नरवणे की किताब पर राहुल गांधी का हमला: लद्दाख विवाद के खुलासे से सरकार में हड़कंप

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नई दिल्ली – लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने पूर्व सेना प्रमुख जनरल मनोज मुकुंद नरवणे की अप्रकाशित किताब ‘फोर स्टार्स ऑफ डेस्टिनी’ को लेकर केंद्र सरकार पर जोरदार हमला बोला है। इस विवाद ने संसद के बजट सत्र में गतिरोध की स्थिति पैदा कर दी है और दिल्ली पुलिस ने किताब के लीक होने के मामले में एफआईआर भी दर्ज कर ली है।

किताब को लेकर राहुल का आरोप

राहुल गांधी का कहना है कि जनरल नरवणे की यह किताब सरकार की मंजूरी के इंतजार में एक साल से अधिक समय से लंबित है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार जानबूझकर इस किताब को प्रकाशित नहीं होने दे रही है क्योंकि इसमें 2020 के लद्दाख संकट और चीन के साथ सीमा विवाद से जुड़े संवेदनशील खुलासे हैं।

सोमवार को संसद में राहुल गांधी ने कहा, “यह किताब किसी विपक्षी नेता की नहीं है। यह किताब किसी विदेशी लेखक की नहीं है। यह किताब है देश के पूर्व सेना प्रमुख जनरल नरवणे की – और हैरानी की बात यह है कि यह किताब कैबिनेट मंत्रियों के हिसाब से मौजूद ही नहीं है।”

किताब में क्या है?

‘फोर स्टार्स ऑफ डेस्टिनी’ में जनरल नरवणे ने अपने चार दशक के सैन्य करियर का विवरण दिया है। किताब के लीक हुए अंशों के अनुसार, इसमें 31 अगस्त 2020 की रात का जिक्र है जब चीनी टैंक और सेना रेचिन ला की तरफ बढ़ रही थी। रिपोर्ट्स के मुताबिक, नरवणे ने लिखा है कि जब उन्होंने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह को फोन किया तो उन्हें कहा गया कि वे ‘टॉप’ से पूछेंगे।

किताब में यह भी उल्लेख है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का संदेश आया – “जो उचित समझो वो करो।” राहुल गांधी ने इस पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि इसका मतलब है कि प्रधानमंत्री ने अपनी जिम्मेदारी नहीं निभाई और सेना प्रमुख को अकेला छोड़ दिया।

इसके अलावा, किताब में अग्निपथ योजना और डोकलाम विवाद का भी विस्तृत जिक्र किया गया है।

सरकार की प्रतिक्रिया

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, गृह मंत्री अमित शाह और लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने राहुल गांधी के दावों पर कड़ा ऐतराज जताया। शुरुआत में सरकार का कहना था कि ऐसी कोई किताब मौजूद ही नहीं है और यह अभी प्रकाशित नहीं हुई है।

जब राहुल गांधी ने संसद परिसर में किताब की हार्डकॉपी दिखाई तो अमित शाह ने कहा कि विवाद राहुल गांधी ने खुद खत्म कर दिया है क्योंकि वह मान रहे हैं कि किताब छपी ही नहीं है।

सरकार का यह भी कहना है कि राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मामलों पर संसद में ऐसे अंश पढ़ना अनुचित है, खासकर जब किताब आधिकारिक तौर पर प्रकाशित नहीं हुई है।

प्रधानमंत्री पर राहुल का निशाना

राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री मोदी के सदन में नहीं आने पर भी सीधा हमला किया। उन्होंने कहा, “प्रधानमंत्री सदन में इसलिए नहीं आ रहे हैं क्योंकि उनके पास असहज सवालों का कोई जवाब नहीं है।”

राहुल ने यह भी घोषणा की कि जब प्रधानमंत्री संसद में आएंगे तो वे उन्हें यह किताब व्यक्तिगत रूप से भेंट करेंगे ताकि देश को हकीकत मालूम हो सके।

दिल्ली पुलिस की एफआईआर

विवाद के बाद दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने किताब के लीक होने के मामले में जांच शुरू कर दी है। एफआईआर दर्ज कर ‘लीकर’ की तलाश शुरू की गई है। पुलिस जानना चाहती है कि अप्रकाशित किताब की कॉपी राहुल गांधी तक कैसे पहुंची।

