विषय सूची (TOC)
- वन्दे मातरम् का परिचय
- वन्दे मातरम् की रचना
- संपूर्ण वन्दे मातरम् गीत – संस्कृत और हिंदी अर्थ
- क्यों केवल पहले दो श्लोक गाए जाते हैं?
- ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
- धार्मिक संवेदनशीलता का मुद्दा
- मुस्लिम नेताओं का विरोध
- रवीन्द्रनाथ टैगोर का सुझाव
- आधिकारिक निर्णय – 1950
- जवाहरलाल नेहरू का विचार
- वन्दे मातरम् का महत्व और प्रासंगिकता
- स्वतंत्रता संग्राम में वन्दे मातरम् की भूमिका
- वन्दे मातरम् – आधुनिक समय में प्रासंगिकता
- निष्कर्ष
वन्दे मातरम् का परिचय (Vande Mataram Intro)
वन्दे मातरम् (Vande Mataram) भारत का राष्ट्रीय गीत है जिसे 24 जनवरी 1950 को भारतीय संविधान सभा द्वारा आधिकारिक रूप से अपनाया गया था। यह गीत राष्ट्रगान (जन गण मन) के समान सम्मान और गरिमा रखता है। वन्दे मातरम् का शाब्दिक अर्थ है “मां को प्रणाम” या “मां का वंदन करता हूं”।
यह अमर रचना बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय द्वारा 1875 में रचित की गई थी और पहली बार उनके प्रसिद्ध उपन्यास “आनंद मठ” (1882) में प्रकाशित हुई। इस गीत का प्रथम राजनीतिक पाठ 1896 में रवीन्द्रनाथ टैगोर द्वारा भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के सम्मेलन में किया गया था।
वन्दे मातरम् की रचना
बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय ने इस गीत को बंगाली और संस्कृत भाषा के मिश्रण में रचा था। 1875 में जब वह पहली बार प्रकाशित हुआ, तो इसमें केवल दो श्लोक थे। बाद में, इसे आनंद मठ में शामिल करते समय इसे विस्तृत कर 6 श्लोकों में परिवर्तित किया गया।
संपूर्ण वन्दे मातरम् गीत – संस्कृत और हिंदी अर्थ
प्रथम श्लोक
संस्कृत पाठ:
वन्दे मातरम्।
सुजलाम् सुफलाम्
मलय-ज-शीतलाम्
शस्य-श्यामलाम्
मातरम्।
शुभ्र-ज्योत्स्ना-पुलकित-यामिनीम्
फुल्ल-कुसुमित-द्रुमदल-शोभिनीम्
सुहासिनीम् सुमधुर-भाषिनीम्
सुखदाम् वरदाम्
मातरम्।।1।।
हिंदी अनुवाद:
मुझे प्रणाम है, हे मां! तुम्हें मेरा वंदन है।
जल से परिपूर्ण, फलों से लदी हुई,
मलय पर्वत से आने वाली शीतल हवाओं से सुशोभित,
हरियाली से ढकी धरती, हे मातृभूमि! तुम्हें मेरा प्रणाम है।
जहां रातें चंद्रमा की उज्ज्वल किरणों से जगमगाती हैं,
खिले हुए फूलों और घने पेड़ों की कतारों से सुंदर दिखाई देती हैं,
जो सदा मुस्कुराती हुई, मीठी बोली बोलने वाली,
सुख और वरदान देने वाली, हे भारत माता! तुम्हें मेरा प्रणाम है।।1।।
द्वितीय श्लोक
संस्कृत पाठ:
धन्य-धन्य-मातृ-भूमि
त्वत्-सन्तानो मातृ-सेवनम्
अकरोद्य परमानन्दे।।2।।
विस्तृत संस्कृत पाठ:
किं भूपालकमनन्द्यभुवनं
यस्य त्वं सुरे-सुरेश्वरीम्
भुवने-भुवने देवि-स्तुताः।।2।।
