VBGRAM G Bill, 2025: MGNREGA की जगह नया कानून संसद से पास

विकसित भारत ग्रामीण रोजगार मिशन VB-GRAM बिल 2025 ग्रामीण श्रमिक अवसंरचना विकास

नई दिल्ली: विपक्ष के भारी विरोध और हंगामे के बीच भारत सरकार ने 18 दिसंबर 2025 को राज्यसभा से विकसित भारत-गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण) बिल (VBGRAM G Bill 2025) को ध्वनि मत से पास करा लिया है। यह ऐतिहासिक बिल 20 वर्षों से लागू महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (MGNREGA) का स्थान लेगा। अब इस बिल को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के पास मंजूरी के लिए भेजा जाएगा।

विकसित भारत-गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण) (VB-GRAM G Bill) बिल क्या है?

विकसित भारत-गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण) बिल (VB-GRAM Bill) 2025 भारत सरकार द्वारा ग्रामीण रोजगार क्षेत्र में एक बड़ा बदलाव करने के उद्देश्य से लाया गया बिल है। इस बिल का उद्देश्य 20 वर्ष पुराने महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (MGNREGA), 2005 को प्रतिस्थापित करना है। इस बिल में कुछ नए प्रावधान जोड़े गए हैं ​जैसे पुराने 100 दिनों की जगह 125 दिनों का रोजगार इसके आलावा 15 दिनों की जगह साप्ताहिक वेतन, केंद्र एवं राज्य सरकार द्वारा फंडिंग 90:10 के जगह 60:40 का अनुपात, काम केवल 4 प्रकार के कार्यों तक सीमित आदि।

VBGRAM G बिल संसद से कब पास हुआ?

  • लोकसभा में पारित: 17 दिसंबर 2025 को (संध्या)
  • राज्यसभा में पारित: 18 दिसंबर 2025 को (मध्यरात को)
  • अगला कदम: राष्ट्रपति की अनुमति के लिए भेजा जाएगा

विरोधी पक्ष ने इस बिल के खिलाफ जोरदार विरोध प्रदर्शन किया और राज्यसभा में सामूहिक धरना भी दिया। लोकसभा में विरोधी सदस्यों ने बिल की प्रतियां फाड़ दीं और नारेबाजी की।

VBGRAM G बिल 2025 में क्या खास है?

1. रोजगार के दिनों में 25% की वृद्धि (100 दिन से 125 दिन)

VB-GRAM बिल सबसे महत्वपूर्ण बदलाव है ग्रामीण परिवारों के लिए गारंटीड रोजगार के दिनों में वृद्धि:

  • पहले (MGNREGA): 100 दिन प्रति वित्तीय वर्ष
  • अब (VB-GRAM): 125 दिन प्रति वित्तीय वर्ष

यह 25% का सीधा विस्तार है जो ग्रामीण परिवारों के लिए अधिक आय सुनिश्चित करता है।​

2. साप्ताहिक वेतन भुगतान (पखवाड़े के बजाय)

  • MGNREGA में: 15 दिन के चक्र में वेतन दिया जाता था
  • VB-GRAM में: साप्ताहिक (हर सप्ताह) वेतन भुगतान होगा

इससे श्रमिकों को नियमित नकदी प्रवाह मिलेगा और वे अपने परिवार की खरीदारी में बेहतर प्रबंधन कर सकेंगे।​

3. 60:40 केंद्र-राज्य फंडिंग मॉडल (साझा वित्तपोषण)

यह एक महत्वपूर्ण संरचनात्मक परिवर्तन है:

पहलूMGNREGAVB-GRAM Bill
फंडिंग पैटर्न90:10 (केंद्र:राज्य)60:40 (केंद्र:राज्य)
केंद्र की जिम्मेदारी90% फंड60% फंड
राज्य की जिम्मेदारी10% फंड40% फंड
उत्तर-पूर्वी/हिमालयी राज्यों के लिए90:1090:10

4. चार निर्दिष्ट कार्य क्षेत्र (Verticals)

VB-GRAM बिल ने काम को केवल चार प्रकार के कार्यों तक सीमित किया है:

  1. जल सुरक्षा: जल संरक्षण संरचनाएं, तालाब, कुआं आदि
  2. मूल ग्रामीण अवसंरचना: सड़कें, स्कूल, आंगनवाड़ी जैसे मूलभूत ढांचे
  3. आजीविका संबंधित संपत्तियां: कौशल विकास, योग्यता बढ़ाने वाली परियोजनाएं
  4. जलवायु लचीलापन: चरम मौसमी घटनाओं से बचाव के काम

