पटना : 10 जनवरी 2026 को जनता दल (यूनाइटेड) के दिग्गज KC Tyagi की एक चिट्ठी ने बिहार और देश की राजनीति में खलबली मचा दी है। इस चिट्ठी में Tyagi ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लिखा है कि बिहार के Chief Minister नीतीश कुमार को देश के सर्वोच्च सम्मान “भारत रत्न” से नवाजा जाना चाहिए। इसके बाद से बिहार की राजनीति में एक नया अध्याय शुरू हो गया है—क्योंकि यह मांग न सिर्फ़ राष्ट्रीय है, बल्कि JDU के अंदर भी गहरी खींचतान का कारण बन गई है।
इसी बीच, JDU से अलग हो चुके Jitan Ram Manjhi ने भी इस मांग का समर्थन किया है। साथ ही, विपक्ष के Tej Pratap Yadav ने एक अलग ही विवादास्पद बयान दिया है—वह तो लालू यादव और नीतीश दोनों को भारत रत्न देने की मांग कर रहे हैं।
तो फिर सवाल यह है: क्या यह भारत रत्न की मांग सिर्फ़ नीतीश के सम्मान का सवाल है, या फिर बिहार की राजनीति का एक बड़ा हिस्सा?
पहला सवाल: भारत रत्न क्या है और किसे मिलता है?
भारत रत्न भारत का सर्वोच्च नागरिक सम्मान है। यह पद्म श्री, पद्म भूषण और पद्म विभूषण से भी ऊंचा है। यह अवार्ड उन लोगों को दिया जाता है जिन्होंने असाधारण जनसेवा और किसी भी क्षेत्र में सर्वोच्च क्रम का प्रदर्शन किया हो। साहित्य, विज्ञान, कला, समाज सेवा, सरकारी सेवा—सभी क्षेत्र भारत रत्न के लिए eligible हैं।
बिहार और भारत रत्न: एक लंबी कहानी
बिहार ने भारत रत्न के संदर्भ में काफ़ी मुश्किलें देखी हैं। कर्पूरी ठाकुर (बिहार के दो बार Chief Minister), जिन्हें “Jan Nayak” (जननायक) कहा जाता था, को तो भारत रत्न तीन दशक बाद (2024) में मिला—जब वह जीवित नहीं रहे। कर्पूरी ठाकुर ने अपने कार्यकाल में OBC (Other Backward Classes) को आरक्षण दिलवाया था। यह एक ऐतिहासिक फैसला था। उनकी यह पहल ही बाद में Mandal Commission का आधार बनी, जिसने पूरे देश में OBC आरक्षण लागू किया।
बिहार की पांच विभूतियों को अब तक भारत रत्न मिल चुका है:
- राजेन्द्र प्रसाद (भारत के पहले राष्ट्रपति)
- Vidhanshankar Ray (Dr. Bidhan Chandra Roy)
- Jayaprakash Narayan (संपूर्ण क्रांति के जनक)
- Ustad Bismillah Khan (शहनाई के महारथी)
- Karpoori Thakur (2024 में, मरणोपरांत)
लेकिन किसी जीवित बिहारी राजनेता को अभी तक भारत रत्न नहीं मिला है। यह बात याद रखना जरूरी है।
KC Tyagi की चिट्ठी: क्या लिखा?
