हरियाणा : हरियाणा के पानीपत जिले से एक ऐसा भयानक मामला सामने आया है जो पूरे देश को हिलाकर रख गया है। यह एक अभूतपूर्व केस है जहां एक 32 वर्षीय महिला पूनम ने अपने सुंदर दिखने वाले बच्चों के प्रति जलन और मानसिक विकृति के कारण कुल चार मासूम बच्चों की बेरहमी से हत्या कर दी। इन सभी हत्याओं को अंजाम देने के लिए उसने पानी में डुबोकर मारने का एक ही तरीका अपनाया, जिससे सभी घटनाएं दुर्घटना लगती रहीं।
पूनम की पहचान और परिवार की जानकारी
आरोपी महिला पूनम सिवाह गांव (हरियाणा) की मूल रहने वाली है। उसकी शादी सोनीपत जिले के बोहड़ गांव में हुई थी। पुलिस के अनुसार, वह एक सामान्य घरेलू महिला के रूप में अपने परिवार में रहती थी, लेकिन मानसिक विकृति के कारण वह जीवन भर इस जलन का शिकार रही कि कुछ बच्चे उससे ज्यादा सुंदर क्यों दिखते हैं।
चार बच्चों की हत्या: एक भयानक कालक्रम
पहली हत्या: इशिका और शुभम (जनवरी 2019)
पूनम के अपराधों की शुरुआत जनवरी 2019 में सोनीपत के गांव भावड़ में हुई। इस घटना में पूनम ने अपनी ननद की 9 वर्षीय बेटी इशिका को अपने घर में बने पानी के टेंक में डुबोकर मार दिया। उसके बेटे ने इशिता की हत्या करते देख लिया था, इसके बाद शक न हो इसी भय के चलते, पूनम ने अपने स्वयं के 3 वर्षीय बेटे शुभम को भी उसी पानी के टेंक में डुबोकर मार डाला। इस तरह से दोनों की मौत को घरवालों ने दुर्घटना माना सोंचा बच्चे आपस में खेलते हुए टैंक में गिर गए होंगे और पूनम बच निकली।
दूसरी हत्या: जिया (2023)
पूनम की जलन अभी खत्म नहीं हुई। 2023 में वह अपनी ननद की बेटी जिया को भी ठीक पिछले हत्या की तरह पानी के टेंक में डुबोकर मार देती है। इस बार भी सभी को लगा कि यह एक साधारण दुर्घटना है। पुलिस के अनुसार, पूनम ने हर बार बड़ी कुशलता से अपने अपराध को छिपाया और परिवार को गुमराह किया।
तीसरी हत्या: विधि (1 दिसंबर 2025)
1 दिसंबर 2025 की रात को पानीपत के नौल्था गांव में शादी का समारोह चल रहा था। आरोपी की ननद का 6 वर्षीय बेटी विधि शादी में शामिल होने के लिए परिवार के साथ गांव आई थी। पूनम ने अपने घर के स्टोर रूम में रखे एक मात्र एक फीट गहरे पानी के टब में विधि को ले जाकर डुबो दिया।
लेकिन इस बार पूनम की चाल नाकाम हो गई। विधि की लाश स्टोर रूम में मिली और घटना के संदर्भ में कुछ बातें संदेहास्पद लगीं। विधि की लंबाई टब की गहराई से अधिक थी, इसलिए वह स्वयं से डूब नहीं सकती थी। साथ ही, दरवाजा बाहर से बंद था, जिससे आत्महत्या की संभावना नहीं रह गई।
पुलिस की तीक्ष्ण जांच और 36 घंटे में गिरफ्तारी
पानीपत पुलिस अधीक्षक भूपेंद्र सिंह की सतर्कता और तेज जांच ने इस मामले को संदेह में बदल दिया। विधि के दादा, सेवानिवृत्त उप-निरीक्षक पाल सिंह को घटना में संदेह था। उन्होंने पुलिस को सूचित किया कि यह एक दुर्घटना नहीं हो सकती है।
36 घंटे की गहन पूछताछ के बाद पूनम ने अपने सभी अपराधों को कबूल कर लिया। उसके मुख से निकले शब्द पूरे देश को सकते में डाल दिए:
“मुझसे कोई सुंदर ना दिखे, इसलिए मैं उन बच्चों को मार देती हूं। मैंने चार बच्चों को मारा है, जिनमें मेरा अपना बेटा भी शामिल है। सभी को मैंने पानी में डुबोकर मार डाला।”