कांग्रेस सूत्रों के अनुसार, राहुल गांधी को यह किताब खुद लेखक जनरल नरवणे से मिली है। हालांकि, इस दावे की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

प्रकाशन की स्थिति

किताब का प्रकाशन पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया कर रहा है। रिपोर्ट्स के अनुसार, प्रकाशक ने मंजूरी का इंतजार किए बिना कुछ एडवांस कॉपियां छापीं और दिल्ली की कुछ बुकस्टोर्स तक पहुंचा दीं। विवाद के बाद सभी कॉपियां वापस मंगा ली गईं और अमेजन तथा फ्लिपकार्ट जैसी वेबसाइट्स से किताब की लिस्टिंग हटा दी गई।

जनरल नरवणे ने एक पुराने ट्वीट में पेंगुइन इंडिया के ट्वीट को शेयर करते हुए लिखा था, “हैलो दोस्तो, मेरी किताब अब उपलब्ध है।” इस ट्वीट को लेकर भी सवाल उठे हैं कि अगर किताब प्रकाशित नहीं हुई तो यह ‘उपलब्ध’ कैसे थी।

कौन हैं जनरल एमएम नरवणे?

जनरल मनोज मुकुंद नरवणे दिसंबर 2019 से अप्रैल 2022 तक भारतीय सेना के 28वें प्रमुख रहे। उनका कार्यकाल ऐसे समय में रहा जब देश कोरोना महामारी से जूझ रहा था और चीन के साथ लद्दाख में तनाव चरम पर था। 2020 का गलवान घाटी संघर्ष उनके कार्यकाल का सबसे संवेदनशील और निर्णायक दौर माना जाता है।

पुणे के ज्ञान प्रबोधिनी स्कूल से पढ़ाई करने वाले नरवणे ने एनडीए खड़कवासला और इंडियन मिलिट्री एकेडमी से प्रशिक्षण लिया। वे पूर्वी कमान के प्रमुख, दिल्ली एरिया के जीओसी और श्रीलंका में ऑपरेशन पवन के दौरान भारतीय शांति सेना का हिस्सा रह चुके हैं।

विपक्ष का रुख

कांग्रेस सहित विपक्षी दलों का कहना है कि सरकार बहस से बच रही है और विपक्ष की आवाज को दबाने की कोशिश कर रही है। विपक्ष के 8 सांसदों को बजट सत्र की शेष अवधि तक लोकसभा से निलंबित कर दिया गया है।

कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी वाड्रा ने भी सरकार की आलोचना करते हुए कहा कि राहुल को एक प्रकाशित किताब से पढ़ने की अनुमति नहीं दी गई।

क्या कहते हैं विशेषज्ञ?

रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि सेना प्रमुखों की किताबों को रक्षा मंत्रालय की मंजूरी की आवश्यकता होती है क्योंकि इनमें संवेदनशील जानकारी हो सकती है। हालांकि, 2020 से 2024 के बीच 35 किताबों को मंजूरी दी गई, लेकिन नरवणे की यह किताब अकेली ऐसी है जो अब तक लंबित है।

कुछ विश्लेषकों का मानना है कि किताब में लद्दाख विवाद, अग्निपथ स्कीम और नेतृत्व से जुड़े संवेदनशील मुद्दों के कारण मंजूरी में देरी हो रही है।

इस विवादित मुद्दे पर भविष्य संभावना?

फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि किताब को प्रकाशन की मंजूरी कब मिलेगी। जनरल नरवणे ने अभी इस विवाद पर कोई सार्वजनिक टिप्पणी नहीं की है।

संसद में यह मुद्दा गतिरोध का कारण बना हुआ है और विपक्ष सरकार से जवाब मांग रहा है। राहुल गांधी ने साफ कर दिया है कि वे इस मुद्दे को जीवित रखेंगे और प्रधानमंत्री से सीधे सवाल पूछेंगे।

यह विवाद न केवल सियासी टकराव का मुद्दा बन गया है, बल्कि यह राष्ट्रीय सुरक्षा, सेना के निर्णय लेने की प्रक्रिया और सरकार की पारदर्शिता पर भी सवाल उठाता है।

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