केरल का सबरीमाला मंदिर आज मकरविलक्कू पर्व के लिए खुलेगा

सबरीमाला मंदिर रात का दृश्य - मकरविलक्कू पर्व के दौरान सुनहरी रोशनी में पवित्र मंदिर

तिरुवनंतपुरम : भगवान अयप्पा को समर्पित भारत के सबसे प्रसिद्ध मंदिर सबरीमाला के पट आज (30 दिसंबर) मकरविलक्कू पर्व के लिए खुलने वाले हैं। केरल के पठानमथिट्टा जिले में स्थित यह प्राचीन धार्मिक स्थल लाखों श्रद्धालुओं को आकर्षित करता है। इस वर्ष मकरविलक्कू उत्सव 14 जनवरी 2026 को मनाया जाएगा, लेकिन इससे पहले मंदिर के कपाट आज खुल जाएंगे।

मंडल पूजा के बाद मंदिर का खुलना

सबरीमाला मंदिर शनिवार रात 11 बजे ‘हरिवरासनम’ (भक्ति गीत) के बाद बंद हो गया था। मंडल पूजा के इस पवित्र अनुष्ठान का समापन होने के बाद, मंदिर के कपाट मकरविलक्कू उत्सव के लिए 30 दिसंबर को दोबारा खुलेंगे। इस दिन श्रद्धालुओं को भगवान अयप्पा के दर्शन का सौभाग्य मिलेगा।

मंडल पूजा का महत्व और समय

मंडल पूजा का शुभ मुहूर्त शनिवार सुबह 10:10 बजे से 11:30 बजे के बीच निर्धारित किया गया था। इस विशेष अनुष्ठान में भगवान अयप्पा को सुनहरे कपड़ों से सजाया जाता है। मंडल पूजा का पालन हर वर्ष नवंबर-दिसंबर में किया जाता है और यह तीर्थयात्रा के सबसे महत्वपूर्ण चरणों में से एक है।

इस बार असाधारण तीर्थयात्रा संख्या

इस वर्ष की तीर्थयात्रा में असाधारण भीड़ देखी गई है। 25 दिसंबर तक ही श्रद्धालुओं की संख्या 30 लाख के पार पहुंच गई है, जो पिछले वर्षों की तुलना में अधिक है। 19 नवंबर को रिकॉर्ड भीड़ दर्ज की गई थी, जब एक दिन में 1,02,299 श्रद्धालुओं ने मंदिर के दर्शन किए थे।

भीड़ नियंत्रण के उपाय

प्रशासन ने आगंतुकों की संख्या को नियंत्रित करने के लिए कड़े उपाय अपनाए हैं। मंडल पूजा के विशेष अवसर पर शुक्रवार और शनिवार को:

  • वर्चुअल कतार के माध्यम से अनुमति दिए जाने वाले श्रद्धालुओं की संख्या घटाकर क्रमशः 30,000 और 35,000 कर दी गई
  • तत्काल बुकिंग को 2,000 तक सीमित रखा गया

ये कदम हाई कोर्ट के निर्देशों के बाद उठाए गए हैं, जिससे भीड़ को अधिक प्रभावी ढंग से प्रबंधित किया जा सके।

मकरविलक्कू उत्सव: परिचय और महत्व

मकरविलक्कू केरल की सांस्कृतिक धरोहर का एक अभिन्न अंग है। यह पर्व हर वर्ष मकर संक्रांति के अवसर पर मनाया जाता है। इस महोत्सव में मकर ज्योति नामक एक पवित्र दिव्य प्रकाश का दर्शन किया जाता है, जिसे देखना भक्तों के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है।

पवित्र मकर ज्योति का दर्शन

मकर ज्योति सबरीमाला मंदिर के विपरीत दिशा में, लगभग 8 किलोमीटर दूर पोन्नम्बलामेद पहाड़ी पर दिखाई देती है। यह दिव्य प्रकाश रातभर में तीन बार जलाया जाता है। हजारों श्रद्धालु इस अलौकिक घटना को अपनी आंखों से देखने के लिए इंतजार करते हैं।

सबरीमाला मंदिर का धार्मिक महत्व

सबरीमाला मंदिर भारत के सबसे महत्वपूर्ण धार्मिक केंद्रों में से एक है। यह मंदिर:

  • भगवान अयप्पा को समर्पित है, जिन्हें भगवान विष्णु और भगवान शिव के पुत्र माना जाता है
  • पश्चिमी घाट की सह्य पर्वत श्रृंखला में समुद्रतल से लगभग 1000 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है
  • 18 पहाड़ियों के बीच में बसा है
  • मंदिर के गर्भगृह तक पहुंचने के लिए 18 सीढ़ियों को पार करना पड़ता है

सबरीमाला की यात्रा कब संभव है

सबरीमाला मंदिर पूरे वर्ष खुला नहीं रहता। यह मंदिर विशेष अवसरों पर ही दर्शन के लिए खुलता है:

समय अवधिविवरण
16 नवंबर से 14 जनवरीमंडल पूजा और मकर संक्रांति के लिए (लगभग 2 महीने)
14 अप्रैलविषुव संक्रांति के अवसर पर
हर महीने के पहले 5 दिनमलयालम महीने के अनुसार

तीर्थयात्रियों के लिए आवश्यक जानकारी

दर्शन के लिए पंजीकरण

सबरीमाला में दर्शन के लिए पूर्व पंजीकरण आवश्यक है। तीर्थयात्री ऑनलाइन और स्पॉट दोनों तरीकों से पास प्राप्त कर सकते हैं:

  • ऑनलाइन पास: 70,000 श्रद्धालु
  • स्पॉट पास: 20,000 श्रद्धालु
  • कुल दैनिक क्षमता: लगभग 90,000 श्रद्धालु

मंदिर के खुलने का समय

मंदिर प्रतिदिन लगभग 18 घंटे खुला रहता है:

  • पहला चरण: सुबह 3:00 बजे से दोपहर 1:00 बजे तक
  • दूसरा चरण: शाम 3:00 बजे से रात 11:00 बजे तक

तीर्थयात्रियों के लिए सुविधाएं

प्रशासन ने श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए निम्नलिखित व्यवस्थाएं की हैं:

  • पहाड़ पर चढ़ने वाले श्रद्धालुओं के लिए पीने के पानी की निरंतर आपूर्ति
  • चिकित्सा सुविधाएं
  • आश्रय स्थल और विश्राम केंद्र
  • मार्गदर्शन और सूचना केंद्र

मकरविलक्कू 2026 की प्रत्याशा

14 जनवरी 2026 को मनाए जाने वाले मकरविलक्कू उत्सव में लाखों श्रद्धालुओं के पहुंचने की अपेक्षा है। इस धार्मिक महोत्सव को संपूर्ण सुरक्षा और व्यवस्था के साथ आयोजित किया जाएगा। यह त्योहार दक्षिण भारत की सबसे महत्वपूर्ण धार्मिक घटनाओं में से एक माना जाता है।

निष्कर्ष

सबरीमाला मंदिर में मकरविलक्कू का आयोजन भारतीय धार्मिक परंपरा का एक अद्भुत उदाहरण है। यह पर्व केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं है, बल्कि भक्तों की आस्था, भारतीय संस्कृति और अध्यात्मिकता का एक जीवंत प्रतीक है। आने वाले हफ्तों में सबरीमाला मंदिर की यात्रा करने की योजना बना रहे श्रद्धालुओं को सलाह दी जाती है कि वे पहले से ही ऑनलाइन पंजीकरण करवा लें और आवश्यक दिशानिर्देशों का पालन करें।

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