KC Tyagi JDU के संस्थापक-सदस्य हैं और लंबे समय से नीतीश कुमार के करीब रहे हैं। उन्होंने PM Modi को एक खुली चिट्ठी लिखी है जिसमें उन्होंने यह तर्क दिए हैं:
- नीतीश कुमार ने बिहार का पुनर्जन्म किया है। जब वह 2005 में Chief Minister बने, तो बिहार को “failed state” कहा जाता था—जहां अपहरण और अपराध ही मुख्य उद्योग थे।
- विकास के नए आयाम: नीतीश ने शिक्षा (महिला साक्षरता आधी हुई), स्वास्थ्य (शिशु मृत्यु दर में कमी), आधारभूत संरचना (सड़क और विद्युत), और महिला सशक्तिकरण (free cycles, prohibition) में काम किया।
- तीस साल का दूरदर्शी नेतृत्व: नीतीश किसी एक पार्टी या गठबंधन के लिए नहीं, बल्कि बिहार के विकास के लिए राजनीति करते हैं।
- “साफ-सुथरी छवि”: नीतीश Kumar को corruption के आरोपों से मुक्त माना जाता है।
JDU की दूरी: “निजी राय” का सवाल
लेकिन यहीं से JDU के अंदर विवाद शुरू हुआ। जब KC Tyagi की चिट्ठी जनता के सामने आई, तो JDU ने आधिकारिक रूप से एक बयान जारी किया:
“यह चिट्ठी KC Tyagi की personal capacity (व्यक्तिगत राय) में लिखी गई है। यह JDU की आधिकारिक पार्टी पॉलिसी नहीं है।”
यह बयान एक तरफ़ से तो महत्वपूर्ण है क्योंकि:
- राजनीतिक विवेक: JDU यह दिखाना चाहती है कि वह किसी विशिष्ट नेता की तारीफ़ के बजाय संस्थागत निर्णयों पर आस्था रखती है।
- अन्य मांगों से अलग: बिहार की कई अन्य हस्तियां भारत रत्न के लिए eligible हो सकती हैं। JDU यह संकेत दे रही है कि वह एक नेता के नाम पर अपनी राजनीतिक पूंजी लगाने में सावधान है।
दूसरी तरफ़, यह बयान JDU के अंदर एक गहरी खींचतान को भी दिखाता है। अगर पार्टी के एक महत्वपूर्ण सदस्य की मांग को आधिकारिक रूप से “निजी राय” कहा जाए, तो इससे पार्टी में विभाजन की संभावना बढ़ जाती है।
Jitan Ram Manjhi का समर्थन और पुरानी राजनीति
अब यह दिलचस्प हो जाता है। Jitan Ram Manjhi, जो बिहार के पूर्व Chief Minister हैं और पहले JDU से थे, अब HAM (Hindustani Awam Morcha) के नेता हैं और NDA का हिस्सा हैं, ने कहा है:
“नीतीश कुमार को भारत रत्न से नवाजा जाना चाहिए। वह बिहार के लिए काम कर रहे हैं।”
यह समर्थन तीन कारणों से महत्वपूर्ण है:
- Manjhi 2014 में पहली बार, नीतीश कुमार के कारण ही CM बने थे। लेकिन उनकी अल्पकालीन सत्ता में कोई ख़ास उपलब्धि नहीं रही।
- अब Manjhi का HAM NDA का हिस्सा है। उनका नीतीश के लिए समर्थन NDA की आंतरिक राजनीति का हिस्सा हो सकता है।
- लेकिन यह Manjhi की “बिहार की राजनीति में relevant रहने की रणनीति” भी हो सकती है। कर्पूरी ठाकुर को 2024 में भारत रत्न मिला था, जिसे Manjhi ने भी सेलिब्रेट किया था। अब वह नीतीश के लिए भी यही करते दिख रहे हैं।
Tej Pratap Yadav का “Double Demand”: नीतीश + लालू?
विपक्ष की तरफ़ से यह मांग भी आई है कि लालू प्रसाद यादव को भी भारत रत्न देना चाहिए।
Tej Pratap Yadav (Tejashwi का भाई) ने कहा है:
“नीतीश और लालू दोनों को भारत रत्न देना चाहिए। वह ‘भाइयों’ की तरह थे।”
यह बयान कई मायनों में विवादास्पद है:
- लालू पर भ्रष्टाचार के आरोप हैं। चाहे वह जेल की सजा पूरी कर चुके हों, लेकिन भारत रत्न के criteria में “exceptional public service” की बात की जाती है—जिसमें लालू के विरुद्ध कई सवाल उठते हैं।
- नीतीश का लालू से रिश्ता Complicated है। 2015 में नीतीश लालू के साथ गठबंधन में आए, लेकिन 2017 में तुरंत अलग हो गए। यह political opportunism का संकेत देता है।
