ओला-उबर की मोनोपॉली को चुनौती देगा ड्राइवर-ओनरशिप वाला ‘भारत टैक्सी’ मॉडल
नई दिल्ली : केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने आज नई दिल्ली के विज्ञान भवन में देश की पहली को-ऑपरेटिव राइड-हेलिंग सर्विस ‘भारत टैक्सी’ का आधिकारिक लॉन्च किया। यह प्लेटफॉर्म सहकारिता मंत्रालय के तहत सहकार टैक्सी कोऑपरेटिव लिमिटेड द्वारा संचालित होगा और इसे भारत की पहली राष्ट्रीय ‘मोबिलिटी कोऑपरेटिव’ के रूप में पेश किया जा रहा है। सरकार का दावा है कि यह ऐप न केवल ओला-उबर जैसे प्राइवेट एग्रीगेटर्स की मोनोपॉली को चुनौती देगा, बल्कि टैक्सी ड्राइवरों को भी असली मालिकाना हक और ज्यादा आमदनी दिलाने का रास्ता खोलेगा।
अमित शाह ने कार्यक्रम में कहा कि ‘भारत टैक्सी’ इस बात की मिसाल है कि कैसे सहकारिता के माध्यम से लोग थोड़ी-थोड़ी पूंजी जोड़कर बड़ी शुरुआत कर सकते हैं। उन्होंने इसे टैक्सी चालकों के लिए “महत्वपूर्ण दिन” करार देते हुए कहा कि इस मॉडल के जरिए ड्राइवर न सिर्फ अधिक लाभ कमा सकेंगे बल्कि “सम्मान के साथ उसके मालिक” भी बनेंगे। यह पहल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन ‘सहकार से समृद्धि’ को शहरी परिवहन क्षेत्र में लागू करने की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है।
क्या है ‘भारत टैक्सी’?
भारत टैक्सी पूरी तरह ऐप-आधारित स्वदेशी राइड-हेलिंग प्लेटफॉर्म है, जिसे एंड्रॉयड और iOS दोनों प्लेटफॉर्म पर लॉन्च किया गया है। इसके जरिए आम यात्री ऑटो, कार और बाइक टैक्सी बुक कर सकेंगे, ठीक उसी तरह जैसे अभी ओला, उबर या रैपिडो के जरिए राइड बुक की जाती है।
यह सेवा सहकार टैक्सी कोऑपरेटिव लिमिटेड के बैनर तले शुरू की गई है, जिसे देश का पहला नेशनल मोबिलिटी कोऑपरेटिव बताया गया है। इस मल्टी-स्टेट कोऑपरेटिव सोसायटी को 2025 में पंजीकृत किया गया था और इसे आठ बड़ी सहकारी संस्थाओं – अमूल, इफको, कृभको, नाफेड, एनडीडीबी, एनसीईएल, एनसीडीसी और नाबार्ड – के सहयोग से संचालित किया जा रहा है।
सरकार के अनुसार, लॉन्च से पहले दिल्ली-एनसीआर और गुजरात में दो महीने का पायलट प्रोजेक्ट चलाया गया, जिसमें तीन से चार लाख के बीच ड्राइवर जुड़ चुके हैं और एक लाख से अधिक यूजर्स ने ऐप पर रजिस्ट्रेशन किया है। मंत्रालय का दावा है कि इस अवधि में ही सारथियों (ड्राइवरों) को लगभग 10 करोड़ रुपये का भुगतान किया जा चुका है।
सहकारी मॉडल: ड्राइवर ही मालिक, जीरो कमीशन
भारत टैक्सी का सबसे बड़ा आकर्षण इसका को-ऑपरेटिव और ड्राइवर-ओनरशिप वाला मॉडल है। हर ड्राइवर, जिसे इस प्लेटफॉर्म पर ‘सारथी’ कहा गया है, सहकारी संस्था का सदस्य और शेयर होल्डर बन सकता है। यानी प्लेटफॉर्म से होने वाले लाभ में उसकी सीधी हिस्सेदारी होगी, जो पारंपरिक प्राइवेट एग्रीगेटर मॉडल से बिल्कुल अलग है।
