North Korea : इस हफ्ते प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, North Korea (उत्तर कोरिया) में गंभीर कागज-कमी की स्थिति सामने आई है — यहाँ तक कि बैंक नोट और अखबार छापने के लिए आवश्यक पेपर भी समाप्त हो गया है। इस समस्या से निपटने के लिए उत्तर कोरियाई नेता किम जोंग-उन ने देशभर में नए पेपर मिल (कागज फैक्ट्री) स्थापित करने का आदेश दे दिया है।
कागज की कमी कैसे पहुंची “खत्म” की कगार पर
- देश पर लगे अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों की वजह से उत्तर कोरिया अन्य देशों के साथ व्यापार नहीं कर पा रहा है। इससे कच्चे माल और आधुनिक तकनीक की आपूर्ति प्रतिबंधित हो गई है — जो पेपर उत्पादन के लिए अनिवार्य थे।
- उद्योग-धंधों में निवेश और विकास की भारी कमी के कारण पेपर मिलें आधुनिक नहीं थीं, जिसके चलते निरंतर खपत से पेपर स्टॉक तेजी से घटा।
- रिपोर्टों के अनुसार, सरकार अपने प्रचार के लिए समाचार पत्रों की छपाई पहले ही कम कर चुकी थी और बैंक नोट छपाने के लिए भी पर्याप्त कागज न होने पर उन्हें अस्थायी कूपन देने पड़ रहे थे।
सरकार का कदम: नए पेपर मिल — पर कितने कारगर?
किम जोंग-उन ने अधिकारियों को देश के विभिन्न प्रांतों में आधुनिक पेपर मिलें स्थापित करने की योजना बनाने का निर्देश दिया है। उन्होंने हाल ही में नए बनाए गए पेपर मिलों का निरीक्षण भी किया, जिसमें मल्टीपरपस पेपर मशीन, टॉयलेट-पेपर मशीन व पेपर कंटेनर मोल्डिंग मशीन शामिल थीं — और उन्होंने इस पहल की सराहना की।
उनकी योजना यह है कि देशभक्ति और स्वावलंबन की भावना के साथ एक “कोरियाई शैली” का पेपर-उद्योग खड़ा किया जाए, ताकि भविष्य में कागज की आवश्यकता — चाहे वह मीडिया हो, बैंकिंग हो या प्रशासन — पूरी हो सके।
हालाँकि, इस योजना की सफलता कई चुनौतियों पर निर्भर करेगी — जैसे कि कच्चे माल की उपलब्धता, तकनीकी दक्षता, निवेश और प्रशासनिक समन्वय।
व्यापक परिप्रेक्ष्य: क्या यह कदम उसी रणनीति का हिस्सा है जिसमें किम निहित हैं?
दरअसल, उत्तर कोरिया में इस तरह की औद्योगिक विस्तार की पहल इस साल पहले भी देखी गयी है। किम जोंग-उन ने हाल ही में देश के कई क्षेत्रीय फैक्ट्रियों का निरीक्षण किया है और उन्हें “एक विशाल क्रांति” बताया — जिसका मकसद आम नागरिकों की जीवनशैली सुधारना और रोजगार बढ़ाना बताया गया।
इससे संकेत मिलता है कि पेपर मिलों की स्थापना केवल कागज की कमी दूर करने के लिए नहीं — बल्कि व्यापक आर्थिक और सामाजिक सुधार की दिशा में एक कदम हो सकती है।
निष्कर्ष
उत्तर कोरिया में घोषित कागज-कमी और उसके चलते नए पेपर मिल खोलने का फैसला — यह संकेत देता है कि देश अब अपनी बिलकुल सीमित संसाधन व बंद-व्यवसायिक ढांचे में सुधार की ओर कदम बढ़ा रहा है। यदि कच्चे माल, तकनीक और प्रशासनिक चुनौतियों का सफल समाधान हुआ — तो यह पहल पेपर उद्योग को पुनर्जीवित कर सकती है।
हालाँकि, यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या यह कदम वास्तव में स्थायी बना पायेगा या फिर वही पुरानी सीमितता फिर से सामने आएगी।












प्रातिक्रिया दे