- Tej Pratap की मांग एक राजनीतिक चाल है। RJD राष्ट्रीय और बिहार में कमजोर है। लालू के लिए भारत रत्न की मांग अपने supporter को energize करने का एक तरीका है।
नीतीश Kumar के Achievements: Positive Side
अगर हम नीतीश के वास्तविक कामों को देखें, तो कुछ उल्लेखनीय बातें हैं:
शिक्षा और महिला सशक्तिकरण
- महिला साक्षरता: जब नीतीश आए (2005), बिहार की महिला साक्षरता दर लगभग 33% थी। आज यह 61% के करीब है।
- साइकिल योजना: गरीब लड़कियों को free साइकिलें देने की योजना से स्कूल dropout rate में कमी आई।
स्वास्थ्य सूचकांक
- शिशु मृत्यु दर (IMR): 2004 में 75 था, अब यह 31 रह गया है। यह राष्ट्रीय औसत (32) के करीब है।
- जीवन प्रत्याशा: 69.1 साल (राष्ट्रीय औसत: 69.7 साल)
आर्थिक विकास
- राज्य GDP: 2004-05 में ₹77,000 करोड़ से बढ़कर 2020-21 में ₹6.1 लाख करोड़ हो गया। यह 6 गुना की बढ़ोतरी है।
- Lalu-Rabri years में GDP 3 गुना बढ़ा था।
कानून और व्यवस्था
- नीतीश ने बिहार को एक “failed state” से निकालकर एक “law and order” state बनाया है।
Criticisms: Negative Side
लेकिन नीतीश के record के अंधेरे पहलू भी हैं:
Flip-Flop Politics
नीतीश को “Paltu Ram” (frequently changing sides) कहा जाता है:
- 2012-13 में anti-corruption agitation के खिलाफ़ खड़े हुए।
- 2014 में NDA छोड़कर Mahagathbandhan में आए।
- 2017 में Mahagathbandhan छोड़ कर फिर NDA में गए।
- 2022 में फिर से Mahagathbandhan में आए (RJD के साथ)।
- 2024 में फिर NDA में लौट आए।
यह political instability का संकेत देता है और कई लोग सवाल उठाते हैं कि यह सिर्फ़ power के लिए की गई चालें हैं।
अपराध दर
हालांकि कानून और व्यवस्था में सुधार हुआ है, लेकिन:
- हिंसक अपराध दर आज भी बहुत अधिक है। Lalu-Rabri years की तुलना में भी कुछ categories में crime बढ़ा है।
आर्थिक असमानता
- Per capita income अभी भी ₹50,000 प्रति साल है—जो देश में सबसे कम है।
- सार्वजनिक ऋण (Public Debt) ने बिहार की आर्थिक सेहत को प्रभावित किया है।
JDU की विधान सभा में गिरावट
- 2010: 117 MLAs
- 2015: 72 MLAs
- 2020: 43 MLAs
- 2025: महत्वपूर्ण सुधार (NDA जीत)
यह दिखाता है कि नीतीश व्यक्तिगत रूप से लोकप्रिय हो सकते हैं, लेकिन उनकी पार्टी (JDU) का समर्थन कम हो रहा है।
भारत रत्न की राजनीति: PM Modi की रणनीति
यहाँ एक और महत्वपूर्ण बिंदु है। कर्पूरी ठाकुर को 2024 में भारत रत्न देना एक राजनीतिक चाल थी:
- Caste Politics: कर्पूरी ठाकुर OBC movement के जनक हैं। उन्हें भारत रत्न देने से OBC और Dalit समुदायों को संदेश गया कि BJP उनके लिए चिंतित है।
- Nitish को satisfy करना: नीतीश ने कर्पूरी ठाकुर को भारत रत्न देने के लिए BJP से लंबे समय से मांग की थी। 2024 में यह मिलना एक राजनीतिक compensation था।
- 2025 बिहार चुनाव की तैयारी: कर्पूरी ठाकुर का भारत रत्न 2025 के बिहार चुनाव के लिए NDA की राजनीति को मजबूत करने का काम आया।
तो क्या नीतीश के लिए भारत रत्न भी एक similar राजनीतिक चाल होगी?
यह संभव है, क्योंकि:
- NDA 2025 के बिहार चुनाव में जीत गया। अब भारत रत्न नीतीश को देने से BJP उन्हें और महत्त्व दे सकता है।
- 2026 में general elections हो सकते हैं। नीतीश के लिए भारत रत्न उन्हें national statue देगा।
- लेकिन यह भी हो सकता है कि पहली बार यह मांग पूरी न हो। अक्सर राजनीतिक मांगें सिर्फ़ electoral leverage के लिए उठाई जाती हैं।
भारत रत्न के Criteria: क्या नीतीश Qualify करते हैं?
