षी गठबंधन को भारी आंतरिक बिखराव का सामना करना पड़ा। RJD विधायक फैसल रहमान और कांग्रेस के तीन विधायक — मनोज बिश्वास, सुरेंद्र कुशवाहा तथा मनोहर प्रसाद सिंह — मतदान के दौरान अनुपस्थित रहे। RJD विधायक फैसल रहमान ने बाद में कहा कि उनकी माता की तबियत बिगड़ने के कारण वे मतदान नहीं कर सके।

हालांकि AIMIM के सभी पांच विधायकों और बसपा के अकेले विधायक सतीश यादव ने महागठबंधन के उम्मीदवार के पक्ष में मत डाला, फिर भी गठबंधन की हार सुनिश्चित थी। तेजस्वी यादव ने मतगणना के दौरान पुनर्मतगणना की मांग उठाई और कहा कि उन्हें 37 वोट मिले जबकि भाजपा के शिवेश राम को केवल 30 वोट मिले, परंतु द्वितीय वरीयता वोटों के आधार पर शिवेश राम की जीत अंततः पक्की हो गई।

नेताओं की प्रतिक्रियाएं

बिहार भाजपा अध्यक्ष संजय सारोगी ने जीत पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा, “NDA के सभी पांच प्रत्याशी विजयी हुए। हमें हमेशा जीत का पूरा विश्वास था।” बिहार के उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा ने कहा कि इस चुनाव ने RJD और कांग्रेस का असली चेहरा उजागर कर दिया है। JDU के प्रदेश अध्यक्ष उमेश सिंह कुशवाहा ने कहा कि NDA की जीत 101% तय थी और विपक्ष चाहे कोई भी हथकंडा अपना ले, परिणाम NDA के पक्ष में ही आना था।

बिहार के मंत्री अशोक चौधरी ने इसे विचारधाराओं की जीत बताते हुए तेजस्वी यादव को अपनी पार्टी में सुधार पर ध्यान देने की नसीहत दी।

NDA के लिए राजनीतिक महत्व

इस चुनाव के साथ मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पहली बार राज्यसभा में प्रवेश करेंगे। यह चुनाव वरिष्ठ नेताओं के सेवानिवृत्त होने के कारण जरूरी था — JDU के हरिवंश नारायण सिंह और रामनाथ ठाकुर 9 अप्रैल 2026 को सेवानिवृत्त होने वाले हैं। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबिन का उच्च सदन पहुंचना भी पार्टी के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है।

मतदान के दौरान NDA के 202 विधायकों ने अपना वोट डाला, जबकि महागठबंधन की तरफ से 37 विधायकों ने मतदान किया। NDA का यह क्लीन स्वीप बिहार में गठबंधन की मजबूती और विपक्षी खेमे की कमजोरी को उजागर करता है।

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