बांग्लादेश में खसरे का प्रकोप: क्या पश्चिम बंगाल, असम और पूर्वोत्तर को है खतरा? जानें बचाव के उपाय

बांग्लादेश में खसरा प्रकोप 2026 — ढाका के अस्पताल में खसरे से पीड़ित बच्चे का उपचार

बांग्लादेश में खसरे की भयावह लहर – 100 से ज़्यादा बच्चों की मौत

बांग्लादेश इस समय खसरे के एक भयानक प्रकोप से जूझ रहा है, जिसने एक महीने से भी कम समय में 100 से अधिक बच्चों की जान ले ली है। सरकार ने विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO), यूनिसेफ और गावी वैक्सीन अलायंस के साथ मिलकर 18 उच्च जोखिम वाले जिलों में 6 महीने से 5 साल की उम्र के बच्चों को टीका लगाने का आपातकालीन अभियान शुरू किया है।

स्वास्थ्य मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, 15 मार्च 2026 के बाद से 7,500 से अधिक संदिग्ध खसरे के मामले सामने आए हैं। देशभर में 113 संदिग्ध मौतें हो चुकी हैं, जिनमें से 17 मौतों की आधिकारिक पुष्टि हो चुकी है।

ढाका के इन्फेक्शियस डिज़ीज़ अस्पताल की हालत बेहद चिंताजनक है। यह अस्पताल लगभग 100 मरीज़ों के उपचार के लिए डिज़ाइन किया गया था, लेकिन अब यह पूरी तरह से भर चुका है। 2026 के पहले कुछ महीनों में ही यहाँ लगभग 255 बच्चे खसरे के साथ भर्ती हो चुके हैं, जबकि पिछले पूरे साल में केवल 69 मामले दर्ज हुए थे।

बांग्लादेश में खसरा क्यों फैला? – राजनीतिक उथल-पुथल और टीकाकरण में चूक

बांग्लादेश के स्वास्थ्य मंत्री सरदार मोहम्मद सखावत हुसैन ने संसद में बताया कि यह प्रकोप पिछली सरकारों की कुप्रबंधन और विफलताओं के कारण हुआ। उन्होंने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना की सरकार और नोबेल पुरस्कार विजेता मुहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार दोनों ने खसरे और छह अन्य बीमारियों के टीकों की कमी को जन्म दिया।

बांग्लादेश में बच्चों के टीकाकरण कवरेज में असमानता एक बड़ी चुनौती है। MR2 के साथ FVC 2023 में केवल 76.8 प्रतिशत था — शहरी क्षेत्रों में 75 प्रतिशत और ग्रामीण क्षेत्रों में 79 प्रतिशत। टीकों और सीरिंज की कमी ने इस प्रकोप को और बढ़ा दिया।

बांग्लादेश को कभी उसके मज़बूत टीकाकरण कार्यक्रम के लिए सराहा जाता था। 2000 से 2024 के बीच खसरे के मामलों में 95 प्रतिशत से अधिक की गिरावट आई थी। लेकिन अब कई कारणों से यह बीमारी वापस लौट आई है, जिनमें दूरदराज़ और गरीब इलाकों में टीकाकरण से वंचित समुदाय, भीड़भाड़ वाली रहन-सहन की स्थितियाँ और सीमा पार लोगों की आवाजाही शामिल हैं।

क्या है खसरा (Measles) और यह कैसे फैलता है?

खसरा एक अत्यंत संक्रामक वायुजनित (Airborne) रोग है, जो बुखार, श्वसन संबंधी लक्षण और एक विशेष प्रकार के चकत्ते का कारण बनता है। यह विशेष रूप से छोटे बच्चों में गंभीर या घातक जटिलताएं उत्पन्न कर सकता है। WHO के अनुसार, इसे फैलने से रोकने के लिए 95 प्रतिशत आबादी का टीकाकरण ज़रूरी है।

खसरे के उपचार में मुख्य रूप से लक्षणों से राहत दिलाना, जटिलताओं को रोकना और द्वितीयक संक्रमणों का प्रबंधन करना शामिल है। बच्चों में, गंभीरता को कम करने के लिए अक्सर चिकित्सकीय देखरेख में विटामिन A की खुराक दी जाती है।