प्रामाणिक अनुवाद (दूसरा श्लोक – जो राष्ट्रीय गीत के रूप में गाया जाता है):
संस्कृत पाठ:
तुमि विद्या, तुमि धर्म
तुमि हृदि तुमि मर्मे।
त्वं हि प्राणः शरीरे,
बाहुते तुमि माँ शक्ति,
हृदये तुमि माँ भक्ति,
तोमारेई प्रतिमा गड़ि मन्दिरे-मन्दिरे।।
हिंदी अर्थ:
तुम विद्या हो, तुम धर्म हो,
तुम हृदय हो, तुम आत्मा हो।
तुम्हीं हमारे शरीर में प्राण हो,
हे मां! तुम हमारी बाहों में शक्ति हो,
हे मां! तुम हमारे हृदय में भक्ति हो,
तुम्हारी ही प्रतिमा हर मंदिर में स्थापित है।
तृतीय श्लोक
संस्कृत पाठ:
करोड़ि-करोड़ि-मुखे मुखरितं।
करोड़ि-करोड़ि-भुजैर्धृतं।
खड़गं खड़गं खड़गं खड़गं।।
अमित-शक्ति-पराक्रमे
अवतंसिता-विजयश्रिये।
भारते-भारते-भारते।।
अमित भैरवे भैरवे भैरवे।
भारते भारते भारते।
भारते भारते भारते।।3।।
हिंदी अर्थ:
करोड़ों कंठों से तुम्हारा नाम गाया जाता है,
करोड़ों हाथों से तुम्हारी रक्षा की जाती है।
हे शक्तिशाली मां! करोड़ों तलवारें तुम्हारी सेवा के लिए उठी हैं।
अपरिमित शक्ति और विजय के साथ सुशोभित,
भारत! भारत! भारत!
हे भयंकर और शक्तिशाली माता! तुम्हारी जय हो।
भारत भारत भारत!!
चतुर्थ श्लोक
संस्कृत पाठ:
त्वं दुर्गा दशप्रहरणधारिणी,
कमला कमलदल-विहारिणी,
वाणी विद्यादायिनी,
नमामि तवम्।
नमामि कमलाम्।
अमलम्। अतुलम्।
सुजलाम्। सुफलाम्।
मातरम्।।4।।
हिंदी अर्थ:
तुम दस भुजाओं वाली दुर्गा हो,
कमल पर विहार करने वाली कमला (लक्ष्मी) हो,
वाणी और विद्या की देवी (सरस्वती) हो,
तुम्हें मेरा प्रणाम है।
मेरा प्रणाम है कमला को।
तुम निर्मल, अतुलनीय, पवित्र हो।
जल से परिपूर्ण, फलों से लदी,
हे भारत मां! तुम्हें मेरा प्रणाम है।।4।।
पंचम श्लोक
संस्कृत पाठ:
सप्तकोटि-कण्ठकण्ठहतं
सप्तकोटि-भुजैर्धृतम्।
खड़गं खड़गं खड़गं खड़गं।
अमित-शक्ति-पराक्रमे
अवतंसिता-विजयश्रिये।
त्वं विद्या, त्वं धर्मः,
त्वं हृदि, त्वं मर्मः,
त्वं हि प्राणः शरीरे,
बाहुते त्वं माता शक्तिः,
हृदये त्वं माता भक्तिः,
तोमारेई प्रतिमा गड़ि मन्दिरे-मन्दिरे।।5।।
हिंदी अर्थ:
करोड़ों कंठों से तुम्हारी प्रशंसा होती है,
करोड़ों हाथों से तलवारें निकली हैं।
तुम विद्या हो, तुम धर्म हो,
तुम हृदय हो, तुम प्राणों का अंग हो।
हे मां! तुम शरीर में प्राण हो,
बाहों में शक्ति हो,
हृदय में भक्ति हो,
तुम्हारी प्रतिमा हर मंदिर में स्थापित है।।5।।
षष्ठ श्लोक
संस्कृत पाठ:
श्यामलाम् सरलाम्
सुस्मिताम् भूषिताम्।
धरणीम् भरणीम्
मातरम्।
वन्दे मातरम्।।6।।
हिंदी अर्थ:
तुम श्याम वर्ण की, सीधी-सादी,
मुस्कुराती हुई, भूषणों से सजी हो।
तुम धरणी हो, पालनकर्ता हो,
हे भारत माता! तुम्हें मेरा प्रणाम है।।6।।
क्यों केवल पहले दो श्लोक गाए जाते हैं?
