हज़ारीबाग (झारखंड): झारखंड के हज़ारीबाग जिले के विष्णुगढ़ प्रखंड स्थित कुसुंभा गाँव में एक 12 वर्षीया मासूम बच्ची के साथ सामूहिक बलात्कार और नृशंस हत्या की घटना ने पूरे राज्य को दहला दिया है। यह मामला 2012 के दिल्ली निर्भया कांड की याद ताज़ा कर रहा है। घटना की क्रूरता और बर्बरता को देखते हुए इसे “झारखंड का निर्भया कांड” कहा जा रहा है।
क्या है पूरा मामला
झारखंड के हज़ारीबाग ज़िले के विष्णुगढ़ प्रखंड के कुसुंभा (या कुसुम्बा) गांव में 12 वर्षीय बच्ची के साथ कथित सामूहिक दुष्कर्म के बाद बर्बरतापूर्वक हत्या का मामला सामने आया है, जिसने पूरे राज्य को झकझोर दिया है। स्थानीय मीडिया व सामाजिक संगठनों ने घटना की क्रूरता की तुलना 2012 के दिल्ली निर्भया कांड से करते हुए इसे कानून-व्यवस्था की बड़ी नाकामी बताया है।
मंगला जुलूस देखने निकली थी बच्ची
जानकारी के अनुसार, नाबालिग बच्ची मंगलवार रात गांव में रामनवमी के अवसर पर निकले मंगला जुलूस को देखने के लिए घर से निकली थी। परिजनों ने बताया कि रात लगभग आठ बजे तक वह जुलूस में नृत्य करते हुए देखी गई, लेकिन इसके बाद अचानक लापता हो गई और रात भर तलाश के बावजूद उसका कोई पता नहीं चल सका।
अगली सुबह स्कूल के पीछे क्षत-विक्षत शव बरामद
बुधवार सुबह ग्रामीणों ने गांव के मध्य विद्यालय/मैदान के पास बने गड्ढे और बांस की झाड़ियों के बीच बच्ची का रक्तरंजित व क्षत-विक्षत शव देखा, जिसके बाद पूरे इलाके में सनसनी और आक्रोश फैल गया। रिपोर्टों के अनुसार, बच्ची का चेहरा पत्थर से बुरी तरह कुचला गया था, दांत टूटे हुए थे और शरीर पर गंभीर चोटों के निशान थे, जिससे उसकी पहचान छिपाने और घटना की बर्बरता दोनों का अंदाजा लगता है।
दुष्कर्म और हैवानियत के आरोप
परिजनों और स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि बच्ची के साथ पहले सामूहिक दुष्कर्म किया गया और फिर साक्ष्य मिटाने तथा पहचान छिपाने के लिए उसकी नृशंस हत्या कर दी गई। फॉरेंसिक जांच में और मीडिया रिपोर्टों में यह भी सामने आया है कि आरोपी ने बच्ची की देह के साथ ऐसी क्रूरता की, जिसे विशेषज्ञों ने भी “निर्भया जैसा बर्बर” करार दिया है, जिसमें उसके निजी अंगों में लकड़ी/बांस का टुकड़ा पाए जाने की बात कही गई है। पुलिस ने हालांकि स्पष्ट किया है कि दुष्कर्म की अंतिम पुष्टि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही की जाएगी।
पुलिस की जांच और अब तक की कार्रवाई
घटना की सूचना मिलते ही विष्णुगढ़ थाना प्रभारी और एसडीपीओ बैजनाथ (बैद्यनाथ) प्रसाद पुलिस बल के साथ घटनास्थल पर पहुंचे और क्षेत्र को घेराबंदी कर जांच शुरू की। मामले की गंभीरता को देखते हुए जिला मुख्यालय से फॉरेंसिक टीम (FSL) और डॉग स्क्वॉड बुलाया गया, जिन्होंने घटनास्थल से खून के नमूने, फिंगरप्रिंट, चप्पल और अन्य संदिग्ध सामान सहित कई अहम साक्ष्य एकत्र किए हैं।
एसडीपीओ प्रसाद के अनुसार, आरोपी/संदिग्धों के कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) निकाले जा रहे हैं और फॉरेंसिक साक्ष्यों की जांच जारी है; पुलिस का दावा है कि वे आरोपियों की पहचान के बेहद करीब हैं। मृतका का पोस्टमार्टम हज़ारीबाग स्थित मेडिकल कॉलेज/सदर अस्पताल में कराया जा रहा है, जिसकी रिपोर्ट के आधार पर आगे की कानूनी धाराएं और कार्रवाई तय की जाएगी।