वैश्विक परिदृश्य – खसरा सिर्फ बांग्लादेश तक नहीं

वैश्विक स्तर पर खसरे के प्रकोप में तेज़ी से वृद्धि हो रही है। 2024 में 59 देशों में बड़े या विघटनकारी प्रकोप हुए, जो 2021 की तुलना में तीन गुना अधिक है। इनमें से एक चौथाई देश ऐसे थे जिन्होंने पहले खसरे को समाप्त कर दिया था।

2026 के वसंत में उत्तरी अमेरिका में भी अलार्म बज रहा है। अप्रैल 2026 की शुरुआत तक अमेरिका में 33 राज्यों में 1,671 से अधिक पुष्ट मामले सामने आ चुके हैं, जो मुख्य रूप से बिना टीकाकरण वाले समूहों में स्थानीय प्रकोप से प्रेरित हैं।

क्या भारत के सीमावर्ती राज्यों को है खतरा?

भारत के पश्चिम बंगाल, असम और पूर्वोत्तर के कुछ हिस्सों में सीमा पार फैलाव की चिंता व्यक्त की जा रही है। यह भी एक चुनौती है कि कोविड-19 महामारी के दौरान नियमित टीकाकरण बाधित हुआ और टीकाकरण दर अभी भी अनुशंसित 95 प्रतिशत तक पूरी तरह नहीं पहुँची है।

WHO को अगस्त 2025 से जनवरी 2026 के बीच रिपोर्ट किए गए अस्थायी आंकड़ों में भारत को खसरे के प्रकोप वाले देशों में पहले स्थान पर रखा गया है, जिसमें 12,135 मामले दर्ज किए गए।

हालाँकि, विशेषज्ञों की राय तुलनात्मक रूप से आश्वस्त करने वाली है।

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, भारत में खसरा-रूबेला टीकाकरण कवरेज पहली खुराक के लिए 93.7 प्रतिशत और दूसरी खुराक के लिए 92.2 प्रतिशत है। 2024 में देश में खसरे के मामलों में पिछले वर्ष की तुलना में 73 प्रतिशत और रूबेला के मामलों में 17 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई।

विशेषज्ञ डॉ. संजीव बागई के अनुसार, भारत “काफी अच्छी स्थिति में है”, हालाँकि वैश्विक यात्रा और प्रवासन अभी भी जोखिम पैदा कर सकते हैं। उन्होंने कहा, “मुझे नहीं लगता कि चिंता का तत्काल कोई कारण है, लेकिन निगरानी और समय पर कार्रवाई बेहद ज़रूरी है।”

खसरे से बच्चे ज़्यादा क्यों प्रभावित होते हैं?

यूनिसेफ की बांग्लादेश प्रतिनिधि राना फ्लावर्स ने कहा कि “यह पुनरुत्थान महत्वपूर्ण प्रतिरक्षा अंतराल को उजागर करता है, विशेष रूप से शून्य-खुराक और कम-टीकाकरण वाले बच्चों में। नौ महीने से कम उम्र के शिशुओं में संक्रमण विशेष रूप से चिंताजनक है, जो अभी नियमित टीकाकरण के लिए पात्र नहीं हैं।”

कुपोषित बच्चे या जिन बच्चों को पूरी तरह टीका नहीं लगाया गया है, उनमें गंभीर बीमारी और मृत्यु का सर्वाधिक खतरा होता है।

खसरे से बचाव के ज़रूरी उपाय – विशेषज्ञों की सलाह

1. टीकाकरण — सबसे कारगर हथियार

सबसे प्रभावी सुरक्षा टीकाकरण ही है। खसरा युक्त वैक्सीन (MCV) की दो खुराकें दीर्घकालिक प्रतिरोधक क्षमता प्रदान करती हैं और प्रकोप को रोकने के लिए अत्यंत आवश्यक हैं। वैश्विक स्तर पर खसरे के पुनरुत्थान का एक प्रमुख कारण अपर्याप्त टीकाकरण कवरेज है।

