ट्रंप का ईरान पर विवादित पोस्ट: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप एक बार फिर अपनी विवादास्पद सोशल मीडिया शैली के कारण सुर्खियों में हैं। ईस्टर संडे की सुबह ट्रंप ने अपने ट्रूथ सोशल प्लेटफॉर्म पर ईरान को कड़ी धमकी देते हुए एक पोस्ट किया, जिसमें उन्होंने मंगलवार को “पावर प्लांट डे और ब्रिज डे” घोषित किया और ईरान से होरमुज़ जलडमरूमध्य तुरंत खोलने की माँग की। इस पोस्ट में न केवल गालियाँ थीं, बल्कि अंत में इस्लामी वाक्यांश “Praise be to Allah” (अल्लाह की प्रशंसा हो) का उपयोग भी था, जिसने अमेरिकी इस्लामिक संगठनों समेत कई राजनीतिक हस्तियों को भड़का दिया।
ट्रंप ने क्या लिखा?
ट्रंप ने अपने ट्रूथ सोशल अकाउंट पर लिखा —
“Tuesday will be Power Plant Day, and Bridge Day, all wrapped up in one, in Iran. There will be nothing like it!!! Open the F***in’ Strait, you crazy bastards, or you’ll be living in Hell – JUST WATCH! Praise be to Allah.”

बाद में ट्रंप ने एक और पोस्ट करते हुए मंगलवार रात 8 बजे (पूर्वी अमेरिकी समय) की अंतिम समयसीमा की घोषणा की।
पोस्ट का पृष्ठभूमि: होरमुज़ जलडमरूमध्य विवाद
अमेरिका और इजराइल द्वारा ईरान पर किए गए हमलों के बाद से ईरान ने होरमुज़ जलडमरूमध्य को प्रभावी रूप से बंद कर रखा है। यह वह जलमार्ग है जिससे दुनिया का लगभग एक-पाँचवाँ तेल गुजरता है। इस बंदी के चलते वैश्विक तेल की कीमतें आसमान छू रही हैं।
ट्रंप ने शनिवार को पहले ही धमकी दी थी कि अगर ईरान ने 48 घंटे में जलडमरूमध्य नहीं खोला तो “सारा नरक उन पर टूट पड़ेगा।” रविवार की पोस्ट इसी कड़ी में एक और तीखा कदम थी।
यह पोस्ट उस घटना के तुरंत बाद आई जब अमेरिकी नेवी SEAL टीम-6 ने ईरान की गहरी पर्वत श्रृंखलाओं में घुसकर एक गिराए गए अमेरिकी एयरफोर्स कर्नल को सफलतापूर्वक बचाया। इस सफल बचाव अभियान से उत्साहित ट्रंप ने और आक्रामक तेवर अपनाए।
क्या ये युद्ध अपराध की धमकी है?
कानूनी विशेषज्ञों और राष्ट्रीय सुरक्षा पर्यवेक्षकों ने ट्रंप की पोस्ट की तीखी आलोचना की है। “पावर प्लांट डे” और “ब्रिज डे” जैसी बातों को नागरिक बुनियादी ढाँचे पर हमले की धमकी के रूप में देखा जा रहा है, जो अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत युद्ध अपराध माना जा सकता है।
ईरान के संयुक्त राष्ट्र मिशन ने ट्रंप की धमकियों की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि “यह नागरिकों को आतंकित करने का सीधा और सार्वजनिक उकसावा है और युद्ध अपराध करने के इरादे का स्पष्ट प्रमाण है।”
CAIR का तीखा विरोध: इस्लाम का मज़ाक उड़ाया?
पोस्ट के अंत में लिखे “Praise be to Allah” वाक्यांश ने अमेरिका के सबसे बड़े मुस्लिम नागरिक अधिकार संगठन CAIR (Council on American-Islamic Relations) को खासा नाराज़ किया।
CAIR ने एक बयान में कहा, “राष्ट्रपति ट्रंप द्वारा इस्लाम का पागलपन भरा मज़ाक और ईरान में नागरिक बुनियादी ढाँचे पर हमले की धमकियाँ लापरवाह और खतरनाक हैं। यह एक ऐसी मानसिकता को दर्शाता है जो मानव जीवन के प्रति उदासीन और धार्मिक भावनाओं के प्रति तिरस्कारपूर्ण है।”
CAIR का कहना था कि हिंसक धमकियों के साथ “Praise be to Allah” वाक्यांश का प्रयोग इस्लाम को हथियार बनाने की “एक परेशान करने वाली इच्छाशक्ति” को दर्शाता है।
यद्यपि यह ध्यान देने योग्य है कि “Allah” अरबी में ईश्वर का अनुवाद मात्र है और यह किसी एक धर्म से नहीं जुड़ा है, फिर भी इसे हिंसक संदर्भ में उपयोग करना अत्यंत विवादास्पद माना जा रहा है।
CAIR ने अमेरिकी कांग्रेस से तत्काल अधिवेशन बुलाने और ईरान युद्ध को समाप्त करने के लिए मतदान करने की माँग की।
मार्जोरी टेलर ग्रीन का विद्रोह: “ट्रंप पागल हैं, ईसाई नहीं”
पूर्व रिपब्लिकन सांसद मार्जोरी टेलर ग्रीन ने ट्रंप के इस पोस्ट की तस्वीर X पर शेयर करते हुए कड़ी आलोचना की। उन्होंने लिखा कि ट्रंप के प्रशासन में जो भी खुद को ईसाई कहते हैं, उन्हें राष्ट्रपति की इस “पागलपन” में दखल देना चाहिए।
ग्रीन ने यह भी कहा कि इस पोस्ट से ईरान के आम लोगों को नुकसान होगा, वही लोग जिन्हें ट्रंप ने “आज़ाद करने” का दावा किया था।
ईरान और अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया
ईरान की अर्ध-सरकारी समाचार एजेंसी तस्नीम ने एक सूत्र के हवाले से कहा कि यदि ट्रंप ने ईरानी पावर प्लांट्स और पुलों पर बमबारी की, तो उन्हें “आंतरिक उथल-पुथल” का सामना करना पड़ेगा।
ट्रंप के पहले कार्यकाल में सलाहकार रहे ब्रेट मैकगर्क ने चेतावनी दी कि राष्ट्रपति की धमकियाँ ईरान को बातचीत की मेज पर नहीं लाएँगी।
तेल बाजारों पर इसका असर भी तुरंत दिखा। रविवार को तेल बाजार खुलते ही कच्चे तेल की कीमत लगभग 114 डॉलर प्रति बैरल पर पहुँच गई।
डेमोक्रेट्स की भी आलोचना
सीनेट के अल्पसंख्यक नेता चक शूमर ने ट्रंप पर हमला बोलते हुए कहा कि “जब लोग चर्च जा रहे हैं और परिवार के साथ ईस्टर मना रहे हैं, तब अमेरिका के राष्ट्रपति सोशल मीडिया पर एक अनियंत्रित पागल की तरह बड़बड़ा रहे हैं।”
निष्कर्ष
ट्रंप की यह पोस्ट तीन स्तरों पर विवादित है – भाषाई (गालियाँ और अपमानजनक शब्द), कानूनी (युद्ध अपराध की संभावित धमकी) और धार्मिक (इस्लामी वाक्यांश का राजनीतिक दुरुपयोग)। जैसे-जैसे मंगलवार की समयसीमा नज़दीक आ रही है, दुनिया की नज़रें इस पर टिकी हैं कि क्या यह केवल दबाव की रणनीति है या वास्तव में एक बड़े सैन्य कदम की पूर्वसूचना।











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