2026 की शुरुआत में ही सोना और चांदी की कीमतों में अभूतपूर्व तेजी देखी जा रही है। सोना ₹1,76,000 से ₹1,80,000 प्रति 10 ग्राम के करीब पहुंच गया है, जबकि चांदी ₹4 लाख प्रति किलोग्राम के करीब है। विश्लेषकों का मानना है कि 2026 में सोने की कीमत ₹1,50,000 से ₹1,65,000 के बीच रह सकती है, जबकि चांदी ₹2,80,000 से ₹3,50,000 प्रति किलो रह सकती है। आइए समझते हैं कि आखिर क्या कारण हैं इस भारी उछाल के पीछे, और भविष्य में क्या हो सकता है।
मुख्य अंश (Highlights)
इस समय सोना-चांदी की कीमतों में क्या हो रहा है?
पिछले कुछ हफ्तों में सोना-चांदी की कीमतों में जो उछाल देखा जा रहा है, वह असाधारण है। मात्र जनवरी 2026 में ही सोने की कीमत में 24% की वृद्धि हुई है, जबकि चांदी 58% बढ़ गई है। अगर पूरे साल 2025 की बात करें, तो सोना 75% और चांदी 167% महंगी हुई है। यह कोई मामूली वृद्धि नहीं है—यह एक ऐतिहासिक घटना है।
सोने चांदी की वर्तमान कीमतें?
- सोना: ₹1,76,000-1,80,000 प्रति 10 ग्राम (अंतरराष्ट्रीय बाजार में $5,500-5,600 प्रति औंस)
- चांदी: ₹4,00,000 प्रति किलोग्राम (अंतरराष्ट्रीय बाजार में $117-120 प्रति औंस)
ये कीमतें न सिर्फ भारतीय बाजार में रिकॉर्ड हैं, बल्कि विश्व स्तर पर भी ऐतिहासिक हैं।
आखिर क्यों बढ़ रहे हैं दाम?
सोना-चांदी की कीमतें सिर्फ भारत में नहीं, बल्कि दुनियाभर में बढ़ रही हैं। इसके पीछे कई महत्वपूर्ण कारण हैं, जिन्हें समझना जरूरी है।
1. विश्व में अनिश्चितता और तनाव
वर्तमान समय में दुनिया भर में राजनीतिक और भू-राजनीतिक तनाव बढ़ा है। यूक्रेन में चल रहा संघर्ष, अमेरिका और यूरोपीय देशों के बीच व्यापार विवाद, और अन्य अंतरराष्ट्रीय समस्याएं निवेशकों को चिंतित कर रही हैं। ऐसे समय में लोग सुरक्षित निवेश की ओर रुख करते हैं, और सोना-चांदी ऐतिहासिक रूप से सबसे विश्वसनीय सुरक्षित निवेश (सेफ हेवन एसेट्स) माने जाते हैं।
2. दुनिया के सेंट्रल बैंक बड़े पैमाने पर सोना खरीद रहे हैं
यह बात बहुत महत्वपूर्ण है। विश्व भर के केंद्रीय बैंक (रिजर्व बैंक, फेडरल रिजर्व जैसे संस्थान) सोने को अपने भंडार में जोड़ रहे हैं। 2025 में लगभग 850 टन सोना केंद्रीय बैंकों द्वारा खरीदा गया, और 2026 में भी इसी गति से खरीदारी जारी रहने की उम्मीद है। यह क्यों? क्योंकि ये बैंक अमेरिकी डॉलर पर निर्भरता कम करना चाहते हैं और अपने भंडार को विविध बनाना चाहते हैं। सोना एक विश्वसनीय, दीर्घकालीन निवेश है।
3. अमेरिकी डॉलर कमजोर पड़ रहा है