भारत रत्न के लिए कोई official written criteria नहीं है, लेकिन अनौपचारिक मानदंड हैं:
Positive Factors
- 30 साल की सार्वजनिक सेवा: नीतीश ने विधान सभा में 1990 से काम किया है और 2005 से CM हैं।
- राष्ट्रीय महत्त्व: बिहार देश का 2nd-most populous state है। इसका CM राष्ट्रीय महत्त्व रखता है।
- सामाजिक कार्य: महिला सशक्तिकरण, दलित-OBC कल्याण।
Negative Factors
- Corruption-free image नहीं: नीतीश खुद तो corrupt नहीं हैं, लेकिन उनकी पार्टी के कई नेताओं पर आरोप हैं।
- Flip-Flop Politics: यह एक बड़ी कमजोरी है। एक “statesman” को stable होना चाहिए।
- अंतर्राष्ट्रीय पहचान नहीं: भारत रत्न को अक्सर “nationally और internationally प्रमुख” लोगों को दिया जाता है।
2025 बिहार चुनाव के बाद: अब क्या?
NDA ने 2025 बिहार चुनाव में लैंडस्लाइड जीत हासिल की है:
- NDA: 202 सीटें (243 में)
- Opposition: 35-40 सीटें
यह जीत नीतीश के leadership और NDA की strength दोनों का प्रमाण है। इस जीत के बाद:
- नीतीश की bargaining power बढ़ी है। वह PM Modi से ज्यादा मांग कर सकते हैं।
- लेकिन NDA के अंदर BJP की ताकत ज्यादा है। BJP यह तय करेगी कि नीतीश को क्या reward देना है।
- भारत रत्न एक प्रतीकात्मक अवार्ड है। इसे देने से सीधा कोई सत्ता transfer नहीं होता।
बड़ा सवाल: यह सब राजनीति क्यों है?
यहाँ एक critical observation है। अगर नीतीश Kumar सच में “बिहार के development के लिए काम कर रहे हैं,” तो फिर भारत रत्न की मांग क्यों?
कारण:
- Legacy Building: नीतीश को लगता है कि भारत रत्न उनकी “legacy को ensure” करेगा। अगर वह कभी power से बाहर आ जाएं, तो कम से कम यह award उन्हें “internationally recognized” बनाए रखेगा।
- Caste और Vote Bank: OBC समुदाय के लिए भारत रत्न एक symbolic victory है। इससे नीतीश को अगले चुनावों में OBC votes मिल सकते हैं।
- NDA के अंदर Position: नीतीश को BJP के सामने “Nationally important CM” के रूप में establish करना है।
- Opposition को Control करना: अगर नीतीश को भारत रत्न मिल जाए, तो RJD (लालू-Tejashwi) को भी “पिछड़ापन” महसूस होगा। यह political leverage है।
Final Analysis: होगा या नहीं होगा?
होने की संभावनाएं:
- NDA जीता है, नीतीश important हैं।
- उन्होंने बिहार को बदला है (positive image)।
- OBC politics के लिए symbolically महत्त्वपूर्ण है।
नहीं होने की संभावनाएं:
- Flip-flop politics की वजह से “consistency” की कमी है।
- PM Modi को नीतीश को satisfy करने की जल्दी नहीं है।
- भारत रत्न committee राजनीतिक दबाव में काम नहीं करती।
- अगर लालू को भी लाइन लगा दी जाए, तो controversal हो जाएगा।
सबसे संभावित परिणाम:
नीतीश को भारत रत्न 2-3 साल में मिल सकता है, लेकिन तुरंत नहीं। यह होगा अगर:
- नीतीश PM Modi के साथ “loyal” रहें (flip-flop न करें)।
- उनकी “clean image” बनी रहे।
- BJP को यह राजनीतिक रूप से फायदेमंद हो।
निष्कर्ष: यह सिर्फ़ एक Award नहीं है
यह पूरा विवाद दरअसल बिहार और भारत की राजनीति के एक बड़े सवाल को उजागर करता है:
क्या हम अभी एक “democratic देश” हैं जहाँ “merit और public service” को सम्मान दिया जाता है, या फिर एक ऐसा देश बन गए हैं जहाँ सब कुछ राजनीति है?
KC Tyagi की चिट्ठी, Jitan Ram Manjhi का समर्थन, Tej Pratap का counter-demand, JDU का “distance”—ये सब political maneuvers हैं, न कि किसी genuine recognition की मांग।
नीतीश Kumar के काम वास्तविक हैं। बिहार में विकास हुआ है। महिला साक्षरता बढ़ी है। अपराध कम हुआ है। लेकिन भारत रत्न देना अभी एक राजनीतिक decision है, एक मानवीय या Merit-based decision नहीं।
अगर भारत को एक true “meritocratic society” बनना है, तो हमें यह ensure करना होगा कि Bharat Ratna सिर्फ़ achievement को recognise करे, न कि political alliances को।












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