नासा ने अपने स्पेस लॉन्च सिस्टम (SLS) रॉकेट और ओरियन अंतरिक्ष यान को अप्रैल 2026 में चार अंतरिक्ष यात्रियों के साथ आर्टेमिस‑II (Artemis II) मिशन पर भेजने की सशर्त मंजूरी दे दी है। यह 50 से अधिक वर्षों बाद पहली बार होगा जब इंसान पृथ्वी की कक्षा से बाहर निकल कर चांद के आसपास की उड़ान भरेंगे। हाल में ईंधन रिसाव और हीलियम फ्लो समस्या जैसी तकनीकी दिक्कतों की मरम्मत के बाद दो दिन की फ़्लाइट रेडीनेस रिव्यू के आधार पर यह फैसला लिया गया। लगभग 10 दिन का यह परीक्षण मिशन चांद की परिक्रमा करते हुए वापसी पर केंद्रित होगा और भविष्य की चंद्र‑अवतरण उड़ानों के लिए सिस्टम व सुरक्षा मानकों की बारीक जाँच करेगा।
नासा का आर्टेमिस-II मिशन का अवलोकन
आर्टेमिस‑II (Artemis II) कार्यक्रम नासा के दीर्घकालिक आर्टेमिस अभियान की पहली मानवयुक्त उड़ान है, जिसका लक्ष्य दशक के अंत तक चांद पर सतत मानव उपस्थिति स्थापित करना है। यह मिशन लगभग 10 दिनों तक चलेगा, जिसमें चार सदस्यीय दल ओरियन अंतरिक्ष यान से चांद के पीछे की ओर से फ्लाई‑बाय कर पृथ्वी पर लौटेगा। यह उड़ान तथाकथित “फ़्री‑रिटर्न” ट्रैजेक्टरी पर होगी, यानी प्रमुख इंजन बर्न पूरा होने के बाद अंतरिक्ष यान स्वाभाविक रूप से चांद के चारों ओर घूम कर पृथ्वी की ओर लौटने वाले मार्ग पर आ जाएगा।
लॉन्च समय और प्रक्षेपण विंडो
नासा ने घोषणा की है कि एसएलएस रॉकेट को फ्लोरिडा के केनेडी स्पेस सेंटर में हैंगर से निकाल कर प्रक्षेपण मंच पर ले जाया जाएगा और 1 अप्रैल के आसपास पहली लॉन्च कोशिश की जा सकती है। एजेंसी के पास अप्रैल की शुरुआत में केवल कुछ दिन की संकीर्ण प्रक्षेपण विंडो है, जिसके बाद अगली कोशिश के लिए 30 अप्रैल से शुरुआती मई तक इंतजार करना होगा। प्रक्षेपण से पहले अंतिम तैयारियों और मौसम की स्थिति के आधार पर सटीक तारीख और समय तय किए जाएंगे।
रॉकेट और अंतरिक्ष यान की तकनीकी स्थिति
आर्टेमिस‑II (Artemis II) के लिए उपयोग होने वाला एसएलएस रॉकेट लगभग 322 फुट (98 मीटर) ऊंचा है और इसे अब तक का सबसे शक्तिशाली रॉकेट माना जाता है, जो ओरियन कैप्सूल को पृथ्वी की कक्षा से बाहर भेजने में सक्षम है। जनवरी‑फरवरी के दौरान पैड पर ईंधन भरने के परीक्षण के समय हाइड्रोजन ईंधन लीक और ऊपरी स्टेज में हीलियम फ्लो की समस्या सामने आई थी। नासा ने पहले हाइड्रोजन लीक को लॉन्च पैड पर ही ठीक किया, लेकिन हीलियम से जुड़ी दिक्कत के लिए रॉकेट को वापस व्हीकल असेंबली बिल्डिंग में ले जाकर मरम्मत करनी पड़ी, जिसके कारण उड़ान को शुरुआती 2026 से टाल कर अप्रैल कर दिया गया।
चार सदस्यीय दल: कौन होंगे चांद की ओर रवाना?