दुनिया में सोने की कीमत अमेरिकी डॉलर में निर्धारित होती है। जब डॉलर कमजोर होता है, तो विदेशी खरीदारों के लिए सोना सस्ता हो जाता है। इसी वजह से मांग बढ़ती है और कीमत चढ़ती है। वर्तमान में डॉलर चार साल के सबसे कम स्तर पर है, जिससे सोना-चांदी सभी के लिए तुलनात्मक रूप से सस्ता है।
4. ब्याज दरें घट रही हैं
फेडरल रिजर्व (अमेरिका का केंद्रीय बैंक) ब्याज दरें कम कर रहा है। कम ब्याज दरों का मतलब है कि बैंक में पैसे रखने पर आपको कम रिटर्न मिलेगा। ऐसे में लोग सोने-चांदी जैसे वैकल्पिक निवेश की ओर बढ़ते हैं।
5. चांदी के लिए औद्योगिक मांग तेज है
सोने के विपरीत, चांदी केवल निवेश का साधन नहीं है। इसका व्यापक औद्योगिक उपयोग है। आजकल सोलर पैनलों में, इलेक्ट्रिक वाहनों में, और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के डेटा सेंटर में चांदी का बड़े पैमाने पर उपयोग होता है। दुनिया सौर ऊर्जा की ओर बढ़ रहा है, इलेक्ट्रिक गाड़ियों की संख्या बढ़ रही है, और एआई का विकास तेजी से हो रहा है। इसलिए चांदी की मांग लगातार बढ़ रही है।
6. छोटे निवेशकों का रुझान
ईटीएफ (एक्सचेंज ट्रेडेड फंड) के जरिए आम लोग भी बड़ी संख्या में सोना-चांदी में निवेश कर रहे हैं। 2025 के आखिरी तिमाही में ही 280 टन के बराबर सोना ईटीएफ में इकट्ठा हुआ, जो केंद्रीय बैंकों की खरीदारी से भी ज्यादा है।
2026 में कीमतें कहां जा सकती हैं?
विश्व के शीर्ष वित्तीय संस्थान और विश्लेषक 2026 के लिए अलग-अलग अनुमान दे रहे हैं।
सोने के लिए अनुमान
| विश्लेषण | अंतरराष्ट्रीय कीमत | भारतीय कीमत |
|---|---|---|
| जेपी मॉर्गन | $5,000-5,400/औंस | ₹1,50,000-1,65,000/10 ग्राम |
| गोल्डमैन सैक्स | $5,400/औंस (दिसंबर 2026) | ₹1,62,000/10 ग्राम |
| भारतीय विशेषज्ञ (रिद्धि सिद्धि) | $5,000-5,500/औंस | ₹1,50,000-1,65,000/10 ग्राम |
| आशावादी अनुमान | $6,000+/औंस | ₹1,80,000+/10 ग्राम |
सबसे संभावित परिदृश्य: 2026 के अंत तक सोना ₹1,50,000 से ₹1,65,000 प्रति 10 ग्राम के बीच रह सकता है।
चांदी के लिए अनुमान
| विश्लेषण | अंतरराष्ट्रीय कीमत | भारतीय कीमत |
|---|---|---|
| सिटीग्रुप | $150/औंस (3 महीने में) | ₹4,50,000/किलो |
| विश्लेषकों की सीमा | $85-150/औंस | ₹2,55,000-4,50,000/किलो |
| भारतीय विशेषज्ञ | $100-120/औंस | ₹3,00,000-3,60,000/किलो |
| आशावादी | $150-170/औंस | ₹4,50,000-5,10,000/किलो |
सबसे संभावित परिदृश्य: 2026 में चांदी ₹2,80,000 से ₹3,50,000 प्रति किलोग्राम के बीच रह सकती है।
किन कारणों से कीमतें इतनी बढ़ सकती हैं?
