परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में भारत ने रचा इतिहास
तमिलनाडु के कलपक्कम में स्थित भारत के प्रोटोटाइप फास्ट ब्रीडर रिएक्टर (PFBR) ने क्रिटिकलिटी हासिल कर ली है, जो देश के परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम की नागरिक परमाणु यात्रा में एक निर्णायक कदम है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 7 अप्रैल 2026 को X (पूर्व में ट्विटर) पर एक पोस्ट के माध्यम से इस ऐतिहासिक उपलब्धि की घोषणा की और देश के वैज्ञानिकों तथा इंजीनियरों को बधाई दी।
यह 500 मेगावाट इलेक्ट्रिक क्षमता वाला सोडियम-कूल्ड फास्ट ब्रीडर रिएक्टर भारतीय नाभिकीय विद्युत निगम लिमिटेड (BHAVINI) द्वारा परमाणु ऊर्जा विभाग के अंतर्गत इंदिरा गांधी परमाणु अनुसंधान केंद्र (IGCAR), कलपक्कम में विकसित किया गया है। इस परियोजना को पूरा करने में दो दशकों से अधिक का समय लगा, जिसमें जटिल डिज़ाइन और उन्नत सामग्री इंजीनियरिंग शामिल है।
क्या है ‘क्रिटिकलिटी’ और क्यों है यह इतनी महत्वपूर्ण?
PFBR भारत का पहला स्वदेशी रूप से विकसित 500 MWe फास्ट ब्रीडर परमाणु रिएक्टर है। जब एक परमाणु रिएक्टर क्रिटिकलिटी प्राप्त करता है, तो इसका अर्थ है कि वह नियंत्रित परमाणु विखंडन की एक स्व-निरंतर श्रृंखला प्रतिक्रिया को बनाए रखने में सक्षम हो गया है, जो एक स्थिर ऊर्जा उत्पादन सुनिश्चित करती है।
इसका अर्थ यह है कि अब रिएक्टर बिना किसी बाहरी हस्तक्षेप के स्वयं-निरंतर परमाणु विखंडन प्रतिक्रिया को बनाए रख सकता है। यह उपलब्धि रिएक्टर को पूर्ण-पैमाने पर बिजली उत्पादन के करीब ले जाती है।
होमी भाभा का त्रि-चरणीय परमाणु कार्यक्रम — एक दृष्टि जो अब सच हो रही है
होमी भाभा ने 1960 के दशक की शुरुआत में भारत के लिए एक त्रि-चरणीय परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम की परिकल्पना की थी, जिसमें थोरियम जैसे संसाधनों की उपलब्धता को ध्यान में रखा गया था। परमाणु ऊर्जा अधिनियम 1962 इसी दृष्टिकोण को ध्यान में रखकर बनाया गया था।
इस त्रि-चरणीय कार्यक्रम की संरचना इस प्रकार है —
पहला चरण: दबावयुक्त भारी जल रिएक्टर (PHWR) जो प्राकृतिक यूरेनियम से ऊर्जा उत्पन्न करते हैं और प्लूटोनियम का निर्माण करते हैं।
दूसरा चरण (वर्तमान उपलब्धि): PFBR यूरेनियम-प्लूटोनियम मिश्रित ऑक्साइड (MOX) ईंधन का उपयोग करेगा। ईंधन कोर के चारों ओर स्थित यूरेनियम-238 का “आवरण” परमाणु रूपांतरण से गुज़रकर अधिक ईंधन का उत्पादन करेगा, जिससे इसे ‘ब्रीडर’ नाम मिला।
तीसरा चरण: थोरियम-232 को ब्रीडर रिएक्टर के ईंधन आवरण में इस्तेमाल किया जाएगा। रूपांतरण की प्रक्रिया से थोरियम, विखंडनीय यूरेनियम-233 बनाएगा, जिसे तीसरे चरण में ईंधन के रूप में उपयोग किया जाएगा।
PFBR की तकनीकी विशेषताएं: क्यों है यह रिएक्टर अनोखा?
