विशेष रिपोर्ट: कैंसर रोकथाम और स्वास्थ्य सेवा में सुधार
भारत के प्रख्यात सर्जिकल ऑन्कोलॉजी विशेषज्ञ डॉ. अंशुमान कुमार ने एक महत्वपूर्ण पॉडकास्ट में कैंसर रोकथाम की एक अनोखी और सरल रणनीति साझा की है। डॉ. कुमार ने दावा किया कि सही जीवनशैली और आहार परिवर्तन के माध्यम से कैंसर को पूरी तरह रोका जा सकता है।
कौन हैं डॉ. अंशुमान कुमार?
डॉ. अंशुमान कुमार सर्जिकल ऑन्कोलॉजी के क्षेत्र में 21 वर्षों के अनुभव के साथ भारत के सर्वोच्च विशेषज्ञों में से एक हैं। उनके पास MBBS (1999), MS in Surgery (2003), M.Ch in Surgical Oncology (2006), और MRCS जैसी योग्यताएं हैं। दिल्ली के धर्मशिला नारायणा सुपरस्पेशलिटी अस्पताल में कार्यरत इस ख्यातनाम डॉक्टर ने अपने कॅरियर में 34,000 से अधिक कैंसर सर्जरी की हैं।
कैंसर: सबके शरीर में मौजूद है
डॉ. कुमार के अनुसार, “कैंसर की कोशिकाएं हर इंसान के शरीर में मौजूद रहती हैं। हर दिन हर व्यक्ति के शरीर में हजारों कैंसर कोशिकाएं बनती हैं और नष्ट भी होती हैं।” उन्होंने बताया कि हमारे शरीर का रक्षा तंत्र (इम्यून सिस्टम) प्रतिदिन इन हानिकारक कोशिकाओं को खोजकर नष्ट करता रहता है।
समस्या तब आती है जब यह रक्षा तंत्र कमजोर पड़ जाता है। डॉ. कुमार के अनुसार, “जिस दिन हमारा डिफेंस सिस्टम कमजोर पड़ गया या कोशिकाएं अधिक संख्या में पनपने लगीं, उसी दिन कैंसर अपना पूरा रूप ले लेता है। जब यह 10 की शक्ति तक पहुंचता है, तब 1 सेंटीमीटर का ट्यूमर बनता है, जिसे हम कैंसर घोषित करते हैं।”
भारत में कैंसर का भयानक भविष्य
डॉ. कुमार ने एक चिंताजनक भविष्यवाणी की है: “2050 तक विश्व में हर 20 में से 1 व्यक्ति को अपने जीवनकाल में कैंसर का सामना करना पड़ेगा।” उन्होंने आगे कहा कि भारत इस दिशा में चिंताजनक दर से आगे बढ़ रहा है और संभावना है कि भारत कैंसर की वैश्विक राजधानी बन जाए।
कैंसर रोकथाम: M-M-S रणनीति
डॉ. अंशुमान कुमार ने कैंसर को रोकने के लिए एक सरल लेकिन प्रभावी तीन स्तंभों वाली रणनीति प्रस्तुत की है:
M (1) – MEAL (स्वास्थ्यकर आहार)
डॉ. कुमार का पहला सुझाव आहार में क्रांतिकारी बदलाव है। उन्होंने कहा कि सबसे पहले “घटिया खाना” बंद करना चाहिए:
- त्यागें: प्रोसेस्ड, रिफाइंड, तेलयुक्त, पैकेज्ड खाना, फास्ट फूड, जंक फूड, अल्कोहल और सिगरेट
- अपनाएं: क्षेत्रीय और मौसमी खाना जो आपके आसपास उपलब्ध हो
- सलाह: होलसम फूड फॉर होलसम हेल्थ – अर्थात, अधिकांश खाना साबुत रूप में खाएं
विशिष्ट सुझाव:
- हर तरह के सलाद का सेवन करें
- चोकर के साथ आटे की रोटियां खाएं
- सब्जियों और दालों की मात्रा बढ़ाएं
- ताजे मौसमी फल खाएं
- रात को खाना न खाएं (इंटरमिटेंट फास्टिंग)
डॉ. कुमार के अनुसार, यह सरल परिवर्तन ब्लड प्रेशर, मधुमेह और मोटापे को नियंत्रित रखता है, जिससे कैंसर से बचाव होता है।
M (2) – MIND (मानसिक स्वास्थ्य)
दूसरा और महत्वपूर्ण स्तंभ मानसिक स्वास्थ्य है। डॉ. कुमार का मानना है कि “मन पर काबू जरूरी है।” उन्होंने सुझाव दिया:
- नकारात्मक विचारों पर रोक लगाएं
- वर्तमान में जीना सीखें