सकारात्मक कारक (कीमतें बढ़ाएंगे)
- केंद्रीय बैंकों की लगातार खरीदारी – 2026 में भी 755-800 टन सोना खरीदा जाएगा, जो बाजार में एक मजबूत सहारा बनी रहेगी।
- भू-राजनीतिक तनाव बने रहेंगे – यूक्रेन, मध्य पूर्व, और व्यापार विवाद जारी रहेंगे, जिससे सुरक्षित निवेश की मांग अधिक रहेगी।
- डॉलर कमजोर रहेगा – अमेरिका की आर्थिक समस्याएं और बढ़ती कर्ज की वजह से डॉलर कमजोर रहने की उम्मीद है।
- ब्याज दरें कम होंगी – अनुमान है कि 2026 में अमेरिका 75 बेसिस पॉइंट्स (0.75%) ब्याज दरें कम करेगा।
- चांदी की औद्योगिक मांग – सोलर ऊर्जा, इलेक्ट्रिक गाड़ियां, और एआई तकनीक के विकास से चांदी की मांग बढ़ेगी।
- भारत में ईटीएफ में निवेश – भारतीय निवेशकों का रुझान भी सोना-चांदी की ओर है, जिससे मांग बढ़ेगी।
चेतावनी के संकेत (संभावित सुधार)
लेकिन सच यह भी है कि कीमतें बहुत तेजी से बढ़ी हैं, जिससे कुछ चेतावनी के संकेत भी दिख रहे हैं:
- बुलबुले के संकेत – चांदी 272% वर्ष दर वर्ष बढ़ी है, जो असामान्य है। कुछ विश्लेषक इसे बुलबुले (बबल) जैसा मानते हैं।
- अत्यधिक अस्थिरता – कीमतों में बहुत तेजी के साथ अचानक गिरावट भी हो सकती है।
- तकनीकी अधिविक्रय – कीमतें मुख्य तकनीकी स्तरों से 30% ऊपर हैं, जहां सुधार संभव है।
- मुनाफे में गिरावट का जोखिम – जब बहुत सारे लोग किसी सम्पत्ति में निवेश कर लें, तो अक्सर कीमतें नीचे आ जाती हैं।
भारत के लिए विशेष बातें
भारत में कीमतें अंतरराष्ट्रीय से अलग क्यों?
जब आप भारत में सोना-चांदी खरीदते हैं, तो कीमत दो चीजों पर निर्भर करती है:
भारतीय कीमत = अंतरराष्ट्रीय कीमत × (डॉलर-रुपये की विनिमय दर)
इसका मतलब यह है कि यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमत स्थिर रहे, पर रुपया कमजोर हो जाए, तो भारत में सोने की कीमत बढ़ जाएगी। इसी वजह से भारत में कीमतें अंतरराष्ट्रीय कीमतों से अलग दिख सकती हैं।
भारत में मांग कम नहीं हुई
आश्चर्यजनक बात यह है कि भारत में कीमतों में भारी इजाफे के बावजूद सोना-चांदी की मांग कम नहीं हुई है। 2025 में भारत ने ₹59,000 करोड़ का सोना आयात किया, जो पिछले साल के अनुमान से ज्यादा है। इसका कारण है भारतीय संस्कृति में सोने का महत्व और विवाह के मौसम में इसकी मांग।
सरकार पर दबाव
बहुत सी खरीदारी के कारण विदेशी मुद्रा पर दबाव बढ़ रहा है और रुपया कमजोर हो रहा है। इसी वजह से सरकार सोना-चांदी पर आयात शुल्क (कस्टम ड्यूटी) बढ़ाने पर विचार कर रही है। वर्तमान में 6% शुल्क है, पहले यह 15% तक था।
आम आदमी के लिए क्या करें?