डॉ. बागई ने वैक्सीन हिचकिचाहट के खिलाफ भी आह्वान किया: “खसरे का टीका सुरक्षित है और इसमें कोई हानिकारक तत्व नहीं है। वैक्सीन हिचकिचाहट और गलत सूचनाएं बंद होनी चाहिए।”

2. स्वच्छता और सतर्कता

संक्रमण से बचाव के लिए निम्न उपाय अपनाएं:

  • भीड़भाड़ वाली जगहों पर जाने से बचें, विशेष रूप से यदि आसपास खसरे के मामले हों
  • खाँसने या छींकने पर मुँह और नाक ढकें
  • नियमित रूप से साबुन और पानी से हाथ धोएं
  • संक्रमित व्यक्ति के सीधे संपर्क से बचें

3. बुखार, चकत्ते और खाँसी दिखे तो तुरंत डॉक्टर से मिलें

अधिकारियों ने माता-पिता को सलाह दी है कि जब भी किसी को खसरे के लक्षण संदिग्ध लगें, तो तुरंत अस्पताल जाएं और दुकानदारों से अनावश्यक दवाएं लेने से बचें।

4. विटामिन A की कमी न होने दें

बच्चों में, गंभीरता को कम करने के लिए चिकित्सकीय देखरेख में विटामिन A की खुराक अक्सर अनुशंसित की जाती है।

आपातकालीन प्रतिक्रिया – बांग्लादेश ने क्या किया?

बांग्लादेश सरकार ने यूनिसेफ, WHO और गावी वैक्सीन अलायंस के समर्थन से आपातकालीन खसरा-रूबेला टीकाकरण अभियान शुरू किया है। इस पहल का लक्ष्य 18 उच्च जोखिम वाले जिलों में 30 उपज़िलों में 6 महीने से 5 साल की उम्र के 12 लाख से अधिक बच्चों को कवर करना है, जिसे बाद में राष्ट्रव्यापी विस्तार दिया जाएगा।

DGHS की रिपोर्ट के अनुसार, प्रकोप ने उत्तर-पश्चिमी राजशाही क्षेत्र को सबसे अधिक प्रभावित किया है, जहाँ स्वास्थ्य अधिकारियों ने निगरानी और केस ट्रैकिंग को तेज़ कर दिया है।

विश्व स्वास्थ्य के लिए एक चेतावनी

इसके बावजूद कि सुरक्षित और किफायती वैक्सीन उपलब्ध है, 2024 में दुनिया भर में लगभग 95,000 खसरे से मौतें हुईं, जो मुख्य रूप से पाँच साल से कम उम्र के उन बच्चों में हुईं जिन्हें टीका नहीं लगाया गया था।

महामारी विशेषज्ञ चेतावनी दे रहे हैं कि व्यापक और समय-समय पर जन टीकाकरण अभियानों के प्रति प्रतिबद्धता के बिना, असुरक्षित समूह साल-दर-साल बढ़ते जाएंगे। इस संकट को दूर करने के लिए एक बहु-आयामी दृष्टिकोण की आवश्यकता है जो वैक्सीन वितरण की तार्किक बाधाओं और डिजिटल गलत सूचनाओं दोनों से निपटे।

निष्कर्ष

बांग्लादेश में खसरे का यह प्रकोप एक तीखी याद दिलाता है कि स्वास्थ्य प्रणाली में छोटी-सी चूक भी विनाशकारी परिणाम दे सकती है। भारत के लिए सबसे बड़ा संदेश यही है कि पश्चिम बंगाल, असम और पूर्वोत्तर राज्यों में सतर्कता बनाए रखना और अपने टीकाकरण कवरेज को मज़बूत रखना अनिवार्य है। अभिभावकों को अपने बच्चों का नियमित टीकाकरण सुनिश्चित करना चाहिए और किसी भी संदिग्ध लक्षण पर तुरंत चिकित्सा सहायता लेनी चाहिए।

⚠️ स्वास्थ्य सूचना: यह लेख सार्वजनिक स्वास्थ्य जागरूकता के उद्देश्य से तैयार किया गया है। किसी भी बीमारी या लक्षण की स्थिति में कृपया योग्य चिकित्सक से परामर्श लें।

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