केरल का नाम बदलकर ‘केरलम’ होगा: केंद्रीय कैबिनेट ने दी मंजूरी — जानिए पूरी कहानी

केरल राज्य का नाम बदलकर केरलम करने को केंद्रीय कैबिनेट की मंजूरी — Kerala Name Change to Keralam 2026

नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में एक ऐतिहासिक फैसला लिया गया — दक्षिण भारत के राज्य ‘केरल’ का नाम बदलकर ‘केरलम’ किया जाएगा। यह बैठक नए पीएमओ भवन ‘सेवा तीर्थ’ में आयोजित पहली कैबिनेट बैठक थी।

क्या है पूरा मामला?

केंद्रीय कैबिनेट ने मंगलवार, 24 फरवरी 2026 को केरल राज्य का नाम बदलकर ‘केरलम’ करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी। केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने प्रेस ब्रीफिंग में यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि ‘Kerala (Alteration of Name) Bill, 2026’ को राज्य विधानसभा के पास उसके विचार हेतु भेजा जाएगा।

भारतीय संविधान के अनुच्छेद 3 के तहत संसद किसी भी राज्य का नाम परिवर्तित कर सकती है। इस प्रक्रिया के अंतर्गत पहले राष्ट्रपति की सिफारिश जरूरी होती है, जिसके बाद बिल को राज्य विधानसभा की राय के लिए भेजा जाता है, और अंत में संसद में पास करना होता है।

प्रस्ताव का इतिहास — कब से चल रही है यह मांग?

‘केरलम’ नाम की मांग कोई नई नहीं है। मलयालम भाषा में इस राज्य को सदा से ‘केरलम’ कहा जाता रहा है। यह मांग 1920 के दशक से चली आ रही है, जब त्रावणकोर, कोचीन और मालाबार के मलयालम भाषी क्षेत्रों को एकजुट करने का आंदोलन शुरू हुआ था।

1 नवंबर 1956 को राज्य पुनर्गठन अधिनियम के तहत ‘केरल’ राज्य का गठन हुआ। लेकिन संविधान की पहली अनुसूची में इसे ‘Kerala’ नाम से दर्ज किया गया, जो अंग्रेजी का रूपांतर है। मलयालम में यह राज्य ‘केरलम’ के नाम से जाना जाता है।

इस मांग को नई ऊर्जा तब मिली जब केरल विधानसभा ने अगस्त 2023 में पहला सर्वसम्मत प्रस्ताव पास किया। उस समय गृह मंत्रालय ने इसमें कुछ तकनीकी बदलाव करने का सुझाव दिया। इसके बाद जून 2024 में मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन ने दूसरा प्रस्ताव विधानसभा में पेश किया, जो सर्वसम्मति से पारित हो गया।

“हमारे राज्य का नाम मलयालम में ‘केरलम’ है। राज्यों का गठन भाषाई आधार पर हुआ, लेकिन संविधान की पहली अनुसूची में हमारा नाम ‘Kerala’ दर्ज है। इसे ‘केरलम’ में संशोधित किया जाना चाहिए।”मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन, केरल विधानसभा प्रस्ताव

‘केरलम’ नाम का क्या है अर्थ?

‘केरलम’ शब्द दो मलयालम शब्दों से बना है — ‘केर’ अर्थात नारियल का पेड़ और ‘आलम’ अर्थात भूमि। इस प्रकार ‘केरलम’ का अर्थ है — नारियल की भूमि। यह नाम राज्य की प्राकृतिक समृद्धि, कृषि परंपरा और सांस्कृतिक धरोहर का प्रतीक है।

ऐतिहासिक रूप से, सम्राट अशोक के शिलालेख II (257 ईसा पूर्व) में ‘केरलपुत्र’ का उल्लेख मिलता है, जो चेर वंश के शासकों को संबोधित करता है। इससे स्पष्ट है कि ‘केरलम’ नाम की जड़ें सदियों पुरानी हैं।

आगे क्या होगी प्रक्रिया?

कैबिनेट की मंजूरी के बाद अब ‘Kerala (Alteration of Name) Bill, 2026’ की प्रक्रिया इस प्रकार होगी:

  1. राष्ट्रपति की सिफारिश — कैबिनेट के प्रस्ताव के आधार पर राष्ट्रपति इस विधेयक को केरल विधानसभा को संदर्भित करेंगे।
  2. राज्य विधानसभा की राय — केरल विधानसभा अपनी टिप्पणी या सहमति देगी।
  3. संसद में पारित — लोकसभा और राज्यसभा दोनों सदनों से बिल पास होना जरूरी है।
  4. राष्ट्रपति की मुहर — राष्ट्रपति के हस्ताक्षर के बाद नाम परिवर्तन आधिकारिक रूप से लागू होगा।

इसके अलावा, नाम परिवर्तन से पूर्व रेलवे, डाक विभाग, सर्वे ऑफ इंडिया, इंटेलिजेंस ब्यूरो जैसी संस्थाओं से अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) भी लेना होगा। विधि एवं न्याय मंत्रालय के दोनों विभागों ने इस प्रस्ताव पर अपनी सहमति पहले ही दे दी है।

राजनीतिक आयाम — चुनाव से पहले का दांव?

यह फैसला 2026 के केरल विधानसभा चुनावों से पहले आया है, जिन्हें अप्रैल-मई में होना है। इस कारण इसे LDF (Left Democratic Front) सरकार की चुनावी रणनीति से भी जोड़कर देखा जा रहा है।

केरल BJP अध्यक्ष राजीव चंद्रशेखर पहले ही मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर इस कदम के प्रति अपनी पार्टी का समर्थन जता चुके हैं। वहीं, कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने सोशल मीडिया पर सवाल उठाया कि अब ‘Keralite’ या ‘Keralan’ के बदले क्या नया संबोधन होगा।

समर्थकों का कहना है कि यह बदलाव मलयालम भाषाई पहचान और सांस्कृतिक विरासत को आधिकारिक मान्यता देता है। आलोचकों का तर्क है कि सरकारी साइनबोर्ड, स्टेशनरी और आधिकारिक दस्तावेजों में परिवर्तन की लागत और लॉजिस्टिक बोझ काफी अधिक होगा।

‘केरल’ से ‘केरलम’ का यह सफर महज एक नाम परिवर्तन नहीं, बल्कि एक भाषाई और सांस्कृतिक पुनर्स्थापना है। मलयालम भाषी जनता की दशकों पुरानी मांग को अब संवैधानिक प्रक्रिया में गति मिली है। जैसे ही यह विधेयक संसद में पारित होकर राष्ट्रपति की मुहर पाएगा, भारत के मानचित्र पर ‘केरलम’ एक नए सांस्कृतिक गौरव के साथ उभरेगा।

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