अब सवाल उठता है कि एक आम निवेशक को क्या करना चाहिए।
1. सोना – दीर्घकालीन निवेश
विशेषताएं:
- अधिक स्थिर, कम अस्थिर
- दीर्घकालीन सुरक्षा प्रदान करता है
- मुद्रास्फीति के विरुद्ध सुरक्षा
- सांस्कृतिक और धार्मिक महत्व
किसके लिए उपयुक्त: परिवार की बचत, विवाह की योजना, दीर्घकालीन निवेश
2. चांदी – वृद्धि की संभावना
विशेषताएं:
- अधिक वृद्धि की संभावना
- लेकिन अधिक अस्थिर
- कम पूंजी निवेश की जरूरत
- औद्योगिक मांग से फायदा
किसके लिए उपयुक्त: मध्यम जोखिम वहन करने वाले, अतिरिक्त आय चाहने वाले
3. दोनों का मिश्रण
सबसे अच्छा विकल्प: अधिकांश विशेषज्ञ सोना और चांदी दोनों में निवेश करने की सलाह देते हैं। इससे:
- जोखिम कम हो जाता है
- आप दोनों का लाभ ले सकते हैं
- पोर्टफोलियो संतुलित रहता है
4. कीमतों में सुधार का इंतजार करें
महत्वपूर्ण सलाह:
- वर्तमान कीमतें बहुत अधिक हैं
- छोटी गिरावट के लिए इंतजार करें
- धीरे-धीरे खरीदारी करें (डॉलर-कॉस्ट एवरेजिंग)
- एक बार में सारा पैसा न लगाएं
भारतीय विशेषज्ञ क्या कहते हैं?
भारतीय सर्राफा व्यापार के अग्रदूत यह मानते हैं:
- पृथ्वीराज कोठारी (रिद्धि सिद्धि बुलियंस) का अनुमान है कि सोना ₹1,50,000 से ₹1,65,000 तक जा सकता है। चांदी का सर्वाधिक संभावित स्तर ₹2,80,000 से ₹3,20,000 है।
- भारतीय सर्राफा संघ के अनुसार वैश्विक अनिश्चितता, भू-राजनीतिक तनाव, और निवेशकों का सुरक्षित निवेश की ओर झुकाव ही मुख्य कारण है।
- विशेषज्ञों की चेतावनी: वर्तमान कीमतों पर खरीदारी मुनाफा लेने का अच्छा समय नहीं है। सुधार की प्रतीक्षा करना बेहतर है।
क्या हो सकती है गलत?
हर अनुमान में जोखिम होता है। निम्नलिखित परिस्थितियों में कीमतें नीचे आ सकती हैं:
- भू-राजनीतिक तनाव कम हो जाए – यदि दुनिया में शांति स्थापित हो जाए
- अमेरिकी अर्थव्यवस्था मजबूत हो – डॉलर मजबूत हो सकता है
- ब्याज दरें बढ़ें – यदि मुद्रास्फीति बढ़ जाए
- तकनीकी सुधार – इतनी तेजी के बाद गिरावट आम है
निष्कर्ष: आम जनता के लिए संदेश
2026 में सोना-चांदी की संभावित कीमतें:
- सोना: ₹1,50,000-1,65,000 प्रति 10 ग्राम
- चांदी: ₹2,80,000-3,50,000 प्रति किलोग्राम
लेकिन याद रखें:
- वर्तमान कीमतें बहुत अधिक हैं
- छोटी गिरावट संभव है
- दीर्घकालीन दृष्टिकोण रखें, अल्पकालिक मुनाफे की चाहत न रखें
- अपनी आर्थिक स्थिति के अनुसार निवेश करें
- किसी विश्वसनीय सलाहकार से सलाह जरूर लें
अंतिम सलाह: सोना-चांदी निवेश का एक महत्वपूर्ण हिस्सा हो सकते हैं, पर ये आपका पूरा पोर्टफोलियो नहीं होना चाहिए। विविधता ही वास्तविक सुरक्षा है।
डिस्क्लेमर: यह लेख सूचना और शिक्षा के उद्देश्य से है। व्यक्तिगत निवेश संबंधी निर्णय लेने से पहले किसी योग्य वित्तीय सलाहकार से परामर्श जरूर लें। भविष्य की कीमतों का कोई निश्चित अनुमान नहीं दिया जा सकता।












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