पूरे भारत में आज से चैत्र नवरात्रि 2026 का पावन पर्व शुरू हो गया है। चैत्र मास की शुक्ल प्रतिपदा से प्रारंभ यह महापर्व मां दुर्गा के नौ दिव्य स्वरूपों को समर्पित है। इस वर्ष नवरात्रि 19 मार्च (गुरुवार) से शुरू होकर 28 मार्च (शनिवार) को राम नवमी के पावन अवसर पर सम्पन्न होगी।
चैत्र नवरात्रि का धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व
हिंदू पंचांग के अनुसार वर्ष में चार नवरात्रि मनाई जाती हैं — चैत्र नवरात्रि, आषाढ़ गुप्त नवरात्रि, अश्विन (शारदीय) नवरात्रि और माघ गुप्त नवरात्रि। इनमें चैत्र नवरात्रि और शारदीय नवरात्रि सर्वाधिक प्रमुख मानी जाती हैं। चैत्र माह से हिंदू नववर्ष का आरंभ होता है, इसलिए यह नवरात्रि विशेष रूप से महत्वपूर्ण है।
पुराणों में वर्णित है कि ब्रह्मा जी ने सृष्टि का निर्माण चैत्र शुक्ल प्रतिपदा को ही किया था। इसी कारण इस दिन से न केवल नवरात्रि बल्कि हिंदू नव संवत्सर का भी शुभारंभ होता है। इस वर्ष विक्रम संवत 2083 का आरंभ भी आज 19 मार्च 2026 से हो रहा है।
शास्त्रीय महत्व
देवी भागवत पुराण के अनुसार, “चैत्र मासे च या नित्या सप्तम्यां पूजिता भवेत। सा देवी सर्वकामार्थं फलदा च सदा भवेत॥” — अर्थात् चैत्र मास में नवरात्रि में देवी की पूजा से सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। मार्कण्डेय पुराण में भी चैत्र नवरात्रि को अत्यंत फलदायी बताया गया है।
घटस्थापना 2026 — शुभ मुहूर्त एवं विधि
नवरात्रि के पहले दिन घटस्थापना (कलश स्थापना) की जाती है, जो पूरे नौ दिनों की पूजा का आधार बनती है। 19 मार्च 2026 को घटस्थापना के लिए निम्नलिखित शुभ मुहूर्त हैं:
| मुहूर्त का नाम | समय | विशेषता |
|---|---|---|
| प्रात:काल शुभ मुहूर्त | 06:28 AM — 07:42 AM | सर्वोत्तम — सूर्योदय के बाद |
| अभिजित मुहूर्त | 11:58 AM — 12:48 PM | अत्यंत शुभ, हर कार्य सिद्ध होता है |
| विजय मुहूर्त | 02:35 PM — 03:24 PM | विजय प्रदायक, शुभ फल |
| संध्याकाल | 06:10 PM — 06:40 PM | प्रदोष काल — विशेष पूजा का समय |
| राहुकाल (वर्जित) | 12:00 PM — 01:30 PM | इस समय घटस्थापना न करें |
घटस्थापना की संपूर्ण विधि
- स्थान शुद्धि एवं तैयारीपूजा स्थान को गंगाजल से शुद्ध करें। मिट्टी या तांबे का कलश लें। उसमें शुद्ध जल, आम के पत्ते, सुपारी, सिक्का, अक्षत, दूर्वा और पंचरत्न डालें। कलश पर आम की पत्तियां लगाएं।
- सप्त धान्य व मिट्टी स्थापनाएक मिट्टी के पात्र में सात प्रकार के अनाज (जौ, गेहूं, तिल, मूंग, चना, धान, मसूर) बोएं। इसके ऊपर कलश स्थापित करें। यह नवदुर्गा का प्रतीक है।
- श्रीफल (नारियल) स्थापनाकलश के मुख पर नारियल रखें। नारियल को लाल वस्त्र या मौली में लपेटकर रखें। नारियल पर स्वस्तिक बनाएं। यह मां दुर्गा का स्वरूप माना जाता है।
- दीप प्रज्वलन एवं आह्वानअखंड ज्योति प्रज्वलित करें। मां दुर्गा का आह्वान करें: “ओम जयंती मंगला काली भद्रकाली कपालिनी। दुर्गा क्षमा शिवा धात्री स्वाहा स्वधा नमोस्तुते॥” इसके बाद षोडशोपचार पूजन करें।
- दुर्गा सप्तशती पाठसंभव हो तो दुर्गा सप्तशती का पाठ करें। न हो सके तो दुर्गाचालीसा, देवी कवच या देवी अष्टोत्तर शतनामावली का पाठ करें। प्रसाद के रूप में फल, मिठाई और पंचामृत चढ़ाएं।
नवरात्रि 2026 — नौ दिन, नौ देवियां, नौ रंग