अपराध का मनोविज्ञान: मानसिक विकृति और जलन
पानीपत के एसपी भूपेंद्र सिंह ने अपनी पूछताछ में पूनम की मानसिक स्थिति के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी दी है। पूनम ने स्वीकार किया कि उसके अंदर एक गहरी जलन थी। जब भी वह किसी सुंदर बच्चे को देखती थी, तो उसके मन में एक विकृत भाव जागृत हो जाता था जिसे वह नियंत्रित नहीं कर पाती थी।
पूनम की गिरफ्तारी से पहले के दो साल तक सभी लोगों को लगता था कि ये सब दुर्घटनाएं हैं। कोई भी यह विश्वास नहीं कर सकता था कि यह महिला, जो परिवार में सामान्यतः हंसती-खेलती दिखती थी, एक साइको किलर है।
अपराध की विधि: पानी में डुबोकर हत्या
पूनम के सभी अपराधों में एक समान विधि दिखता है:
- शिकार का चयन: पूनम ने सभी सुंदर दिखने वाले बच्चों को निशाना बनाया
- विश्वास अर्जन: उसने परिवार के विश्वास को खेल-खेल में तोड़ा
- अलगथलग करना: बच्चों को पानी के टब या टेंक के पास ले जाना
- अपराध: पानी में डुबोकर हत्या करना
- साक्ष्य छिपाना: हर बार घटना को दुर्घटना के रूप में प्रस्तुत करना
तांत्रिक क्रिया से जुड़ा संदेह
जांच से यह भी सामने आया कि पूनम की कुछ घटनाएं एकादशी (शुक्ल पक्ष) के दिन अंजाम दी गई थीं। इससे सवाल उठा है कि क्या यह मामला किसी तांत्रिक क्रिया से जुड़ा हो सकता है। हालांकि, पुलिस की प्रारंभिक जांच में पूनम की मानसिक विकृति ही अपराध का मुख्य कारण प्रतीत होता है।
समाज के लिए एक चेतावनी
यह मामला समाज के लिए एक गंभीर चेतावनी है। यह साबित करता है कि अपराध की कोई सीमा नहीं होती है। एक घरेलू महिला, जो सामान्य लगती है, वह भी विकृत मानसिकता का शिकार हो सकती है।
भारत में यह पहली बार है कि कोई महिला सीरियल किलर के रूप में पकड़ी गई है। यह मामला भारतीय न्याय प्रणाली, मनोविज्ञान और समाज के लिए एक अभूतपूर्व कानूनी और सामाजिक मुद्दा बन गया है।
कानूनी कार्रवाई और भविष्य
पानीपत पुलिस ने पूनम को गिरफ्तार कर लिया है। अब वह भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 302 (हत्या) के तहत आरोपित है। उसे न्यायालय में पेश किया गया है और पुलिस ने पूछताछ के लिए रिमांड माँगा है।
यह मामला आने वाले समय में भारतीय कानूनी व्यवस्था में एक मिसाल बन सकता है। समाज को ऐसी विकृत मानसिकता वाले लोगों के बारे में जागरूक होना चाहिए और बच्चों की सुरक्षा को प्राथमिकता देनी चाहिए।
निष्कर्ष
हरियाणा की पूनम का मामला सिर्फ एक अपराध नहीं है, यह एक सामाजिक विपत्ति है। यह हमें सिखाता है कि:
- मानसिक स्वास्थ्य को समाज में गंभीरता से लेना चाहिए
- बच्चों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देनी चाहिए
- परिवार के सदस्यों की असामान्य व्यवहार पर ध्यान देना चाहिए
- पुलिस की जांच में तीक्ष्णता और तकनीकी उपकरणों का उपयोग आवश्यक है
यह मामला न्याय, मानवाधिकार और मनोविज्ञान का एक जटिल प्रश्न बनकर उभरा है। भारत में महिला सीरियल किलर की यह पहली घटना समाज को आइना दिखाती है कि अपराध किसी भी लिंग, आयु या सामाजिक स्थिति से परे हो सकता है।













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