- दिमाग में अधिक चीजें न रखें
- परिवार और समाज के साथ समय बिताएं
- मित्रों के साथ मस्ती करें
- नकारात्मक लोगों से दूर रहें
- हर पल सकारात्मक रहें
- जीवन की परेशानियों को हंसते-हंसते पार करें
- योग और ध्यान का नियमित अभ्यास करें
डॉ. कुमार के अनुसार, “हमारा मन चंचल होता है। अगर आपने मन को बांध लिया और खुश रहना सीख लिया, तो कोई भी बीमारी आपको छू नहीं पाएगी।”
S – SLEEP (गहरी और शांतिपूर्ण नींद)
तीसरा और अंतिम स्तंभ है गुणवत्तापूर्ण नींद। डॉ. कुमार के अनुसार:
- बिस्तर को सही से साफ-सुथरा रखें
- बच्चे की तरह शांति से सोएं
- रात में नींद बार-बार न टूटे
- रात में केवल एक बार नींद खुले
- गहरी और सुकून भरी नींद जरूरी है
डॉ. कुमार ने जोर देकर कहा कि यह तीनों बातें (खान-पान, मानसिक स्वास्थ्य और नींद) मिलकर कैंसर को दूर रखती हैं।
कैंसर का सच: शरीर स्वयं करता है संकेत
डॉ. अंशुमान कुमार के अनुसार, कैंसर तब तक विकसित नहीं होता जब तक शरीर संकेत देता रहता है। जब हम गलत खान-पान, गलत व्यवहार और गलत जीवनशैली से इन कोशिकाओं को प्रताड़ित करते हैं, तो ये कोशिकाएं “आतंकवादियों की तरह” पनपने लगती हैं।
“शरीर का डिफेंसिव सिस्टम इन आतंकवादियों को मारने के लिए सेना की तरह काम करता है,” डॉ. कुमार ने समझाया। लेकिन अगर हम इन कोशिकाओं को अधिक प्रताड़ित करते हैं, तो ये कोशिकाएं धीरे-धीरे सेना को भी चकमा देने लगती हैं। इसी स्तर पर भी शरीर आपको सुधरने का मौका देता है – अगर इस बिंदु पर सुधार न हो, तो ये कोशिकाएं पूरी तरह कैंसर में बदल जाती हैं।
स्वास्थ्य सेवा में भ्रष्टाचार की गंभीर समस्या
डॉ. कुमार ने भारतीय स्वास्थ्य सेवा व्यवस्था में व्याप्त भ्रष्टाचार पर कड़ी आलोचना की है:
अनावश्यक परीक्षण और दवाएं
डॉ. कुमार के अनुसार, कई चिकित्सक विशिष्ट परीक्षण और दवाएं निर्धारित करते हैं जो उनके वित्तीय हित से जुड़ी होती हैं। वे कहते हैं कि “अगर कोई डॉक्टर विशिष्ट परीक्षण कराने का सुझाव दे रहा है और विशिष्ट दवाएं लेने को कह रहा है, तो निश्चित रूप से कुछ गड़बड़ है।”
अयोग्य चिकित्सकों द्वारा विशेषज्ञ सर्जरी
डॉ. कुमार की सबसे गंभीर शिकायत कैंसर सर्जरी में अयोग्य चिकित्सकों का उपयोग है। उन्होंने कहा, “यह तमाशा है कि गैस्ट्रोइंटेरोलॉजी के डॉक्टर पेट के कैंसर की सर्जरी करते हैं। जनरल सर्जन कैंसर सर्जरी करते हैं।”
कॉर्पोरेट अस्पतालों ने, उन्होंने कहा, M.Ch (कैंसर सर्जरी) योग्य चिकित्सकों को नियुक्त करने के नियम से बचने के लिए एक चाल निकाली है। वे सामान्य सर्जन को कैंसर सर्जरी करने देते हैं।
अनावश्यक सर्जरी
2018 में किए गए एक अध्ययन में पता चला कि दिल का स्टेंट, घुटना प्रतिस्थापन, और कैंसर सर्जरी में कई अनावश्यक प्रक्रियाएं की जा रही हैं। सरकारी सर्वेक्षण से पता चला कि लगभग 44% लोगों को सर्जरी की जरूरत नहीं थी, लेकिन उन्हें करा दी गई।
बड़े अस्पतालों का आकर्षण
डॉ. कुमार ने चेतावनी दी कि रोगी अक्सर बड़ी इमारतों और शानदार अस्पतालों से प्रभावित होते हैं, लेकिन यह जांचना महत्वपूर्ण है कि वहां कौन काम कर रहा है। उन्होंने सुझाव दिया:
