भारतीय रेलवे विद्युतीकरण के मोर्चे पर भारत अब वैश्विक महाशक्तियों ब्रिटेन, रूस और चीन से कहीं आगे निकल चुका है

Indian railways beats China, UK, Russia electrification milestone 2025

नई दिल्ली: भारतीय रेलवे ने बुनियादी ढांचे के विकास में एक ऐतिहासिक मील का पत्थर हासिल कर लिया है। ताज़ा आंकड़ों के मुताबिक, भारत ने अपने रेलवे नेटवर्क के विद्युतीकरण (Electrification) के मामले में दुनिया की कई बड़ी महाशक्तियों को पीछे छोड़ दिया है। यह उपलब्धि न केवल भारत की तकनीकी क्षमता को दर्शाती है, बल्कि ‘ग्रीन रेलवे’ (Green Railway) के सपने को भी सच करती नज़र आ रही है।

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99.2% विद्युतीकरण के साथ भारत बना ग्लोबल लीडर

दिसंबर 2025 में जारी किए गए आंकड़ों के अनुसार, भारतीय रेलवे ने अपने ब्रॉड गेज नेटवर्क का 99.2% विद्युतीकरण पूरा कर लिया है। यह आंकड़ा इसलिए चौंकाने वाला है क्योंकि भारत ने इस रेस में ब्रिटेन, रूस और चीन जैसे विकसित और विशाल रेलवे नेटवर्क वाले देशों को पछाड़ दिया है।​

रेल मंत्रालय द्वारा साझा की गई जानकारी और ‘इंटरनेशनल यूनियन ऑफ रेलवे’ (UIC) की रिपोर्ट बताती है कि जहां भारत 100% विद्युतीकरण के बेहद करीब है, वहीं अन्य देश अभी भी इससे काफी पीछे हैं।

महाशक्तियों से तुलना: आंकड़ों की जुबानी

अगर हम आंकड़ों पर नज़र डालें, तो भारत की बढ़त साफ दिखाई देती है। नीचे दी गई तालिका (Table) में भारत और अन्य प्रमुख देशों की स्थिति देखें:

देश (Country)विद्युतीकरण प्रतिशत (Electrification %)
भारत (India)99.2% 
चीन (China)~82% 
रूस (Russia)~52% 
ब्रिटेन (UK)~39% 
अमेरिका (USA)<1% (बहुत कम)

स्विट्जरलैंड (Switzerland) दुनिया का एकमात्र ऐसा प्रमुख देश है जिसने 100% विद्युतीकरण हासिल किया है, लेकिन उसके नेटवर्क का आकार भारत की तुलना में बेहद छोटा है। भारत जैसे विशाल भौगोलिक क्षेत्र वाले देश के लिए यह उपलब्धि अद्वितीय है।

‘मिशन मोड’ में हुआ काम: 2014 के बाद की क्रांति

इस सफलता के पीछे सबसे बड़ा कारण सरकार का ‘मिशन मोड’ में काम करना है। आंकड़ों के मुताबिक:

  • 2014 से पहले: आज़ादी के बाद के लगभग 60 वर्षों में केवल 21,801 मार्ग किलोमीटर (RKM) का विद्युतीकरण हुआ था।
  • 2014-2025 के बीच: पिछले 11 वर्षों में भारतीय रेलवे ने 46,900 RKM से अधिक का विद्युतीकरण पूरा किया है, जो पिछले 60 वर्षों के काम से दोगुना से भी ज्यादा है।

22 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में लगभग पूर्ण विद्युतीकरण

