सस्पेंडेड TMC MLA हुमायूं कबीर ने बाबरी मस्जिद की नींव रखी, 33 साल बाद अयोध्या मामले को भड़काया

हुमायूं कबीर बाबरी मस्जिद नींव रखते हुए

मुर्शिदाबाद — पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद जिले में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के सस्पेंडेड MLA हुमायूं कबीर ने आज बेलडांगा के मोरादघी इलाके में बाबरी मस्जिद की नींव रखी। यह कार्यक्रम अयोध्या में विवादित बाबरी मस्जिद के विध्वंस के बिल्कुल 33 साल बाद आयोजित हुआ है। हुमायूं कबीर की इस पहल ने राजनीतिक विवाद को नए आयाम दे दिए हैं।

हुमायूं कबीर का बड़ा दावा और विशाल भीड़

सस्पेंडेड TMC नेता ने दावा किया कि इस आयोजन में करीब 3 लाख लोग शामिल होंगे। मोरादघी के पास राष्ट्रीय राजमार्ग 12 के किनारे 25 बीघा की जमीन पर 150 फीट × 80 फीट का मंच तैयार किया गया था। यह मंच करीब 10 लाख रुपये की लागत से बनाया गया था और इसकी क्षमता 400 मेहमानों को बैठाने की थी।

कबीर ने खुद बताया कि नींव रखने का कार्यक्रम 10 बजे सुबह कुरान की तिलावत के साथ शुरू हुआ। दोपहर 12 बजे के बाद औपचारिक नींव रखने का कार्यक्रम संपन्न हुआ। सऊदी अरब से दो काजियों को विशेष काफिले में लाया गया था ताकि वे धार्मिक अनुष्ठान को संपन्न कर सकें।

TMC का सस्पेंशन और राजनीतिक घमासान

हुमायूं कबीर की इस खतरनाक घोषणा के बाद TMC ने शुक्रवार को तुरंत कार्रवाई की। पार्टी के नेता और कोलकाता की मेयर फिरहाद हकीम ने साफ कहा कि “हम देख रहे हैं कि एक MLA अचानक घोषणा कर रहे हैं कि वह बाबरी मस्जिद बनाएंगे। यह अचानक क्यों? हम पहले ही उन्हें चेतावनी दे चुके हैं। हमारी पार्टी TMC के फैसले के अनुसार, हम MLA हुमायूं कबीर को सस्पेंड कर रहे हैं।]”

62 वर्षीय हुमायूं कबीर देबरा विधानसभा सीट से MLA हैं। सस्पेंशन के बाद उन्होंने नई पार्टी बनाने की घोषणा की है और कहा है कि वह 2026 की विधानसभा चुनावों में 130 से 135 सीटों पर लड़ाई देंगे।

कोलकाता हाईकोर्ट का महत्वपूर्ण निर्णय

शुक्रवार को कोलकाता हाईकोर्ट की विभाग पीठ ने इस मामले में किसी को रोकने से इनकार कर दिया। अभिनय प्रधान न्यायाधीश सुजॉय पाल और न्यायाधीश पार्थ सारथी सेन ने कहा कि यह कार्यक्रम आयोजित हो सकता है, लेकिन कानून और व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी पूरी तरह से राज्य सरकार की है।

कोर्ट ने उस समय यथास्थिति बनाए रखने का निर्देश दिया ताकि सांप्रदायिक सद्भावना कायम रहे। हालांकि, अदालत ने घटनाक्रम को रोकने के लिए प्रशासन पर कोई प्रतिबंध नहीं लगाया।

सुरक्षा और प्रशासनिक व्यवस्था

मुर्शिदाबाद जिले में भारी सुरक्षा व्यवस्था की गई थी। करीब 3,000 पुलिस कर्मी, तेज कार्रवाई बल (RAF), और केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (CAPF) की तैनाती की गई। बेलडांगा और राजीनगर पुलिस स्टेशन के आसपास के इलाकों में भारी सुरक्षा व्यवस्था की गई थी।

राष्ट्रीय राजमार्ग 12 के दोनों ओर बैरिकेड लगाए गए थे। बेलडांगा को पूरा उच्च सुरक्षा क्षेत्र घोषित किया गया था और पुलिस के निर्देशों के अनुसार मैदान को शाम 4 बजे तक खाली करना था।

