सऊदी अरब : बादलों और बारिश के कारण पूरे सऊदी अरब में शव्वाल का हिलाल (नया चांद) देखना नामुमकिन रहा। सऊदी सुप्रीम कोर्ट की चांद देखो कमेटी ने आधिकारिक घोषणा की कि रमज़ान 30 दिन पूरा करेगा और ईद उल फितर शुक्रवार, 20 मार्च 2026 को मनाई जाएगी। अब भारत, पाकिस्तान और बांग्लादेश में चांद दिखने के बाद ईद की तारीख तय होगी।
सऊदी अरब में क्यों नहीं दिखा शव्वाल का चांद?
इस्लामी कैलेंडर के अनुसार रमज़ान 1447 AH का 29वां दिन 18 मार्च 2026, बुधवार को था। सऊदी सुप्रीम कोर्ट ने पूरे साम्राज्य के मुसलमानों को उस शाम शव्वाल का हिलाल देखने का निर्देश दिया था। हालांकि, पश्चिमी सऊदी अरब में उस समय खराब मौसम, बादलों और हल्की बारिश की वजह से चांद देखना संभव नहीं हो पाया। दम्माम से तबूक तक के सभी प्रमुख चांद देखने के केंद्रों पर निगरानी रखी गई, लेकिन हिलाल कहीं भी नज़र नहीं आया।
खगोलशास्त्रीय गणनाओं ने पहले ही संकेत दिया था कि 18 मार्च को चांद सूर्यास्त से पहले ही अस्त हो सकता है, जिससे उसकी दृश्यता असंभव रहती। इस्लामी परंपरा के अनुसार, यदि 29वें रोज़ चांद नहीं दिखता, तो रमज़ान 30 दिन का माना जाता है और अगले दिन ईद मनाई जाती है।
“जब चांद नहीं दिखा, तो रमज़ान का महीना 30 दिन पूरा होगा। अत: शव्वाल 1447 AH का पहला दिन 20 मार्च, शुक्रवार होगा।” — सऊदी सुप्रीम कोर्ट
दुनिया भर में ईद की तारीखें — एक नज़र में
सऊदी अरब की आधिकारिक घोषणा के बाद खाड़ी देशों ने भी अपनी तारीखें तय कर दीं। नीचे दी गई तालिका में दुनिया के प्रमुख देशों में ईद उल फितर 2026 की संभावित तारीखें देखें:
| देश / क्षेत्र | चांद दिखने की तारीख | ईद की तारीख |
|---|---|---|
| सऊदी अरब | 19 मार्च (अपेक्षित) | 20 मार्च (शुक्रवार) |
| UAE (संयुक्त अरब अमीरात) | 19 मार्च | 20 मार्च (शुक्रवार) |
| कतर | 19 मार्च | 20 मार्च (शुक्रवार) |
| कुवैत | 19 मार्च | 20 मार्च (शुक्रवार) |
| बहरीन | 19 मार्च | 20 मार्च (शुक्रवार) |
| यमन | 19 मार्च | 20 मार्च (शुक्रवार) |
| इराक | 19 मार्च | 20 मार्च (शुक्रवार) |
| लेबनान | 19 मार्च | 20 मार्च (शुक्रवार) |
| फिलिस्तीन | 19 मार्च | 20 मार्च (शुक्रवार) |
| भारत | 19–20 मार्च (देखना बाकी) | 20 या 21 मार्च |
| पाकिस्तान | 20 मार्च (अपेक्षित) | 21 मार्च (शनिवार) |
| बांग्लादेश | 20 मार्च (अपेक्षित) | 21 मार्च (शनिवार) |
| इंडोनेशिया | 19–20 मार्च | 20 या 21 मार्च |
| सिंगापुर | 20 मार्च | 21 मार्च (शनिवार) |
| तुर्किये | 19 मार्च | 20 मार्च (शुक्रवार) |
| मलेशिया | 19–20 मार्च | 20 या 21 मार्च |
भारत में कब मनेगी ईद 2026?
