भारतीय राजनीति में एक ऐसी घटना हुई है जो विचारधारात्मक रूप से एक दूसरे के विरोधी माने जाने वाले दोनों दलों को एक साथ ला दिया है। महाराष्ट्र के अंबरनाथ नगर निकाय में BJP (भारतीय जनता पार्टी) और Congress (भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस) ने न केवल हाथ मिलाए हैं, बल्कि एक साझा सरकार भी बनाई है। यह गठजोड़ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘कांग्रेस मुक्त भारत’ के नारे को चुनौती देता है और भारतीय राजनीति में शक्ति के लिए किए जाने वाले समझौतों की नई परिभाषा तय करता है।
चुनाव परिणाम और धुर विरोधियों का अप्रत्याशित गठजोड़
अंबरनाथ नगर निकाय के 60 सदस्यीय परिषद में दिसंबर 2025 के चुनाव में विभिन्न राजनीतिक दलों को निम्नलिखित सीटें मिलीं:
| दल | सीटें |
|---|---|
| शिव सेना (एकनाथ शिंदे फैक्शन) | 27 |
| BJP | 14 |
| Congress | 12 |
| NCP (अजीत पवार फैक्शन) | 4 |
| स्वतंत्र | 2 |
शिव सेना सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी, परंतु उसे 30 सदस्यों के बहुमत के लिए 3 सीटें कम रही। यह कमी ही BJP के लिए अवसर साबित हुई।
‘अंबरनाथ विकास आघाड़ी’ का गठन
BJP के स्थानीय नेतृत्व ने Congress और NCP (अजीत पवार फैक्शन) के साथ गठबंधन की बातचीत शुरू की। 31 दिसंबर 2025 को, इन तीनों दलों ने ‘अंबरनाथ विकास आघाड़ी’ नाम का एक नया गठजोड़ बनाया।
गठजोड़ की संरचना:
- BJP के 14 सदस्य
- Congress के 12 सदस्य
- NCP (अजीत पवार) के 4 सदस्य
- स्वतंत्र का 1 सदस्य
- कुल: 32 सदस्य (30 का बहुमत प्राप्त)
नगर निकाय अध्यक्ष का पद BJP को मिला, जबकि भाजपा के अभिजीत करंजुले पटील को गुट नेता नियुक्त किया गया।
शिव सेना को बाहर करने की रणनीति
इस गठजोड़ का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि इसका निर्माण BJP के सहयोगी दल शिव सेना (एकनाथ शिंदे गुट) को सत्ता से बाहर करने के लिए किया गया। महाराष्ट्र की सरकार में BJP और शिव सेना एक साथ हैं, लेकिन अंबरनाथ में स्थानीय स्तर पर उनके बीच मतभेद हो गए।
अंबरनाथ मुंबई मेट्रोपॉलिटन क्षेत्र में स्थित है और यह अंबरनाथ से चुने जाने वाले सांसद श्रीकांत शिंदे के अधीन आता है। BJP के अनुसार, शिव सेना के साथ बातचीत विफल रही, इसलिए Congress और NCP के साथ गठजोड़ करना पड़ा।
राज्य नेतृत्व की प्रतिक्रिया और विरोध
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री की कड़ी प्रतिक्रिया
जब यह खबर सामने आई, तो Maharashtra के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने इसे “अस्वीकार्य” करार दिया। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा:
“मैं बहुत स्पष्ट शब्दों में कह रहा हूं। Congress या AIMIM के साथ कोई गठजोड़ स्वीकार्य नहीं है। यह गठजोड़ तोड़ना होगा। अगर किसी स्थानीय नेता ने यह कदम उठाया है, तो यह गलत है और कड़ी कार्रवाई की जाएगी।”
Congress ने स्वयं को दूर किया
Congress के महाराष्ट्र नेतृत्व ने भी इस गठजोड़ से खुद को अलग करने का प्रयास किया। महाराष्ट्र प्रदेश Congress समिति के उपाध्यक्ष गणेश पटील ने अंबरनाथ के Congress नेता प्रदीप पटील को संदेश भेजा:
“हमने Congress के प्रतीक पर चुनाव लड़े और 12 सीटें जीतीं, लेकिन आपने राज्य नेतृत्व को जानकारी दिए बिना BJP के साथ गठजोड़ कर दिया। हमें यह बात मीडिया से पता चली।”
