अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सीनियर ट्रेड एडवाइजर पीटर नवारो ने एक बार फिर भारत पर तीखे हमले किए हैं। इस बार का मुद्दा सीधे AI (ChatGPT)और अमेरिकी बिजली से जुड़ा है। नवारो का सवाल है – ‘अमेरिकी लोग भारत में AI सेवाओं के लिए क्यों पैसे दे रहे हैं?’ यह बयान उस समय आया है जब अमेरिका और भारत के बीच व्यापार समझौते पर गतिरोध बना हुआ है और ट्रंप प्रशासन भारत पर 50% टैरिफ लगाए हुए हैं।
अमेरिकी लोग भारत में AI के लिए क्यों पैसे दे रहे हैं? – नवारो
17 जनवरी, 2026 को ‘रियल अमेरिका वॉइस’ पॉडकास्ट पर स्टीव बैनन (पूर्व व्हाइट हाउस रणनीतिकार) से बातचीत करते हुए नवारो ने यह विवादास्पद टिप्पणी की:
“अमेरिकी लोग भारत में AI के लिए क्यों पैसे दे रहे हैं? ChatGPT अमेरिकी धरती पर चलता है, अमेरिकी बिजली का इस्तेमाल करता है, और भारत, चीन और दुनिया भर के बड़े यूजर्स को सेवा देता है। यह एक ऐसा मुद्दा है जिसे संभाला जाना चाहिए।”
ट्रंप प्रशासन का चेतावनी: ‘मजबूत कार्रवाई’ आने वाली है
नवारो ने केवल आलोचना ही नहीं की, बल्कि एक संभावित नीति कार्रवाई की ओर भी संकेत दिया। उन्होंने कहा:
“हम AI डेटा सेंटर्स की इस पूरी समस्या को बहुत ध्यान से देख रहे हैं, जो अमेरिकियों के लिए बिजली की कीमत बढ़ा रही है। ट्रंप की ओर से इसके लिए मजबूत कार्रवाई की उम्मीद रखें। इसपर नजर रखिए।”
यह बयान दो महत्वपूर्ण मुद्दों को जोड़ता है:
- अमेरिकी ऊर्जा का घरेलू उपयोग – बिजली की बढ़ती कीमतें अमेरिकी उपभोक्ताओं को प्रभावित कर रही हैं
- वैश्विक AI मांग – भारत और चीन जैसे देशों में बड़ी संख्या में ChatGPT उपयोगकर्ता हैं
विशेषज्ञ विश्लेषण: नवारो का AI तर्क कितना वैध है?
यह तर्क खामियों से भरा है, पहली महत्वपूर्ण खामी यह है कि डिजिटल सेवाएं अपनी प्रकृति से सीमाहीन होती हैं। जिस तरह यूरोप में कोई व्यक्ति Netflix पर अमेरिकी सीरीज देखता है, उसी तरह भारत में कोई ChatGPT का उपयोग करता है। दोनों ही अमेरिकी कंपनियों की सेवाएं हैं जो अमेरिकी बुनियादी ढांचे पर चलती हैं।
दूसरा लागत बंटवारा का तर्क गलत है – दुनिया भर के सभी उपयोगकर्ता (भारतीय सहित) सेवा के लिए भुगतान करते हैं। भारतीय ChatGPT उपयोगकर्ता सीधे OpenAI को भुगतान करते हैं, चाहे subscription के जरिए या पेड प्लान के माध्यम से। यह कहना कि “अमेरिकी लोग भारतीयों के लिए बिजली खर्च कर रहे हैं” गणितीय रूप से गलत है।
तीसरी खामी यह है कि भारत को अलग से निशाना बनाना एकतरफा है – चीन भारत से अधिक ChatGPT और अन्य अमेरिकी सेवाओं का उपयोग करता है, लेकिन चीन के लिए नवारो के पास कोई ऐसी आलोचना नहीं है। यूरोप, जापान और अन्य विकसित देश भी AI सेवाओं का भारी उपयोग कर रहे हैं। इसलिए, भारत को विशेष रूप से लक्ष्य करना राजनीतिक दुर्भावना को दर्शाता है, तकनीकी समस्या को नहीं।
