मुंबई/नवी मुंबई – प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने फॉरेस्ट लैंड मुआवज़ा घोटाले की जांच के तहत भाजपा नेता और कारोबारी जनार्दन मोरू म्हात्रे (JM Mhatre) व उनकी पत्नी के नाम पर दर्ज नवी मुंबई स्थित तीन भूखंडों को अस्थायी रूप से अटैच कर दिया है। इन ज़मीनों की अनुमानित क़ीमत करीब ₹17.74 करोड़ बताई गई है। यह कार्रवाई मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम क़ानून (PMLA), 2002 के तहत की गई है। जानकारी के मुताबिक़, प्राविज़नल अटैचमेंट ऑर्डर 4 फ़रवरी 2026 को जारी किया गया, जिसकी जानकारी एजेंसी ने 8 फ़रवरी को सार्वजनिक की।
उरण और उल्वे में तीन भूखंडों पर ED की कार्रवाई
ED के मुंबई ज़ोनल ऑफिस के अनुसार, प्राविज़नल अटैचमेंट ऑर्डर के तहत नवी मुंबई के उरण और उल्वे क्षेत्र में स्थित तीन अचल संपत्तियां (भूमि के टुकड़े) अटैच की गई हैं। ये भूखंड कथित तौर पर JM म्हात्रे और उनकी पत्नी के स्वामित्व में हैं। एजेंसी का कहना है कि इन संपत्तियों की खरीद के लिए इस्तेमाल की गई रकम “प्रोसीड्स ऑफ क्राइम” यानी अपराध से अर्जित धन होने के शक के दायरे में है।
एजेंसी ने स्पष्ट किया कि यह अटैचमेंट PMLA की धाराओं के तहत प्रोविजनल (अस्थायी) है। इसका मतलब है कि फिलहाल मालिक इन संपत्तियों को बेच, गिरवी रख या ट्रांसफर नहीं कर सकेंगे। आगे चलकर विशेष PMLA अदालत से कन्फ़र्मेशन के बाद ही यह अटैचमेंट स्थायी रूप ले सकता है।
मामला किस फॉरेस्ट लैंड से जुड़ा है?
यह केस रायगढ़ ज़िले के पनवेल तहसील के मौजे वाहल गांव की फॉरेस्ट लैंड से जुड़ा है। जांच के दायरे में आई ज़मीनें सर्वे नंबर 427/1 (लगभग 41.70 हेक्टेयर) और 436/1 (लगभग 110.60 हेक्टेयर) के अंतर्गत आती हैं। ये जमीनें 1975 में Maharashtra Private Forests (Acquisition) Act के तहत राज्य सरकार ने अधिग्रहित कर ली थीं और सरकारी रिकॉर्ड में इनका मालिकाना हक़ महाराष्ट्र वन विभाग के नाम दर्ज था।
ED की जांच में यह आरोप सामने आया है कि बाद के सालों में राजस्व रिकॉर्ड (7/12 उतारे) से वन विभाग का नाम हटाकर कथित तौर पर आरोपियों के नाम चढ़ा दिए गए। रिकॉर्ड की इस कथित हेराफेरी के बाद, विवादित ज़मीन के हिस्से को नेशनल हाईवेज़ अथॉरिटी ऑफ़ इंडिया (NHAI) के नाम ट्रांसफर कर दिया गया और इसके एवज़ में भारी मुआवज़ा ले लिया गया।
ED के अनुसार, इस घोटाले के ज़रिए JM म्हात्रे को लगभग ₹42.4 करोड़ और सह–आरोपी को करीब ₹9.69 करोड़ का मुआवज़ा मिला था, जबकि ज़मीन पर उनका वैध मालिकाना हक़ नहीं था।
“प्रोसीड्स ऑफ़ क्राइम” से नई संपत्तियाँ खरीदने का आरोप
एजेंसी का आरोप है कि फॉरेस्ट लैंड के अवैध अधिग्रहण और NHAI से मुआवज़ा पाने के बाद, प्राप्त राशि को अलग–अलग रास्तों से घुमाकर नई अचल संपत्तियाँ खरीदने, लोन चुकाने, ग्रुप कंपनियों के ख़र्च और परिजनों के खातों में ट्रांसफर करने में इस्तेमाल किया गया। इन ग्रुप इकाइयों में J M Mhatre Infrastructure Pvt Ltd (JMMIPL) और JMM Homes जैसी कंपनियाँ शामिल बताई गई हैं।
इसी कथित मनी लॉन्ड्रिंग चेन के हिस्से के रूप में ED ने अब उरण और उल्वे की तीन संपत्तियों को अटैच किया है, जिन्हें एजेंसी “अपराध की आय से अर्जित” मान रही है।
पहले से चल रही बड़ी कार्रवाई: कुल अटैचमेंट अब ₹69.47 करोड़
यह घोटाला नया नहीं है; इससे जुड़े मामलों में ED पहले भी कई सर्च और अटैचमेंट कर चुकी है।
- जून 2025 में ED ने मुंबई और नवी मुंबई में कई ठिकानों पर छापेमारी की थी, जिसमें करीब ₹44 करोड़ के बैंक बैलेंस, फिक्स्ड डिपॉज़िट और म्यूचुअल फ़ंड को फ़्रीज़/अटैच किया गया था। साथ ही ₹16.5 लाख नकद भी जब्त किए गए थे।
- 12 जनवरी 2026 को इसी केस में लगभग ₹7.10 करोड़ की पाँच अचल संपत्तियों को भी अस्थायी रूप से अटैच किया गया था।
ED के ताज़ा बयान के मुताबिक़, नए ₹17.74 करोड़ के अटैचमेंट के साथ इस केस में अब तक कुल ₹69.47 करोड़ की संपत्तियाँ अटैच, सीज़ या फ़्रीज़ की जा चुकी हैं।
BJP नेता JM म्हात्रे की पृष्ठभूमि
JM म्हात्रे नवी मुंबई–पनवेल क्षेत्र के जाने–माने कारोबारी और बिल्डर हैं। वे JM Mhatre Infrastructure Pvt Ltd के चेयरमैन हैं और पहले Peasants and Workers Party (PWP) से जुड़े रहे, बाद में भाजपा में शामिल हुए। वे पनवेल नगर परिषद के पूर्व अध्यक्ष भी रह चुके हैं।
फॉरेस्ट लैंड मुआवज़ा घोटाले में नाम आने के बाद से उनके ठिकानों पर ED की छापेमारी और अब बार–बार हो रही अटैचमेंट कार्रवाई ने राजनीतिक हलकों में भी हलचल बढ़ा दी है। हालांकि, ताज़ा कार्रवाई पर उनकी या भाजपा की ओर से कोई नया आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।
आगे क्या?
ED का कहना है कि वह अभी भी पैसे के ट्रेल, शेल कंपनियों और बेनामी संपत्तियों की जांच कर रही है। एजेंसी ने संकेत दिया है कि जैसे–जैसे जांच आगे बढ़ेगी, और संपत्तियों की पहचान होने पर उन्हें भी अटैच या फ़्रीज़ किया जा सकता है। मामले से जुड़े सरकारी अफ़सरों, बिचौलियों और अन्य लाभार्थियों से भी आगे पूछताछ की संभावना जताई जा रही है।













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