मौजूदा निजी राइड-हेलिंग कंपनियां प्रति राइड 20–30 प्रतिशत या उससे अधिक तक कमीशन काटती हैं, जिसकी वजह से ड्राइवरों की नेट कमाई काफी घट जाती है। भारत टैक्सी में ‘जीरो कमीशन’ मॉडल अपनाया गया है। ड्राइवरों से प्रति राइड कमीशन नहीं काटा जाएगा, बल्कि वे सिर्फ एक मामूली दैनिक, साप्ताहिक या मासिक मेंबरशिप शुल्क देंगे। भारत टैक्सी के सीईओ विवेक पांडे के मुताबिक, फिलहाल प्लेटफॉर्म किसी तरह की सर्विस फीस नहीं ले रहा है, लेकिन आगे चलकर प्रतिदिन लगभग 25–30 रुपये के आसपास शुल्क लेने पर विचार हो सकता है, जो मौजूदा प्राइवेट एग्रीगेटर्स द्वारा वसूले जाने वाले कमीशन की तुलना में बहुत कम होगा।
अमित शाह ने पहले भी स्पष्ट किया था कि सरकार का लक्ष्य टैक्सी, ऑटो और बाइक टैक्सी चलाने वाले ड्राइवरों की निजी कंपनियों पर निर्भरता खत्म करना और यह सुनिश्चित करना है कि “प्रॉफिट का हर पैसा ड्राइवर तक पहुंचे”। सहकारी मॉडल के तहत ड्राइवरों के लिए बीमा, सस्ते बैंक लोन, विज्ञापन से अतिरिक्त आय और सामाजिक सुरक्षा जैसी सुविधाएं भी जोड़ी जाएंगी।
यात्रियों के लिए क्या बदलेगा? सर्ज प्राइसिंग से राहत, सस्ता किराया
भारत टैक्सी का दूसरा अहम दावा यात्रियों के हित से जुड़ा है। प्लेटफॉर्म पर सर्ज प्राइसिंग यानी पीक ऑवर, बारिश, ट्रैफिक या त्योहारों के समय अचानक बढ़ा हुआ किराया नहीं लिया जाएगा। किराया पहले से तय फेयर चार्ट के आधार पर होगा और ऐप पर पारदर्शी तरीके से दिखेगा, जिससे उपभोक्ताओं को अचानक दोगुना-तिगुना किराया चुकाने की स्थिति से राहत मिलने की उम्मीद है।
नीति-निर्माताओं का अनुमान है कि जीरो कमीशन मॉडल की वजह से भारत टैक्सी पर मिलने वाली राइड्स का किराया मौजूदा प्राइवेट एग्रीगेटर्स की तुलना में औसतन 20–30 प्रतिशत तक सस्ता हो सकता है। कम कमीशन का सीधा लाभ ड्राइवर और यात्री, दोनों को मिलेगा – ड्राइवर की नेट कमाई बढ़ेगी और यात्री को तुलनात्मक रूप से कम किराया देना होगा।
सुरक्षा के मोर्चे पर भी भारत टैक्सी ने कुछ अतिरिक्त फीचर जोड़े हैं। मंत्रालय के अनुसार, प्लेटफॉर्म पर जुड़े ड्राइवरों का पुलिस वेरिफिकेशन, रियल-टाइम जीपीएस ट्रैकिंग, इन-ऐप SOS बटन, मल्टीलिंगुअल सपोर्ट और 24×7 कस्टमर सपोर्ट की सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। दिल्ली पुलिस और गुजरात पुलिस के साथ मिलकर सुरक्षा प्रोटोकॉल तैयार किए गए हैं, और आगे इसे अन्य राज्यों की पुलिस के साथ भी जोड़ा जाएगा।
लॉन्च कार्यक्रम में अमित शाह के मुख्य संदेश
लॉन्च के अवसर पर अमित शाह ने कहा कि ‘भारत टैक्सी’ यह दिखाती है कि सहकारिता के माध्यम से छोटे-छोटे निवेश भी बड़े स्तर की आर्थिक गतिविधि में बदले जा सकते हैं। उन्होंने अपने संबोधन में दोहराया कि यह पहल सिर्फ एक ऐप लॉन्च नहीं, बल्कि टैक्सी ड्राइवर बहन-भाइयों को “सम्मानजनक मालिकाना हक” दिलाने और उन्हें गिग इकॉनमी के शोषण से मुक्त करने की दिशा में एक संरचनात्मक बदलाव है।
शाह ने यह भी विश्वास जताया कि आने वाले समय में भारत टैक्सी देश की नंबर-वन टैक्सी कंपनी के रूप में उभरेगी, खासकर सहकारी क्षेत्र में। उन्होंने कहा कि इससे न केवल रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे, बल्कि शहरी परिवहन में किफायत, पारदर्शिता और जवाबदेही भी बढ़ेगी।
कार्यक्रम में देशभर से आए करीब 1,200 सारथियों (ड्राइवर सदस्यों) ने हिस्सा लिया, जो इस प्लेटफॉर्म के शुरुआती सदस्य हैं। सहकारिता मंत्रालय ने इसे ड्राइवर समुदाय के “सम्मान और सशक्तीकरण” के उत्सव के रूप में पेश किया।