आर्टेमिस‑II मिशन पर नासा के तीन और कनाडाई अंतरिक्ष एजेंसी (सीएसए) के एक अंतरिक्ष यात्री सहित चार सदस्यीय दल उड़ान भरेगा। इस दल में नासा के रीड वाइस्मैन, विक्टर ग्लोवर और क्रिस्टिना कुक के साथ सीएसए के जेरेमी हैनसन शामिल हैं, जो ओरियन क्रू सरवाइवल सिस्टम सूट पहन कर उड़ान भरेंगे। यह पहली बार होगा जब कोई गैर‑अमेरिकी अंतरिक्ष यात्री मानवयुक्त चंद्र‑परिक्रमा मिशन का हिस्सा बनेगा, जो अंतरराष्ट्रीय सहयोग के लिहाज से महत्वपूर्ण प्रतीकात्मक संदेश देता है।
10 दिनी उड़ान की रूपरेखा
नासा ने आर्टेमिस‑II (Artemis II) मिशन के लिए विस्तृत “डेली एजेंडा” जारी किया है, जिसमें हर दिन की प्राथमिक गतिविधियों का खाका दिया गया है। उड़ान भरने के लगभग आठ मिनट बाद ही ओरियन कैप्सूल पृथ्वी की निचली कक्षा में पहुँच जाएगा और लगभग 10 दिन की व्यस्त दिनचर्या शुरू हो जाएगी।
फ्लाइट डे‑1: सिस्टम चेक‑आउट और हाई‑अर्थ ऑर्बिट
लॉन्च के बाद एसएलएस के मुख्य इंजन बंद होने पर ओरियन और इंटिरिम क्रायोजेनिक प्रोपल्शन स्टेज (आईसीपीएस) बाकी रॉकेट से अलग हो जाएंगे। लगभग 49 मिनट बाद आईसीपीएस का इंजन चलाकर कक्षा के सबसे निचले बिंदु (पेरिजी) को 100 मील ऊंचाई तक बढ़ाया जाएगा और एक घंटे बाद दूसरी बर्न के जरिए ओरियन को उच्च पृथ्वी कक्षा में भेजा जाएगा। इस दौरान चालक दल लगभग 23 घंटे तक ओरियन के जीवन‑समर्थन सिस्टम, पीने के पानी के डिस्पेंसर, टॉयलेट और कार्बन डाइऑक्साइड हटाने की व्यवस्था जैसी प्रणालियों की गहन जाँच करेगा और कैप्सूल के अंदरूनी सेट‑अप को 10 दिन के निवास के अनुकूल बनाएगा।
फ्लाइट डे‑2: ट्रांस‑लूनर इंजेक्शन (टीएलआई)
दूसरे दिन दल के सदस्य ओरियन के अंदर एक्सरसाइज़ उपकरण और लाइफ‑सपोर्ट सिस्टम की अतिरिक्त जाँच करेंगे, ताकि पृथ्वी की कक्षा छोड़ने से पहले सभी सिस्टम अपेक्षित रूप से काम कर रहे हों। दिन का मुख्य आकर्षण ट्रांस‑लूनर इंजेक्शन बर्न होगा, जिसे यूरोपीय सर्विस मॉड्यूल पर लगे ओरियन के मुख्य इंजन से अंजाम दिया जाएगा और यही बर्न अंतरिक्ष यान को चांद की ओर तथा 10वें दिन पृथ्वी वापसी के रास्ते पर सेट कर देगा। इस बर्न के बाद दल को अपेक्षाकृत हल्का कार्यक्रम मिलेगा, ताकि वे गहरे अंतरिक्ष के वातावरण के अनुकूल हो सकें और धरती के साथ पहली स्पेस‑टू‑ग्राउंड वीडियो बातचीत कर सकें।
फ्लाइट डे‑3 से 5: ट्रैजेक्टरी सुधार और सूट परीक्षण
तीसरे दिन पहला आउटबाउंड ट्रैजेक्टरी करेक्शन बर्न किया जाएगा ताकि ओरियन चांद की सही राह पर बना रहे, साथ ही CPR और मेडिकल किट सहित चिकित्सीय प्रक्रियाओं के कई प्रदर्शन किए जाएंगे। चौथे दिन दूसरा ट्रैजेक्टरी करेक्शन किया जाएगा और दल के सदस्यों को उन भौगोलिक लक्ष्यों की समीक्षा का समय मिलेगा, जिनकी वे चांद के पास पहुँच कर उच्च‑रिज़ॉल्यूशन तस्वीरें लेंगे। पाँचवें दिन ओरियन चंद्र गुरुत्व क्षेत्र में प्रवेश करेगा और दल अपने नारंगी रंग के क्रू सरवाइवल सूट की फिटिंग, प्रैशराइजेशन, सीट इंस्टॉलेशन और सूट पहन कर खाने‑पीने की क्षमता जैसे पहलुओं का विस्तार से परीक्षण करेगा।
