वॉशिंगटन : अमेरिकी सर्वोच्च न्यायालय ने ट्रंप के आपातकालीन शक्तियों के तहत लगाए गए टैरिफ पर आज निर्णय जारी नहीं किया। विश्व अर्थव्यवस्था और भारत सहित सभी व्यापारिक भागीदारों के लिए यह फैसला महत्वपूर्ण है।
अमेरिकी सर्वोच्च न्यायालय ने शुक्रवार, 9 जनवरी 2026 को राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के विवादास्पद टैरिफ मामले में अपना ऐतिहासिक फैसला जारी नहीं किया। न्यायालय ने अपने नियमित राय जारी करने के दिन को लेकर आगे बढ़ते हुए यह निर्णय स्थगित कर दिया है। इस निर्णय से विश्व अर्थव्यवस्था और व्यापारिक समुदाय को बड़ा झटका लगा है, क्योंकि यह मामला $150 बिलियन (लगभग 12.5 लाख करोड़ रुपये) से अधिक की राशि को प्रभावित कर सकता है।
क्या है यह विवादास्पद मामला?
ट्रंप प्रशासन ने 1977 के अंतर्राष्ट्रीय आपातकालीन आर्थिक शक्ति अधिनियम (International Emergency Economic Powers Act – IEEPA) का उपयोग करते हुए विभिन्न देशों पर व्यापक टैरिफ लागू किए हैं। यह कानून राष्ट्रीय आपातकाल के दौरान राष्ट्रपति को विशेष शक्तियां प्रदान करता है। ट्रंप ने इसी आधार पर दुनिया भर के व्यापारिक भागीदारों पर देश-विशेष टैरिफ लागू किए हैं।
भारत को इसका विशेष प्रभाव:
भारत को विशेषकर कठोर टैरिफ का सामना करना पड़ रहा है। भारत के 87 बिलियन डॉलर ($87B) के निर्यात में से लगभग 55 प्रतिशत जोखिम में है, विशेषकर वस्त्र, रत्न-जवाहरात, चमड़ा और रासायनिक उद्योग प्रभावित हैं। भारत के रूसी तेल की खरीद से जुड़े 25% अतिरिक्त शुल्क लगाए गए हैं। इससे भी गंभीर, एक नए प्रस्तावित विधेयक के तहत भारत को 500% तक के टैरिफ का सामना करना पड़ सकता है।
न्यायालय के तर्क और विरोधाभास
निचली अदालतों ने पहले ही 2025 में यह निर्णय दिया था कि ये टैरिफ गैरकानूनी तरीके से लागू किए गए थे। हालांकि, अदालतों ने आयात कर को लागू रहने दिया है जबकि ट्रंप प्रशासन सर्वोच्च न्यायालय में अपील दायर करता है।
मुख्य विधिक प्रश्न:
न्यायालय के समक्ष मुख्य प्रश्न यह है कि क्या राष्ट्रपति को IEEPA के तहत इतनी व्यापक और देश-विशेष टैरिफ लागू करने की शक्ति है। IEEPA के पाठ में स्पष्ट रूप से टैरिफ का उल्लेख नहीं है, और किसी भी पूर्व राष्ट्रपति ने इसे इस तरीके से कभी उपयोग नहीं किया है।
5 नवंबर 2026 को मौखिक तर्क के दौरान, न्यायालय के रूढ़िवादी और उदारवादी दोनों सदस्यों ने इस विषय पर संदेह व्यक्त किया था। कुछ दांव लगाने वाले बाजारों (Kalshi और Polymarket) में ट्रंप के पक्ष में निर्णय की संभावना मात्र 23-31% थी। यह सुझाव देता है कि न्यायालय ट्रंप प्रशासन के खिलाफ फैसला दे सकता है।
आर्थिक प्रभाव और बकाया राशि
कंपनियों ने दिसंबर 14, 2025 तक IEEPA-आधारित टैरिफ में अनुमानित $133.5 बिलियन का भुगतान किया है, जो अब $150 बिलियन के करीब माना जाता है। यह राशि सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर निर्भर करती है।
रिफंड का सवाल:
900 से अधिक मुकदमे अब अमेरिकी अंतर्राष्ट्रीय व्यापार न्यायालय में लंबित हैं, जिनमें 1,000 से अधिक प्रतिवादी शामिल हैं, टैरिफ रिफंड की मांग कर रहे हैं। यदि सुप्रीम कोर्ट ट्रंप के खिलाफ फैसला करता है, तो ये कंपनियां बड़ी मात्रा में धनवापसी के लिए पात्र हो सकती हैं।
अगला कदम और समय सारणी
सर्वोच्च न्यायालय ने निर्णय में तेजी देने का वादा किया है, और इसके आने वाले दो सप्ताहों में अधिक राय जारी करने की संभावना है। यदि इस सप्ताह निर्णय नहीं आता है, तो वह महीने के अंत तक आने की उम्मीद है।
वैश्विक अर्थव्यवस्था पर असर
संयुक्त राष्ट्र की 2026 की विश्व स्थिति और संभावना रिपोर्ट के अनुसार, वैश्विक अर्थव्यवस्था 2026 में 2.7% की दर से बढ़ेगी, जो 2025 के अनुमानित 2.8% से कम है। ट्रंप के टैरिफ का प्रभाव 2026 में अधिक स्पष्ट होगा। विश्व व्यापार में वृद्धि 2025 के 3.8% से घटकर 2026 में 2.2% तक सिकुड़ने की उम्मीद है।
क्षेत्रीय प्रभाव:
चीन, जो टैरिफ का मुख्य लक्ष्य है, की विकास दर 4.9% से घटकर 4.6% हो जाने की उम्मीद है। यूरोपीय संघ और जापान जैसे अमेरिकी सहयोगी भी अपनी वृद्धि दर में मामूली गिरावट देख रहे हैं।
ट्रंप प्रशासन की रणनीति
यदि सुप्रीम कोर्ट ट्रंप के खिलाफ फैसला करता है, तो विश्लेषकों का मानना है कि प्रशासन कुछ दिनों में अन्य कानूनों का उपयोग करके टैरिफ को पुनः लागू कर सकता है। व्यापार अधिनियम 1974 की धारा 301 और 122, और 1962 के व्यापार विस्तार अधिनियम की धारा 232 का उपयोग किया जा सकता है। ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट ने आश्वस्त किया है कि सुप्रीम कोर्ट ट्रंप के पक्ष में फैसला देगा, साथ ही यह भी कहा है कि यदि आवश्यक हो तो प्रशासन अन्य तरीकों से टैरिफ को बनाए रख सकता है।
भारत की रणनीति
भारत ने इन टैरिफ की निंदा की है और राजनयिक हल की मांग की है। दोनों देशों के बीच व्यापार वार्ता चल रही है, और एक समझौते की उम्मीद अगले महीने तक है। भारत अपनी कृषि सुरक्षा का बचाव कर रहा है, क्योंकि लाखों छोटे किसानों के आजीविका पर निर्भरता है।
व्यापारिक समुदाय की तैयारी
कानूनी फर्मों और व्यापार संगठन अलग-अलग परिदृश्यों के लिए तैयारी कर रहे हैं। कंपनियां अपने IEEPA-आधारित टैरिफ जोखिम को समझ रही हैं और संभावित रिफंड प्रक्रियाओं का विश्लेषण कर रही हैं।
निष्कर्ष: एक अनिश्चित भविष्य
ट्रंप के टैरिफ पर सुप्रीम कोर्ट का निर्णय वैश्विक व्यापार, भारतीय निर्यात और अंतर्राष्ट्रीय आर्थिक संबंधों के लिए एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित होगा। जबकि निर्णय में देरी अनिश्चितता को बढ़ाता है, विश्लेषकों का मानना है कि अगले दो सप्ताहों में स्पष्टता आ सकती है। अब तक, विश्व भारत, चीन, ईयू और अन्य प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं के साथ वैश्विक व्यापार पर इस ऐतिहासिक निर्णय का इंतजार कर रहा है।












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