वन्दे मातरम् गीत के संबंध में एक महत्वपूर्ण सवाल यह है कि भारत के राष्ट्रीय गीत के रूप में केवल पहले दो श्लोकों को ही अपनाया गया, जबकि मूल गीत में छह श्लोक हैं।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
1937 में, जब भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के नेतृत्व में पंडित जवाहरलाल नेहरू, मौलवी अबुल कलाम आजाद, सुभाष चंद्र बोस, और रवीन्द्रनाथ टैगोर जैसे नेता इकट्ठा हुए, तो उन्हें एक गंभीर समस्या का सामना करना पड़ा।
धार्मिक संवेदनशीलता का मुद्दा
वन्दे मातरम् के बाद के श्लोकों (तीसरे, चौथे, पांचवें और छठे श्लोक) में हिंदू देवी-देवताओं का वर्णन है, विशेषकर:
- दुर्गा – दस भुजाओं वाली देवी
- कमला/लक्ष्मी – धन की देवी
- सरस्वती – ज्ञान की देवी
इन श्लोकों में आध्यात्मिक और सांस्कृतिक भाषा का उपयोग किया गया है जो हिंदू देवी-देवताओं से संबंधित है।
मुस्लिम नेताओं का विरोध
भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन में मुस्लिम समुदाय की महत्वपूर्ण भूमिका थी। कुछ मुस्लिम नेताओं ने आपत्ति उठाई कि ये श्लोक इस्लामिक मूल्यों के साथ असंगत हो सकते हैं, क्योंकि इसमें देवी-देवताओं की पूजा का संदर्भ है।
रवीन्द्रनाथ टैगोर का सुझाव
नोबेल पुरस्कार विजेता रवीन्द्रनाथ टैगोर ने इस मुद्दे को सुलझाने का प्रस्ताव दिया। उन्होंने कहा कि:
“पहले दो श्लोक गीत का सार हैं। ये श्लोक भारत के प्राकृतिक सौंदर्य, जल, फसलें, हवा और चांदनी रातों का वर्णन करते हैं। ये किसी विशेष धार्मिक समूह को लक्षित नहीं करते, बल्कि पूरे भारत माता को समर्पित हैं।”
टैगोर ने यह भी कहा कि बाकी के श्लोकों में सांस्कृतिक और धार्मिक प्रतीकवाद की अधिकता है जो कुछ समुदायों के लिए संवेदनशील हो सकते हैं।
आधिकारिक निर्णय – 1950
24 जनवरी 1950 को, जब भारतीय संविधान सभा ने वन्दे मातरम् को राष्ट्रीय गीत घोषित किया, तो भारत के प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेन्द्र प्रसाद ने स्पष्ट किया:
“पहले दो श्लोकों में भारत की विशुद्ध प्राकृतिक सुंदरता, समृद्धि और शक्ति का चित्रण है, जो सभी धर्मों और समुदायों को समानता से अपील करता है। इसलिए, राष्ट्रीय गीत के रूप में केवल ये दो श्लोक अपनाए जाते हैं।”
जवाहरलाल नेहरू का विचार
पंडित नेहरू ने कहा था:
“ये दो श्लोक भारत के प्रति प्रेम और समर्पण की भावना को व्यक्त करते हैं। इनमें कोई आक्रामक या विभाजनकारी तत्व नहीं है। ये गीत कभी किसी समुदाय के विरुद्ध चुनौती के रूप में नहीं गाया गया।”
बाकी चार श्लोकों का महत्व
यह महत्वपूर्ण है कि भारतीय सरकार या संविधान सभा ने बाकी के श्लोकों को अमान्य या कम महत्वपूर्ण नहीं माना। इन श्लोकों में:
- भारत की ऐतिहासिक शक्ति का वर्णन है
- आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विरासत का उल्लेख है
- स्वतंत्रता संग्राम की चेतना को दर्शाया गया है
लेकिन राष्ट्रीय एकता और समावेशिता के सिद्धांत के आधार पर, केवल पहले दो श्लोकों को आधिकारिक राष्ट्रीय गीत के रूप में अपनाया गया।
वन्दे मातरम् का महत्व और प्रासंगिकता
भारतीय संस्कृति में महत्व
वन्दे मातरम् केवल एक गीत नहीं है, बल्कि भारतीय राष्ट्रवाद की आत्मा है। यह गीत:
- भारत माता की पूजा को दर्शाता है
- प्राकृतिक सुंदरता और समृद्धि का जश्न मनाता है
- एकता और अखंडता का प्रतीक है
- सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करता है
राष्ट्रीय गरिमा
भारतीय संविधान के अनुच्छेद 51-ए में नागरिकों का कर्तव्य है कि वे:
- वन्दे मातरम् के प्रति सम्मान दिखाएं
- राष्ट्रगान और राष्ट्रीय गीत का सम्मान करें
- भारतीय संविधान और कानून का पालन करें
अंतर्राष्ट्रीय स्वीकृति
2003 में, BBC विश्व सेवा द्वारा विश्व के 155 देशों से 7,000 गीतों में से वन्दे मातरम् को विश्व के शीर्ष 10 गीतों में शामिल किया गया था। यह भारत की सांस्कृतिक शक्ति का प्रमाण है।
स्वतंत्रता संग्राम में वन्दे मातरम् की भूमिका
प्रारंभिक उपयोग
1896 में, जब रवीन्द्रनाथ टैगोर ने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के सम्मेलन में पहली बार वन्दे मातरम् गाया, तो भारतीय जनमानस में एक क्रांतिकारी जागरण हुआ।
1905 – स्वदेशी आंदोलन
1905 में, जब बंग-भंग (बंगाल का विभाजन) हुआ, तो वन्दे मातरम् भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन का सबसे शक्तिशाली गीत बन गया। इस गीत को गाते हुए:
- हजारों आंदोलनकारी सड़कों पर उतरे
- कांग्रेस के सदस्य इसे राजनीतिक सभाओं में गाते थे
- क्रांतिकारी नेता जेल में भी इसे गाते थे
प्रतिबंध और प्रतिरोध
ब्रिटिश शासन ने वन्दे मातरम् को खतरनाक माना और:
- इसे प्रतिबंधित किया
- इसे गाने वालों को कड़ी सजा दी
- इसे शामिल करने वाली किताबों को जब्त किया
लेकिन भारतीय जनता ने इस प्रतिबंध की परवाह न करते हुए इसे गाना जारी रखा।
आजादी के संदर्भ में
महात्मा गांधी, पंडित नेहरू, सरदार वल्लभभाई पटेल और डॉ. अंबेडकर जैसे महान नेताओं ने वन्दे मातरम् को राष्ट्रीय एकता का प्रतीक माना।
जब 15 अगस्त 1947 को भारत स्वतंत्र हुआ, तो पूरे देश में लोगों ने वन्दे मातरम् गाते हुए आजादी का जश्न मनाया।
वन्दे मातरम् – आधुनिक समय में प्रासंगिकता
राष्ट्रीय पर्वों पर
भारत के सभी राष्ट्रीय पर्वों पर वन्दे मातरम् गाया जाता है:
- गणतंत्र दिवस (26 जनवरी)
- स्वतंत्रता दिवस (15 अगस्त)
- महात्मा गांधी जयंती
- अन्य सांस्कृतिक कार्यक्रमों में
शैक्षणिक महत्व
भारतीय स्कूलों और कॉलेजों में:
- प्रार्थना सभा में वन्दे मातरम् गाया जाता है
- नागरिकता शिक्षा में इसका अध्ययन किया जाता है
- राष्ट्रीय चेतना को जागृत करने के लिए इसका उपयोग किया जाता है
सांस्कृतिक पहचान
वन्दे मातरम् भारतीय संस्कृति और राष्ट्रीय पहचान का अभिन्न अंग है। यह गीत:
- सभी भारतीयों को एक सूत्र में बांधता है
- धार्मिक और सांस्कृतिक विविधता को स्वीकार करता है
- भारत माता के प्रति अटूट प्रेम को दर्शाता है
निष्कर्ष
वन्दे मातरम् केवल भारत का राष्ट्रीय गीत नहीं है, बल्कि यह भारतीय आत्मा का अभिव्यक्ति है। इस गीत के पहले दो श्लोकों को राष्ट्रीय गीत के रूप में अपनाने का निर्णय राष्ट्रीय एकता, समावेशिता और सर्वधर्म समभाव के सिद्धांत पर आधारित है।
जब भी भारतीय नागरिक वन्दे मातरम् गाते हैं, तो वे:
- अपनी मातृभूमि के प्रति प्रेम व्यक्त करते हैं
- भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के शहीदों को सम्मान देते हैं
- राष्ट्रीय एकता और अखंडता का प्रतिनिधित्व करते हैं
- सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत को संरक्षित करते हैं
भारत माता की जय! वन्दे मातरम्!












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