3,000 से अधिक स्वयंसेवकों को शुक्रवार सुबह से ही तैनात किया गया था ताकि वे भीड़ को नियंत्रित करें और राजमार्ग पर यातायात को सुचारू रखें। खाने की व्यवस्था भी स्थल पर की गई थी।

BJP और विपक्षी पार्टियों की प्रतिक्रिया

भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने इस घटनाक्रम को “तुष्टिकरण की राजनीति” कहा है। BJP की नेता अग्निमित्रा पॉल ने कहा कि यह कानून और व्यवस्था का मामला है और यह मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के षड्यंत्र का हिस्सा है।

भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) ने भी TMC की आलोचना की और कहा कि कबीर की यह कार्रवाई पार्टी की “वैचारिक तरलता” का एक उदाहरण है।

हुमायूं कबीर की राजनीतिक चाल

हुमायूं कबीर की इस कार्रवाई ने पश्चिम बंगाल की राजनीति में नए सवाल खड़े कर दिए हैं। 2026 की विधानसभा चुनावियों से पहले यह घटना ध्यान आकर्षित कर रही है। कबीर ने खुद को बंगाल का असदुद्दीन ओवैसी बनाने की महत्वाकांक्षा दिखाई है।

कबीर ने ममता बनर्जी और TMC के “धर्मनिरपेक्ष राजनीति के दोहरे मानदंडों” को उजागर करने का दावा किया है। उनका कहना है कि “हम मुख्यमंत्री और TMC के दोहरे मानदंडों को उजागर करेंगे। उन्होंने अल्पसंख्यकों को मूर्ख बनाया है और RSS-BJP के साथ एक गुप्त समझौता है।”

ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य

यह घटना बेहद संवेदनशील समय पर हुई है। अयोध्या में मूल बाबरी मस्जिद को 6 दिसंबर 1992 को ध्वस्त किया गया था। उस घटना को 33 साल बीत चुके हैं। आज का दिन हिंदू कार्यकर्ताओं के लिए ऐतिहासिक महत्व रखता है।

वर्तमान में अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण पूरी तरह से संपन्न हो चुका है। इसी समय हुमायूं कबीर की यह घोषणा राजनीतिक तापमान को और भी बढ़ा गई है।

ग्राउंड रिपोर्ट और जनभागीदारी

मुर्शिदाबाद के बेलडांगा गांव में आदिवासी तबके के लोगों ने भी इस कार्यक्रम में भाग लिया। उत्तर बारासत के मोहम्मद सफीकुल इस्लाम ने सिर पर ईंटें लाद कर आयोजन स्थल तक पहुंचे। उन्होंने बताया कि “मैं जहां हुमायूं कबीर बाबरी मस्जिद की नींव रखेंगे, मैं भी वहां जाऊंगा। मैं बाबरी मस्जिद के लिए ईंटें ला रहा हूँ।”

बेलडांगा पुलिस स्टेशन से मात्र 5 किलोमीटर की दूरी पर स्थित इस स्थान को हुमायूं कबीर की नई पार्टी के लिए एक महत्वपूर्ण प्लेटफॉर्म के रूप में देखा जा रहा है।

राज्य प्रशासन का रुख

पश्चिम बंगाल के प्रशासन ने कहा कि वह केवल कानून और व्यवस्था बनाए रखने पर केंद्रित है। राज्य सरकार ने भारतीय सरकार से कहा कि 19 कंपनियों के बल तैनात किए गए हैं।

प्रशासन का मुख्य लक्ष्य राष्ट्रीय राजमार्ग पर बाधा न आए और कोई सांप्रदायिक झगड़ा न हो, यह सुनिश्चित करना था।

निष्कर्ष

हुमायूं कबीर की बाबरी मस्जिद नींव रखने की कार्रवाई पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुई है। यह घटना 2026 की विधानसभा चुनावियों से पहले हिंदु-मुस्लिम राजनीति को नए आयाम दे रही है। TMC के सस्पेंशन के बाद भी कबीर ने अपनी योजना पूरी की है, जो उनके राजनीतिक दृढ़ संकल्प को दर्शाता है।

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