ऐप, कवरेज और आगे की विस्तार योजना
फिलहाल भारत टैक्सी ऐप गूगल प्ले स्टोर और एप्पल ऐप स्टोर दोनों पर उपलब्ध कराया गया है। मंत्रालय और कंपनी ने यात्रियों से अपील की है कि वे वही ऐप डाउनलोड करें जिसे सहकार टैक्सी कोऑपरेटिव लिमिटेड ने जारी किया है, क्योंकि ‘Bharat Taxi’ नाम से कुछ अन्य गैर-संबंधित ऐप भी स्टोर पर मौजूद हैं। सही ऐप पहचानने के लिए आधिकारिक लोगो और डेवलपर का नाम जांचने की सलाह दी गई है।
शुरुआती चरण में सेवा मुख्य रूप से दिल्ली-एनसीआर और कुछ चुनिंदा शहरों में उपलब्ध कराई गई है, जहां पायलट प्रोजेक्ट के दौरान इसे टेस्ट किया गया था। सरकार की योजना है कि अगले दो वर्षों के भीतर भारत टैक्सी को देश के सभी राज्यों और प्रमुख शहरों तक विस्तार दिया जाए, साथ ही हर राज्य में हेल्प सेंटर और सपोर्ट ऑफिस स्थापित किए जाएं। भविष्य में इस सेवा को मेट्रो नेटवर्क और अन्य सार्वजनिक परिवहन मोड्स के साथ एकीकृत करने की भी योजना है, ताकि ‘लास्ट-माइल कनेक्टिविटी’ बेहतर हो सके।
ओला-उबर के लिए बड़ी चुनौती या पूरक विकल्प?
भारत टैक्सी के लॉन्च को कई विश्लेषक देश के कैब सेक्टर में “डिसरप्टिव” कदम मान रहे हैं, क्योंकि यह सीधे तौर पर ओला, उबर और रैपिडो जैसे ऐप-आधारित प्राइवेट एग्रीगेटर्स को चुनौती देता है। जीरो कमीशन और सहकारी मालिकाना हक जैसे फीचर ड्राइवरों के लिए बेहद आकर्षक हो सकते हैं, जिससे बड़ी संख्या में ड्राइवर इस नए प्लेटफॉर्म की ओर रुख कर सकते हैं।
हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी राइड-हेलिंग प्लेटफॉर्म की सफलता उसके नेटवर्क इफेक्ट, टेक्नोलॉजी की विश्वसनीयता और कस्टमर एक्सपीरियंस पर निर्भर करती है। भारत टैक्सी के सामने चुनौती होगी कि वह पर्याप्त संख्या में ड्राइवर और यात्रियों को जोड़कर राइड की उपलब्धता, ऐप की परफॉर्मेंस और सर्विस क्वालिटी को उस स्तर तक पहुंचाए, जहां वह निजी कंपनियों के मजबूत नेटवर्क से टक्कर ले सके।
फिर भी, सरकार समर्थित और सहकारी मॉडल पर आधारित इस सेवा को एक महत्वपूर्ण ‘स्वदेशी विकल्प’ के रूप में देखा जा रहा है, जो गिग इकॉनमी में न्यायसंगत कमाई, सामाजिक सुरक्षा और भागीदारी आधारित विकास की नई बहस को मजबूती दे सकती है।
निष्कर्ष
‘भारत टैक्सी’ का लॉन्च केवल एक नई टैक्सी ऐप की शुरूआत नहीं, बल्कि शहरी परिवहन और सहकारिता दोनों क्षेत्रों में एक नए प्रयोग की शुरुआत है। ड्राइवर-फ्रेंडली को-ऑपरेटिव मॉडल, जीरो कमीशन, सर्ज प्राइसिंग से छुटकारा और सुरक्षा संबंधी अतिरिक्त फीचर्स इसे पारंपरिक ऐप-आधारित कैब सेवाओं से अलग पहचान देते हैं। आने वाले महीनों में यह साफ होगा कि क्या यह पहल वास्तव में ओला-उबर जैसी कंपनियों की पकड़ को ढीला कर पाएगी या फिर बाजार में एक मजबूत वैकल्पिक विकल्प के रूप में विकसित होगी। फिलहाल इतना तय है कि टैक्सी सेक्टर में प्रतिस्पर्धा बढ़ने से ड्राइवरों और यात्रियों – दोनों को लाभ मिलने की संभावनाएं मजबूत हो गई हैं।












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