जमशेदपुर का वायरल बॉय ‘धूम’: सोशल मीडिया पर छाया देसी टैलेंट

जमशेदपुर का वायरल बॉय 'धूम': इंटरनेट सेंसेशन से पुनर्जीवन तक की कहानी

जमशेदपुर: सोशल मीडिया की दुनिया में कब, कौन और कैसे स्टार बन जाए—यह कहना मुश्किल है। “धूम” जमशेदपुर का वायरल बॉय इन दिनों सोशल मीडिया में अपने देशी अंदाज में कृष मूवी के गाने “दिल न दिया …दिल न लिया … ले बेट्टा” से वायरल हो रहा है। धूम आज कल सोशल मीडिया में सच में धूम मचा रहा है। देश भर के ब्लॉगर , यूट्यूबर और दूसरे क्रिएटर्स धूम को फ्रेम में रख कर खूब शॉर्ट्स बनाकर वायरल कर रहे हैं। कुछ क्रिएटर्स उनकी हालत को देखते हुए  मदद को भी आगे आ रहे हैं। आइये धूम की वायरल दुनिया से रूबरू होते हैं।

Viral Boy Dhoom कौन है?

जिस लड़के को दुनिया ‘Viral Boy Dhoom‘ के नाम से जानती है, उसकी उम्र 32 साल है। उसकी शारीरिक स्थिति इस कदर है कि वह 16-18 साल का लड़का दिखाई देता है। वह झारखण्ड राज्य के बागबेड़ा थाना, जमशेदपुर (टाटा) के एक बस्ती का रहने वाला है। उसका मुख्य व्यवसाय कचरा/कूड़ा बीनना है। वह दिन-भर नशे में डूबा रहता है, इसलिए ज्यादातर वायरल वीडिओज़ में आपको हिलता डुलता दिख जायेगा।

वायरल बॉय धूम का असली नाम क्या है?

वायरल बॉय धूम का असली नाम पिंटू है, एक Viral Video में वह खुद ही बताता है जिसे यहाँ quote किया जा रहा है,

मेरा असली नाम है पिंटू, टाइटल है पिंटू प्रसाद, मगर मेरा नाम रख दिया शुरू से धूम

उसी वीडियो में जब उससे पूछा जाता है की

आपका नाम धूम किसने रखा ?

तो जवाब में कहता है,

मेरे को पुलिस पकड़कर ले जा रहा था जेल, बागबेड़ा थाना का, तो हम का किये न! अपना बस्ती का राम नगरे से चलती कार से कूदक गए, कूदक के जो रेस लगाए न की ये लोग हमको पकड़ नहीं पाए। इसी लिए मेरा नामे रख दिया धूम ”.

कृष का सुनेगा गाना“(Krish Ka Sunega Gana)

सोशल मीडिया पर एक सा्धारण सा वीडियो वायरल हो रहा है जिसमें एक युवा लड़का, नशे में मस्त, हिलते-डुलते बार-बार दोहराता दिख रहा है – “कृष का सुनेगा गाना (Krish Ka Sunega Gana)”। ये वही शब्द है जो सोशल मीडिया पर आग की तरह फैल गया और एक कचरा बीनने वाले साधारण से लड़के को रातोंरात स्टार बना दिया। इंस्टाग्राम रील्स से लेकर टिकटॉक, यूट्यूब शॉर्ट्स से लेकर डीजे रिमिक्स तक हर जगह यही आवाज गूंजने लगी।

इस वायरल सनसनी के पीछे की कहानी केवल मजेदार नहीं बल्कि यह एक ऐसी कहानी है जो समाज के दिल को छू जाती है। यह एक ऐसे युवा की कहानी है जो गरीबी की दलदल में फंसा हुआ है, नशे की बेड़ियों में जकड़ा हुआ है, और जिसका फायदा उठाते हुए लोग अपने वायरल वीडियो बना रहे हैं।

धूम की पारिवारिक पृष्ठभूमि

धूम (पिंटू) के माता-पिता का नाम पार्वती (माँ) और ओम प्रकाश (पिता) है। लेकिन दुर्भाग्यवश, पिंटू ने अपनी जिंदगी का एक बड़ा हिस्सा माता-पिता के बिना गुजारा है। धूम खुद ही बताता है की उसके माता पिता अब इस दुनिया में नहीं है। जिसका कोई नहीं उसका भगवान होता है।

हालांकि एक वायरल वीडियो में उसके माता-पिता और उसके छोटे भाई को दिखाया गया है। वे दावा करते है की धूम उसी का बेटा है और वह झूट बोल रहा है।

जमशेदपुर के कचरे के ढेर में रहने वाला यह नौजवान न तो किसी का बेटा है अब, और न ही कोई उसका है।