- डॉक्टर की योग्यता जांचें
- डॉक्टर की प्रमाणपत्र देखें
- यह देखें कि डॉक्टर ने कितने रोगियों को ठीक किया है
- दूसरी राय (सेकंड ओपिनियन) जरूर लें
कैंसर का इलाज: वर्तमान समस्याएं
डॉ. कुमार के अनुसार, वर्तमान आधुनिक चिकित्सा प्रणाली कैंसर के लक्षणों को समाप्त तो करती है, लेकिन मूल कारण को संबोधित नहीं करती। वे कहते हैं:
“यह आग है जो कोशिका के अंदर है। अगर आपने इसे सही नहीं किया, तो भले ही आप सर्जरी कर दें, कीमोथेरेपी दे दें, विकिरण चिकित्सा दे दें, फिर भी कैंसर दोबारा हो सकता है।”
कैंसर के इलाज के बाद भी, डॉ. कुमार के अनुसार, कैंसर की कोशिकाएं शरीर में निष्क्रिय रूप में बनी रहती हैं। अगर रक्षा तंत्र कमजोर है, तो यह फिर से सक्रिय हो जाती है।
डॉ. कुमार की नई पहल: समग्र उपचार
डॉ. अंशुमान कुमार ने धर्मशिला अस्पताल को छोड़ दिया है और एक नई पहल शुरू की है जो आयुर्वेद और आधुनिक चिकित्सा को जोड़ता है। उनका दृष्टिकोण है:
- अलोपैथी – 35% भूमिका
- आयुर्वेद – समग्र देखभाल
- जीवनशैली – मुख्य भूमिका
डॉ. कुमार कहते हैं, “अगर सभी चिकित्सा पद्धतियां एक साथ आ जाएं, तो सबसे बड़ा लाभ जनता को मिलेगा। इलाज की लागत तुरंत कम हो जाएगी।”
वे आयुर्वेद के माध्यम से विशेष आलू और अन्य पोषक खाद्य पदार्थ उगा रहे हैं जो कैंसर विरोधी गुणों के साथ हों।
डॉ. कुमार का दर्शन
डॉ. अंशुमान कुमार का इलाज दर्शन सरल है:
“आशा (HOPE) से शुरुआत, आशा से अंत।”
उनका मंत्र है: “स्वास्थ्य, धन से कहीं अधिक कीमती है” (Wellness is more precious than wealth)
उपचार का उद्देश्य “शरीर में एक अनुकूल शारीरिक वातावरण तैयार करना है जो प्रतिकूल परिस्थितियों का सामना करने में मदद करे।”
भविष्य की आशा
डॉ. कुमार का मानना है कि अगर सही कदम उठाए जाएं:
- बीमारियों की संख्या कम हो जाएगी
- लोग स्वस्थ रहेंगे
- बीमारियों की रोकथाम व्यवस्था शुरू हो जाएगी
- अस्पतालों की संख्या और भीड़ कम हो जाएगी
- इलाज की लागत में नाटकीय कमी आएगी
- राष्ट्र की दक्षता बढ़ेगी
सुझाव: सेकंड ओपिनियन लेना जरूरी है
डॉ. कुमार का सबसे महत्वपूर्ण सुझाव: “हर गंभीर बीमारी के लिए दूसरी राय जरूर लें।” वे कहते हैं कि दिल की स्टेंट लगवाने, घुटना बदलवाने, या कैंसर की सर्जरी कराने से पहले कम से कम एक और डॉक्टर से परामर्श लें।
निष्कर्ष
डॉ. अंशुमान कुमार का संदेश स्पष्ट है: कैंसर रोकना आसान है, लेकिन इलाज करना जटिल है। सही खान-पान, सकारात्मक मानसिकता, और गुणवत्तापूर्ण नींद के माध्यम से हम न केवल कैंसर, बल्कि अन्य कई जीवनशैली संबंधी बीमारियों से बच सकते हैं।
उनकी M-M-S रणनीति एक सरल लेकिन प्रभावी दृष्टिकोण है जिसे हर व्यक्ति अपना सकता है। साथ ही, स्वास्थ्य सेवा व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही की जरूरत है ताकि रोगियों को सही और आवश्यक इलाज मिले।
चिकित्सा सलाह: यह लेख सामान्य जानकारी के लिए है। किसी भी स्वास्थ्य समस्या के लिए कृपया योग्य चिकित्सक से परामर्श लें।












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