चैत्र नवरात्रि 2026 में प्रत्येक दिन एक विशेष देवी की पूजा होती है और हर दिन का एक शुभ रंग भी निर्धारित है। इस वर्ष की देवी तालिका इस प्रकार है:
नवरात्रि 2026 दिनवार सूची
| दिन | तारीख | देवी | तिथि | शुभ रंग |
|---|---|---|---|---|
| दिन 1 | 19 मार्च | माँ शैलपुत्री | प्रतिपदा | लाल |
| दिन 2 | 20 मार्च | माँ ब्रह्मचारिणी | द्वितीया | नीला |
| दिन 3 | 21 मार्च | माँ चंद्रघंटा | तृतीया | पीला |
| दिन 4 | 22 मार्च | माँ कूष्मांडा | चतुर्थी | हरा |
| दिन 5 | 23 मार्च | माँ स्कंदमाता | पंचमी | सफेद |
| दिन 6 | 24 मार्च | माँ कात्यायनी | षष्ठी | नारंगी |
| दिन 7 | 25 मार्च | माँ कालरात्रि | सप्तमी | ग्रे/काला |
| दिन 8 | 26 मार्च | माँ महागौरी | अष्टमी | बैंगनी |
| दिन 9 | 28 मार्च | माँ सिद्धिदात्री | नवमी (राम नवमी) | गुलाबी |
विशेष नोट: इस वर्ष अष्टमी (26 मार्च) और नवमी (28 मार्च) के बीच 27 मार्च (शुक्रवार) को तिथि क्षय के कारण अष्टमी-नवमी का संयोग विशेष फलदायी माना जाएगा। कन्या पूजन और हवन अष्टमी या नवमी, दोनों में से किसी एक पर किया जा सकता है।
नवरात्रि व्रत के नियम और परंपराएं
नवरात्रि व्रत रखने वालों के लिए कुछ विशेष नियम हैं जिनका पालन करना आवश्यक माना जाता है। शास्त्रों के अनुसार इन नियमों का पालन करने से व्रत का पूर्ण फल प्राप्त होता है:
- आहार: व्रत में केवल फल, साबूदाना, सिंघाड़े का आटा, कुट्टू का आटा, अरबी, शकरकंद, दूध और मेवों का सेवन करें। अन्न, प्याज, लहसुन, मांस-मदिरा से परहेज करें।
- ब्रह्मचर्य: नवरात्रि के दौरान ब्रह्मचर्य का पालन करना शुभ माना जाता है। मन को पवित्र और एकाग्र रखें।
- वस्त्र: जहां तक हो सके लाल, पीले, नारंगी या सफेद वस्त्र पहनें। इन्हें देवी के प्रिय रंग माना गया है।
- केश और नाखून: पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार नवरात्रि में बाल और नाखून नहीं काटने चाहिए।
- जमीन पर शयन: कट्टर व्रतधारी नौ दिनों तक भूमि पर शयन करते हैं और देवी की आराधना में समय बिताते हैं।
- अखंड दीप: यदि संभव हो तो नौ दिनों तक अखंड ज्योति जलाए रखें। यह अत्यंत शुभ माना जाता है।
- दुर्गा सप्तशती: नौ दिनों में दुर्गा सप्तशती के 700 श्लोकों का क्रमबद्ध पाठ करना सर्वोत्तम है।
कन्या पूजन — अष्टमी और नवमी का विधान
नवरात्रि की अष्टमी (महाअष्टमी) और नवमी (महानवमी) तिथि को कन्या पूजन का विशेष महत्व है। इसे कुमारी पूजन भी कहते हैं। इस वर्ष 26 मार्च (अष्टमी) और 28 मार्च (नवमी) को कन्या पूजन किया जाएगा।
2 से 10 वर्ष की 9 कन्याओं को घर बुलाकर उनके पैर धोएं, तिलक लगाएं और भोजन कराएं। इसके साथ एक लांगुरिया (बालक) का भी पूजन करने की परंपरा है। कन्याओं को वस्त्र, दक्षिणा और उपहार देकर उनका आशीर्वाद लें। शास्त्रों में कहा गया है कि कन्याओं में देवी का वास होता है, इसलिए उनकी पूजा साक्षात् दुर्गा पूजा के समान फलदायी है।
राम नवमी 2026 — नवरात्रि का समापन
इस वर्ष चैत्र नवरात्रि का समापन 28 मार्च 2026 को राम नवमी के महापर्व पर होगा। राम नवमी भगवान श्रीराम का जन्मोत्सव है और यह चैत्र शुक्ल नवमी को मनाया जाता है। इस दिन भगवान राम की विशेष पूजा-अर्चना, रामायण पाठ और भव्य शोभायात्राओं का आयोजन होता है।
