भारत अपना 77वां गणतंत्र दिवस मना रहा है। आज सुबह कार्तव्य पथ पर एक शानदार परेड का आयोजन किया गया जो भारतीय सेना की ताकत, सांस्कृतिक विविधता और राष्ट्रीय गौरव का प्रतीक था। इस वर्ष की परेड में एक विशेष बात थी – यूरोपीय संघ के दो सर्वोच्च नेता मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित थे।
मुख्य अंश (Highlights)
गणतंत्र दिवस के मुख्य अतिथि
इस बार गणतंत्र दिवस की परेड को देखने के लिए यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयन भारत आए हैं। यह पहली बार है जब किसी क्षेत्रीय ब्लॉक (bloc) के दोनों शीर्ष नेता भारत के गणतंत्र दिवस के मुख्य अतिथि बने हैं। इससे पहले ऐसा सम्मान 2018 में आसियान को दिया गया था।
EU नेताओं की यात्रा भारत-यूरोप संबंधों का नया मोड़
क्यों EU नेताओं की यात्रा महत्वपूर्ण है ?
- भारत-EU मुक्त व्यापार समझौता (FTA) पर 27 जनवरी को भारत-EU शिखर सम्मेलन होगा
- रक्षा और सुरक्षा साझेदारी को मजबूत करने का संदेश
- दोनों देश वैश्विक राजनीति में लोकतांत्रिक मूल्यों को बढ़ावा देने में प्रतिबद्ध हैं
ऑपरेशन सिंधूर: सेना की ताकत का सबसे बड़ा प्रदर्शन
इस गणतंत्र दिवस की सबसे खास बात ऑपरेशन सिंधूर की त्रि-सेना झांकी (Tri-Services Tableau) रही। यह एक शानदार प्रदर्शनी थी जिसने दिखाया कि भारतीय सेना कैसे एकता के साथ काम करती है।
झांकी में दिखाए गए हथियार:
| हथियार सिस्टम | विवरण | महत्व |
|---|---|---|
| ब्राह्मोस मिसाइल | सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल | सटीक हमले की क्षमता |
| S-400 एयर डिफेंस | हवाई रक्षा प्रणाली | आसमान की सुरक्षा |
| अकाश मिसाइल | मध्यम दूरी की मिसाइल | नागरिकों की सुरक्षा |
| T-90 भीष्म टैंक | मुख्य लड़ाकू टैंक | जमीनी शक्ति |
| नाग मिसाइल | एंटी-टैंक मिसाइल | अग्रिम कार्रवाई |
पहली बार का आयोजन:
आज पहली बार कार्तव्य पथ पर “फेज्ड बैटल अरे” (Phased Battle Array) प्रदर्शनी दिखाई गई। इसका मतलब है कि सेना ने असली युद्ध के मैदान की तरह की स्थिति को दिखाया, जहां ड्रोन, टैंक, तोपें सब एक साथ काम करते हैं।
एक ग्लास केस में “इंटीग्रेटेड ऑपरेशनल सेंटर” दिखाया गया जो यह बताता है कि कैसे सैटेलाइट, ड्रोन और रडार सिस्टम एक दूसरे से जुड़े होते हैं और कैसे असली समय में निर्णय लिए जाते हैं।
वंदे मातरम का 150 साल का जश्न: राष्ट्रीय गीत की विरासत
इस वर्ष गणतंत्र दिवस की मुख्य थीम है “वंदे मातरम का 150 साल“। यानी बंकिम चंद्र चटर्जी ने जब 1875 में इस गीत की रचना की थी, तब से लेकर आज तक यह गीत हमारे राष्ट्र की आत्मा रहा है।
वंदे मातरम के बारे में महत्वपूर्ण बातें:
- 1875 में रचना: बंकिम चंद्र चटर्जी ने अपने उपन्यास “आनंद मठ” में इस गीत को शामिल किया
- 1896 में पहली बार गाया गया: रवीन्द्रनाथ टैगोर ने कलकत्ता के कांग्रेस सत्र में पहली बार इस गीत को गाया
- 1950 में राष्ट्रीय गीत बना: भारत के संविधान सभा ने इसे राष्ट्रीय गीत के रूप में अपनाया
- आजादी की लड़ाई का मंत्र: ब्रितिश शासन के समय यह गीत स्वतंत्रता आंदोलन का महत्वपूर्ण हिस्सा था
आज की परेड में?