तीन दिन तक अंतिम संस्कार से इनकार, कड़ी सज़ा की मांग
घटना के बाद गुस्साए परिजनों और ग्रामीणों ने पहले तीन दिन तक बच्ची का अंतिम संस्कार करने से इनकार कर दिया और दोषियों की तत्काल गिरफ्तारी, फास्ट ट्रैक कोर्ट में सुनवाई और फांसी की सज़ा की मांग करते रहे। परिजन लगातार आरोप लगा रहे हैं कि जब तक सभी अभियुक्तों की गिरफ्तारी नहीं हो जाती और उन्हें सख्त सज़ा की गारंटी नहीं मिलती, परिवार न्याय पाने के लिए संघर्ष जारी रखेगा। अंततः प्रशासन और स्थानीय नेताओं के आश्वासन के बाद शुक्रवार शाम को अंतिम संस्कार संपन्न हुआ।
सड़कों पर उबाल, बंद की चेतावनी और राजनीतिक प्रतिक्रिया
घटना के विरोध में गांव और आसपास के क्षेत्रों में लोगों ने प्रदर्शन किया, सड़क जाम किए और अधिकारियों के वाहनों को रोक कर तत्काल कार्रवाई की मांग की। रिपोर्टों के अनुसार, हज़ारीबाग के सांसद मनीष जायसवाल और झारखंड भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष व राज्यसभा सांसद आदित्य साहू ने कुसुंभा गांव पहुंचकर पीड़ित परिवार से मुलाकात की और सरकार पर कानून-व्यवस्था को लेकर निशाना साधते हुए दोषियों की शीघ्र गिरफ्तारी की मांग की।
भाजपा नेताओं ने चेतावनी दी है कि यदि पुलिस रविवार तक आरोपियों को गिरफ्तार करने में विफल रहती है, तो सोमवार को हज़ारीबाग बंद का आह्वान किया जाएगा और चरणबद्ध आंदोलन शुरू किया जाएगा। दूसरी ओर, महिला संगठनों और स्थानीय समाजसेवियों ने इस घटना को “बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ” जैसे अभियानों पर प्रश्नचिह्न बताते हुए सीबीआई जांच, कठोर मुआवजा नीति और पीड़ित परिवार को सुरक्षा देने की मांग की है।
निर्भया जैसे कड़े कानून, फिर भी डर खत्म नहीं
2012 के निर्भया कांड के बाद बलात्कार और विशेषकर नाबालिगों के खिलाफ यौन अपराधों के लिए कानूनों को और सख्त किया गया, फास्ट ट्रैक कोर्ट और पॉक्सो एक्ट के तहत कठोर प्रावधान जोड़े गए, लेकिन हज़ारीबाग जैसे मामलों से साफ है कि जमीनी स्तर पर न तो अपराधियों में कानून का भय दिख रहा है और न ही लड़कियों की सुरक्षा सुनिश्चित हो पाई है। सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि सिर्फ कड़े कानून काफी नहीं, बल्कि त्वरित और निष्पक्ष जांच, समयबद्ध सुनवाई, दोषियों को उदाहरणात्मक सज़ा और समुदाय स्तर पर सुरक्षा तंत्र मजबूत करना भी बेहद ज़रूरी है।
प्रशासन और सरकार से क्या अपेक्षाएँ
स्थानीय लोगों, जनप्रतिनिधियों और महिला संगठनों की प्रमुख मांगें हैं कि:
- मामले को फास्ट ट्रैक कोर्ट में चलाकर समयबद्ध तरीके से दोष सिद्ध कर सख्त सज़ा दी जाए।
- पीड़ित परिवार को पर्याप्त मुआवजा और दीर्घकालिक आर्थिक-सामाजिक सुरक्षा उपलब्ध कराई जाए।
- विष्णुगढ़ और आसपास के इलाकों में पुलिस गश्त, सीसीटीवी, हेल्पलाइन और महिला सुरक्षा संबंधी उपायों को तत्काल मज़बूत किया जाए, ताकि ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके।
फ़िलहाल पुलिस पोस्टमार्टम रिपोर्ट और फॉरेंसिक साक्ष्यों के आधार पर जांच आगे बढ़ा रही है और दावा कर रही है कि बहुत जल्द आरोपियों को गिरफ्तार कर कानून के कटघरे में खड़ा किया जाएगा, जबकि पीड़ित परिवार और ग्रामीण न्याय की प्रतीक्षा में हैं।












प्रातिक्रिया दे