नवारो की असली चिंता शायद तकनीकी नहीं, बल्कि राजनीतिक है – भारत को व्यापार सौदे पर दबाव देना, भारत के ऊर्जा विकल्पों को नियंत्रित करना, और अमेरिकी IT सेवाओं के साथ प्रतिस्पर्धा कम करना। यदि यह वास्तव में ऊर्जा संरक्षण की चिंता होती, तो नवारो को सभी देशों के साथ समान व्यवहार करना चाहिए, केवल भारत के साथ नहीं।
नवारो की इतिहास: भारत विरोधी बयानों का रिकॉर्ड
पीटर नवारो यह पहली बार नहीं हैं जब वह भारत पर हमला कर रहे हैं। उनके पास विवादास्पद टिप्पणियों का लंबा इतिहास है:
पिछली टिप्पणियां:
- ‘टैरिफ का महाराजा’ – भारत को ये नाम देते हुए उच्च व्यापार बाधाओं का आरोप लगाया
- ‘रणनीतिक मुफ्तखोरी’ – भारत को यह आरोप लगाया कि वह अमेरिकी सुरक्षा लाभ ले रहा है
- ‘क्रेमलिन का तेल मनी लॉन्ड्रिंग’ – भारत को रूस के युद्ध के लिए धन पहुंचाने का दोषी माना
- ‘ब्राह्मण’ विवाद (2025) – आरोप लगाया कि ‘ब्राह्मण’ भारत में लाभ ले रहे हैं (भारत ने इसे ‘अस्वीकारणीय’ बताया)
- आउटसोर्सिंग विरोधी रुख – विदेशी दूरस्थ कार्यकर्ताओं पर टैरिफ का समर्थन
भारत का जवाब: MEA की नई मुलाकात की घोषणा
भारत के विदेश मंत्रालय (MEA) ने ट्रंप के व्यापार सलाहकार के बयानों को “अनुचित और भ्रामक” बताया है। MEA के प्रवक्ता राधीर जैसवाल ने विभिन्न मौकों पर कहा है:
“हमने नवारो द्वारा की गई अनुचित और भ्रामक टिप्पणियां देखी हैं। स्पष्ट रूप से हम उन्हें अस्वीकार करते हैं।”
भारत की मुख्य बातें:
- ऊर्जा सुरक्षा आवश्यकता – तेल की खरीद राष्ट्रीय हित के आधार पर है
- बाजार की परिस्थितियां – “प्रचलित विश्व बाजार स्थितियों” के अनुसार खरीद होती है
- आलोचना अनुचित – भारत को अकेले निशाना बनाना गलत है (चीन भी अधिक रूसी तेल खरीद रहा है)
- रणनीतिक साझेदारी – भारत और अमेरिका की “व्यापक वैश्विक रणनीतिक साझेदारी” महत्वपूर्ण है
भारत में ChatGPT का उपयोग: वास्तविक आंकड़े
भारत वास्तव में AI सेवाओं का एक प्रमुख उपयोगकर्ता है:
भारत का AI बाजार:
- उपयोगकर्ता संख्या: भारत में ChatGPT के लाखों सक्रिय उपयोगकर्ता हैं
- IT उद्योग: भारतीय IT कंपनियां AI तकनीकों को एकीकृत कर रही हैं
- स्टार्टअप इकोसिस्टम: भारतीय स्टार्टअप AI पर निर्भर हो रहे हैं
- शिक्षा: शिक्षार्थियों द्वारा व्यापक उपयोग
भारतीय IT सेक्टर पर असर: बड़ी चिंता
यह सब तब हो रहा है जब भारतीय IT सेक्टर पहले से ही दबाव में है:
चुनौतियां:
- आउटसोर्सिंग विरोधी नीति: अमेरिका में भारतीय IT पेशेवरों को विज़ा मिलना मुश्किल हो रहा है
- ऑटोमेशन: AI की वजह से कुछ IT नौकरियां खतरे में हैं
- टैरिफ खतरा: 50% टैरिफ से IT सेवाएं महंगी हो गई हैं
संभावित समाधान:
- भारतीय IT कंपनियों को यूरोप, एशिया में विस्तार करना
- घरेलू AI क्षमता विकसित करना
- मूल्य-संवर्धित सेवाएं प्रदान करना
क्या यह ट्रंप प्रशासन की नई ‘ट्रिक’ है?