फ्लाइट डे‑6: चांद के सबसे नजदीक
छठे दिन आर्टेमिस‑II (Artemis II) दल चांद की सतह से लगभग 4,000 से 6,000 मील की दूरी तक करीब पहुँचते हुए उसकी दूर की ओर (फार साइड) से फ्लाई‑बाय करेगा, इसी दौरान वे पृथ्वी से भी सबसे दूर होंगे। मिशन की लॉन्च तिथि और समय के आधार पर यह उड़ान 1970 की अपोलो‑13 टीम द्वारा बनाए गए लगभग 248,655 मील की दूरी के रिकॉर्ड को भी पार कर सकती है। इस दिन का अधिकांश समय चांद की सतह की तस्वीरें और वीडियो लेने, विभिन्न प्रकाश स्थितियों में भू‑आकृतिक विशेषताओं का अवलोकन करने और संचार के अस्थायी रूप से बाधित होने (चांद के पीछे की ओर जाते समय) के बावजूद अपने अनुभवों को रिकॉर्ड करने में व्यतीत होगा।
वापसी के दिन: रेडिएशन सुरक्षा और री‑एंट्री
सातवें दिन ओरियन चंद्र गुरुत्व क्षेत्र से बाहर निकलते हुए पृथ्वी की ओर वापसी की राह पर होगा और पहला रिटर्न ट्रैजेक्टरी करेक्शन बर्न किया जाएगा, जबकि दिन का बड़ा हिस्सा दल के लिए विश्राम का होगा। आठवें दिन दल ओरियन के अंदर मौजूद सामग्रियों का उपयोग कर उच्च सौर विकिरण की स्थिति में अस्थायी शेल्टर बनाने की क्षमता का परीक्षण करेगा और मैनुअल पायलटिंग मोड में अंतरिक्ष यान को अलग‑अलग एटिट्यूड में नियंत्रित करने के अभ्यास करेगा। नौवें दिन री‑एंट्री और स्प्लैशडाउन की तैयारियों, कचरा प्रबंधन सिस्टम के परीक्षण और ऑर्थोस्टैटिक इंटॉलरेंस (गुरुत्वाकर्षण में वापसी पर चक्कर/बेहोशी) से निपटने के लिए विशेष परिधान की फिटिंग जाँच जैसी गतिविधियाँ होंगी, जबकि दसवें दिन अंतिम ट्रैजेक्टरी करेक्शन के बाद ओरियन का क्रू मॉड्यूल सर्विस मॉड्यूल से अलग होकर लगभग 3,000 फ़ारेनहाइट तापमान झेलते हुए पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश करेगा और अंततः पैसिफिक महासागर में पैराशूट के सहारे 17 मील प्रति घंटे के आसपास की गति से स्प्लैशडाउन करेगा।
जोखिम कारक और नासा की रणनीति
आर्टेमिस‑II (Artemis II) केवल आर्टेमिस कार्यक्रम की दूसरी उड़ान है और पहली बार मनुष्यों को चांद के आस‑पास ले जाएगी, इसलिए जोखिम का स्तर स्वाभाविक रूप से ऊँचा है। नासा अधिकारियों ने हालिया ब्रीफिंग में यह स्वीकार किया कि सीमित डेटा‑पॉइंट्स के कारण इस मिशन के लिए सटीक विफलता‑संभावना बताना कठिन है और उन्होंने कोई स्पष्ट प्रतिशत सार्वजनिक नहीं किया। नासा के इंस्पेक्टर जनरल की हालिया रिपोर्ट में समग्र रूप से मानवयुक्त आर्टेमिस चंद्र‑अवतरण मिशन के लिए लगभग 1‑इन‑30 फेल्यर रिस्क और चंद्र सतह संचालन चरण के लिए 1‑इन‑40 के स्तर का अनुमान दिया गया है, जबकि ऐतिहासिक रूप से अपोलो मिशनों में क्रू नुकसान का अनुमानित जोखिम लगभग 1‑इन‑10 तक आंका गया था।