दर्दनाक जीवन की शुरुआत: बचपन से ही नशे की कालिमा

धूम की जीवन कथा बेहद दर्दनाक है। उसने एक साक्षात्कार में खुद अपनी दर्द भरी कहानी बताई। बचपन में उसके माता-पिता उसे “पानी” कहकर शराब पिलाते थे। भोलेपन में वह इसे पानी समझकर पी लेता था। धीरे-धीरे, यह आदत एक लत में बदल गई। जब वह बड़ा हुआ, तब तक नशे की जंजीर उसे पूरी तरह बांध चुकी थी।

धूम के अनुसार उसके माता-पिता के निधन के बाद, वह अकेला पड़ गया। कोई संरक्षक नहीं, कोई सहारा नहीं। वह जमशेदपुर की गलियों में भटकने लगा, कचरे के ढेर से कुछ पैसे कमाते हुए, अपनी अधूरी इच्छाओं को शराब में डुबोते हुए।

धूम के वायरल होने की कहानी

कैसे ‘Krish Ka Sunega Gana’ सोशल मीडिया का सनसनी बन गया?

वैसे तो धूम काफी पहले से फेमस है लेकिन जमशेदपुर में कंटेंट क्रिएटर्स की भीड़ ने उसे दिसंबर 2025 में देश के लगभग हर मोबाइल स्क्रीन तक पंहुचा दिया। दिसंबर 2025 की शुरुआत में, एक वीडियो सोशल मीडिया पर साझा किया गया। इसमें एक युवा, हमारा धूम, कचरे के बीच बैठा था और बार-बार एक वाक्य दोहरा रहा था “कृष का सुनेगा गाना …कृष का”। एक अन्य युवा कैमरे के पीछे था, जो धूम को यह वाक्य बार-बार कहने के लिए कह रहा था। धूम की भोली-भाली प्रतिक्रिया और उसकी सहज अदाएं इस वीडियो को विषय दिष्टिकोण से मजेदार बना गईं।

धूम की लोकप्रियता के पीछे कई वजहें हैं—

  • नेचुरल एक्सप्रेशंस: बिना बनावट के, दिल से किया गया परफॉर्मेंस
  • देसी स्वैग: सादगी में छुपा आत्मविश्वास
  • रिलेटेबल कंटेंट: आम जीवन की झलक, जिससे लोग खुद को जोड़ पाते हैं
  • शॉर्ट वीडियो फॉर्मेट: रील्स और शॉर्ट्स के लिए परफेक्ट

यही कारण है कि उसके वीडियो फेसबुक, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर लगातार शेयर हो रहे हैं।

डीजे रिमिक्स से लेकर राष्ट्रीय ट्रेंड तक

वह वीडियो अभूतपूर्व गति से वायरल हुआ। संगीतकारों ने इसे डीजे रिमिक्स में बदला। भारत के बड़े-बड़े शहरों—मुंबई, दिल्ली, लखनऊ, पटना, बनारस—के क्लबों में लोग “Krish Ka Sunega Gana” सुनने लगे। यूट्यूब शॉर्ट्स, इंस्टाग्राम रील्स, टिकटॉक – हर प्लेटफॉर्म पर यही ट्रेंड चलने लगा।

साथ ही, धूम का एक और प्रसिद्ध डायलॉग सुर्खियों में आया  “Le Beta” और भावुक संवाद “Dil Na Diya, Dil Na Liya”। ये लाइनें भी लाखों लोगों के मुँह में आ गईं।

वायरल होने का आंकड़े:

  • मिलियन व्यूज और शेयर्स
  • भारत के शीर्ष क्लबों में ट्रेंडिंग
  • लाखों मीम्स और कंटेंट वैरिएशन
  • असंख्य डीजे ऐरेंजमेंट

अंधेरी सच्चाई: वायरलिटी का अभिशाप

कंटेंट क्रिएटर्स का शोषण और नशे में गहराई

जो चीज शुरुआत में एक मजेदार वायरल मोमेंट लग रही थी, वह जल्द ही एक दुःखद सच्चाई में बदल गई। हजारों कंटेंट क्रिएटर्स धूम के पास पहुंचने लगे। किसी को अपने वीडियो में उसके साथ शूटिंग करनी थी, किसी को उससे कोई विशेष डायलॉग करवाना था। कभी कभी वह इतना गुस्सा और मानसिक रूप से इतना टॉर्चर हो जाता है की गाली गलौज करने लगता है, जमीन पर लेट जाता है, कभी कहता है “मछली की तरह हम तुमलोग के जाल में फंस गए हैं”

सबसे ज्यादा चिंताजनक तथ्य यह है कि कुछ कॉन्टेंट क्रिएटर्स ने जो पैसे धूम को दिए, वह उसके नशे को और गहरा करने लगे। कुछ सौ रुपये, कुछ हजार रुपये—यह सब पैसा सीधे शराब और ड्रग्स में चला जाता था। कोई नहीं सोचता था कि इस लड़के को नशे की कालकोठरी से कैसे निकाला जाए। कोई नहीं पूछता था कि इसके भविष्य का क्या होगा।

अस्तित्व फाउंडेशन के संस्थापकों ने बाद में कहा:

“बहुत से लोगों ने धूम को थोड़े-थोड़े पैसे दिए, बस अपने वीडियो के लिए। लेकिन वह पैसा उसे शराब की ओर धकेल रहा था। कोई नहीं सोचता था कि इसके स्वास्थ्य का क्या होगा, इसकी जिंदगी का क्या होगा। अगर हमने समय पर कदम न उठाते, तो यह लड़का शायद जीवित न रहता।”

अस्तित्व फाउंडेशन का प्रयास

नशा मुक्ति केंद्र में आगमन: दूसरी जिंदगी की शुरुआत

धूम के वायरल होने के कुछ हफ्तों बाद, एक सुखद समाचार आया। जमशेदपुर का प्रसिद्ध चैरिटी संगठन ‘अस्तित्व फाउंडेशन’ धूम की मदद के लिए आगे आया।

अस्तित्व फाउंडेशन की टीम धूम को पुनर्वास केंद्र में लाई। लेकिन पहली बार, उन्होंने सही तरीका अपनाया। कानूनी प्रक्रिया के अनुसार, उन्होंने पहले बागबेड़ा थाने से अनुमति ली, फिर धूम को रिहैबिलिटेशन सेंटर लाए।

धूम की स्वीकृति और पहली बार की उम्मीद

शुरुआत में धूम ने फाउंडेशन की मदद लेने से इनकार कर दिया। उसने कहा कि वह अपने काम (कचरा बीनना) के बिना रह नहीं सकता। लेकिन धीरे-धीरे, वह समझ गया कि लोग उसकी मदद चाहते हैं।

सामाजिक दायित्व और सीख:

‘Dhoom’ की कहानी से समाज को क्या सीखना चाहिए?

इंटरनेट की दोहरी धार: प्रसिद्धि बनाम दायित्व

धूम की कहानी हमें एक महत्वपूर्ण सवाल उठाती है: क्या इंटरनेट की मशहूरी जिंदगी बदलती है, या और भी बर्बाद करती है?

वायरल होना अपने आप में कोई बुरी बात नहीं है। लेकिन जब वायरलिटी किसी गरीब, असहाय, और नशे में जकड़े व्यक्ति का होता है, तो वह एक सामाजिक अपराध बन जाता है। इंटरनेट के युग में, हमें यह समझना होगा कि:

  1. प्रत्येक वीडियो के पीछे एक इंसान है: जब आप किसी को ‘चहकते हुए’ देख रहे हैं, उस समय वह शायद कमजोर, भूखा, और दर्द में हो।
  2. शेयर करना = दायित्व लेना: जब आप किसी वीडियो को शेयर करते हैं, तो आप अप्रत्यक्ष रूप से उस व्यक्ति के जीवन को प्रभावित कर रहे हैं।
  3. सहानुभूति से अधिक कार्रवाई चाहिए: कंटेंट क्रिएटर्स को केवल व्यूज के लिए नहीं, बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी के साथ काम करना चाहिए।

समाज की भूमिका: गरीबों और बेसहारों के लिए

धूम की कहानी साफ करती है कि:

  • हर गरीब को बचाने की जिम्मेदारी सिर्फ सरकार की नहीं है।
  • स्थानीय समुदाय, चैरिटी संगठन, और जागरूक नागरिकों को भी आगे आना चाहिए।
  • नशे से लड़ना एक व्यक्तिगत नहीं, बल्कि सामाजिक समस्या है।

निष्कर्ष: आशा की एक किरण

जमशेदपुर के इस 32 साल के नौजवान की कहानी सिर्फ एक वायरल सनसनी नहीं है। यह एक ऐसी कहानी है जो:

  1. एक व्यक्ति के पुनर्जीवन की संभावना दिखाती है
  2. समाज की दायित्वशीलता को जागृत करती है
  3. इंटरनेट के उपयोग के बारे में गहरे सवाल उठाती है
  4. मानवीय गरिमा की जीत का प्रतीक है

धूम जब कचरे के ढेर में बैठकर “Krish Ka Sunega Gana” गा रहा था, तब शायद वह नहीं जानता था कि एक दिन पूरी दुनिया उसे सुनेगी। लेकिन जब उसे असली मदद मिली, तब उसने समझा कि सच्ची मशहूरी उपहार नहीं, दायित्व है।

आज, जब धूम अस्तित्व फाउंडेशन में अपने पुनर्निर्माण के रास्ते पर है, तब हर एक को इस बात को समझना चाहिए:

सोशल मीडिया पर जो कुछ भी आप देख रहे हैं, वह हकीकत नहीं हो सकता। असली हकीकत तब है, जब आप किसी को मदद देते हैं—बिना कैमरे के, बिना लाइक्स के, बिना शेयर्स के।


Viral Boy Dhoom Death News - पिंटू प्रसाद धूम जीवित हैं - वायरल मौत की खबर झूठ है
Fact Check – Death news of viral boy Dhoom
IPS Tadasha Mishra - The first woman regular DGP in the history of Jharkhand state.
IPS Tadasha Mishra apointed regular DGP of Jharkhand

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