नई दिल्ली : रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन 4 दिसंबर 2025 को शाम 7 बजे नई दिल्ली में पहुंचेंगे। यह ऐतिहासिक यात्रा भारत-रूस रणनीतिक साझेदारी के 25 साल पूरे होने के मौके पर हो रही है।
इस दो दिवसीय राज्य यात्रा के दौरान, पुतिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात करेंगे। साथ ही, भारतीय राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु भी रूसी राष्ट्रपति से अलग से मिलेंगी। यह यात्रा 23वें भारत-रूस वार्षिक शिखर सम्मेलन के लिए है।
पुतिन की नई दिल्ली यात्रा का पूरा कार्यक्रम
4 दिसंबर 2025 (गुरुवार)
- शाम 7 बजे इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर उतरेंगे
- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ निजी डिनर में शामिल होंगे
5 दिसंबर 2025 (शुक्रवार)
- राजघाट का दौरा करेंगे
- हैदराबाद हाउस में द्विपक्षीय बैठक होगी
- भारत मंडपम में FICCI के आयोजन में शामिल होंगे
- राष्ट्रपति भवन में राज्य भोज का आयोजन किया जाएगा
भारत-रूस रणनीतिक साझेदारी: 25 साल की यात्रा
भारत और रूस के बीच रणनीतिक साझेदारी की शुरुआत 3 अक्टूबर 2000 को हुई थी। इसी दिन, तत्कालीन राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने रणनीतिक साझेदारी की घोषणा की थी।
साल 2010 में, इस साझेदारी को “विशेष और विशेषाधिकार प्राप्त रणनीतिक साझेदारी” के स्तर तक उन्नत किया गया। तब से लेकर आज तक, दोनों देशों के बीच सहयोग लगातार बढ़ता ही जा रहा है।
रक्षा, ऊर्जा और व्यापार – मुख्य सहयोग क्षेत्र
रक्षा सहयोग
रूस भारत का दूसरा सबसे बड़ा रक्षा आपूर्तिकर्ता है। 5 अरब डॉलर की S-400 मिसाइल प्रणाली भारत की रक्षा क्षमता को मजबूत करी है। दोनों देशों के बीच सैन्य-तकनीकी सहयोग को कम से कम 2031 तक बढ़ाया जा चुका है।
ऊर्जा क्षेत्र
भारत को रूस से सस्ती दरों पर तेल की आपूर्ति मिलती है। इससे भारत की ऊर्जा सुरक्षा को लाभ मिल रहा है। रूस भारत के बुनियादी ढांचे विकास के लिए दीर्घकालीन निवेशक बनने जा रहा है।
व्यापार
वर्ष 2024-25 में भारत-रूस द्विपक्षीय व्यापार 68.7 अरब डॉलर तक पहुंच गया है। दोनों देशों का लक्ष्य 2030 तक इस व्यापार को 100 अरब डॉलर तक ले जाना है।
पुतिन यात्रा के दौरान अपेक्षित समझौते
पुतिन की इस यात्रा के दौरान कई महत्वपूर्ण समझौते होने की संभावना है:
- व्यापार और आर्थिक समझौते: द्विपक्षीय व्यापार बढ़ाने के लिए समझौते
- स्वास्थ्य सहयोग: चिकित्सा विज्ञान और दवा उद्योग में सहयोग
- रक्षा समझौते: सैन्य सहयोग को और मजबूत करने के लिए
- ऊर्जा क्षेत्र: तेल और गैस सहयोग में विस्तार
- डिजिटल और प्रौद्योगिकी: कृत्रिम बुद्धिमत्ता और आधुनिक तकनीकों में भागीदारी
- सांस्कृतिक और शिक्षा समझौते: आदान-प्रदान कार्यक्रमों को बढ़ावा देने के लिए
दिल्ली सर्वोच्च सतर्कता पर
पुतिन की यात्रा के मद्देनजर दिल्ली में बेहद कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की गई है। दिल्ली पुलिस, केंद्रीय एजेंसियां और पुतिन की व्यक्तिगत सुरक्षा टीम लगी हुई है। ड्रोन निगरानी, CCTV कैमरे और तकनीकी बुद्धिमत्ता प्रणालियां सक्रिय कर दी गई हैं।
भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह यात्रा?