5. विकसित ग्राम पंचायत योजनाएं (Plans)

सभी काम ग्राम पंचायत योजनाओं से निकलेंगे, जो ब्लॉक, जिला और राष्ट्रीय स्तर पर समन्वित होंगी। यह स्थानीय विकास को प्राथमिकता देता है।

6. कमजोर समूहों के लिए विशेष सुविधाएं

VBGRAM बिल निम्नलिखित समूहों के लिए विशेष कार्ड प्रदान करेगा:

  • अकेली महिलाएं
  • विकलांग व्यक्ति
  • बुजुर्ग नागरिक
  • मुक्त बंधुआ मजदूर
  • ट्रांसजेंडर व्यक्ति​

7. 60 दिन की कृषि अवधि (Agricultural Pause)

  • फसल कटाई के समय: काम का अनिवार्य रुकावट
  • लक्ष्य: किसानों को खेत के काम पर ध्यान केंद्रित करने देना
  • अवधि: 60 दिन​

8. सरकारी बजट आवंटन

  • कुल बजट: ₹95,000 करोड़ (95 हजार करोड़ रुपये)
  • अवधि: 5 वर्षीय योजना के अंतर्गत​

MGNREGA और VBGRAM G बिल में मुख्य अंतर – तुलनात्मक विश्लेषण

1. रोजगार के दिन

विशेषताMGNREGAVB-GRAM Bill
गारंटीड दिन100 दिन125 दिन ✓
अतिरिक्त दिनसूखा/जनजातीय क्षेत्रों मेंसामान्यीकृत
विशेषतान्यूनतम गारंटीमानक प्रावधान

2. फंडिंग मॉडल (सबसे महत्वपूर्ण अंतर)

पहलूMGNREGAVB-GRAM Bill
बजटिंगमांग-संचालित (Demand-driven)मानक आवंटन (Normative)
केंद्र का भार90-100%60%
राज्य का भार0-10%40%
लचीलापनखुली-समाप्त (Open-ended)सीमित (Capped)
अतिरिक्त खर्चकेंद्र वहन करता हैराज्य वहन करेगा

3. योजना आधार

मापदंडMGNREGAVB-GRAM Bill
योजना बनानापंचायत की मांग के अनुसारविकसित ग्राम पंचायत योजनाएं
केंद्रीकरणविकेंद्रीकृत (Decentralized)अधिक केंद्रीकृत
कार्य के प्रकारसभी प्रकार के कामकेवल 4 निर्दिष्ट क्षेत्र

4. काम की प्रकृति

विशेषताMGNREGAVB-GRAM Bill
मॉडलमांग-संचालित (मजदूर मांग करें)आपूर्ति-संचालित (सरकार निर्धारित)
लचीलापनअधिक (Workers’ choice)कम
अधिकारकानूनी अधिकार (Right-based)गारंटी-आधारित

5. वेतन भुगतान चक्र

पहलूMGNREGAVB-GRAM Bill
भुगतान चक्र15 दिनसाप्ताहिक
नियमिततापखवाड़े वारहर हफ्ते

VB-GRAM बिल की जरूरत क्यों पड़ी? सरकार का तर्क

1. बदलते ग्रामीण परिस्थितियां

सरकार का दावा है कि पिछले 20 वर्षों में ग्रामीण परिस्थितियां काफी बदल गई हैं:

  • सड़कें, बिजली और संचार सुविधाएं बेहतर हुई हैं
  • डिजिटल वित्तीय सेवाएं (UPI, बैंकिंग) सुलभ हो गई हैं
  • कृषि के बाहर अन्य रोजगार के अवसर बढ़े हैं
  • युवा आबादी शिक्षित हो गई है

इसलिए MGNREGA का पुरानी ढांचा अब पर्याप्त नहीं है।

2. विकसित भारत 2047 के अनुरूप

VB-GRAM बिल को भारत के विकास दृष्टिकोण (Viksit Bharat 2047) के अनुरूप बनाया गया है, जो:

  • दीर्घकालीन ग्रामीण विकास को प्राथमिकता देता है
  • टिकाऊ संपत्तियां (durable assets) बनाने पर ध्यान देता है
  • जलवायु लचीलापन बढ़ाता है
  • पानी सुरक्षा सुनिश्चित करता है​

3. MGNREGA में भ्रष्टाचार

सरकार ने खुलासा किया कि MGNREGA में काफी भ्रष्टाचार था:

  • ₹86,000 करोड़ के बजट में से 27% (₹23,220 करोड़) अभी तक भुगतान नहीं हुआ है
  • सामग्री खरीद में कमियां
  • भुगतान में विलंब
  • पारदर्शिता की कमी

VB-GRAM बिल इन समस्याओं को हल करने का प्रयास करता है।

4. बेहतर गवर्नेंस और जवाबदेही

VB-GRAM बिल निम्नलिखित सुधार लाता है:

  • साप्ताहिक वेतन भुगतान – तेजी से नकदी पहुंच
  • दंड व्यवस्था (₹10,000 तक) – भ्रष्टाचार के खिलाफ कड़ी कार्रवाई
  • सामाजिक लेखा परीक्षा – सामुदायिक निरीक्षण
  • ग्राम पंचायतों को सशक्त बनाना – स्थानीय निर्णय लेने की क्षमता​

विपक्ष की आलोचना और मांगें – विस्तृत विश्लेषण

विपक्ष ने VB-GRAM बिल के खिलाफ कई गंभीर आपत्तियां उठाई हैं:

1. महात्मा गांधी का नाम हटाया जाना (नाम परिवर्तन)

विपक्ष की मांग: बिल का नाम MGNREGA जैसा ही रहना चाहिए

आलोचना के मुख्य बिंदु:

  • यह “बापू को अपमानित करना” है
  • सरकार का “नाम बदलने का जुनून” गलत है
  • 73वें संवैधानिक संशोधन की भावना का उल्लंघन है
  • गांधी की विरासत को मिटाने का प्रयास

विरोधी नेता:

  • प्रियंका गांधी (कांग्रेस): “संसद परिसर में महात्मा गांधी की मूर्ति के सामने धरना”
  • अखिलेश यादव (समाजवादी पार्टी)
  • टी.आर. बालू (DMK)

2. राज्यों पर वित्तीय भार बढ़ना (60:40 फंडिंग)

विपक्ष की मांग: पहले की तरह 90:10 या कम से कम 75:25 फंडिंग बनी रहे

आलोचना:

  • “मृत्यु घंटी है राज्यों के लिए” – DMK सांसद
  • 60:40 मॉडल से राज्यों का 40% बोझ बढ़ेगा
  • राज्यों के पास पहले से वित्तीय संकट है, नया बोझ सहन नहीं कर सकते
  • कम आय वाले राज्य और भी कमजोर पड़ेंगे

मात्रात्मक प्रभाव:

  • अगर कोई राज्य ₹1,000 करोड़ खर्च करता है:
    • पहले: केंद्र ₹900 करोड़ + राज्य ₹100 करोड़
    • अब: केंद्र ₹600 करोड़ + राज्य ₹400 करोड़
    • राज्य का बोझ 4 गुना बढ़ गया!

3. मांग-संचालित से आपूर्ति-संचालित मॉडल

विपक्ष की मांग: MGNREGA की मांग-संचालित प्रणाली बनी रहे

आलोचना:

  • MGNREGA की ताकत: किसान/मजदूर जब चाहें काम के लिए मांग कर सकते हैं
  • VB-GRAM की कमजोरी: सरकार पहले से तय करेगी कितना काम दिया जाएगा
  • सरकार अपनी सुविधा से बजट बदल सकती है – न्यायसंगत नहीं
  • **मजदूरों की आजादी छिनती है
  • बेरोजगारी भत्ता भी अनिश्चित हो सकता है

4. कानूनी अधिकार को गारंटी में बदलना

विपक्ष की मांग: “कानूनी अधिकार” का दर्जा बनाए रखना चाहिए

मुद्दा:

  • MGNREGA: “कानूनी अधिकार” – अदालत में मांग कर सकते हैं
  • VB-GRAM: सिर्फ “गारंटी” – राजनीतिक प्रतिबद्धता मात्र
  • गारंटी तोड़ी जा सकती है, अधिकार नहीं​

5. काम के प्रकार में कमी (4 विशेष क्षेत्रों तक सीमित)

विपक्ष की मांग: सभी प्रकार के काम MGNREGA की तरह करने चाहिए

आलोचना:

  • MGNREGA में: सभी प्रकार के सार्वजनिक काम (स्कूल, सड़क, बाजार, आदि)
  • VB-GRAM में: केवल 4 क्षेत्र – कम लचीलापन
  • ग्राम पंचायत अपनी स्थानीय जरूरतों के अनुसार काम नहीं चुन सकती
  • 73वें संवैधानिक संशोधन का सीधा उल्लंघन