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक 29 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में से 22 ने अपने ब्रॉड गेज रेल नेटवर्क पर 100 प्रतिशत विद्युतीकरण या उसके करीब का स्तर हासिल कर लिया है। आंध्र प्रदेश, बिहार, दिल्ली, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, झारखंड, केरल और कई अन्य राज्यों में संपूर्ण नेटवर्क विद्युतीकृत हो चुका है, जबकि राजस्थान में 98 प्रतिशत, गुजरात में 97 प्रतिशत और कर्नाटक में 96 प्रतिशत विद्युतीकरण पूरा हो चुका है। असम, गोवा और कुछ पूर्वोत्तर राज्यों में शेष खंडों पर तेजी से काम चल रहा है।

कार्बन उत्सर्जन में 89% तक कमी की संभावना

सरकारी आंकड़ों के अनुसार सड़क मार्ग से 1 टन माल को 1 किलोमीटर ले जाने पर लगभग 101 ग्राम CO₂ उत्सर्जित होता है, जबकि रेल के माध्यम से यही परिवहन मात्र 11.5 ग्राम CO₂ उत्सर्जन के साथ होता है। इसका अर्थ है कि रेल परिवहन सड़क की तुलना में करीब 89 प्रतिशत कम कार्बन उत्सर्जन करता है और विद्युतीकरण बढ़ने से यह लाभ और अधिक स्पष्ट हो जाता है। रेल विद्युतीकरण से डीजल पर निर्भरता घटने के साथ देश के कुल कार्बन फुटप्रिंट में भी उल्लेखनीय कमी आई है।

डीजल खपत में 136 करोड़ लीटर की कमी

भारतीय रेलवे ने बताया है कि ट्रैक्शन (लोकोमोटिव परिचालन) के लिए ईंधन खपत में वर्ष 2018‑19 की तुलना में 2023‑24 के दौरान 136 करोड़ लीटर की कमी दर्ज की गई। यह कमी सीधे तौर पर विद्युतीकरण बढ़ने, ऊर्जा दक्षता सुधारने और परिचालन में आधुनिक तकनीक अपनाने का परिणाम है। इसके साथ ही विदेशी मुद्रा की बचत, परिचालन लागत में गिरावट और माल ढुलाई‑यात्री सेवाओं को सस्ता व टिकाऊ बनाने में मदद मिली है।

यात्रियों के लिए तेज, शांत और किफायती सफर

विद्युत इंजन डीजल लोकोमोटिव की तुलना में तेजी से गति पकड़ते हैं और अधिक औसत गति बनाए रखने में सक्षम हैं, जिससे समयपालन सुधरता है और यात्रा समय कम होता है। इलेक्ट्रिक ट्रेनों में शोर और कंपन अपेक्षाकृत कम होता है, जिससे यात्रियों को अधिक आरामदायक अनुभव मिलता है और लंबी दूरी की यात्रा भी कम थकाऊ लगती है। परिचालन लागत घटने से भविष्य में किराए पर दबाव कम रहने और सेवाओं की गुणवत्ता बढ़ाने की संभावनाएं मजबूत हुई हैं।

माल ढुलाई और लॉजिस्टिक्स पर सकारात्मक प्रभाव

विद्युतीकरण से भारतीय रेलवे की ढुलाई क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है क्योंकि इलेक्ट्रिक लोकोमोटिव अधिक हॉर्स‑पावर के साथ भारी माल गाड़ियों को तेज गति से खींच सकते हैं। तेज और भरोसेमंद माल गाड़ियां उद्योगों, कोल्ड‑चेन, पोर्ट कनेक्टिविटी और ई‑कॉमर्स लॉजिस्टिक्स के लिए गेम‑चेंजर साबित हो रही हैं। इससे सड़क से रेल की ओर शिफ्ट बढ़ने की उम्मीद है, जो ट्रैफिक जाम और सड़क प्रदूषण कम करने में भी मदद करेगा।