भारत में ईद की तारीख स्थानीय रूयत-ए-हिलाल कमेटी की घोषणा पर निर्भर करती है। भारत में रमज़ान की शुरुआत 18-19 फरवरी 2026 को हुई थी। अब 19 मार्च (गुरुवार) की शाम मगरिब के बाद चांद देखा जाएगा। दिल्ली-NCR में शव्वाल का चांद शाम 6:24 से 6:58 बजे के बीच दिखने की उम्मीद है।
भौगोलिक कारणों से भारत में चांद आमतौर पर सऊदी अरब की तुलना में एक दिन बाद दिखता है। यदि 19 मार्च को चांद नज़र आ जाता है, तो भारत में ईद 20 मार्च (शुक्रवार) को मनाई जाएगी। अगर नहीं दिखता, तो 20 मार्च की शाम चांद देखने के बाद ईद 21 मार्च (शनिवार) को होगी।
अंतिम निर्णय स्थानीय चांद देखो कमेटी की आधिकारिक घोषणा के बाद ही होगा।
शुक्रवार और ईद एक साथ — क्या है इस्लामी नियम?
इस बार सऊदी अरब में ईद उल फितर और जुमे की नमाज़ एक ही दिन, 20 मार्च (शुक्रवार) को पड़ रही है। UAE की फतवा काउंसिल ने स्पष्ट किया है कि जिन मुसलमानों ने ईद की नमाज़ पढ़ ली है, उनके लिए जुमे की नमाज़ अनिवार्य नहीं है, हालांकि वे चाहें तो पढ़ सकते हैं। यह एक दुर्लभ और पवित्र संयोग माना जाता है जिसे “अल-जुमुआतैन” कहते हैं।
ईद उल फितर का महत्व और परंपराएं
ईद उल फितर इस्लाम के दो प्रमुख त्योहारों में से एक है। यह पवित्र रमज़ान महीने के समाप्त होने पर मनाई जाती है, जिसमें मुसलमान सूर्योदय से सूर्यास्त तक रोज़ा (उपवास) रखते हैं, नमाज़ पढ़ते हैं और दान-पुण्य करते हैं। ईद के दिन सुबह विशेष ईद की नमाज़ अदा की जाती है।
नमाज़ से पहले “ज़कात उल फितर” यानी फितरा देना ज़रूरी होता है — यह एक धार्मिक दान है ताकि ज़रूरतमंद लोग भी ईद की खुशियों में शामिल हो सकें। इसके बाद घरों में सेवई, खीर और फिरनी जैसी मिठाइयां बनाई जाती हैं। बड़े-बुजुर्ग बच्चों को “ईदी” — नकद पैसे या उपहार — देते हैं। एक-दूसरे को “ईद मुबारक” कहकर गले मिलते हैं।
ईद उल फितर सिर्फ त्योहार नहीं, बल्कि रमज़ान के एक महीने की कड़ी मेहनत, संयम और आत्मशुद्धि का उत्सव है — यह महीने भर की इबादत के पुरस्कार का दिन है।
ईद पर बाहर नमाज़ क्यों नहीं होगी?
इस साल एक महत्वपूर्ण खबर यह भी है कि कुछ मुस्लिम देशों में क्षेत्रीय सुरक्षा संवेदनशीलताओं के कारण खुले मैदानों में ईद की नमाज़ पर रोक लगाई गई है। अधिकारियों ने निर्देश दिया है कि ईद की नमाज़ केवल मस्जिदों के अंदर ही पढ़ी जाएगी। श्रद्धालुओं को सलाह दी गई है कि वे नमाज़ के लिए जल्दी पहुंचें और व्यवस्थित तरीके से प्रवेश करें।
इस्लामी कैलेंडर और चांद का संबंध
इस्लामी हिजरी कैलेंडर पूरी तरह से चंद्र चक्र पर आधारित है। यह ग्रेगोरियन कैलेंडर से लगभग 10-11 दिन छोटा होता है, यही कारण है कि ईद हर साल ग्रेगोरियन तारीखों में थोड़ी पीछे खिसकती है। शव्वाल महीने की शुरुआत नए चांद के दीदार पर निर्भर करती है — यही वजह है कि अलग-अलग देशों में ईद अलग-अलग तारीखों को पड़ सकती है।
अस्वीकरण(Disclaimer):
इस लेख में दी गई ईद की तारीखें खगोलशास्त्रीय गणनाओं और उपलब्ध आधिकारिक घोषणाओं पर आधारित हैं। भारत में अंतिम तारीख स्थानीय चांद देखो कमेटी की घोषणा के बाद ही निश्चित होगी। पाठकों से निवेदन है कि वे अपने स्थानीय धार्मिक संगठन या सरकारी घोषणा की प्रतीक्षा करें।












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