हैदराबाद में आयोजित विश्व संघ शिविर के समापन समारोह में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक मोहन भागवत ने भारत की विश्वव्यापी भूमिका को लेकर महत्वपूर्ण बातें कहीं। तेलंगाना के रंगारेड्डी जिले में रविवार को दिए गए अपने भाषण में भागवत ने जोर दिया कि भारत का विश्वगुरु बनना कोई व्यक्तिगत महत्वाकांक्षा नहीं है, बल्कि यह दुनिया की आवश्यकता है।
सनातन धर्म का पुनरुत्थान भगवान की इच्छा
RSS प्रमुख ने 20वीं शताब्दी के आध्यात्मिक नेता योगी अरविंद का जिक्र करते हुए कहा कि सनातन धर्म के पुनरुत्थान का विचार बहुत पहले व्यक्त किया गया था। भागवत के मुताबिक, योगी अरविंद ने 100 साल पहले ही घोषणा की थी कि सनातन धर्म का पुनरुत्थान ईश्वर की इच्छा है और हिंदू राष्ट्र का उदय इसी पुनरुत्थान के लिए जरूरी है।
भागवत ने कहा:
“वह समय अब आ गया है। भारत, हिंदू राष्ट्र, सनातन धर्म और हिंदुत्व एकदूसरे के पर्यायवाची हैं। योगी अरविंद ने एक शताब्दी पहले संकेत दिया था कि यह प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। अब हमें उस प्रक्रिया को आगे बढ़ाना है।”
विश्वगुरु बनने के लिए कठोर परिश्रम जरूरी
RSS चीफ ने स्पष्ट किया कि भारत का विश्वगुरु बनना कोई आसान काम नहीं है। इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए निरंतर और कठोर परिश्रम की जरूरत है। मोहन भागवत के अनुसार, यह कड़ी मेहनत कई धाराओं से चल रही है, जिसमें संघ भी एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
उन्होंने जोर दिया कि भारत का उद्देश्य शक्ति प्रदर्शन नहीं, बल्कि विश्व को सही दिशा देना है। इसके लिए:
- व्यक्तित्व निर्माण पर विशेष ध्यान देना आवश्यक है
- स्वयंसेवकों को समाज के विभिन्न क्षेत्रों में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए भेजा जाना चाहिए
- मूल्य आधारित और अनुशासित जीवन का उदाहरण विश्व के सामने प्रस्तुत करना होगा
तकनीक मानवता की मालिक नहीं बनेगी
मोहन भागवत ने आने वाले समय में तकनीक, सोशल मीडिया और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के बढ़ते प्रभाव को लेकर चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि यह जरूरी है कि तकनीक मानवता की मालिक न बने।
भागवत की महत्वपूर्ण बातें:
| विषय | RSS प्रमुख का विचार |
|---|---|
| तकनीक की भूमिका | तकनीक मानवता की सेवक होनी चाहिए, मालिक नहीं |
| मानव बुद्धि का उपयोग | विश्व कल्याण के लिए, न कि विनाशकारी प्रवृत्तियों के लिए |
| तकनीक की दिशा | दैवीय प्रवृत्तियों की ओर, आसुरी प्रवृत्तियों की ओर नहीं |
| व्यावहारिक कदम | सिर्फ भाषण नहीं, आचरण से उदाहरण प्रस्तुत करना होगा |
उन्होंने स्पष्ट किया कि “जब हम अपने आचरण से उदाहरण पेश करेंगे, तभी दुनिया भारत के विचार और जीवन मूल्यों को स्वीकार करेगी।”
हिंदुओं से एकजुट होने की अपील
RSS प्रमुख ने हिंदुओं से एकजुट होकर सनातन धर्म को और ऊंचाइयों पर ले जाने की अपील की। उन्होंने कहा कि भारत और विदेशों में संघ से जुड़े संगठन एक ही उद्देश्य साझा करते हैं:
- हिंदू समाज को संगठित करना
- मूल्य आधारित जीवन का उदाहरण देना
- अनुशासित समाज का निर्माण करना
सेवा के बदले कुछ नहीं चाहिए
मोहन भागवत ने सेवा के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि सच्ची सेवा बिना किसी पुरस्कार की अपेक्षा के होनी चाहिए। उन्होंने कहा:
“सेवा करने वाले का अधिकार सिर्फ सेवा करना होता है और कुछ नहीं। सेवा मेरा कर्तव्य है और इसके बदले में मुझे कुछ नहीं चाहिए।”
भागवत के अनुसार, जो लोग सेवा बाद में इनाम की उम्मीद में करते हैं, वह असली सेवा नहीं है, बल्कि एक लेन-देन है।
भारत की वैश्विक जिम्मेदारी
RSS चीफ ने जोर दिया कि विश्वगुरु बनने के लिए कई क्षेत्रों में निरंतर प्रयास की जरूरत है। संघ व्यक्तित्व निर्माण पर विशेष ध्यान देकर स्वयंसेवकों को समाज के विभिन्न कार्यक्षेत्रों में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए भेज रहा है।
भागवत ने गर्व के साथ कहा कि आज संघ से जुड़े लोगों के कार्यों की हर जगह सराहना हो रही है और समाज का उन पर विश्वास बढ़ा है।
निष्कर्ष
विश्व संघ शिविर के इस समापन समारोह में मोहन भागवत का संदेश स्पष्ट था: भारत को विश्वगुरु बनना न तो कोई सपना है और न ही महत्वाकांक्षा, बल्कि यह दुनिया की आवश्यकता है। इसके लिए कठोर परिश्रम, आचरण में परिवर्तन और सामूहिक प्रयास आवश्यक है। सनातन धर्म के पुनरुत्थान की यह यात्रा 100 साल पहले शुरू हुई थी, और अब सभी हिंदुओं को मिलकर इसे आगे बढ़ाना होगा।












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