नई दिल्ली : देश भर के सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में आज पांच दिवसीय कार्य सप्ताह (5-day work week) की लंबे समय से लंबित मांग को लेकर एक दिवसीय देशव्यापी हड़ताल शुरू हो गई है। यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस (UFBU) द्वारा आह्वान की गई यह हड़ताल आधी रात से शुरू होकर अगली दिन की आधी रात तक चलेगी।
यह बैंकिंग क्षेत्र की एक ऐतिहासिक कार्रवाई है, जिसमें लगभग 8 लाख बैंक कर्मचारी और अधिकारी शामिल हो रहे हैं। हड़ताल में सार्वजनिक क्षेत्र के प्रमुख बैंक जैसे स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI), पंजाब नेशनल बैंक (PNB), बैंक ऑफ बड़ौदा, बैंक ऑफ इंडिया, केनरा बैंक और इंडियन बैंक सहित अन्य सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक शामिल हैं।
मुख्य अंश (Highlights)
हड़ताल का मुख्य कारण ? UFBU की क्या है मांग ?
बैंकिंग क्षेत्र की नौ प्रमुख यूनियनों का प्लेटफॉर्म UFBU का कहना है कि यह हड़ताल मार्च 2024 में भारतीय बैंक संघ (Indian Banks Association – IBA) और UFBU के बीच हुए वेतन संशोधन समझौते के तहत की जा रही है। इस समझौते के अनुसार सोमवार से शुक्रवार तक प्रतिदिन 40 मिनट अतिरिक्त कार्य समय के बदले सभी शनिवारों को छुट्टी घोषित करने पर सहमति बनी थी। यानि सोमवार से शुक्रवार तक 5-दिवसीय कार्य सप्ताह की बात कही गयी थी।
हालांकि, यह समझौता मार्च 2024 में किया गया था, लेकिन लगभग नौ महीने बाद भी सरकार की तरफ से इस निर्णय की अंतिम मंजूरी नहीं मिल पाई है। UFBU के अनुसार, यह लंबी देरी ही इस हड़ताल का मुख्य कारण है।
असफल सुलह प्रयास
हड़ताल को टालने के लिए 22 और 23 जनवरी को भारतीय बैंक संघ (IBA), वित्तीय सेवा विभाग (DFS) और UFBU के बीच सुलह की बातचीत का आयोजन किया गया। मुख्य श्रम आयुक्त की निगरानी में चली इन बातचीतों में विस्तृत चर्चा हुई, लेकिन सकारात्मक परिणाम नहीं निकले। इसके बाद UFBU ने 27 जनवरी की हड़ताल को अंतिम रूप दिया।
यूनियन नेताओं के अनुसार, सरकार की निष्क्रियता और दोहरी भूमिका ने यह हड़ताल “थोपी गई” है। यूनियनें कहती हैं कि वे मार्च 2024 में ही किए गए समझौते को लागू करने के लिए आग्रह कर रही हैं।
किन बैंकिंग सेवाओं पर असर?
इस हड़ताल के कारण सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में निम्नलिखित सेवाएं प्रभावित हो रही हैं:
- नकद जमा और निकासी सेवाएं बंद रहेंगी
- चेक क्लियरेंस की प्रक्रिया प्रभावित होगी
- शाखा से संबंधित सभी सेवाएं उपलब्ध नहीं रहेंगी
- ऋण और दस्तावेज़ से संबंधित कार्य रुके रहेंगे
- ग्राहक सेवा केंद्र बंद रहेंगे
हालांकि, डिजिटल बैंकिंग सेवाएं जैसे ATM, UPI, मोबाइल बैंकिंग और इंटरनेट बैंकिंग सामान्य रूप से चालू रहने की संभावना है।
निजी बैंकों पर सीमित असर
यह हड़ताल मुख्य रूप से सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों को प्रभावित करेगी। HDFC Bank, ICICI Bank, Axis Bank, IndusInd Bank, Kotak Mahindra Bank, Yes Bank, IDFC First Bank, Bandhan Bank और RBL Bank जैसे बड़े निजी बैंक सामान्य रूप से अपनी सेवाएं प्रदान करते रहेंगे।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
बैंकिंग क्षेत्र में पांच दिवसीय कार्य सप्ताह की मांग नई नहीं है। इसी तरह की मांग 2015 में 10वें द्विपक्षीय समझौते में भी रखी गई थी। उस समय दूसरे और चौथे शनिवार को छुट्टी लागू हुई, लेकिन सभी शनिवारों को छुट्टी देने की मांग लंबित रहती आई।
2022-23 में फिर से विस्तृत चर्चा के बाद यह प्रस्ताव सरकार को भेजा गया, लेकिन दो साल से अधिक समय बीत गया और अब तक कोई निर्णय नहीं हुआ। इसी देरी के चलते UFBU ने 24-25 मार्च 2025 की हड़ताल घोषित की थी, जिसे सरकार के आश्वासन पर स्थगित कर दिया गया था।
यूनियनों की तर्कपूर्ण अपील
UFBU का कहना है कि भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI), जीवन बीमा निगम (LIC), सामान्य बीमा निगम (GIC), शेयर बाजार और केंद्र सरकार के कार्यालय पहले ही पांच दिवसीय कार्य सप्ताह का पालन कर रहे हैं। ऐसे में बैंकों में ऐसा न होने का कोई औचित्य नहीं रह जाता।
यूनियन नेताओं ने कहा है कि “बैंक कर्मचारी भारत की वित्तीय स्थिरता, समावेशन और विकास को चलाते हैं, अक्सर अपने ही कल्याण की कीमत पर। पांच दिन का कार्य सप्ताह कोई रियायत नहीं है; यह एक लंबे समय से लंबित सुधार है।”
सरकारी प्रतिक्रिया और भविष्य की रणनीति
वित्तीय सेवा विभाग ने अब तक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है। हालांकि, सुलह वार्ता विफल रहने के बाद यह स्पष्ट है कि दोनों पक्षों के बीच गतिरोध बना हुआ है।
UFBU ने यह भी स्पष्ट किया है कि अगर 26 जनवरी की शाम से पहले कोई सकारात्मक विकास होता है, तो उस पर विचार किया जा सकता है। लेकिन अभी तक ऐसा कोई संकेत नहीं मिला है।
बैंकिंग ग्राहकों के लिए सलाह
बैंक ग्राहकों को सलाह – नकद आवश्यकताओं के लिए ATM का उपयोग किया जा सकता है। ऑनलाइन लेनदेन और UPI सेवाएं सामान्य रूप से चलती रहेंगी।












प्रातिक्रिया दे