आज, मंगलवार 3 मार्च 2026 को, रात के आकाश में एक असाधारण खगोलीय घटना घटने वाली है। इस वर्ष का पहला और एकमात्र पूर्ण चंद्र ग्रहण — जिसे वैज्ञानिक भाषा में Total Lunar Eclipse और लोकप्रिय भाषा में “ब्लड मून” कहा जाता है — आज शाम भारत सहित एशिया, ऑस्ट्रेलिया और उत्तरी अमेरिका के करोड़ों लोगों को देखने को मिलेगा। विशेष बात यह है कि यह ग्रहण फाल्गुन पूर्णिमा यानी होली के पवित्र पर्व के साथ एक दुर्लभ संयोग बना रहा है — होली पर 100 साल बाद ऐसा दुर्लभ संयोग बन रहा है।
ब्लड मून क्या होता है?
चंद्र ग्रहण तब होता है जब पृथ्वी, सूर्य और चंद्रमा के बीच में आ जाती है और अपनी छाया चंद्रमा की सतह पर डालती है। जब चंद्रमा पूरी तरह पृथ्वी की गहरी छाया (Umbra) में समा जाता है, तो सूर्य की सीधी रोशनी उस तक नहीं पहुँच पाती। हालाँकि, पृथ्वी का वायुमंडल सूर्य की रोशनी को मोड़कर चंद्रमा पर डालता है, जिससे चाँद एक गहरे लाल-तांबई रंग में दिखता है — इसी को “ब्लड मून” कहते हैं।
ग्रहण की पूरी टाइमिंग (IST) — द्रिक पंचांग के अनुसार
चंद्र ग्रहण दोपहर 3 बजकर 20 मिनट से शुरू होकर शाम 6 बजकर 47 मिनट तक रहेगा। इसका खग्रास (Totality) चरण शाम 4 बजकर 34 मिनट से आरंभ होगा।
- ग्रहण प्रारंभ (Penumbral) — दोपहर 3:20 PM
- खग्रास / Totality प्रारंभ — शाम 4:34 PM
- अधिकतम ग्रहण (वैश्विक) — शाम 6:00 PM
- भारत में सर्वाधिक दृश्यता — 6:33 से 6:40 PM
- ग्रहण पूर्णतः समाप्त — शाम 6:46–6:47 PM
- कुल वैश्विक अवधि — 3 घंटे 27 मिनट
- Totality की अवधि — लगभग 58 मिनट
- भारत में दृश्य अवधि — लगभग 20 मिनट
सूतक काल ( द्रिक पंचांग के अनुसार)
3 मार्च को सुबह 6 बजकर 20 मिनट से सूतक काल प्रारंभ होगा। सूतक काल के दौरान सभी मांगलिक कार्य वर्जित रहेंगे और मंदिरों के कपाट बंद कर दिए जाएंगे।
- सूतक काल प्रारंभ — सुबह 6:20 AM (ग्रहण से ठीक 9 घंटे पहले)
- सूतक काल समाप्त — शाम 6:46–6:47 PM (ग्रहण समाप्ति के साथ)
- बच्चे, बुजुर्ग और गर्भवती महिलाओं के लिए — दोपहर 3:20 PM से 6:47 PM
फाल्गुन पूर्णिमा स्नान-दान मुहूर्त
द्रिक पंचांग के अनुसार, पूर्णिमा तिथि 2 मार्च की शाम 5 बजकर 55 मिनट से शुरू होकर 3 मार्च शाम 5 बजकर 7 मिनट तक रहेगी। स्नान-दान के लिए ब्रह्म मुहूर्त सुबह 5 बजकर 19 मिनट से 6 बजकर 8 मिनट तक था। यह मुहूर्त सूतक (6:20 AM) से पहले का था, इसलिए जिन्होंने इस दौरान स्नान-दान किया उन्हें पुण्य फल प्राप्त होगा।
भारत में कहाँ और कैसे दिखेगा?