मानव अंतरिक्ष उड़ान विशेषज्ञों के अनुसार नई भारी‑भरकम रॉकेट प्रणाली की शुरुआती 2‑3 उड़ानों में प्रायः 2 प्रतिशत (1‑इन‑50) के आसपास फेल्यर रिस्क देखा जाता है, लेकिन आर्टेमिस उड़ानों के बीच लगभग 3.5 साल के अंतर के कारण यह तुलना सीधी नहीं मानी जा रही है। नासा के वरिष्ठ अधिकारी जिम हनीकट ने संकेत दिया कि आर्टेमिस‑I जैसी पहली उड़ान की तुलना में अब जोखिम कुछ कम ज़रूर है, लेकिन इसे परिपक्व, नियमित कार्यक्रमों की श्रेणी में रखना अभी जल्दबाज़ी होगी। एजेंसी ने माइक्रो‑मीटियोरॉयड और ऑर्बिटल डिब्रिस (एमएमओडी) को मानव अंतरिक्ष उड़ानों के लिए प्रमुख जोखिमों में से एक बताया है, हालांकि ऐसे घटनाक्रम दुर्लभ हैं और मॉडल‑आधारित आकलन हमेशा वास्तविकता से कुछ दूरी पर रहते हैं।
कार्यक्रम में बदलाव और भविष्य की उड़ानें
नासा के नए प्रशासक जैरेड आइज़ैकमैन ने हाल ही में आर्टेमिस कार्यक्रम में बड़े पैमाने पर पुनर्गठन की घोषणा की है, ताकि चंद्र अभियानों की रफ्तार तेज की जा सके और उड़ानों के बीच लंबे अंतराल से पैदा होने वाले जोखिम को घटाया जा सके। योजना के तहत अगले वर्ष पृथ्वी की कक्षा में एक अतिरिक्त मानवीय अभ्यास उड़ान जोड़ी गई है, जिसे अब नया आर्टेमिस‑III माना जाएगा, जबकि चांद पर दो अंतरिक्ष यात्रियों के उतरने वाला मिशन आर्टेमिस‑IV के रूप में पुनर्निर्धारित किया गया है। आइज़ैकमैन 2028 तक एक या दो चंद्र अवतरण मिशन कराने का लक्ष्य रख रहे हैं, जिसके लिए स्पेसएक्स और ब्लू ओरिजिन जैसी निजी कंपनियाँ भी तेज़ी से चंद्र लैंडर विकसित कर रही हैं।
वैश्विक परिप्रेक्ष्य और महत्व
आर्टेमिस‑II (Artemis II) को केवल तकनीकी परीक्षण उड़ान के रूप में नहीं, बल्कि 1972 के बाद पहली मानवयुक्त चंद्र‑परिक्रमा के रूप में देखा जा रहा है, जो वैश्विक स्तर पर वैज्ञानिक, राजनीतिक और वाणिज्यिक संकेत देता है। यह मिशन चांद पर भविष्य के बेस, संसाधन‑अन्वेषण और गहरे अंतरिक्ष, विशेषकर मंगल मिशनों की राह बनाने के लिए आधारभूत तकनीकों—जैसे शक्तिशाली प्रक्षेपण प्रणालियाँ, दीर्घकालिक लाइफ‑सपोर्ट, विकिरण सुरक्षा और इंटरनेशनल पार्टनरशिप मॉडल—का वास्तविक परिवेश में परीक्षण करेगा। सफल होने पर आर्टेमिस‑II मानव अंतरिक्ष अन्वेषण के एक नए युग की शुरुआत का प्रतीक बन सकता है, जहाँ सरकारी एजेंसियाँ और निजी कंपनियाँ मिलकर चांद को स्थायी मानवीय उपस्थिति के अगले पड़ाव के रूप में विकसित करेंगी।












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