विश्लेषकों के अनुसार, नवारो के बयान कई उद्देश्य पूरे कर सकते हैं:
गहन कारण:
- घरेलू राजनीति: अमेरिकी मतदाताओं को दिखाना कि ट्रंप “अमेरिका पहले” कर रहे हैं
- विदेशी नीति: भारत को अमेरिकी नीति के अनुसार मोड़ना
- नई पहल: आगामी समझौतों में अधिक शर्तें जोड़ने का आधार
- अन्य देशों को सूचित करना: इसी तरह के “आरोप” अन्य देशों के लिए भी आ सकते हैं
भारत को क्या करना चाहिए: व्यावहारिक सुझाव
तत्काल कदम:
- सार्वजनिक प्रतिक्रिया: MEA को स्पष्ट बयान देना चाहिए
- तकनीकी विवरण: भारतीय विशेषज्ञों को AI के वैश्विक प्रकृति को समझाना चाहिए
- अंतर्राष्ट्रीय समर्थन: अन्य देशों को साथ लाना (चीन, यूरोप)
दीर्घकालिक रणनीति:
- ऊर्जा विविधता: रूसी तेल का वैकल्प खोजना
- घरेलू AI: भारतीय AI मॉडल विकसित करना (चैटजीपीटी का विकल्प)
- रणनीतिक साझेदारी: अन्य देशों के साथ AI सहयोग
- IT क्षेत्र को मजबूत करना: नई सेवाओं पर ध्यान
वैश्विक संदर्भ: अन्य देश भी लक्ष्य हो सकते हैं
दिलचस्प बात यह है कि नवारो ने “चीन और भारत” दोनों का जिक्र किया है। इसका मतलब:
भविष्य की संभावना:
- चीन पर अधिक दबाव: यदि भारत असहमत होगा
- यूरोप की चिंता: यूरोपीय देश भी ChatGPT का उपयोग करते हैं
- वैश्विक AI को हथियार बनाना: ट्रंप शायद AI को व्यापार हथियार बना सकते हैं
नवारो का असली एजेंडा: व्यापार युद्ध
विशेषज्ञों का मानना है कि नवारो की आलोचना महज तेल के बारे में नहीं है:
व्यापक व्यापार रणनीति:
- भारतीय व्यापार को दबाना – 50% टैरिफ से शुरुआत
- आउटसोर्सिंग विरोधी नीति – IT और सेवा क्षेत्र को लक्ष्य करना
- वैचारिक विरोध – ट्रंप के “अमेरिका फर्स्ट” एजेंडा का हिस्सा
- भू-राजनीतिक दबाव – भारत को अमेरिकी नीति के करीब लाना
अमेरिका-भारत व्यापार संकट: समय सीमा
| तारीख | घटना | टैरिफ प्रभाव |
|---|---|---|
| अगस्त 2025 | ट्रंप ने भारत पर 50% टैरिफ लागू किए | व्यापार समझौता ठप |
| सितंबर 2025 | नवारो की “रणनीतिक मुफ्तखोरी” टिप्पणी | विदेश मंत्रालय ने खंडन किया |
| जनवरी 2026 | ‘महाराजा ऑफ टैरिफ’ बयान | व्यापार बातचीत अभी भी ठप |
| जनवरी 17-18, 2026 | AI डेटा सेंटर बयान | नया विवाद |
500% टैरिफ की धमकी: भारत के लिए सबसे बड़ा खतरा
सबसे चिंताजनक विकास ‘Sanctioning Russia Act of 2025’ है:
क्या है यह कानून:
- अमेरिकी सीनेट में पेश किया गया बिल
- 500% तक टैरिफ लगाने की शक्ति राष्ट्रपति को देता है
- रूसी तेल खरीदने वाले देशों को लक्ष्य करता है
भारत के लिए प्रभाव:
- 500% टैरिफ = व्यापार प्रतिबंध: भारतीय वस्तुएं अमेरिका में अनबिकनी हो जाएंगी
- IT सेक्टर को झटका: भारतीय सॉफ्टवेयर, सेवाएं बेमानी हो जाएंगी
- कुल GDP को नुकसान: भारत-अमेरिका व्यापार में लगभग $150+ बिलियन का जोखिम
- नौकरियों पर असर: लाखों लोगों को बेरोजगारी का खतरा
विकास पक्ष:
- गुयाना-ब्राजील से तेल: तेजी से विविधीकरण
- नवीकरणीय ऊर्जा: सोलर, विंड पर अधिक निवेश
- परमाणु ऊर्जा: भारतीय परमाणु प्रोग्राम को बढ़ावा
निष्कर्ष: एक बड़ा खेल एक बड़े मंच पर
पीटर नवारो का “अमेरिकी बिजली भारत में AI के लिए क्यों खर्च हो रही है?” सवाल केवल तकनीकी समस्या नहीं है। यह:
- व्यापार युद्ध का एक नया मोर्चा
- भू-राजनीति का नया खेल
- भारत को नीचा दिखाने का प्रयास
- अंतर्राष्ट्रीय संबंधों में नई जटिलता
भारत के सामने विकल्प:
- लड़ना: 50% टैरिफ को स्वीकार न करना, अपनी बात रखना
- समझौता: किसी सीमा तक आत्मसमर्पण (लेकिन कीमत बहुत है)
- बचना: नई व्यापार साझेदारी खोजना (यूरोप, जापान, ASEAN)
यह वह समय है जब भारत को अपनी कूटनीति तेज करनी होगी और अमेरिकी दबाव का सामना करते हुए अपने आर्थिक हित की रक्षा करनी होगी। “अमेरिकी बिजली भारत में AI के लिए क्यों खर्च हो रही है?” सवाल केवल एक सवाल नहीं है – यह भारत की आने वाली कूटनीति का एक परीक्षा है।












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