यह चंद्र ग्रहण भारत के पूर्वी हिस्सों में ज्यादा स्पष्ट रूप से दिखाई देगा, जबकि अन्य क्षेत्रों में आंशिक रूप से नजर आ सकता है। भारत के अलावा यह ग्रहण ऑस्ट्रेलिया, दक्षिण-पूर्व एशिया, प्रशांत महासागर और अमेरिका के कुछ हिस्सों में भी दिखाई देगा।
शहरवार अनुमानित समय (IST):
- गुवाहाटी / पूर्वोत्तर — 5:40 से 6:47 PM (सर्वोत्तम दृश्यता)
- पटना / कोलकाता — 5:50 से 6:47 PM
- कानपुर / लखनऊ — 6:14 से 6:47 PM
- दिल्ली / नोएडा — 6:26 से 6:47 PM
- मुंबई — 6:30 से 6:47 PM
- चेन्नई / बेंगलुरु — 6:25 से 6:47 PM
सभी 12 राशियों पर प्रभाव
ज्योतिषियों की मानें तो साल का पहला चंद्र ग्रहण भारत में दिखेगा, जिसके कारण इसका प्रभाव अगले 1 महीने तक सभी राशियों पर पड़ेगा। यह ग्रहण सिंह राशि और पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र में लग रहा है।
- मेष — करियर में सतर्कता जरूरी, नए निर्णय टालें
- वृषभ — आर्थिक मामलों में सावधानी
- मिथुन — मानसिक तनाव संभव, ध्यान करें
- कर्क — स्वास्थ्य पर ध्यान दें, ग्रहण का सीधा प्रभाव
- सिंह — ग्रहण सीधे इस राशि में, अत्यंत सावधान रहें
- कन्या — खर्चों पर नियंत्रण रखें
- तुला — रिश्तों में मतभेद संभव
- वृश्चिक — कार्यक्षेत्र में संयम रखें
- धनु — यात्रा से बचें
- मकर — पारिवारिक मामलों में धैर्य
- कुंभ — वित्तीय निर्णय स्थगित करें
- मीन — आध्यात्मिक गतिविधियाँ लाभकारी
(ज्योतिषीय व्याख्याएँ आस्था-आधारित हैं)
वास्तु टिप्स — ग्रहण के दौरान क्या करें, क्या न करें
ग्रहण के समय वातावरण में नकारात्मक ऊर्जा ज्यादा होती है, जिसका प्रभाव मानसिक स्थिति पर पड़ता है।
क्या करें:
- ग्रहण काल में गायत्री मंत्र, महामृत्युंजय मंत्र, भगवान विष्णु या शिव के मंत्रों का जाप करें।
- ग्रहण समाप्त होने के बाद पूरे घर में गंगाजल छिड़कें।
- चंद्रमा से जुड़ी वस्तुओं का दान करें — चावल, दूध, सफेद कपड़े।
- ग्रहण देखने के बाद स्नान अवश्य करें।
क्या न करें:
- नुकीली वस्तुओं जैसे चाकू, कैंची आदि का उपयोग न करें।
- बाल और नाखून न काटें।
- भोजन न बनाएँ और न ग्रहण करें।
- शुभ, मांगलिक कार्य वर्जित हैं। मंदिर दर्शन न करें — कपाट बंद रहेंगे।
2026 का इकलौता पूर्ण ग्रहण — अगला कब?
NASA के अनुसार, यह 2026 का एकमात्र पूर्ण चंद्र ग्रहण है। इसके बाद अगला पूर्ण चंद्र ग्रहण 31 दिसंबर 2028 और 1 जनवरी 2029 की रात को “New Year’s Blood Moon” के नाम से आएगा — यानी लगभग तीन साल तक इस स्तर का खगोलीय नजारा नहीं मिलेगा।
कैसे देखें — विशेषज्ञ सुझाव
- खुली आँखों से देखें — सौर ग्रहण के विपरीत, चंद्र ग्रहण देखना पूर्णतः सुरक्षित है।
- पूर्व दिशा में अवरोध-मुक्त दृश्य होना जरूरी है।
- शहरी रोशनी से दूर जाएँ — जितना अंधेरा, उतना बेहतर नजारा।
- दूरबीन या टेलीस्कोप अनुभव को और रोमांचक बनाएंगे।
- मौसम पहले जाँच लें।












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