6. 60 दिन की अनिवार्य कृषि अवधि

विपक्ष की मांग: कृषि अवधि को मजबूरी न बनाई जाए

आलोचना:

  • सभी क्षेत्रों में फसल का समय अलग-अलग है
  • 60 दिन की एक निश्चित अवधि सभी के लिए उपयुक्त नहीं
  • यह मजदूरों की पसंद को प्रभावित करता है
  • वास्तविक समस्या MGNREGA में नहीं, कृषि नीति में है​

7. संसद की स्थायी समिति को भेजने की मांग

विपक्ष की मांग: बिल को विस्तृत जांच के लिए Parliamentary Standing Committee को भेजा जाए

तर्क:

  • ऐसा महत्वपूर्ण बिल जो 12+ करोड़ लोगों को प्रभावित करता है
  • गहन अध्ययन की आवश्यकता है
  • व्यापक परामर्श आवश्यक है
  • संसदीय परंपराओं का पालन करना चाहिए

विरोधी नेताओं की मांग:

  • जयराम रमेश (कांग्रेस): Standing Committee को भेजो
  • सपतगिरी उलका (कांग्रेस): Rural Development Committee के सदस्य के रूप में अपील

8. NDA के अपने सहयोगी की चिंता

TDP (तेलुगु देशम पार्टी) की मांग: भी वित्तीय भार से चिंतित है

  • चंद्रबाबू नायडु की पार्टी ने भी चेतावनी दी
  • राज्य के वित्तीय हालात गंभीर हैं
  • 60:40 मॉडल असहनीय है
  • Standing Committee को भेजने की मांग​

9. लोकसभा में विरोध की तीव्रता

  • विरोधी सदस्यों ने बिल की प्रतियां फाड़ दीं
  • महात्मा गांधी की मूर्ति के सामने धरना प्रदर्शन
  • लोकसभा में अराजकता
  • राज्यसभा में रात के 12 बजे तक विरोध

सरकार का जवाब – सफाई

1. “अपग्रेड, डिलूट नहीं”

  • शिवराज सिंह चौहान: बिल काम के दिन 100 से 125 तक बढ़ाता है
  • यह कमजोरी नहीं, सुधार है

2. “MGNREGA का नाम बदलना गलत नहीं”

  • सरकार: हर योजना का नाम समय के साथ बदलता है
  • नया नाम, नया दृष्टिकोण दर्शाता है
  • गांधी के सिद्धांत बने रहेंगे, नाम सिर्फ बदल गया

3. “MGNREGA ने पहले भी भ्रष्टाचार किया”

  • UPA के समय: ₹86,000 करोड़ में से 27% अभी तक pay नहीं हुआ
  • नई व्यवस्था में: साप्ताहिक भुगतान से धांधली की गुंजाइश कम होगी
  • बेहतर गवर्नेंस सुनिश्चित करेंगे

4. “राज्यों को अधिक स्वायत्तता मिलेगी”

  • सहकारी संघवाद को बढ़ावा
  • राज्यों को अपनी प्राथमिकताएँ तय करने का अधिकार
  • अधिक स्वामित्व, बेहतर कार्यान्वयन

क्या होगा अब?

अगले कदम:

  1. राष्ट्रपति की अनुमति: बिल राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को भेजा जाएगा
  2. राष्ट्रपति का हस्ताक्षर: मुख्य अनुष्ठान
  3. अधिनियम बनना: राष्ट्रपति की स्वीकृति के बाद आधिकारिक अधिनियम बन जाएगा
  4. 6 महीने में राज्य क्रियान्वयन: राज्यों को नई योजना के अनुसार MGNREGA को बदलना होगा

निष्कर्ष

VB-GRAM Bill 2025 एक ऐतिहासिक बदलाव लाता है, लेकिन विवादास्पद है:

सरकार का दावा:

  • 25% अधिक दिन (125 दिन)
  • बेहतर वेतन भुगतान (साप्ताहिक)
  • कम भ्रष्टाचार
  • आधुनिक ढांचा

विपक्ष की आशंका:

  • राज्यों पर अतिरिक्त भार
  • मांग-संचालित से आपूर्ति-संचालित का नकारात्मक प्रभाव
  • मजदूरों के अधिकार में कमी
  • गांधी की विरासत में परिवर्तन

वास्तविकता: आने वाले महीनों में ही पता चलेगा कि यह बिल ग्रामीण भारत के लिए किस हद तक लाभकारी साबित होता है।

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