राम नवमी पर मध्याह्न काल (12:00 से 12:48 बजे तक) में भगवान राम का जन्मोत्सव मनाने की परंपरा है, क्योंकि शास्त्रों के अनुसार श्रीराम का जन्म इसी समय हुआ था। पूरे देश में अयोध्या, वाराणसी, मथुरा सहित सभी प्रमुख मंदिरों में विशेष आयोजन होंगे।
प्रमुख पूजा स्थल — देश भर में उत्सव
वैष्णो देवी (जम्मू), विंध्यवासिनी देवी (मिर्जापुर), कामाख्या देवी (असम), दुर्गाजी का मंदिर (वाराणसी), चामुंडेश्वरी देवी (मैसूर), अंबाजी मंदिर (गुजरात), और ज्वाला देवी (हिमाचल प्रदेश) सहित देशभर के प्रमुख शक्तिपीठों में विशेष आयोजन हो रहे हैं। श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ने की संभावना है।
विशेष मंत्र — नवरात्रि साधना के लिए
“या देवी सर्वभूतेषु शक्तिरूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥”
— दुर्गा सप्तशती, सर्वप्रमुख श्लोक — नवरात्रि में 108 बार जप करें
इसके अतिरिक्त प्रत्येक देवी के विशेष बीज मंत्र का जप भी अत्यंत फलदायी है। माँ दुर्गा का मूल मंत्र “ॐ दुं दुर्गायै नमः” और महाकाली मंत्र “ॐ क्रीं कालिकायै नमः” का जप करना नवरात्रि में विशेष शुभ माना जाता है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
Q1. चैत्र नवरात्रि 2026 कब से कब तक है?
Ans: चैत्र नवरात्रि 2026 का आरंभ 19 मार्च 2026 (गुरुवार) से हो रहा है और यह 28 मार्च 2026 (शनिवार) को राम नवमी पर सम्पन्न होगी। इस वर्ष तिथि के अनुसार नवरात्रि 10 दिनों की है।
Q2. 19 मार्च 2026 को घटस्थापना का सबसे शुभ समय क्या है?
Ans: 19 मार्च को घटस्थापना के लिए सबसे उत्तम मुहूर्त प्रात: 06:28 से 07:42 बजे तक है। इसके अलावा अभिजित मुहूर्त 11:58 से 12:48 बजे तक भी अत्यंत शुभ है। राहुकाल (दोपहर 12:00 से 01:30) में घटस्थापना न करें।
Q3.नवरात्रि 2026 में कन्या पूजन कब किया जाएगा?
Ans: कन्या पूजन 26 मार्च (अष्टमी) और 28 मार्च (नवमी / राम नवमी) दोनों दिन किया जा सकता है। इस वर्ष 27 मार्च को तिथि क्षय की स्थिति के कारण अधिकांश पंडित अष्टमी (26 मार्च) को कन्या पूजन करने की सलाह दे रहे हैं।
Q4. नवरात्रि व्रत में क्या खाया जा सकता है?
Ans: व्रत में फल, साबूदाना, कुट्टू का आटा, सिंघाड़े का आटा, अरबी, शकरकंद, मखाना, दूध, दही, मेवे और सेंधा नमक का उपयोग कर सकते हैं। अन्न (गेहूं, चावल), प्याज, लहसुन, हल्दी, धनिया, सामान्य नमक और मांसाहार वर्जित है।
Q5. चैत्र नवरात्रि और शारदीय नवरात्रि में क्या अंतर है?
Ans: चैत्र नवरात्रि वसंत ऋतु में चैत्र माह (मार्च-अप्रैल) में, जबकि शारदीय नवरात्रि शरद ऋतु में अश्विन माह (सितंबर-अक्टूबर) में मनाई जाती है। दोनों में माँ दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा होती है, परंतु चैत्र नवरात्रि का समापन राम नवमी से होता है, जो इसे विशिष्ट बनाता है।
Q6. नवरात्रि में किस देवी की पूजा करने से क्या फल मिलता है?
Ans: माँ शैलपुत्री — स्वास्थ्य व दीर्घायु, माँ ब्रह्मचारिणी — तप और ज्ञान, माँ चंद्रघंटा — शांति और साहस, माँ कूष्माण्डा — ऊर्जा और आयु, माँ स्कंदमाता — पुत्र प्राप्ति, माँ कात्यायनी — विवाह बाधा निवारण, माँ कालरात्रि — शत्रु नाश, माँ महागौरी — सौभाग्य, और माँ सिद्धिदात्री — मोक्ष और सिद्धि का आशीर्वाद प्रदान करती हैं।












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