हरित ऊर्जा के साथ ‘ग्रीन रेलवे’ की दिशा में कदम

विद्युतीकरण के साथ-साथ भारतीय रेलवे सौर और पवन जैसे नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों से अपनी ऊर्जा आवश्यकताओं का बड़ा हिस्सा पूरा करने की दिशा में काम कर रहा है। विभिन्न रिपोर्टों के अनुसार रेलवे ने सौर प्लांट और पवन ऊर्जा परियोजनाओं के जरिए अपनी हरित क्षमता लगातार बढ़ाई है, जिससे कोयला आधारित बिजली पर निर्भरता कम करने का लक्ष्य रखा गया है। सरकार का लक्ष्य है कि आने वाले वर्षों में रेलवे संचालन को अधिकतम हद तक ग्रीन एनर्जी से चलने वाली प्रणाली में बदला जाए।

पर्यावरण को बड़ा फायदा: 2030 तक ‘नेट ज़ीरो’ का लक्ष्य

रेलवे के इस कायाकल्प का सीधा असर पर्यावरण पर पड़ेगा। इलेक्ट्रिक ट्रेनों के चलने से डीजल इंजन से होने वाले कार्बन उत्सर्जन में भारी कमी आएगी।

  • इस पहल के साथ, भारतीय रेलवे 2030 तक दुनिया का सबसे बड़ा ‘नेट ज़ीरो कार्बन उत्सर्जक’ (Net Zero Carbon Emitter) बनने की राह पर है।
  • रेल परिवहन, सड़क परिवहन की तुलना में 89% कम CO2 उत्सर्जित करता है।​

वैश्विक परिप्रेक्ष्य में भारत की बढ़ती साख

चीन, रूस और ब्रिटेन जैसे देशों के बड़े रेल नेटवर्क होने के बावजूद भारत ने कम समय में अधिक कवरेज के साथ विद्युतीकरण कर अपनी तकनीकी और प्रोजेक्ट मैनेजमेंट क्षमता का प्रदर्शन किया है। यह उपलब्धि भारत को न केवल एशिया, बल्कि वैश्विक स्तर पर एक ऐसे देश के रूप में स्थापित करती है जो बड़े‑स्तर के बुनियादी ढांचा सुधारों को समयबद्ध तरीके से लागू कर सकता है। विशेषज्ञ इसे भारत के ‘ग्रीन ग्रोथ’ मॉडल का महत्वपूर्ण स्तंभ मान रहे हैं।

निष्कर्ष

भारत की यह उपलब्धि केवल पटरियों तक सीमित नहीं है। यह एक बदलते हुए भारत की तस्वीर है जो अपनी गति, तकनीक और पर्यावरण संरक्षण के प्रति प्रतिबद्धता से दुनिया को चौंका रहा है। ब्रिटेन और रूस जैसे देशों का पिछड़ना यह साबित करता है कि बुनियादी ढांचे के विकास में भारत अब ‘फॉलोअर’ नहीं, बल्कि ‘लीडर’ है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

Q1: भारतीय रेलवे का कितना प्रतिशत विद्युतीकरण (Electrification) हो चुका है?

Ans: दिसंबर 2025 तक, भारतीय रेलवे के ब्रॉड गेज नेटवर्क का लगभग 99.2% विद्युतीकरण पूरा हो चुका है।

Q2: क्या भारत ने रेलवे विद्युतीकरण में चीन को पीछे छोड़ दिया है?

Ans: हाँ, प्रतिशत के मामले में भारत (99.2%) चीन (82%) से आगे निकल चुका है।

Q3: भारतीय रेलवे का ‘नेट ज़ीरो’ लक्ष्य क्या है?

Ans: भारतीय रेलवे ने वर्ष 2030 तक पूरी तरह से ‘नेट ज़ीरो कार्बन उत्सर्जक’ बनने का लक्ष्य रखा है।

Q4: पूर्ण विद्युतीकरण से यात्रियों को क्या लाभ होगा?

Ans: इससे ट्रेनों की गति बढ़ेगी (जैसे वंदे भारत), प्रदूषण कम होगा, और रेलवे की परिचालन लागत कम होने से भविष्य में किराए में स्थिरता आ सकती है।

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