भारत के विदेश नीति में रूस की विशेष भूमिका है। रूस भारत का एक समय-परीक्षित दोस्त है। पुतिन की यह यात्रा कई कारणों से महत्वपूर्ण है:
- भू-राजनीतिक संतुलन: भारत की बहुध्रुवीय विदेश नीति में रूस अहम भूमिका निभाता है।
- रक्षा और सुरक्षा: भारत की रक्षा क्षमता मजबूत करने में रूस का सहयोग अमूल्य है।
- आर्थिक लाभ: सस्ते तेल और गैस की आपूर्ति भारत की अर्थव्यवस्था को मजबूत करती है।
- अंतरराष्ट्रीय मंचों पर समर्थन: संयुक्त राष्ट्र सहित विभिन्न मंचों पर रूस भारत का समर्थन करता है।
- बहुपक्षीय सहयोग: शंघाई सहयोग संगठन, BRICS और अन्य मंचों पर रूस के साथ भारत का सहयोग।
23वां भारत-रूस वार्षिक शिखर सम्मेलन
यह शिखर सम्मेलन भारत-रूस संबंधों का सर्वोच्च संस्थागत संवाद तंत्र है। अब तक 22 शिखर सम्मेलन बारी-बारी से भारत और रूस में आयोजित हुए हैं। इस बार 23वां शिखर सम्मेलन नई दिल्ली में हो रहा है।
Eurasia Economic Union के साथ व्यापार समझौता
भारत और यूरेशिया आर्थिक संघ (जिसमें रूस, कजाकिस्तान, किर्गिस्तान, बेलारूस और आर्मेनिया शामिल हैं) के बीच मुक्त व्यापार समझौते पर बातचीत चल रही है। इस समझौते से दोनों पक्षों को 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार 100 अरब डॉलर के लक्ष्य को हासिल करने में मदद मिलेगी।
भारत के De-Dollarization की रणनीति
भारत भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के माध्यम से रूस के SPFS (System for Transfer of Financial Messages) को अपनाने पर विचार कर रहा है। यह SWIFT प्रणाली के बाहर सुरक्षित रुपये-रूबल लेनदेन को सुविधाजनक बनाएगा। इससे लेनदेन सस्ता और तेज हो जाएगा।
भारत-रूस संबंधों का भविष्य
पुतिन की यह यात्रा भारत-रूस संबंधों को नए आयाम देने वाली है। अक्टूबर 2025 में वाल्दाई के सम्मेलन में पुतिन ने भारत के साथ संयुक्त फंड बनाने का प्रस्ताव दिया था। यह कृत्रिम बुद्धिमत्ता और आधुनिक तकनीकों के क्षेत्र में सहयोग को आगे ले जाने के लिए है।
पुतिन की दिल्ली यात्रा से भारत-रूस साझेदारी में नए द्वार खुलने की आशा है। रक्षा, ऊर्जा, व्यापार और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में और भी गहरे सहयोग की संभावना है।
निष्कर्ष
व्लादिमीर पुतिन की आसन्न यात्रा भारत और रूस के 25 साल के रणनीतिक साझेदारी के इतिहास में एक महत्वपूर्ण पड़ाव है। यह यात्रा दोनों देशों के बीच तत्काल मुद्दों पर बातचीत के लिए एक मंच प्रदान करेगी। साथ ही, भविष्य के सहयोग की नींव भी तैयार करेगी।
4-5 दिसंबर की यह बैठक भारत-रूस संबंधों को नई ऊंचाइयों पर ले जाने की संभावना रखती है। दोनों देशों को इस साझेदारी से न केवल आर्थिक लाभ मिलेगा, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी उनकी स्थिति मजबूत होगी।












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