- कार्तव्य पथ के साथ-साथ 1923 में बनाई गई ऐतिहासिक पेंटिंग्स लगाई गईं
- 2,500 सांस्कृतिक कलाकारों ने परफॉर्मेंस दिया
- थीम: “स्वतंत्रता का मंत्र – वंदे मातरम” और “समृद्धि का मंत्र – आत्मनिर्भर भारत”
30 झांकियां: भारत की विविधता का रंगीन प्रदर्शन
गणतंत्र दिवस की परेड में कुल 30 झांकियां दिखाई गईं – 17 राज्यों/संघ क्षेत्रों की और 13 मंत्रालयों/विभागों की।
ये झांकियां दो मुख्य थीम पर केंद्रित थीं:
- “स्वतंत्रता का मंत्र: वंदे मातरम”
- “समृद्धि का मंत्र: आत्मनिर्भर भारत”
कुछ प्रमुख झांकियां:
- असम की टेराकोटा कला
- पंजाब के गुरु तेग बहादुर साहब जी की 350वीं शहादत वर्षी
- विभिन्न राज्यों की सांस्कृतिक विरासत
प्रधानमंत्री मोदी की राष्ट्रीय युद्ध स्मारक पर श्रद्धांजलि
सुबह 9:30 बजे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी राष्ट्रीय युद्ध स्मारक (National War Memorial) पर पहुंचे। उन्होंने शहीदों को श्रद्धांजलि देने के लिए माल्यार्पण किया और 2 मिनट का मौन रखा गया।
इसके बाद राष्ट्रगान बजाया गया और भारतीय सेना ने औपचारिक सलामी दी।
गणतंत्र दिवस परेड के मुख्य आकर्षण
| समय | कार्यक्रम | विवरण |
|---|---|---|
| 9:30 AM | राष्ट्रीय युद्ध स्मारक पर श्रद्धांजलि | PM मोदी द्वारा |
| 10:30 AM | राष्ट्रगान & ध्वज फहराना | कार्तव्य पथ पर |
| 10:30-12:00 PM | मुख्य परेड | 90 मिनट की अवधि |
| परेड समाप्ति पर | 2,000+ रंगीन गुब्बारे | आसमान में छोड़े गए |
हवाई प्रदर्शन:
- राफेल, Su-30 MKI, मिग-29 जेट का फ्लाईपास्ट
- हेलीकॉप्टर का फूल बरसाना
- “सिंधूर फॉर्मेशन” – एक विशेष संरचना
राष्ट्रपति के साथ EU नेता
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने एक राजकीय बग्घी में बैठकर परेड का निरीक्षण किया। उनके साथ EU के दोनों नेता भी थे। यह दृश्य भारत की बढ़ती वैश्विक शक्ति का प्रतीक था।
PM मोदी का संदेश
प्रधानमंत्री ने राष्ट्र को संबोधित करते हुए कहा:
“सभी देशवासियों को गणतंत्र दिवस की हार्दिक बधाई। भारत की आन-बान और शान का प्रतीक यह राष्ट्रीय महापर्व आप सभी के जीवन में नई ऊर्जा और नए उत्साह का संचार करे। विकसित भारत का संकल्प और अधिक सुदृढ़ हो।”
क्यों यह गणतंत्र दिवस खास है?
- पहली बार EU के दोनों नेता मुख्य अतिथि
- Operation Sindoor का सबसे बड़ा प्रदर्शन
- Vande Mataram का 150 साल का जश्न
- पहली बार Phased Battle Array फॉर्मेशन
- 2,500 सांस्कृतिक कलाकार एक मंच पर
- सेना की अत्याधुनिक तकनीक का प्रदर्शन
हमें याद है – 26 जनवरी क्या है?
26 जनवरी 1950 को भारत का संविधान लागू हुआ था। उसी दिन भारत एक संप्रभु लोकतांत्रिक गणराज्य (Sovereign Democratic Republic) बन गया था। ब्रितिश शासन से आजाद होने के बाद यह भारत का पहला स्वतंत्र संविधान था, जिसे डॉ. भीमराव अंबेडकर ने तैयार किया था।
निष्कर्ष
भारत का 77वां गणतंत्र दिवस न केवल एक राष्ट्रीय पर्व है, बल्कि यह भारतीय सेना की मजबूती, सांस्कृतिक विविधता और अंतर्राष्ट्रीय कूटनीति का एक शानदार प्रदर्शन है। ऑपरेशन सिंधूर की झांकी ने विश्व को दिखाया कि भारत की सेना आधुनिक तकनीक से लैस है, जबकि वंदे मातरम का 150 साल का जश्न हमें अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़ाता है।
EU के शीर्ष नेताओं की उपस्थिति भारत-यूरोप के बढ़ते संबंधों का प्रमाण है। आने वाले दिनों में भारत-EU FTA (मुक्त व्यापार समझौता) अंतिम रूप ले सकता है, जो दोनों देशों के लिए एक ऐतिहासिक कदम होगा।
🇮🇳 जय हिंद! जय भारत!












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