Congress ने तुरंत अपने अंबरनाथ ब्लॉक अध्यक्ष प्रदीप पटील को निलंबित कर दिया और उन 12 निर्वाचित सदस्यों को भी पार्टी से निलंबित किया, जो इस गठजोड़ में शामिल थे।
शिव सेना का क्रोधित प्रतिक्रिया
शिव सेना के अंबरनाथ विधायक बलाजी किनिकर ने इसे “अनैतिक और अवसरवादी गठजोड़” कहा। उन्होंने कहा:
“BJP का नारा है ‘कांग्रेस मुक्त भारत’, लेकिन महाराष्ट्र में यही पार्टी Congress के साथ सत्ता बना रही है। यह शिव सेना के साथ गद्दारी है।”
इस गठजोड़ के पीछे का तर्क
BJP का पक्ष
BJP के अभिजीत करंजुले पटील और अन्य स्थानीय नेताओं का तर्क था कि:
- प्रशासनिक जिम्मेदारी: अंबरनाथ को “भ्रष्टाचार और धमकी” से मुक्त करने के लिए यह गठजोड़ आवश्यक था।
- बहुमत की चुनौती: मात्र 14 सदस्यों के साथ BJP स्वयं सत्ता नहीं संभाल सकता था। नगर निकाय के नियमों के अनुसार, किसी भी प्रस्ताव को सामान्य सभा में बहुमत से पारित होना आवश्यक है।
- विकल्प की कमी: BJP को Congress, शिव सेना (शिंदे गुट), या किसी अन्य विकल्प के बीच चुनना था।
Congress का दावा
Congress के प्रवक्ताओं का कहना है कि “यह गठजोड़ नहीं, बल्कि विभिन्न पार्टियों के कार्यकर्ताओं का संगठन है जो शिव सेना द्वारा किए गए भ्रष्टाचार के विरुद्ध एक साथ आए हैं।”
भारतीय राजनीति के लिए निहितार्थ
विचारधारा का संकट
यह घटना भारतीय राजनीति में एक महत्वपूर्ण प्रश्न उठाती है: क्या शक्ति और सत्ता विचारधारा से अधिक महत्वपूर्ण है?
BJP, जो अपने आप को एक “राष्ट्रवादी” और “हिंदुत्ववादी” दल के रूप में प्रस्तुत करता है, ने एक “धर्मनिरपेक्ष” दल Congress के साथ सत्ता साझा की। यह विरोधाभास राजनीतिक पर्यवेक्षकों के बीच व्यापक बहस का विषय बन गया है।
‘कांग्रेस मुक्त भारत’ पर सवाल
प्रधानमंत्री मोदी का प्रसिद्ध नारा “कांग्रेस मुक्त भारत” को इस घटना से सीधा चुनौती मिली है। विरोधी दलों के नेताओं ने व्यंग्य से कहा है कि BJP का यह नारा केवल चुनाव प्रचार के दौरान के लिए है, स्थानीय सत्ता में नहीं।
स्थानीय राजनीति में नए समीकरण
यह घटना दर्शाती है कि भारतीय नगर निकायों में स्थानीय राजनीति अपने अपने नियम बनाती है। राष्ट्रीय स्तर पर कड़े विरोधी दल स्थानीय स्तर पर अपने हित में गठजोड़ कर सकते हैं।
अन्य स्थानों पर समान घटनाएं
अंबरनाथ एकमात्र स्थान नहीं है जहां BJP ने अप्रत्याशित गठजोड़ किए हैं। अकोट नगर निकाय में भी BJP ने AIMIM (अल-इंडिया मजलिस-ई-इत्तेहादुल मुस्लिमीन) के साथ गठजोड़ किया है, जो एक इस्लामिक राजनीतिक दल है। यह भी राष्ट्रीय नेतृत्व को अस्वीकार्य है।
निष्कर्ष
BJP और Congress का अंबरनाथ में गठजोड़ भारतीय राजनीति का एक महत्वपूर्ण पल है। यह दर्शाता है कि:
- स्थानीय से राष्ट्रीय अलग है: स्थानीय चुनावों में सत्ता के लिए विचारधारा की कुर्बानी दी जा सकती है।
- नेतृत्व का नियंत्रण: राष्ट्रीय नेतृत्व के “निर्देश” हमेशा स्थानीय नेताओं द्वारा माने नहीं जाते।
- शक्ति ही सब कुछ: भारतीय राजनीति में सत्ता प्राप्त करना अक्सर विचारधारा से अधिक महत्वपूर्ण साबित होता है।
यह घटना आने वाले समय में भारतीय राजनीति कैसे विकसित होगी, इसके लिए एक महत्वपूर्ण संकेत हो सकती है। राष्ट्रीय राजनीति में अगर ऐसी “अजब गठबंधन” की घटनाएं बढ़ी, तो यह राजनीतिक समीकरणों को पूरी तरह बदल सकता है।












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