PFBR एक 500 MWe सोडियम-कूल्ड, पूल-प्रकार का फास्ट ब्रीडर रिएक्टर है जो यूरेनियम-238 और प्लूटोनियम-239 से बने मिश्रित ऑक्साइड (MOX) ईंधन का उपयोग करता है। यह रिएक्टर उपभोग से अधिक विखंडनीय सामग्री उत्पन्न करने के लिए डिज़ाइन किया गया है, जिससे ईंधन की स्थिरता बढ़ती है।
एक फास्ट ब्रीडर रिएक्टर तेज़, अनमॉडरेटेड न्यूट्रॉन का उपयोग करके उपभोग से अधिक ईंधन उत्पन्न करता है। ये तेज़ न्यूट्रॉन यूरेनियम-238 को प्लूटोनियम-239 में परिवर्तित करते हैं। द्रव सोडियम को शीतलक के रूप में उपयोग किया जाता है क्योंकि यह न्यूट्रॉन को धीमा नहीं करता।
पैसिव सेफ्टी फीचर्स: PFBR एक परिष्कृत तृतीय-पीढ़ी का रिएक्टर है जिसमें अंतर्निहित निष्क्रिय सुरक्षा तंत्र हैं। आपातकालीन स्थिति में, ये विशेषताएं सक्रिय प्रणालियों पर निर्भर हुए बिना सुविधा को तुरंत और सुरक्षित रूप से बंद करने की गारंटी देती हैं।
‘आत्मनिर्भर भारत’ का जीता-जागता उदाहरण
आत्मनिर्भर भारत की भावना के अनुरूप, PFBR को 200 से अधिक भारतीय उद्योगों के महत्वपूर्ण योगदान के साथ, जिनमें MSMEs भी शामिल हैं, BHAVINI द्वारा पूरी तरह स्वदेशी रूप से डिज़ाइन और निर्मित किया गया है। सरकार ने 2003 में भारत के सबसे उन्नत परमाणु रिएक्टर के निर्माण और संचालन के लिए भारतीय नाभिकीय विद्युत निगम लिमिटेड की स्थापना को मंजूरी दी थी।
प्रधानमंत्री मोदी ने दी वैज्ञानिकों को बधाई
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को भारत के परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम में एक महत्वपूर्ण मील के पत्थर की सराहना की जब देश का पहला स्वदेशी PFBR क्रिटिकलिटी प्राप्त कर गया। उन्होंने इस विकास को “भारत की नागरिक परमाणु यात्रा में एक निर्णायक कदम” बताया।
पीएम मोदी ने यह भी रेखांकित किया कि यह उपलब्धि तीसरे चरण के तहत भारत के विशाल थोरियम भंडार के प्रभावी दोहन का मार्ग प्रशस्त करती है।
परमाणु ऊर्जा आयोग के अध्यक्ष अजीत कुमार मोहंती ने कहा, “आज एक ऐतिहासिक दिन है। PFBR की क्रिटिकलिटी के साथ भारत हमारे तीन-चरण परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम के दूसरे चरण में प्रवेश कर गया है। यह भारत को बड़े फास्ट रिएक्टर का संचालन करने वाला केवल दूसरा देश बनाता है।”
भारत बना रूस के बाद दूसरा देश
एक बार चालू होने के बाद, भारत रूस के बाद दुनिया का केवल दूसरा देश बन जाएगा जिसके पास व्यावसायिक स्तर पर संचालित फास्ट ब्रीडर रिएक्टर होगा। इससे कलपक्कम वैश्विक स्तर पर एक बेहद छोटे और विशिष्ट समूह में शामिल हो जाएगा, जो भारत को उन्नत परमाणु ऊर्जा में एक प्रमुख दीर्घकालिक खिलाड़ी के रूप में स्थापित करने की दिशा में अतिरिक्त रणनीतिक महत्व देता है।
PFBR की ऐतिहासिक यात्रा: देरी, चुनौतियां और जीत
1985 में कलपक्कम में फास्ट ब्रीडर टेस्ट रिएक्टर (FBTR) बनाया गया था। यह शोध उद्देश्यों के लिए था और फास्ट ब्रीडर तकनीक में ज्ञान अर्जित करने के लिए था। इसकी सफलता ने बाद में BHAVINI के तहत 500 MW प्रोटोटाइप फास्ट ब्रीडर रिएक्टर विकसित करने के कार्यक्रम का नेतृत्व किया, जो 2004 में शुरू हुआ।
फ्यूल लोडिंग 18 अक्टूबर 2025 को शुरू हुई। रिएक्टर से वाणिज्यिक संचालन सितंबर 2026 तक शुरू होने की उम्मीद है।
आगे की राह: ग्रिड से जुड़ाव और विस्तार
अगला कदम रिएक्टर को विद्युत ग्रिड से जोड़ना और AERB की मंजूरी के बाद वाणिज्यिक आधार पर बिजली उत्पादन शुरू करना होगा। परमाणु ऊर्जा विभाग की संतुष्टि के बाद कलपक्कम में दो और फास्ट ब्रीडर रिएक्टरों का निर्माण होगा।
सरकार ने 2031-32 तक लगभग 22 GW परमाणु क्षमता और परमाणु ऊर्जा मिशन के तहत 2047 तक 100 GW की बड़ी महत्वाकांक्षा की योजना बनाई है। इस संदर्भ में, PFBR एक अकेली इंजीनियरिंग उपलब्धि नहीं बल्कि ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने और जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम करने की व्यापक कोशिश का हिस्सा है।
थोरियम: भारत की असली परमाणु ताकत का भंडार
भारत के पास दुनिया के सबसे बड़े थोरियम भंडारों में से एक है। फास्ट ब्रीडर रिएक्टर भारत के लक्ष्य — एक बंद परमाणु ईंधन चक्र विकसित करने और आयातित यूरेनियम पर निर्भरता कम करने — की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। रूस इकलौता अन्य देश है जो वाणिज्यिक स्तर पर FBR संचालित करता है।
निष्कर्ष
कलपक्कम में PFBR की क्रिटिकलिटी भारत के वैज्ञानिक समुदाय की दशकों की मेहनत, दृढ़ता और स्वदेशी क्षमता का प्रमाण है। जब दुनिया के कई देश इस तकनीक को छोड़ रहे थे, भारत ने इसकी संभावनाओं पर विश्वास बनाए रखा। यह उपलब्धि न केवल भारत की ऊर्जा सुरक्षा की दिशा में एक बड़ा कदम है, बल्कि यह सिद्ध करती है कि भारत विश्व के सबसे जटिल परमाणु प्रौद्योगिकियों में से एक को स्वयं विकसित और संचालित करने में सक्षम है।












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